आज देश विदेश में शिक्षा पाने के रास्तों को बैंक लोन आसान कर रहा है। चूंकि ये लोन की रकम बैंक सीधे संबंधित संस्थान को जारी करती है। इसलिए प्रार्थी द्वारा इनके दुरुपयोग कीभी गुंजाइश नहीं होती। यदि छात्र प्रतिभावान है, तो एजूकेशन लोन उनके लिए बहुत बडा सहारा है। ऐसे में बेहतर होगा कि छात्र बैंक से मिल रहे वित्तीय ऋणों का पूरा उपयोग करते हुए अपने कॅरियर को पुख्ता दिशा दें।
आर.एन. मोहंती
जी.एम, इलाहाबाद बैंक, उत्तर प्रदेश
इन दिनों तरह-तरह के प्रोफेशनल व एकेडेमिक कोर्सेस ने छात्रों को अवसर तो कई दिए हैं, लेकिन इन कोर्सो में लगने वाली भारी-भरकम फीस अभी भी छात्रों, उनके अभिभावकों के लिए सिरदर्द है। यही कारण है कि हर साल 10+2 पास करने वाले कुछ बेहद प्रतिभावान बच्चे चाहते हुए भी स्तरीय प्रोफेशनल कोर्सेस में दाखिला नहीं ले पाते। ऐसे में सरकार भी इस क्षेत्र में बदलाव के पक्षधर है। बीते दिनों केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में प्रोफेशनल एजूकेशन लोन में दी गई राहत सरकार की यही मंशा बयां करती है।
क्या है नई पॉलिसी
भारत सरकार के एक सर्वे पर गौर करें तो देश में बारहवीं उत्तीर्ण कुल छात्रों में केवल 5 से 10 फ सदी छात्र ही प्रोफेशनल कोर्सेज कर पाते हैं, जबकि विकसित देशों में यह आंकडा 60 फीसदी तक है। बीते दिनों शक्षिक कोर्स के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए सरकार ने एजूकेशन लोन स्कीम्स को उदार किया है, साथ ही बैंक को लोन डिफॉल्ट से बचाने के लिए ऋण गारंटी कोष(के्रडिट गारंटी ट्रस्ट) की स्थापना का प्रावधान रखा है। इस कोष के बनने से छात्रों को 7.5 लाख राशि तक के शिक्षा ऋण बगैर किसी गारंटी के मिलेंगे। यहीं नहीं यदि किसी कारणवश अभिभावक बैंक लोन चुकता नहीं कर पाते तो पहले की तरह अभिभावक के नाम आरसी नहीं भेजी जाएगी, न उनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी बल्कि अब कुल ऋण का 75 फीसदी इस कोष से बैंकों को अदा किया जाएगा। शेष 25 प्रतिशत की वसूली बैंक खुद करेगी।
लोकप्रिय हो रहे हैं एजूकेशन लोन
इन दिनों देश के ज्यादातर सरकारी व प्राइवेट बैंक एजूकेशन लोन उपलब्ध कराते हैं। निर्धारित नियम व शर्तो के अनुसार बैंक से अधिकतम 20 लाख रुपए बतौर ऋण प्राप्त किया जा सकता है। जॉब के उपरांत या कोर्स करने के 6 माह या एक वर्ष के अंतराल में कैंडिडेट को लोन ब्याज के साथ वापस करना होता है। एजूकेशन लोन के तहत बैंक छात्रों की ट्यूशन फीस, यात्रा खर्च, हॉस्टल जैसे बडे खर्च कवर करती है। एजूकेशन लोन पहले प्रोफेशनल कोर्स के लिए ही मिलता था, पर अब जरूरत को समझते हुए स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर भी उपलब्ध है।
अपनी दावेदारी
यदि आप सेंट्रल, स्टेट यूनिवर्सिटयों या फिर ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) के मान्यता प्राप्त संस्थानों से सर्टिफिकेट कोर्स या फिर पीएचडी जैसे प्रोग्राम्स में प्रवेश लेते हैं, तो आप लोन के हकदार हैं। इसके अतिरिक्त लोन की पात्रता के लिए कैंडिडेट्स को भारत का नागरिक व आयु अधिकतम पैंतीस वर्ष के आसपास होनी चाहिए। इसके अलावा एजूकेशन लोन केवल प्रोफेशनल अथवा स्नातक/ स्नातकोत्तर स्तर पर रेगुलर कोर्सेस में इनरोल्ड छात्र को ही मिलते हैं। वे छात्र जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 4.5 लाख रुपये से कम है, उन्हें ऋण पर सब्सिडी मिलती है। लोन वापसी की अधिकतम सीमा सात वर्ष होती है। इस दौरान स्टूडेंट्स को अपने एजूकेशनल डाक्यूमेंट्स/ फोटोकॉपी समेत अन्य दस्तावेजों की कॉपी बैंक में जमा करानी पडती है।
मोरीटोरियम पीरियड
सरकार ने छात्रों की सुविधा के मद्देनजर लोन वापसी की व्यवस्था की है। इसमें कर्ज अदायगी की अवधि 5 से 7 वर्ष के बीच तय है। अमूमन इस दौरान छात्र अपनी प्रोफेशनल एजूकेशन पूरी कर लेता है। छात्र की जॉब लगने के 6 माह बाद या फिर कोर्स पूरा करने के एक साल बाद (जो भी पहले हो) ऋण अदायगी करनी होती है। यह अवधि मोरीटोरियम पीरियड कही जाती है।
छूट का है प्रावधान
छात्र ने यदि आइआइटी,आइआइएमसी, आइआइएम, निफ्ट जैसे प्रीमियम संस्थानों में प्रवेश लिया है, तो उसे एजूकेशन लोन पर बैंक ब्याज दर में छूट मिलती है। इतना ही नहीं बैंक एक निश्चित आय वर्ग से संबंधित कैंडिडेट को ब्याज में भी राहत देती है। वहीं बालिकाओं को एजूकेशन लोन पर ब्याज में 1 फीसदी छूट का नियम है। एक अनुमान के मुताबिक, सबसे अधिक एजूकेशन लोन मैनेजमेंट से संबंधित कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स लेते हैं, उसके बाद इंजीनियरिंग कोर्स करनेवाले स्टूडेंट्स आते हैं।
ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस कवरेज
ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस कवरेज स्कीम के तहत ज्यादातर बैंक इंश्योरेंस कवर प्रदान करते हैं। लोन अवधि (5 से 7 साल) के दौरान यदि बारोअर की आकस्मिक मौत हो जाती है तो उसका पूरा पैसा बैंक को बीमा कंपनियों से मिलता है। इस तरह के इंश्योरेंस में बैंकों का पब्लिक या प्राइवेट सेक्टर की बीमा कंपनियों से टाई-अप रहता है, जिसे ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस कवरेज के नाम से जाना जाता है। बच्चे की उम्र के हिसाब से प्रीमियम में फर्क होता है। किसी भी बैंक से एजुकेशन लोन लेने से पहले रिपेमेंट, ब्याज (फिक्स या फ्लोटिंग रेट) और इसकी शर्त, प्रोसेसिंग फीस आदि की जांच-पडताल कर लें। रिपेमेंट के लिए फिक्स रेट ज्यादा मुनासिब माना जाता है।
अगर लेनी हो विदेश शिक्षा
विदेश में पढने के लिए भी एजूकेशन लोन ल े सकते हैं। ऋण पात्रता के लिए आपका संबंधित पाठ्यक्रम में चयन, परीक्षा या अन्य माध्यमों से होना जरूरी होगा। विदेश में शिक्षा के लिए आपको अधिकतम 20 लाख रुपये तक का लोन मिलेगा। इस दौरान बैंक एडमिनिस्ट्रेटिव फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज, रिपेमेन्ट चार्ज की पूरी जानकारी रखना उपयोगी होगा। स्कूली स्तर पर छात्रों के समक्ष आने वाली वित्तीय समस्याओं क ो दूर करने के लिए कुछ बैंक ों ने ज्ञान दीपिका जैसी कई लोन स्कीमें चलाकर एजूकेशन को आसान बनाया है। इसके तहत हाईस्कूल व इंटर के छात्रों को कवर किया जाता है।