डॉक्टरों
को दूसरा भगवान कहा जाता है क्योंकि मरीजों को स्वस्थ करने की जिम्मेदारी
इन्हीं पर होती है लेकिन इस महत्वपूर्ण कार्य में नर्स की भूमिका को भी
नकारा नहीं जा सकता है। देखा जाए तो मरीजों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी
इनके ऊपर ही होती है। तभी तो इन्हें सभी प्यार से सिस्टर भी कहते हैं।
भारतीय सिस्टर विदेश का भी रुख करने लगी हैं क्योंकि विदेशों में इन्हें
जॉब के साथ-साथ बेहतर सैलरी भी मिलने लगी है।
जॉब ऑप्शन
डी.पी.एम.आई. की प्रिंसीपल डॉक्टर अरुणा सिंह के मुताबिक आप 10वीं और 12वीं करने के बाद भी नर्सिंग के कोर्स में दाखिला ले सकती हैं। इस कोर्स की सफलतापूर्वक समाप्ति के बाद आपके लिए जॉब के कई रास्ते खुल जाते हैं। दरअसल, इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज जॉब की कोई कमी नहीं है। आप हॉस्पिटल, नर्सिंग होम्स, क्लीनिक और हैल्थ डिपार्टमैंट, ओल्ड एज होम्स, मिलिट्री हैल्थ सर्विस, स्कूल्स, रेलवे, पब्लिक सैक्टर, मैडीकल डिपार्टमैंट आदि में कार्य कर सकते हैं।
विदेश में अवसर
यदि आप इस क्षेत्र से जुड़ी हैं तो आज यूरोपियन देशों, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका और खाड़ी देशों में जॉब की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। साथ ही इन देशों में आकर्षक सैलरी पैकेज के साथ ओवरटाइम भी मिलता है। यही वजह है कि भारतीय नर्स विदेश का रुख करने लगी हैं लेकिन यूरोप और अमरीका जाने के लिए सी.जी.एफ.एन.एस. (कमीशन ऑफ ग्रैजुएट ऑफ फॉरेन नर्सिंग स्कूल), टी.ओ.ई. एफ.एल. (टैस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज), टी.डब्ल्यू.ई. (टैस्ट ऑफ रिटन इंग्लिश) और टी.एस.ई. (टैस्ट ऑफ स्पोकन इंगलिश) के एग्जाम के दौर से होकर जुडऩा पड़ सकता है।
सरकारी प्रयास
नर्सिंग एजुकेशन में व्यापक सुधार के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने की योजना है। इसके लिए हैल्थ मिनिस्ट्री ने 230 जिलों की पहचान की है जहां ऑग्जिलियर नर्स मिडवाइव्स (ए.एन.एम.) और ग्रैजुएट नर्स मिडवाइव्स (जी.एन.एम.) इंस्टीच्यूट खोला जाएगा। इसके अलावा, चार रीजनल इंस्टीच्यूट में नर्सिंग की शिक्षा को और बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। सच तो यह है कि आज नर्स हैल्थ केयर सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
पारिश्रमिक
नर्स की सैलरी उनकी योग्यता और अनुभव पर भी निर्भर करती है। सरकारी अस्पतालों में सैलरी 8 हजार से 15 हजार रुपए के करीब हो सकती है। लेकिन प्राइवेट और मिलिट्री नर्सिंग में कार्य करने वालों की सैलरी ज्यादा होती है।
जॉब ऑप्शन
डी.पी.एम.आई. की प्रिंसीपल डॉक्टर अरुणा सिंह के मुताबिक आप 10वीं और 12वीं करने के बाद भी नर्सिंग के कोर्स में दाखिला ले सकती हैं। इस कोर्स की सफलतापूर्वक समाप्ति के बाद आपके लिए जॉब के कई रास्ते खुल जाते हैं। दरअसल, इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज जॉब की कोई कमी नहीं है। आप हॉस्पिटल, नर्सिंग होम्स, क्लीनिक और हैल्थ डिपार्टमैंट, ओल्ड एज होम्स, मिलिट्री हैल्थ सर्विस, स्कूल्स, रेलवे, पब्लिक सैक्टर, मैडीकल डिपार्टमैंट आदि में कार्य कर सकते हैं।
विदेश में अवसर
यदि आप इस क्षेत्र से जुड़ी हैं तो आज यूरोपियन देशों, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका और खाड़ी देशों में जॉब की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। साथ ही इन देशों में आकर्षक सैलरी पैकेज के साथ ओवरटाइम भी मिलता है। यही वजह है कि भारतीय नर्स विदेश का रुख करने लगी हैं लेकिन यूरोप और अमरीका जाने के लिए सी.जी.एफ.एन.एस. (कमीशन ऑफ ग्रैजुएट ऑफ फॉरेन नर्सिंग स्कूल), टी.ओ.ई. एफ.एल. (टैस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज), टी.डब्ल्यू.ई. (टैस्ट ऑफ रिटन इंग्लिश) और टी.एस.ई. (टैस्ट ऑफ स्पोकन इंगलिश) के एग्जाम के दौर से होकर जुडऩा पड़ सकता है।
सरकारी प्रयास
नर्सिंग एजुकेशन में व्यापक सुधार के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने की योजना है। इसके लिए हैल्थ मिनिस्ट्री ने 230 जिलों की पहचान की है जहां ऑग्जिलियर नर्स मिडवाइव्स (ए.एन.एम.) और ग्रैजुएट नर्स मिडवाइव्स (जी.एन.एम.) इंस्टीच्यूट खोला जाएगा। इसके अलावा, चार रीजनल इंस्टीच्यूट में नर्सिंग की शिक्षा को और बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। सच तो यह है कि आज नर्स हैल्थ केयर सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
पारिश्रमिक
नर्स की सैलरी उनकी योग्यता और अनुभव पर भी निर्भर करती है। सरकारी अस्पतालों में सैलरी 8 हजार से 15 हजार रुपए के करीब हो सकती है। लेकिन प्राइवेट और मिलिट्री नर्सिंग में कार्य करने वालों की सैलरी ज्यादा होती है।