रेडिएशन फिजिक्स के क्षेत्र में पारिश्रमिक पदों पर खूब नौकरियां उपलब्ध हैं

फिजिक्स यानी भौतिक शास्त्र के तहत ऊर्जा के रूपांतरण एवं उसके द्रव्य संबंधों का अध्ययन किया जाता है। दूसरे शब्दों में स्थान, काल, गति, द्रव्य, विद्युत, प्रकाश, ऊष्मा एवं ध्वनि के गुणों तथा एक-दूसरे के साथ संबंधों का अध्ययन किया जाता है। ऊर्जा किसी न किसी रूप में जरूरी है और धरती पर जीवन के अस्तित्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इसका अध्ययन भी बेहद मायने रखता है। रेडिएशन भी एक तरह की ऊर्जा है। इसे ऐसी ऊर्जा माना जाता है जो किसी माध्यम अथवा स्थान से गुजरते हुए किसी अन्य तत्व में सोख ली जाती है। इसके तहत चिकित्सा क्षेत्र में रेडिएशन थैरेपी के उपयोग के लिए रेडिएशन की सुरक्षित मात्रा का आकलन किया जाता है।

रेडिएशन दो तरह की होती है - आयोनाइजिंग तथा नॉन-आयोनाइजिंग जो फोटोन द्वारा ले जाई जाने वाली ऊर्जा पर निर्भर करता है। चूंकि आयोनाइजिंग रेडिएशन नुक्सान पहुंचा सकती है, इसलिए यह एक महत्वपूर्ण सवाल है कि इंसानों के इंडस्ट्री, शोध संस्थानों एवं चिकित्सा क्षेत्र के लिए इसकी कितनी मात्रा सुरक्षित हो सकती है। इंसानों को नुक्सान पहुंचा सकने की क्षमता की वजह से ही रेडिएशन के क्षेत्र में काम करने के लिए दक्ष पेशेवरों की जरूरत होती है।

एटॉमिक एनर्जी रैगुलेटरी बोर्ड

रेडिएशन का इस्तेमाल करने वाले संगठनों की निगरानी के लिए एटॉमिक एनर्जी रैगुलेटरी बोर्ड की स्थापना 15 नवम्बर 1983 को की गई। ऐसे संगठनों के काम की निगरानी करना ही इसकी प्रमुख जिम्मेदारी है। यह इन संगठनों को रेडिएशन सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए प्रमाणित भी करती है। नियमों के तहत अनिवार्य किया गया है हर ऐसे संगठन में एक रेडिएशन सेफ्टी अफसर की नियुक्ति की जाए। उसका काम संगठन में रेडिएशन के इस्तेमाल तथा किसी दुर्घटना की हालत में रेडिएशन से हो सकने वाले नुक्सान को वह काबू कर सके।

न्यूक्लियर रिएक्टर्स में जरूरत
एक अनुमान के अनुसार साल 2020 तक न्यूक्लियर रिएक्टर तथा ईंधन आयात करके देश के वर्तमान ऊर्जा उत्पादन में 25 हजार मैगावाट क्षमता का इजाफा किया जाएगा। भविष्य में न्यूक्लियर पावर संयंत्रों की संख्या में होने जा रहे इजाफे को देखते हुए भी इस क्षेत्र में काफी विकास होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। ऐसे में रेडिएशन सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की जरूरत भी पैदा हो रही है।

रेडिएशन थैरेपी का क्षेत्र

रेडिएशन फिजिसिस्ट या मैडीकल फिजिसिस्ट रेडिएशन से किए जाने वाले चिकित्सा उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे उपचार के लिए रेडिएशन की सही-सही मात्रा का आकलन करने का काम करते हैं ताकि रोगी का उपचार भी हो तथा इससे उसे किसी तरह का नुक्सान भी न हो।

अन्य प्रमुख क्षेत्र
चिकित्सा ही नहीं इसके अलावा शोध कार्यों में भी रेडिएशन फिजिसिस्ट्स के लिए असीम संभावनाएं मौजूद हैं। इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा रुचि इसलिए भी वैज्ञानिकों द्वारा ली जाती रही है क्योंकि इस विषय में हुए अनेक क्रांतिकारी आविष्कारों से निर्माण, न्यूक्लियर एनर्जी तथा अत्याधुनिक चिकित्सा जांच-पड़ताल एवं उपचार संभव हो सका है। वैसे भी इस विषय में समग्र भौतिकी की अहम भूमिका है जिस कारण इसमें फिजिसिस्ट, बायोलॉजिस्ट, कैमिस्ट या मैडीकल फील्ड के लोग काम कर रहे हैं।  इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग काफी ज्यादा है और बेहतरीन पारिश्रमिक वाले पदों पर नौकरियां भी खूब उपलब्ध हैं।

सम्भावनाएं
यह एक बढिय़ा करियर तो है ही साथ ही साथ बेहद चुनौतीपूर्ण भी है क्योंकि इसमें इंसानों की रक्षा तथा रेडिएशन द्वारा उनके कल्याण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन पर ही होती है।

हाल के सालों में अस्पतालों, रेडियो थैरेपी सैंटरों तथा कुछ विशेष उद्योगों एवं संगठनों में मैडीकल फिजिसिस्ट की मांग काफी बढ़ गई है। एटॉमिक एनर्जी रैगुलेटरी बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत रेडियो थैरेपी सैंटर या अस्पताल में प्रशिक्षित मैडीकल फिजिसिस्ट को नियुक्त करना अनिवार्य है। इस क्षेत्र में तकनीकी रूप से दक्ष लोगों की काफी कमी है।

कोर्स एवं पाठ्यक्रम
इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को 12वीं कक्षा में फिजिक्स-कैमिस्ट्री-मैथ्स का अध्ययन करना चाहिए। इसके बाद वे विज्ञान में ग्रैजुएशन करें। फिर वे अपनी पसंद के हिसाब से रेडिएशन एवं मैडिकल फिजिक्स में एम.एससी. डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।

रेडिएशन फिजिक्स के पाठ्यक्रम में आमतौर पर रेडिएशन कैमिस्ट्री, रेडिएशन बायोलॉजी, इलैक्ट्रानिक्स और इंस्ट्रूमैंटेशन, स्टैटिस्टिक्स, कम्प्यूटेशनल मैथड, मैडीसिन के क्षेत्र में रेडियो आइसोटोप्स की भूमिका, इंडस्ट्री रिसर्च, एग्रीकल्चर एवं रेडिएशन के नुक्सान, आकलन तथा उनका नियंत्रण आदि शामिल होता है। प्रशिक्षण के दौरान रेडिएशन के सुरक्षित इस्तेमाल के तरीके छात्रों को सिखलाए जाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान इनको प्रयोग द्वारा भी सिखाया जाता है। रेडिएशन का इस्तेमाल करने वाले अस्पतालों एवं इंडस्ट्री का दौरा भी उन्हें करवाया जाता है।

प्रमुख संस्थान

1 डिपार्टमैंट ऑफ फिजिक्स, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़

2 इंस्टीच्यूट ऑफ न्यूक्लियल मैडीसिन एंड अलाइड साइंसेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली

3 ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल साइंसेज (एम्स), नई दिल्ली

4 भाभा एटॉमिक रिसर्च सैंटर, मुम्बई, महाराष्ट्र

5 डिपार्टमैंट ऑफ फिजिक्स, अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई, तमिलनाडु

6 यूनिवर्सिटी ऑफ कालीकट, केरल

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