Dual Degree गारंटी ब्राइट फ्यूचर की

Dual Degree गारंटी ब्राइट फ्यूचर की
स्किल्स में होगा इजाफा
दिल्ली विश्वविद्यालय में अगर कोई रिसर्च में जाना चाहता है, तो उसके लिए अलग से पेपर शामिल किए गए हैं। नॉलेज को मजबूती देने के लिए डिसिप्लिन कोर्स है। एंप्लॉयमेंट स्किल्स सिखाने के लिए अप्लायड कोर्स शामिल किए गए हैं।
प्रो. दिनेश सिंह, वाइस चांसलर
दिल्ली विश्वविद्यालय
केस-1
महत्वाकांक्षी दिव्यांश को लग रहा था कि इंडस्ट्री को जहां टेक्निकल स्किल की दरकार है, वहीं एडमिनेस्ट्रेटर की जरूरत भी कम नहीं। जब उसे रेपुटेड यूनिर्वसिटी में फाइव ईयर डुअल डिग्री कोर्स में बीटेक के साथ एमबीए करने का ऑफर मिला, तो उसने प्रैक्टिकल डिसीजन लेते हुए एडमिशन ले लिया। दोस्तों ने कहा, यार, तुम कहां पांच साल के चक्कर में पड गए। करियर में एक साल पीछे रह जाओगे। बीटेक करो और झट से नौकरी हाथ में लो। दिव्यांश जानता था कि वो बेशक एक साल बाद कैंपस से बाहर आएगा, लेकिन प्रोफेशनल व‌र्ल्ड में उतरने की अचूक तैयारी और बेहतरीन स्किल्स के साथ। उसने फैसला नहीं बदला। एक कंपलीट पैकेज के साथ उसे कंपनी ने हाथों-हाथ लिया और आज वो सक्सेसफुल है। कंपनी में उसकी रेपुटेशन है, क्योंकि उसे टेक्निकल और मैनेजमेंट दोनों की नॉलेज है।
आने वाले पांच सालों में इंडस्ट्री का सिनारियो बदलने वाला है। इंडस्ट्रीज और कॉरपोरेट्स को टेक्नोक्रेट एडमिनेस्ट्रर की जरूरत ज्यादा होगी। मल्टीपल स्किल रखने वालों की अलग ही डिमांड होगी। स्किल्स की कमी का रोना रो रही इंडस्ट्री को तब सुकून मिलेगा, जब उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक प्रोफेशनल्स मिलने लगेंगे। इंडस्ट्री और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के बीच एक मैच क्रिएट होगा। स्टूडेंट्स को ब्राइट फ्यूचर के मौके मिलेंगे। इसके लिए डुअल डिग्री करने वालों की जबरदस्त डिमांड रहेगी। एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स ने भी इस सच्चाई को पहचान लिया है। बढती डिमांड के चलते जानी-मानी यूनिवर्सिटीज ने इस साल कई डुअल डिग्री कोर्सेज इंट्रोड्यूस किए हैं और इनकी मेरिट या कट-ऑफ भी काफी ऊंचा जाने की संभावना है। कॉस्ट कम, टाइम बेनिफिट, एकेडमिकली स्ट्रॉन्ग और अपनी रुचि के मुताबिक स्पेशलाइजेशन। इतने फायदे एक साथ मिलें तो फिर क्यूं न डुअल डिग्री कोर्सेज की पॉपुलरिटी बढे। बीटेक के साथ एमबीए या एमटेक। पांच साल का कोर्स और ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन एक साथ। स्टूडेंट्स को भी डुअल डिग्री कोर्सेज के फायदे पता चल गए हैं। इसी के साथ यूजीसी भी दो डिग्री एक साथ देने का मन बना रही है। मान्यता मिलने के बाद स्टूडेंट्स बीए इकोनॉमिक्स के साथ बीएससी फिजिक्स और लॉ जैसे क्रॉस स्ट्रीम के दो अंडरग्रेजुएट कोर्स एक साथ कर अपनी स्किल्स को दोगुना कर सकेंगे। इस तरह का ट्रेंड नया है और स्टूडेंट्स के फ्यूचर को उज्जवल बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड रहा है।
मेरा फैसला रहा सही
डुअल डिग्री के साथ मैं रिसर्च में अपना करियर बना सकता हूं। मुझे एक एक्सट्रा रिसर्च इंटर्नशिप करने का मौका मिल रहा है। मुझे जीआरई की तैयारी के लिए ज्यादा समय मिल रहा है। मैं सोच सकता हूं कि मुझे क्या चाहिए। जबकि मेरे साथ के बैच के जो स्टूडेंट्स बीटेक के प्रोजेक्ट्स के साथ जीआरई और जॉब की तैयारी में जुटे थे, उनका कंफ्यूजन और प्रॉब्लम्स देख कर मुझे दुख होता है। बेशक एक साल बाद ही सही, लेकिन जब मैं प्रोफेशनल फील्ड में आऊंगा तो पूरी तैयारी के साथ।
यह कहना है समर्थ महाजन का। समर्थ के मुताबिक वे डुअल डिग्री कोर्स से वे टेक्निकली स्ट्रॉन्ग हो रहे हैं। इसी कोर्स की बदौलत आज उन्हें अपने करियर के फैसले लेने में आसानी हो रही है। वे जानते हैं कि उनकी मंजिल क्या होगी। डुअल डिग्री कोर्स लेते समय शायद उन्हें इतना अहसास नहीं था कि उनका फैसला इस कदर सही साबित होगा। अपने एक्सपीरियंस को वे कुछ इस तरह से बयान करते हैं, जब मैंने आईआईटी खडगपुर में बीटेक के साथ एमटेक मैकेनिकल ज्वाइन किया था, तो मुझे डुअल डिग्री के बारे में इतना पता नहीं था। उस समय मैकेनिकल ब्रांच लेने के लिए ही मैंने इस कोर्स का ऑप्शन चुना था, लेकिन आज मैं फाइव ईयर कोर्स के फाइनल ईयर में हूं और मैं महसूस कर रहा हूं कि मेरा फैसला सही था।
स्किल्स होंगी स्पेशलाइज्ड
हाल ही में एक सर्वे आया कि भारतीय कंपनियों को उनकी जरूरत के मुताबिक सही योग्यता वाले एम्प्लॉयी नहीं मिल रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, हर 10 एंप्लॉयर्स में से छह को इस मुश्किल का सामना करना पडा रहा है। अकाउंटिंग, फाइनेंस, आईटी और इंजीनियरिंग जैसे फील्ड में यह समस्या और ज्यादा है। अंडरग्रेजुएट कोर्स कर जल्द से जल्द इंडस्ट्री में आने वाले स्टूडेंट्स को अपनी नॉलेज बढाने से ज्यादा अपने पैकेज की फिक्र होती है। इस सब बीच वे यह भूल जाते हैं कि वे जब तक अपने सब्जेक्ट या उसको सपोर्ट करते किसी फील्ड में टेक्निकली स्ट्रॉन्ग नहीं होंगे, तब तक उन्हें कमी खलती ही रहेगी और वे किसी जगह पर खुद को पीछे छूटता हुआ महसूस करेंगे। गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड स्कूल ऑफ इन्फॉर्मेशन व कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी की डीन इंचार्ज इला कुमार भी डुअल डिग्री कोर्सेज को स्टूडेंट्स के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण मानती हैं और उनको स्पेशलाइजेशन की सलाह देती हैं। अपने अनुभव बताते हुए वे कहती हैं, जो स्टूडेंट बीटेक के साथ एमटेक करके निकलता है, वह टेक्निकल ट‌र्म्स में बहुत आगे निकल जाता है। आज नॉलेज इंडस्ट्री में चीजें स्पेशलाइज्ड हो गई हैं। अगर आपको विशेष नॉलेज है, तो आपकी जोरदार डिमांड होगी। एक वाकया बताते हुए वे कहती हैं, मेरे पास इंडस्ट्री के लोग आए, उन्हें आर्किटेक्चर में यूकिलिप्टस एक्सपर्ट की बेहद जरूरत थी। जब मैंने उन्हें बताया कि मेरे एक स्टूडेंट को इसकी नॉलेज है, तो उन्होंने उससे बातचीत करके तुरंत उसको अप्वाइंटमेंट लेटर और ज्वाइनिंग का ऑफर दे दिया।
एप्लॉयड कोर्सेज: ग्रोथ का गुड ऑप्शन डीयू ने अपने 4 ईयर कोर्स के तहत एप्लॉयड कोर्सेज का एक अच्छा ऑप्शन दिया है, जो एक साथ कई सब्जेक्ट पढ लेने की सहूलियत प्रदान करता है। एप्लॉयड कोर्सेज स्टूडेंट्स को मार्केट की डिमांड के मुताबिक एजुकेशन देते हैं। इन्हें ग्रेजुएशन के साथ-साथ करने पर जॉब मार्केट में डिमांड बढना निश्चित है। हर कोर्स के लिए एप्लॉयड कोर्स होते हैं, लेकिन स्टूडेंट चाहें तो दूसरे कोर्स के एप्लॉयड कोर्स भी पढ सकते हैं। एप्लॉयड कोर्सेज में प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट्स को बढावा दिया जाता है। इनमें जॉब इंटरव्यू फेस करने तक की ट्रेनिंग भी शामिल हैं।
बेस्ट अप्लॉयड कोर्सेज
ई-एंटरप्रिन्योरशिप, बिजनेस एनालिटिक्स एंड इंटेलिजेंस, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, ई-बिजनेस एंड साइबर लॉ, ई-मार्केटिंग, ई-अकाउंटिंग और ई-फाइलिंग एंड रिट‌र्न्स, जियो-इंफॉर्मेटिक्स, मोबाइल एप्लीकेशन एंड एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म, वेब टेक्नोलॉजी, एंबेडिड सिस्टम, मीडिया एंड कम्युनिकेशन स्किल्स, एकेडमिक राइटिंग एंड कम्पोजिशन, टेक्स्ट एंड परफॉर्मेस, इंग्लिश लैंग्वेज टीचिंग, गेम थ्योरी, फाइनेंशियल इकोनॉमिक्स, पब्लिक फाइनेंस, एनवॉयरनमेंटल इकोनॉमिक्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन इन केमिस्ट्री, एनालिटिकल केमिस्ट्री, फॉर्मास्युटिकल केमिस्ट्री और ग्रीन केमिस्ट्री, मैथमेटिकल फाइनेंस आदि।
डुअल डिग्री से बढेगी डेफ्थ
इस बात में कोई शक नहीं है कि आप दो डिग्री एक साथ करते हैं, तो आपकी डेफ्थ बाकी लोगों से ज्यादा ही होगी। जीबीयू में जितने भी अंडरग्रेजुएट टेक्निकल कोर्स हैं, उनके साथ पीजी का कॉम्बो है। अपने कोर्सेज और करिकुलम को सही ठहराते हुए इला कुमार कहती हैं, जो स्टूडेंट बीटेक करके मार्केट में चले जाते हैं, उनकी डेफ्थ कम रह जाती है। 10-15 साल बाद जब उन्हें इस चीज का अहसास होता है, तब तक टाइम निकल जाता है। जब वे तरक्की में रुकावट महसूस करते हैं, तो उनमें निराशा पनपने लगती है। डुअल डिग्री कराकर हम ऐसे प्रोफेशनल्स पैदा कर रहे हैं, जिनकी गहराई ज्यादा है। जिन्हें गुड प्रोफेशनल्स कहा जा सकता है। ये इंडस्ट्री की जरूरतों को एक्सपर्टाइजेशन के साथ पूरी करेंगे।
जितनी मेहनत, उतना पैकेज
हाल में बिट्स पिलानी के तीन स्टूडेंट्स को गूगल ने एक करोड 22 लाख रुपये के एनुअल पैकेज पर सेलेक्ट किया। यह बिट्स के स्टूडेंट्स का अब तक का हाईएस्ट पैकेज माना जा रहा है। तीनों सूडेंट्स बिट्स में डुअल डिग्री कोर्स में एमएससी मैथमेटिक्स एंड बीई कम्प्यूटर साइंस में फाइनल ईयर के स्टूडेंट हैं। तीनों की पढाई जुलाई 2013 में पूरी होगी। सर्च इंजन गूगल ने तीनों को अक्टूबर 2013 में कंपनी के अमेरिका की माउंटेनव्यू सिटी स्थित हेडक्वॉर्टर में जॉब के लिए प्लेस किया है। इससे पता चलता है कि कंपनियों को टैलेंट जरूरत है। अच्छे करियर के लिए डिग्री के साथ प्रोफेशनल स्किल्स भी जरूरी है। ये स्किल्स अगर कैंपस की पढाई के साथ ही डेवलप हो जाए,ं तो इसमें बुराई ही क्या है।
क्यों करें डुअल डिग्री कोर्स
-दो डिग्री एक ही समय में पूरी हो जाती है।
-रिसर्च फील्ड में जाने का ग्राउंड तैयार होता है।
-एकेडेमिकली मजबूत बन जाते हैं।
-कॉस्ट इफेक्टिव होता है।
-समय का फायदा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
-च्वाइस के विषय पढने की आजादी होती है।
-मार्केट की डिमांड के मुताबिक खुद को डेवलप कर सकते हैं।
-करियर के ऑप्शन और कई अवसर एक साथ मिलते हैं।
क्रॉस स्ट्रीम को भी मिलेंगे ऑप्शन
स्टूडेंट को अलग-अलग स्ट्रीम्स के दो अंडरग्रेजुएट या पोस्टग्रेजुएट कोर्स एक साथ करने की अनुमति देने पर यूजीसी विचार कर रही है। यूजीसी का यह कदम बाजार की डिमांड के मुताबिक देने की दिशा में पहल है। इनमें एक डिग्री ओपन लर्निग से की जा सकेगी।
है एक चैलेंज
दो डिग्री हर मायने में बेहतर है, लेकिन दोनों एक साथ करना चैलेंज भी है। समय और कोर्स की जरूरतें पूरी करने के लिए डेडिकेशन की जरूरत पडती है।
मैच क्रिएट कर रहे हैं हम
कंपनीज तो अच्छे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं। अगर आपको काम आता है, तो आपकी डिमांड कम नहीं होगी, बल्कि आपके पास इतने ऑप्शन होंगे कि सलेक्शन आपके हाथ में होगा। हमारी यूनिवर्सिटी का करिकुलम इंडस्ट्री ओरिएंटेड है। हमने इंडस्ट्री के लोगों को बुलाया, उनकी जरूरतें पूछीं और फिर इसे डिजाइन किया। हम इंडस्ट्री और प्रोफेशनल्स के बीच मैच क्रिएट कर रहे हैं।
इला कुमार
डीन इंचार्ज, गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा
जॉब दिलाएंगे डुअल कोर्स
आज देश में कई इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटीज डुअल डिग्री वाले कोर्स करा रही हैं। ध्यान देने की बात यह है कि हमें इनमें से स्तरीय संस्थान का ही चयन करना है। यह काम बेहद सावधानी भरा है, इसमें किसी भी तरह की चूक की कोई गुंजाइश नहीं है। आप अगर रिकग्नाइज्ड गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट से डुअल डिग्री कोर्स करते हैं तो उसका बेनिफिट जरूर मिलेगा। आने वाला दौर डुअल डिग्री कोर्सेज का ही है। इसमें किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए।
जितिन चावला
करियर काउंसलर
पांच साल में बदल जाएगा सिनारियो
आने वाले पांच सालों में इंडस्ट्री का सिनारियो निश्चित रूप से बदला होगा। हमारे डुअल डिग्री कोर्सेज का उद्देश्य है कि स्टूडेंट्स को कंपलीट नॉलेज मिले। हमने चार साल के बाद एक्जिट का ऑप्शन भी दिया है, लेकिन मेरा मानना है कि छात्रों को कंटीन्यू करना चाहिए। हमारा पाठ्यक्रम भी आम कोर्सेज से हटकर है। डुअल डिग्री कोर्स करने वाले सटूडेंट्न्स को ड्यूरेशन, कोर्स क्रेडिट का फायदा मिलता है। एक अलग एक्सपोजर मिलता है। इंडस्ट्री जो डिमांड कर रही है, उसके हिसाब से ही यूनिवर्सिटी नए प्रोडक्ट दे रही है। एक तरफ हम स्टूडेंट्स को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार कर इंडस्ट्री को स्किल्ड प्रोफेशनल्स दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ इंडस्ट्री को भी इस न्यू प्रोडक्ट के लिए डिमांड क्रिएट करने के लिए कह रहे हैं।
दिलीप के. बंद्योपाध्याय
वाइस चांसलर, इंद्रप्रस्थ यूनिविर्सिटी, दिल्ली

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