फूड इंडस्ट्री में हैं नए अवसर

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फल एवं सब्जी उत्पादक देश है जबकि दुग्ध उत्पाद में इसका स्थान पहला है। देश में मवेशियों की सबसे अधिक संख्या है तथा यह दुनियां के बड़े मांस निर्यातक देशों में से एक है। वहीं अंडों एवं मछली का यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत की फूड इंडस्ट्री बहुत विशाल है, जिसमें लगातार विकास हो रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में रोजगार के हमेशा से ही व्यापक अवसर मौजूद रहे हैं, जिनमें आज और अधिक तेजी से विकास हो रहा है।

बदलाव का दौर
आधुनिक युग में जीवन के हर पहलू में बड़ा बदलाव आया है और हमारा भोजन भी इसमें शामिल है। आज भोजन से जुड़ी हर बात में पहले से कहीं अधिक रुचि ली जाने लगी है। भारतीय फूड इंडस्ट्री में कई नए रुझान उभर रहे हैं, साथ ही साथ मध्यवर्ग की आय में भी इजाफा हुआ है और इंटरनैट एवं मीडिया जैसे माध्यमों की वजह से जानकारी तक उसकी पहुंच कहीं अधिक आसान हो चुकी है। एक अनुमान के अनुसार साल 2020 तक भारतीय फूड इंडस्ट्री 320 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच जाएगी।

इस वजह से फूड एंड न्यूट्रिशन सैक्टर में रोजगार के अनेक नए अवसर उभरे हैं, जिनमें युवा अपना भविष्य उज्ज्वल कर सकते हैं। यहां फूड इंडस्ट्री के ऐसे ही कुछ आकर्षक सैक्टरों की जानकारी दे रहे हैं।

1. फूड टैक्नोलॉजिस्ट तथा प्रोसैसर
इन दिनों प्रशिक्षण प्राप्त फूड टैक्नोलॉजिस्ट्स के पास रोजगार के बहुत अवसर मौजूद हैं। वे भोजन संबंधी नए शोध एवं भोजन को अधिक समय तक संरक्षित रखने की विधियां तैयार करने पर काम करते हैं। उन्हें फूड प्रोसैसिंग कम्पनियों, फूड रिसर्च लैबोरेटरीज, होटलों, रेस्तराओं, फूड स्टाइलिस्ट्स, एजुकेशनल इंस्टीच्यूशन्स, सरकारी संगठनों से लेकर केटरिंग कम्पनियों में भी काम मिल सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियां फूड टैक्नोलॉजिस्ट्स को बतौर फूड इंस्पैक्टर या हैल्थ इंस्पैक्टर नियुक्त करती हैं।

भारतीय वैज्ञानिक अनेक विदेशी कम्पनियों के लिए काम कर रहे हैं, जो भारतीय जनता की पसंद के अनुरूप विशेष रूप से प्रोसैस्ड फूड तैयार करने का प्रयत्न करते हैं। उनकी कोशिश है कि बड़े स्तर पर खाद्य उत्पादों का उत्पादन किफायती कीमतों पर किया जा सके।

इस सैक्टर में काम करने के लिए युवाओं को फूड इंजीनियरिंग या टैक्रोलॉजी का अध्ययन करना चाहिए।

2. न्यूट्रिशनिस्ट तथा डाइटिशियन

स्वस्थ जीवनशैली के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता से इस क्षेत्र के जानकारों की मांग में भी खासा इजाफा हुआ है जो लोगों को जीवन जीने के स्वस्थ तौर-तरीकों की सलाह दे सकें। अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, हैल्थ स्पा एवं वैलनैस क्लीनिक्स, बड़े होटलों और फिटनैस सैंटर्स में न्यूट्रिशनिस्ट्स एवं डाइटिशियन्स की बड़ी मांग रहती है। इस सैक्टर में शुरूआत 10 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह पारिश्रमिक से हो सकता है।

इस सैक्टर में सफलता के लिए विभिन्न प्रकार की डाइट तैयार करने में गहरी रुचि होना जरूरी है। स्पोट्रस न्यूट्रिशनिस्ट्स एवं डाइटिशियन्स के लिए भविष्य में अनेक अवसर दिखाई दे रहे हैं। स्पोट्रस न्यूट्रिशनिस्ट्स खिलाडिय़ों के शरीर तथा खेल की जरूरतों के हिसाब से उनके खान-पान का ध्यान रखते हैं। उनका आहार ऐसा होना चाहिए, जिससे उनमें जीतने की ललक तथा क्षमता विकसित हो। वे टीम फिजियोथैरेपिस्ट एवं कोच के साथ मिल कर काम करते हैं।

3. फूड स्टाइलिस्ट तथा फोटोग्राफर
हाल के सालों में फूड स्टाइलिंग का क्षेत्र भी खासा लोकप्रिय हो रहा है। यह रेस्तरांओं, कुकबुक्स के फोटोग्राफ्स, टी.वी. विज्ञापनों एवं फिल्मों आदि के लिए व्यंजनों की सजावट करने की विधि है, जिसमें पाक् कला तथा विज्ञान का एक साथ प्रयोग किया जाता है। स्टाइलिस्ट्स एवं फोटोग्राफर्स व्यंजनों को ताजा तथा स्वादिष्ट दिखाने के लिए सजावट हेतु खास सामग्रियां जुटाने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

फूड स्टाइलिस्ट्स को एक दिन के काम के लिए भी हजारों रुपए पारिश्रमिक मिल सकता है। प्रतिष्ठित फूड स्टाइलिस्ट्स तो अपना पारिश्रमिक खुद तय करते हैं।  एक अच्छा फूड फोटोग्राफर बनने के लिए युवाओं में रचनात्मकता के अलावा भोजन का ज्ञान, खूबसूरती की समझ, धैर्य तथा परिश्रम कुछ आवश्यक योग्यताएं हैं। इस सैक्टर में करियर बनाने के लिए पहले होटल मैनेजमैंट का अध्ययन करें, फिर अपने पसंद के सैक्टर में अनुभव हासिल करने की कोशिश की जाए। फोटोग्राफी का प्रशिक्षण भी काम आता है।

4. सैंसरी इवैलुएटर
फूड इंडस्ट्री के सबसे कम जागरूकता वाले सैक्टरों में से एक है सैंसरी इवैलुएशन। यह सैक्टर उन लोगों के लिए तो सर्वोत्तम है जिनका विश्वास खाने के लिए जीने में है।

इसके तहत विभिन्न व्यंजनों को चख कर उनकी गुणवत्ता तथा स्वाद के स्तर का आकलन किया जाता है। इस सैक्टर में उन उपभोक्ता उत्पाद कम्पनियों में आसानी से काम मिल सकता है, जहां सैंसरी इवैलुएशन  विभाग होते हैं।

इस सैक्टर में तरक्की करने की पर्याप्त सम्भावनाएं हैं क्योंकि यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं से जुड़ा है। गहन शोध तथा कोशिशों के बाद तैयार उत्पाद  को उपभोक्ताओं द्वारा पसंद किया जाना ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि साबित होता है। इस सैक्टर में काम करने वालों को स्वाद एवं गुणवत्ता की परख के कौशल के अलावा उत्पाद एवं उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं की समझ भी होनी चाहिए।

उपरोक्त सैक्टर्स के अलावा युवा होटल
इंडस्ट्री, एग्रो टूरिज्म, फूड साइंस आदि में भी करियर संवार सकते हैं।

प्रमुख संस्थान
नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फूड टैक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमैंट, कुंडाली, सोनीपत, हरियाणा

आई.सी.टी., मुम्बई, महाराष्ट्र

जी.बी.पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टैक्नोलॉजी, पंतनगर, उत्तर प्रदेश

इंटरनैशनल लाइफ साइंसेज इंस्टीच्यूट, हौज खास, नई दिल्ली

जे.डी. बिरला इंस्टीच्यूट, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ न्यूट्रिशन हैदराबाद, आंध्र प्रदेश

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