उत्कृष्टï सेवाओं की डगर पर पहला कदम-बैंकिंग


बैंकिंग क्षेत्र में विस्तारवादी नीति के चलते सेवाओं की बेहद संभावनाएं पनपी हैँ। व्यापक शाखा विस्तारीकरण ने रोजगार के नए अवसरों का सृजन किया है। आज हमारे देश में नौकरीशुदा लोगों की एक बड़ी तादाद बैंकिंग क्षेत्र में नियोजित है। भारत में बैंकिंग क्षेत्र में नियोजन को एक आकर्षक कैरियर के दृष्टिïकोण से देखा जाता है। हमारे देश के बेरोजगार लाखों युवक-युवतियां हर साल बैंकों में विभिन्न पदों पर सेवायोजन हेतु आवेदन करते हैं। बैंक क्षेत्र में युवा व प्रतिभाशाली लोगों के लिए स्वर्णिम कैरियर की संभावनाएं हैं।
बैंक प्रत्येक देश, काल व परिस्थितियों में लोगों के आकर्षक का केंद्रबिंदु रहे हैं। बैंकों में कार्य करना समाज में प्रतिष्ठïा वृद्धि का महत्त्वपूर्ण कारक माना जाता रहा है। साफ-सुथरी, प्रशंसनीय व भरोसेमंद सेवाओं में अग्रणी बैंकिंग सेवाएं आज भी युवाओं के आकर्षण का सबब हैं। आज के शिक्षित युवाओं में से लाखों युवक-युवतियां प्रतिवर्ष बैंकों के लिए विज्ञापित होने वाले विभिन्न पदों हेतु अपनी तकदीर आजमाते हैं। उत्तम सेवा शर्तों, सुविधाओं व आकर्षक वेतन के कारण बैंक क्षेत्र में नियुक्ति सभी के लिए एक स्वप्न सरीखी है। कठिन परिश्रम, सूझबूझ व निरंतर अध्यवसाय के बल पर ये स्वप्न साकार हो सकता है।
वर्ष 1969 से पूर्व तक भारत में बैंकिंग सुविधाओं का दायरा काफी सीमित तथा तंगहाल था। तब सामान्यत: यह क्षेत्र निजी क्षेत्र के नियंत्रण में था। मोटेतौर पर लोगों की अवधारणा थी कि बैंक केवल समाज के ऊंचे तबके के लिए ही बनाए गए हैं। किसानों तथा निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए बैंकों के दरवाजे बंद प्राय: थे। बैंकों के संचालन से लेकर ऑपरेटिंग तक का काम पूंजीपतियों, उद्योगपतियों तथा समाज के धनाढï्य व पहली पंक्ति में गिने जाने वाले लोगों का प्रिय शगल माना जाता था।
भारत सरकार ने वर्ष 1969 में बैंकिंग क्षेत्र पर सामाजिक नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से देश के 14 बड़े बैंकों का राष्टï्रीयकरण कर दिया। यह सिलसिला चलता रहा तता 1980 में भी छह और बैंक राष्टï्रीयकरण की परिधि में आ गए। परिणामस्वरूप भारत की अधिकांश बैंक व्यवस्था सार्वजनिक क्षेत्र के हवाले हो गई। राष्टï्रीयकरण के बाद बैंकिंग विकास को पंख लग गए और उसने अभूतपूर्व रूप से अतुलनीय उपलब्धि का सफर तय किया। बैंकों की आंधी न सिर्फ विकसित, शिक्षित व सभ्य शहरी परिवेश की जरूरत बनी अपितु वह दूरदराज के गांवों में भी लोगों के लिए सुख-सुविधाओं का ख्याल करने वाली एक बेहतरीन संस्था साबित हुई।
बैंकिंग विस्तार की इस सुखद बयार में उपलब्धियों व अवसरों के फूल खिल उठे। रोजगार की तलाश में खाली बैठे हाथ नोटों से खेलने लगे। बैंकिंग क्षेत्र को आज भी नौकरीपेशा क्षेत्र में सर्वाधिक ईमानदारी वाली तबका माना जाता है। बाकी सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्रों में जहां भ्रष्टïाचार का भारी घालमेल है, वहीं बैंक आज भी अपनी साख को बनाए हुए हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सीधी भर्ती द्वारा भरा जाने वाला पद परिवीक्षाधीन अधिकारी (प्रोबेशनरी ऑफिसर) का है। बैंक क्षेत्र में खाली पड़े अधिकारियों के एक चौथाई पद सीधी भर्ती द्वारा की गई नियुक्तियों से भरे जाते हैं। शेष तीन चौथाई पदों की पूर्ति लिपिकों की आंतरिक पदोन्नति द्वारा पूर्ण की जाती है। अनेक बैंक हर साल परिवीक्षाधीन अधिकारी के पदों हेतु हजार-बारह सौ रिक्तियां विज्ञाप्ति करते हैं। इन पदों हेतु बड़ी संख्या में युवक-युवतियां आवेदन करते हैं।
जो युवक-युवतियां इस पद के उम्मीदवार हैं, उन्हें संबंधित प्रतियोगिता परीक्षा के लिए कड़े परिश्रम व निरंतर अध्ययन की आवश्यकता है। प्रतियोगिता परीक्षाओं का आयोजन विभिन्न बैंकिंग भर्ती समूहों (बैंकिंग सर्विसेज रिक्रूमेंट बोडï्र्स) द्वारा किया जाता है। हरेक बैंकिंग सेवा भर्ती समूह को कुछ बैंक आवंटित किए गए हैं। परिवीक्षाधीन अधिकारी के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न होती है- लिखित परीक्षा तथा साक्षात्कार।
लिखित परीक्षा का आयोजन देश के समस्त महानगरों, राज्य की राजधानियों तथा समस्त बड़े शहरों में किया जाता है। लिखित परीक्षा के माध्यम से उम्मीदवार की तर्कक्षमता, गणितीय अभिरुचि, सामान्य ज्ञान तथा भाषागत अध्ययन की जांच की जाती है। यह परीक्षा वस्तुनिष्ठï प्रकार (ऑबजेक्टिव टेस्ट) की होती है, जिसमें एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूछे गए सवालों के जवाब देने होते हैं। परीक्षा हिंदी अथवा अंग्रेजी किसी भी माध्यम में दी जा सकती है।
सामान्य ज्ञान की पुस्तकें, इतिहास, समसामयिक घटनाओं की जानकारी रखने वाले तथा पत्र-पत्रिकाओं का आद्योपांत अध्ययन करने वाले व्यक्तियों को परीक्षा में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। जो अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में मेरिट पर रहते हैं उन्हें साक्षात्कार हेतु आमंत्रित किया जाता है। साक्षात्कार के लिए चुने गए लोगों को आने-जाने का खर्चा भी प्रदान किए जाने का प्रावधान है। लिखित परीक्षा व साक्षात्कार दोनों में उच्च स्थान अर्जित करने वाले लोगों को स्वास्थ्य जांच के उपरांत नियुक्ति दे दी जाती है।
किसी भी संकाय से स्नातक उत्तीर्ण  करने वाले युवक-युवतियां जिनकी आयु 21 से 28 वर्ष के बीच है, परिवीक्षाधीन अधिकारी के लिए आवेदन की पात्रता रखते हैं। चुने गए अभ्यर्थियों को दो वर्ष के लिए परिवीक्षा अवधि पर रखा जाता है। उनका निष्पादन व प्रगति रिपोर्टें  संतोषजनक पाए जाने पर संबंधित बैंक की सेवा में उनकी पुष्टिï की जाती है।
परिवीक्षा अवधि के दौरान चयनित अभ्यर्थियों को बैंकिंग व प्रबंधन से जुड़े विविध विषयों पर दो-तीन चरणों में सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यही नहीं उन्हें व्यावहारिक (ऑन द जॉब) प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
बैंकिंग क्षेत्र में सुनियोजित परिश्रम के बल पर आप अपने स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

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