राष्ट्रपिता
महात्मा गांधी ने कहा था, 'अगर देश को आगे ले जाना है तो गांव की तरक्की
करनी होगी।' और ग्रामीण अंचल की तरक्की तभी हो सकती है, जब यहां रहने वाले
लोगों को सामाजिक, मानसिक और राजनीतिक स्तर पर जागरूक और आत्मनिर्भर बनाया
जाए।
यदि आप ग्रामीण विकास से संबंधित कार्य में रुचि रखते हैं तो ‘रूरल डेवलपमेंट’ में करियर बना सकते हैं।
इसे कहते हैं रूरल डेवलपमेंट
ग्रामीणों
के अधिकारों के लिए लड़ना व उनका हक दिलवाने के लिए एंटी करप्शन मूवमेंट
चलाना, वुमन हेल्थ एंड चाइल्ड हेल्थ पर काम करना, रूरल डेवलपमेंट के तहत
आता है। वर्तमान समय में ग्रामीण भारत बहुत तेजी से बदल रहा है, केंद्र
सरकार ग्रामीणों के लिए नई योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है। आने वाले
दिनों में यह उनके लिए बहुत ही कारगर सिद्ध होगी। जरूरत है तो मेक इन
इंडिया बनाने के लिए ग्रामीणों को इस बारे में सही जानकारी दी जाए।
ग्रामीण
विकास का क्षेत्र बहुत विस्तृत है, ऐसे में आपको सुनिश्चित करना होगा कि
आप टीचिंग, रिसर्च या फील्ड वर्क में से कौन से कार्य को करना पसंद करेंगे।
देश के कई शैक्षणिक संस्थान रूरल डेवलपमेंट में प्रोफेशनल कोर्स कराते
हैं, रूरल डेवलपमेंट को प्रोफेशनल कोर्स के तहत माना जाता है। इस क्षेत्र
में सबसे अधिक आपकी स्किल्स और रुचियां मायने रखती हैं।
आप
बारहवीं के बाद बीए, एमए के बाद भी सीधे-तौर पर ग्रामीण विकास के लिए काम
कर सकते हैं लेकिन करियर को और बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि बैचलर ऑफ
सोशल वर्क या मास्टर ऑफ सोशल वर्क का कोर्स किया जाए।
ऐसे बनाएं करियर
आप
12वीं के बाद बैचलर ऑफ सोशल वर्क करके सीधे फील्ड में काम कर अनुभव हासिल
कर सकते हैं या फिर दो साल का मास्टर ऑफ सोशल वर्क कोर्स करके कैम्पस
प्लेसमेंट से नौकरी हासिल कर सकते हैं। रिसर्च क्षेत्र में जाने के लिए दो
वर्ष का एमफिल भी कर सकते हैं। आगे आप चाहें तो पीएचडी भी कर सकते हैं।
विस्तृत विषय, शानदार करियर
रूरल
डेवलपमेंट में किए जाने वाले विकास के क्षेत्रों जैसे हेल्थ, कम्युनिटी
वर्क, ह्यूमन रिलेशंस डेवलपमेंट, एचआईवी एड्स इत्यादि क्षेत्र में काम कर
सकते हैं। रिसर्चर के तौर पर आप एसोसिएट रिसर्चर या फिर रिसर्च डिजाइनर या
किसी संस्थान के प्रोजेक्ट से जु़डकर काम कर सकते हैं। टीचिंग में आप किसी
संस्थान या यूनिवर्सिटी में जाकर रूरल डेवलपमेंट पढा सकते हैं।
इस
क्षेत्र में आपकी सेलरी आपके अनुभव और काम करने की क्षमता के साथ ही आप
किस संस्थान के साथ काम करने जा रहे हैं, इस पर निर्भर करती है जो 15 हजार
से 65 हजार तक हो सकती है।
प्रमुख संस्थान
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, दिल्ली।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर।
जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, हैदराबाद।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, सेंटर-11, टैगोर मार्ग, मानसरोवर, जयपुर।
दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, दिल्ली।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर।
जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, हैदराबाद।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, सेंटर-11, टैगोर मार्ग, मानसरोवर, जयपुर।