विदेश
जाकर पढऩे की इच्छा कई युवाओं को होती है तथा हर साल भारत से हजारों
छात्र उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए विदेश जाते भी हैं परंतु कुछ देशों
में उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे व्यवहार के
पीछे कई तरह के कारण हो सकते हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप उन्हें समझें ताकि
उनका सामना सरलता से कर सकें।
1. आपको जानने में लोगों को समय लगेगा : हमेशा याद रखें कि लोग पहले ही दिन से आपको जानने तथा समझने नहीं लगेंगे। उन्हें कुछ समय तथा स्थान देना होगा ताकि वे आप पर भरोसा कर सकें।
2. उनके पूर्वाग्रही रवैए से निराश न हों : कई बार लोगों के मन में अन्य देशों तथा उनकी संस्कृति के बारे में पूर्वाग्रह होता है यानी वे उन लोगों के बारे में अच्छी या बुरी एक खास तरह की राय रखते हैं। जब उनके वे विचार आपके बारे में उनके रवैये को प्रभावित करें तो बेहतर होगा कि आप इसे निजी तौर पर न लें। ऐसे लोगों के रवैये या बातों से निराश न हों।
3. नए स्थान की संस्कृति का सम्मान करें : मेजबान देश की संस्कृति एवं परम्पराओं को यथोचित आदर-सम्मान दें। आदर हासिल करने के लिए पहले आदर देना पड़ता है। नए समुदायों में घुलने-मिलने के लिए उनकी परम्परा, मूल्यों तथा विश्वास को समझना होगा।
4. काऊंसलर से बात करें : यदि आपको स्थिति इतनी खराब लगने लगी है कि वह आपके दैनिक कामकाज में बाधा उत्पन्न करने लगे तो किसी काऊंसलर की सहायता लेने से न झिझकें। वह आपको सही सलाह देंगे तथा बेहतर ढंग से स्थिति से निपटने में आपकी सहायता कर सकते हैं।
5. परिवार के सम्पर्क में रहें : अपने परिवार तथा दोस्तों के सम्पर्क में रहते हुए आप नए स्थान के साथ जल्द तालमेल बैठा सकेंगे। इससे आपको चीजों को नए नजरिए से देखने में भी मदद होगी।
6. पढ़ाई पर ध्यान दें : अपने लक्ष्य से ध्यान भटकने न दें। याद रखें कि आप वहां क्यों गए हैं। जम कर पढ़ाई करें तथा अच्छा स्थान प्राप्त करने की कोशिश करें। इससे आपका आत्मविश्वास भी बना रहेगा।
7. सामाजिक बनें : नए लोगों से मिलने से कभी न शर्माएं। दूसरों को जानने के हर मौके का लाभ उठाएं। नई जगह के नए माहौल में घुलने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है जिसका दीर्घकाल में आपको ही लाभ होगा।
8. समस्या होने पर अधिकारियों की सहायता लें : यदि स्थिति इस कदर खराब हो जाए कि उसका असर आपके काम तथा कुशलता पर पडऩे लगे तो किसी ऐसे व्यक्ति से सहायता लें जिसके पास उपयुक्त अधिकार हों। इसे अपनी कमजोरी न समझें। वहां अपनी कुशलता तथा आराम के लिए जो भी सहायता उपलब्ध हो, उसका लाभ उठाएं।
1. आपको जानने में लोगों को समय लगेगा : हमेशा याद रखें कि लोग पहले ही दिन से आपको जानने तथा समझने नहीं लगेंगे। उन्हें कुछ समय तथा स्थान देना होगा ताकि वे आप पर भरोसा कर सकें।
2. उनके पूर्वाग्रही रवैए से निराश न हों : कई बार लोगों के मन में अन्य देशों तथा उनकी संस्कृति के बारे में पूर्वाग्रह होता है यानी वे उन लोगों के बारे में अच्छी या बुरी एक खास तरह की राय रखते हैं। जब उनके वे विचार आपके बारे में उनके रवैये को प्रभावित करें तो बेहतर होगा कि आप इसे निजी तौर पर न लें। ऐसे लोगों के रवैये या बातों से निराश न हों।
3. नए स्थान की संस्कृति का सम्मान करें : मेजबान देश की संस्कृति एवं परम्पराओं को यथोचित आदर-सम्मान दें। आदर हासिल करने के लिए पहले आदर देना पड़ता है। नए समुदायों में घुलने-मिलने के लिए उनकी परम्परा, मूल्यों तथा विश्वास को समझना होगा।
4. काऊंसलर से बात करें : यदि आपको स्थिति इतनी खराब लगने लगी है कि वह आपके दैनिक कामकाज में बाधा उत्पन्न करने लगे तो किसी काऊंसलर की सहायता लेने से न झिझकें। वह आपको सही सलाह देंगे तथा बेहतर ढंग से स्थिति से निपटने में आपकी सहायता कर सकते हैं।
5. परिवार के सम्पर्क में रहें : अपने परिवार तथा दोस्तों के सम्पर्क में रहते हुए आप नए स्थान के साथ जल्द तालमेल बैठा सकेंगे। इससे आपको चीजों को नए नजरिए से देखने में भी मदद होगी।
6. पढ़ाई पर ध्यान दें : अपने लक्ष्य से ध्यान भटकने न दें। याद रखें कि आप वहां क्यों गए हैं। जम कर पढ़ाई करें तथा अच्छा स्थान प्राप्त करने की कोशिश करें। इससे आपका आत्मविश्वास भी बना रहेगा।
7. सामाजिक बनें : नए लोगों से मिलने से कभी न शर्माएं। दूसरों को जानने के हर मौके का लाभ उठाएं। नई जगह के नए माहौल में घुलने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है जिसका दीर्घकाल में आपको ही लाभ होगा।
8. समस्या होने पर अधिकारियों की सहायता लें : यदि स्थिति इस कदर खराब हो जाए कि उसका असर आपके काम तथा कुशलता पर पडऩे लगे तो किसी ऐसे व्यक्ति से सहायता लें जिसके पास उपयुक्त अधिकार हों। इसे अपनी कमजोरी न समझें। वहां अपनी कुशलता तथा आराम के लिए जो भी सहायता उपलब्ध हो, उसका लाभ उठाएं।