MARINE LOGISTICS हॉबी और एडवेंचर का फ्यूजन

MARINE LOGISTICS हॉबी और एडवेंचर का फ्यूजन
इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कई सारी तकनीक आने के बाद भी इंटरनेशनल ट्रेड के लिए समुद्र सबसे बेहतर और सस्ता साधन बना हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक, आज देश के करीब 90-95 परसेंट पेट्रोल, कैरोसिन, कोयला, एलॉय, जींस, खाने-पीने के दूसरे जरूरी सामान का ट्रांसपोर्टेशन समुद्र के रास्ते ही होता है। जिस तरह से हमारा देश व‌र्ल्ड में इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज का सेंटर बन रहा है और हम कई देशों के साथ ट्रेड बढा रहे हैं, जिसके चलते मैरीन लॉजिस्टिक पर हमारी व्यापारिक निर्भरता बढती जा रही है। एक्सपर्ट कहते हैं कि इस क्षेत्र में प्रोफेशनल्स की काफी कमी है, जबकि ग्लोबल बिजनेस की वजह से मैरीन लॉजिस्टिक्स में एंट्री लेवल पर करियर के अनेक ऑप्शंस हैं।
वर्क प्रोफाइल
मैरीन लॉजिस्टिक्स का वर्क ब्रॉड और जोखिम भरा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और नेविगेशन में टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट के साथ इनका वर्क ईजी हो गया है। इनका मेन वर्क शेड्यूलिंग, मार्केटिंग ऑफ स्पेस, बुकिंग ऑफ कार्गो, सुपरविजन एंड कस्टमर रिलेशनशिप बनाना रहता है।
प्रोफेशन में एंट्री
मैरीन लॉजिस्टिक्स में एंट्री के दो रास्ते हैं- नॉटिकल साइंस और इंजीनियरिंग। इसमें एंट्री आप तभी कर सकते हैं, जब आप पीसीएम से सीनियर सेकेंडरी पास होंगे। इस कोर्स में एंट्री पाने के लिए फिजिकली फिट होना भी कंपल्सरी है। इसके अलावा कुछ तय हेल्थ स्टैंड‌र्ड्स को भी पूरा करना होता है। वैसे अगर आप मेंटली और फिजिकली फिट हैं, तो इसमें एंट्री के लिए एलिजिबल हैं। अगर होम सिकनेस है, तो आप इसमें एंट्री न करें, क्योंकि इसमें कई-कई महीनों तक घर से बाहर रहना पडता है?
अपॉच्र्युनिटीज
आज ओसन इकोनॉमिक डेवलपमेंट का साधन बन चुका है। जो देश इसका जितने बेहतर ढंग से उपयोग कर सकता है, वह उतना ही कामयाब है। इस बात को गवर्नमेंट और प्राइवेट दोनों ही सेक्टर ने गंभीरता से लिया है। इन सबके चलते बडी संख्या में ट्रेंड प्रोफेशनल्स के पास शिपिंग कंपनीज में जॉब के कई नए ऑप्शंस हैं। इस सेक्टर में मिलने वाली सैलरी और फैसिलिटीज का कोई जोड नहीं है। यही वजह है कि इसमें जॉब करने के लिए काफी संख्या में यूथ आते हैं। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसी कई शिपिंग कंपनियां मैरीन एक्सपर्ट की सर्विसेज लेती हैं। विदेश में फ्यूचर बनाना चाहते हैं, तो इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन द अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग में भी एंट्री कर सकते हैं। इसके अलावा, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, नॉर्वे समेत कई फॉरेन कंट्रीज में मैरीन एक्सपर्ट की डिमांड बनी रहती है।
टॉप इंस्टीट्यूट्स
- ट्रेनिंगशिप चाणक्य, नवी मुंबई
- मैरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कोलकाता और मुम्बई
- इंडियन मेरीटाइम इंस्टीट्यूट, चेन्नई
- नेशनल शिप डिजाइन एंड रिसर्च सेंटर, विशाखापट्टनम
मस्ट हैव स्किल्स
मैरीन लॉजिस्टिक्स में सक्सेस तभी पा सकते हैं, जब आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स और इंग्लिश अच्छी होगी। इंग्लिश के अलावा अगर आप अन्य फॉरेन लैंग्वेज के जानकार हैं, तो आगे बढने के चांसेज आपके लिए अधिक हैं। अगर ये क्वॉलिटीज होंगी, तो एडवर्स कंडीशंस में पेशेंस और लीडरशिप से उसे बेहतर तरीके से हैंडल कर सकते हैं।
- लीडरशिप क्वॉलिटी
- कम्युनिकेशन स्किल्स
- गुड नॉलेज ऑफ मेरीटाइम वेसल्स, मैरीन इंजीनियरिंग, वायरलेस टेक्नोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी
- डोमेन नॉलेज ऑफ पर्टिकुलर इंडस्ट्री
- नॉलेज ऑफ सप्लाई चेन मैनेजमेंट
- सेलिंग एक्सपीरियंस

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