अंग्रेजी भाषा तरक्की की परिभाषा

कहा जाता है कि भाषा कोई भी हो, उसका आभामंडल उसकी परिधि में आने वालों को प्रभावित करता है। हो सकता है कि बदलते समय व बदलती धारणाओं के बीच इस आभामंडल की चमक कम या ज्यादा हो जाए, लेकिन उसका प्रभाव खत्म कभी नहीं होता। हमारे रहन-सहन, व्यक्तित्व, सोचने के ढंग पर हरदम इसकी छाप रहती हैं। भारत जैसे बहुभाषीय देश में तो इस छाप पर अक्सर गर्मागर्म बहस होती रही हैं, जहां हर कोई अपनी सहूलियतों से अपनी भाषा को प्रमुखता देता नजर आता है। ऐसा हो भी क्यों न आखिर यही तो है आपकी पहचान, आपकी मौजूदगी दर्शाने का जरिया। पर आज भाषा केवल पहचान का ही माध्यम नहीं है आज तो यह कॅरियर के मंच पर कामयाबी का कर्टेन रेजर बन चुकी है। यही कारण है कि इन दिनों हर कोई किसी खास भाषा में खुद को पारंगत बनाने में जुटा है। इन भाषाओं में अंग्रेजी की जगह शीर्ष पर है।
ग्लोबल दुनिया में खुलती राहें
आज की दुनिया बडी तेजी से सपाट हो रही है। हर भाषा, समुदाय के लोग अपनी आर्थिक सामाजिक जरूरतों के चलते करीब आ रहे हैं। इस दौरान अंग्रेजी इन विपरीत संस्कृतियों के बीच सेतु का काम कर रही है। केवल कम्यूनिकेशन ही क्यों, जीवन के हर क्षेत्र में हो रहे हर छोटे बडे बदलावों को फायदे में तब्दील करने में भी अंग्रेजी उपयोगी बन रही है। चीन में हुए ओलंपिक का ही उदाहरण लें जहां आयोजन को सफल बनाने के लिए लाखों लोगों को इंग्लिश भाषा में पारंगत बनाया गया। क्या कैब ड्राइवर,क्या रेस्टोरेंट ऑनर, क्या सुरक्षाकर्मी सभी को इस दौरान फर्राटेदार इंग्लिश बोलना सिखाया गया।
भारत के पास है एज
अनेक पारंपरिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक वजहों से इंग्लिश विदेशी भाषा होकर भी हमारे लिए अंजान नहीं है, बल्कि यह तो आज हमारे आस-पास घरेलू भाषा की तरह इस्तेमाल होती है। देश के किसी भी कोने में चले जाएं, अंग्रेजी जानने समझने वाले लोग मिल ही जाएंगे। अंग्रेजी जानने वालों की इतनी बडी संख्या आज देश के लिए वरदान सरीखी है। जिसका मीठा फल हमें देश की तेज इकनॉमिक ग्रोथ के तौर पर मिल रहा है। बीपीओ, केपीओ/आईटी/ एकेडेमिक्स में इसकी साफ झलक देखी जा सकती है। इन क्षेत्रों में शानदार इंग्लिश की बदौलत युवा, देश के लिए रेवेन्यू पैदा कर रहे हैं।
इंग्लिश : स्कूल लेवल पर
माना जाता है कि निश्चित समय में चीजें अपनी शक्ल बदल लिया करती हैं। इंग्लिश की भी तासीर कुछ ऐसी ही है, जो प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर महज एक विषय के तौर पर पढाई?जाती है तो बीतते वक्त के साथ कॅरियर ग्रोथ की जरूरत में तब्दील हो जाती है। पर पहले ऐसा नहीं था यहां तक कि इंग्लिश की पढाई ही अमूमन कक्षा 6 से शुरू हुआ करती थी। इंग्लिश बोलने जानने वाले लोग भी कम ही थे। आज चीजें तेजी से बदली हैं। नतीजतन मदर लैंग्वेज न होने के बाद भी आज देश में अंग्रेजी समझने वालों की संख्या बढी है और शायद इसी के चलते विदेशों में भारतीय इंग्लिश के ग्राहक भी बढे हैं। कॉल सेंटर, ऑनलाइन ट्यूशन से लेकर इंटरनेशनल बिजनेस मीट तक में भारतीयों का यह हुनर सिर आंखों पर लिया जा रहा है। यह सब संभव हुआ प्राथमिक स्तर पर इंग्लिश लर्निग टीचिंग के मजबूत ढांचे के चलते। माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में तेज सरकारी प्रयास व मौजूदा संसाधन की बदौलत इंग्लिश आने वाले समय में बडे अवसरों को पैदा कर रही है।
सामाजिक बदलावों का प्रतीक
कोई कुछ भी कहे लेकिन अंग्रेजी भाषा समाज केताने बाने में फर्क ला रही है। यह सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का कारण भी बन रही है। एक टीवी कॉमर्शियल में पहले अपनी कमजोर इंग्लिश से दरकिनार महसूस करने वाली मिसेज शर्मा जब फर्राटे से इंग्लिश बोलती हैं, तो वे एक ब्रांड के प्रचार के साथ साथ बदलते दौर की धारणाएं भी बयां कर जाती हैं। समझा जा सकता है कि आज सामाजिक संदर्भो में अंग्रेजी किस तरह प्रभावी हो रही है।
कंपटीशन में इंग्लिश
कार्यक्षेत्र में अंग्रेजी के बढे महत्व के चलते अमूमन सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में इंग्लिश नॉलेज को अनिवार्य?बना दिया गया है। आइएएस से लेकर रेलवे तक ज्यादातर परीक्षाओं में इंग्लिश, सफलता का बडा कंपोनेंट मानी जाती है। तो वहीं इंटरव्यू व जीडी में भी स्पोकन इंग्लिश के बगैर काम नहीं चलता। ऐसे में जरूरी है कि कॅरियर की ट्रेन पकडने से पहले अपना इंग्लिश का प्लेटफॉर्म मजबूत बनाएं।
इंटरव्यू, जीडी की राह
इन दिनों इंग्लिश, कॅरियर में कामयाबी पाने की बडी शर्त है। कंपटीशन में तो इसका महत्व है?ही, जॉब की अंतिम सीढी यानि इंटरव्यू में भी इसकी कम अहमियत नहीं है। जॉब के दौरान भी यह उतना ही काम आती है। बकौल विशेषज्ञ आज जॉब में तरक्की की गुंजाइश उस व्यक्ति के लिए सर्वाधिक है, जो इंग्लिश में फ्लूयंट है। इसके अलावा इन दिनों तमाम तरह के जॉब हैं, जहां आपकी इंग्लिश नॉलेज व स्पीकिंग को ही परखा जाता है। ज्यादातर आउटसोर्सिग से संबंधित काम इस दायरे में आते हैं।
ट्रांसलेटर
आज देश में सक्षम अनुवादकों की बहुत मांग है। इनकी जरूरत विदेश मंत्रालय, दूतावासों, शोध-संस्थानों से लेकर पब्लिेकशन हाउस तक सभी जगह होती है। यहां काम करके आप अंतरराष्ट्रीय हलकों में भी पहचान बना सकते हैं।
मीडिया
मीडिया मेअंग्रेजी पर पकड रखने वालों को हाथों-हाथ लिया जा रहा है। यहां वेब, इलेक्ट्रानिक, प्रिंट जैसे माध्यमों में अच्छे इंग्लिश कंटेंट राइटर्स, प्रूफ रीडर्स, सब-एडीटर के लिए कई च्वाइसेस हैं। हिंदी अखबारों में भी काम करने के लिए अच्छी इंग्लिश आनी चाहिए।
आउटसोर्स वर्क
पूर्ण ग्लोबलाइजेशन की ओर बढती दुनिया में आउटसोर्सिग का चलन तेज हुआ है। इसके अंतर्गत विदेशी कंपनियां अपना अतिरिक्त काम संबंधित बीपीओ फर्मो के माध्यम से पूरा करती है। इन दिनों भारत इस क्षेत्र का बडा खिलाडी है जिसका बीपीओ साम्राज्य 50 बिलियन डॉलर के पार पहुंचने को है तो केपीओ सेक्टर में भी पंख लगे हैं।
टीचर व ट्रेनर
रोजगार के लिए अंग्रेजी के बढे महत्व के चलते देश में इंग्लिश के बेहतरीन अध्यापकों की मांग बढी है। इन दिनों ज्यादा से ज्यादा छात्र अंग्रेजी में अपना भविष्य संवारने के लिए पीजी स्पेशल कोर्सेस, शॉर्ट टर्म कार्सेस अटेंड कर रहे हैं। ऐसे में इंग्लिश विषय में पीजी, एमफिल लोगों के लिए इंग्लिश अध्यापन के क्षेत्र में पूरी संभावनाएं हैं। कॉलेजों, स्कूलों के अलावा प्राइवेट ट्यूशन, स्पीकिंग इंस्टीट्यूट्स में योग्य लोगों की दरकार है।

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