Data for Purpose करियर इन स्टैटिस्टिक्स

Data for Purpose करियर इन स्टैटिस्टिक्सअगर कभी भी स्पो‌र्ट्स की कमेंट्री सुनी होगी, तो याद होगा कि कमेंटेटर फील्ड में प्लेयर के आने के साथ ही, उससे संबंधित सारी रोचक जानकारी आपको पल भर में बता देता है कि उसने कितने मैच खेले हैं, उनका पिछला रिकॉर्ड क्या रहा है, कौन सी पारी उन्होंने अब तक बेस्ट खेली है आदि। पर्दे के पीछे ये सभी जानकारियां स्टैटिशियन उन्हें मुहैया कराते हैं। अगर आप भी जोड-गुणा करने में माहिर हैं और आंकडों से खेलने में आपकी दिलचस्पी है, तो स्टैटिस्टिक्स में करियर बना सकते हैं।
एक्सपर्ट कहते हैं कि स्टैटिशियन इज नॉट कलेक्टिंग ए लॉट ऑफ नंबर्स, इट इज कलेक्टिंग नंबर ऑफ पर्पज। यही वजह है कि स्टैटिस्टिक्स एक अप्लाइड, इंटरडिसिप्लिनरी सब्जेक्ट है। इकोनॉमी से लेकर कॉमर्स, कंप्यूटर लैंग्वेजेज, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा एनालिस्ट टूल्स, इंश्योरेंस, रिस्क असेसमेंट बैंकिंग, फाइनेंस, रिसर्च जैसी जगहों पर स्टैटिस्टिक्स का इस्तेमाल होता है।
असल में यह एक कला है, जिसके माध्यम से वह विभिन्न सोर्सेज से डाटा एकत्रित करके उसे इन्फॉर्मेशन बेस्ड बनाया जाता है। इनका एरिया काफी ब्रॉड है। यही कारण है कि इसमें सभी के लिए अवसर हैं।
किस तरह के कोर्स
इसमें बीएससी, एमएससी के अलावा हायर एजुकेशन से संबंधित कई तरह के कोर्स हैं। अधिकतर कोर्स पीजी लेवल पर उपलब्ध हैं। वर्क रिसर्च बेस्ड होते हैं। इस कारण हायर एजुकेशन मस्ट है। आ‌र्ट्स, कॉमर्स, साइंस सभी स्ट्रीम के युवा एंट्री के लिए एलिजिबिल हैं। बस बढिया मैथमेटिकल स्किल्स होनी चाहिए। कुछ यूनिविर्सिटीज मेरिट के आधार पर एंट्री देते हैं, तो कुछ के लिए एंट्रेंस एग्जाम भी देना होता है, जिसमें गणित, रीजनिंग व एप्टीट्यूड टेस्ट लिया जाता है।
फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स
कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसमें स्टैटिस्टिक्स प्रोफेशनल्स नहीं रखे जा रहे हैं। स्पो‌र्ट्स के अलावा, मेडिसिन, एग्रीकल्चर, इकोनॉमी, एजुकेशन, इंजीनियरिंग, मार्केटिंग, इंश्योरेंस, पब्लिक हेल्थ लॉ, स्टॉक मार्केट और रिसर्च, पॉपुलेशन एनालिसिस आदि में आंक डों की उपयोगिता बढती जा रही है। इतना ही नहीं, स्टैटिस्टिक्स सब्जेक्ट वाले आईईएस, आईएसएस के साथ-साथ सिविल सर्विसेज एग्जाम और टीचिंग लाइन में शामिल होकर करियर को आसमान की बुलंदी प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, अन्य सरकारी विभागों, जैसे-योजना आयोग, द नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लॉयड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर), इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लॉयड मैनपॉवर रिसर्च (आईएएमआर), इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर), स्टैटिस्टिकल एंड इकोनॉमिक ब्यूरो, सामाजिक-आर्थिक अनुसंधान और बैंकों में जॉब के अवसर हैं। इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट, कोलकाता, दिल्ली, बेंगलुरु के साथ-साथ डीयू में इसकी पढाई होती है।
कैलकुलेशन पर बेस्ड
यह पूरी तरह कैलकुलेशन बेस्ड फील्ड है। ऐसे में साउंड मैथमेटिकल बैकग्राउंड की अपेक्षा की जाती है। इसके अलावा कंप्यूटर की अपडेट नॉलेज, इंग्लिश नॉलेज भी जरूरी है। अगर रिसर्च माइंडेड के साथ हार्ड वर्कर हैं, तो यह फील्ड में प्रोग्रेस है।
प्रो. पूनम सिंह, एचओडी, डिपार्टमेंट ऑफ स्टैटिस्टिक्स दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टैटिस्टिक्स में ञ्जश्रश्च ह्रश्चह्लद्बश्रठ्ठह्य बढती उपयोगिता और डिमांड के चलते स्टैटिशियन की मांग सभी फील्ड में है। अगर मैथ्स स्ट्रांग है और इन्फॉर्मेशन बेस्ड नंबर्स देने की एबिलिटी है, तो आपके लिए अवसरों का खुला आसमान है..
एक्चुअॅरि
एक्चुअॅरि इज एन एक्सपर्ट इन रिस्क मैनेजमेंट। अपने मैथ्स स्किल्स का भरपूर उपयोग करते हुए बीमा के जोखिम और प्रीमियम की गणना कर फ्यूचर की सही स्थिति का फाइनेंशियली आकलन इनका मेन वर्क है। एक्चुअॅरि प्रोफेशनल्स डेथ, डिजीज, दुर्घटना, विकलांगता आदि के दौरान वित्तीय जोखिम का आकलन करते हैं। आज एक्चुअॅरि प्रोफेशनल्स की डिमांड गवर्नमेंट और प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों में ही नहीं, बल्कि टैरिफ एडवाइजरी कमिटी, इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आईआरडीए), सोशल सिक्योरिटी स्कीम, फाइनेंशियल एनालिसिस फर्म में भी है। बीए, बीएससी के अलावा सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी उपलब्ध हैं। एक्चुरिअॅल साइंस से संबंधित कोर्सेज में ग्रेजुएट डिग्री के लिए मैथ्स या स्टैटिस्टिक्स में सीनियर सेकंडरी होना आवश्यक है, जबकि पीजी डिप्लोमा, मास्टर्स डिग्री और सर्टिफिकेट कोर्स के लिए मैथ्स/स्टैटिस्टिक्स विषय से ग्रेजुएशन की डिग्री जरूरी है।
स्पो‌र्ट्स स्टैटिशियन
आज सभी खेल लोकप्रिय होते जा रहे हैं और सभी में इस तरह के प्रोफेशनल्स रखना समय की मांग है। अगर खेल में रुचि है तो आधी दूरी आप यूं ही तय कर लेते हैं। क्वालिफिकेशन के लिए कोई हार्ड एंड फास्ट रूल्स नहीं है। अगर आप जानकार हैं, प्रेशर में बेस्ट करने की क्षमता और डेडलाइन के पक्के हैं तो आपके लिए अवसरों की कमी नहीं है। विभिन्न खेलों में अवसर के अलावा स्पो‌र्ट्स प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों में भी अवसर हैं।
गवर्नमेंट स्टैटिशियन
गवर्नमेंट प्लान बनाने में इनका महत्वपूर्ण रोल होता है, क्योंकि संबंधित क्षेत्रों का डाटा यही अवेलेबल कराते हैं। यही कारण है कि देश और राज्य की सरकारें हर वर्ष इस तरह के प्रोफेशनल्स की नियुक्ति एग्जाम के माध्यम से करती हैं। अगर आप सरकारी नौकरी करना चाहते हैं तो यूपीएससी के अलावा एसएससी और अन्यपरीक्षाओं के माध्यम से सपने साकार कर सकते हैं। सभी परीक्षा की एलिजिबिलिटी और एंट्रेंस टेस्ट अलग हैं।
एनवॉयरनमेंटल स्टैटिशियन
ग्लोबल वॉर्मिग व‌र्ल्ड वाइड समस्या है। इस क्षेत्र से संबंधित प्रोफेशनल्स की डिमांड सभी जगह है। ये संबंधित कंपनी या संस्था को एनवॉयरनमेंटल डाटा उपल्ब्ध करातं है। इस क्षेत्र में जिस तरह से रिसर्च हो रहे हैं, उसी के आधार पर ये अपना वर्क करते हैं। इसमें एकेडेमिक बैंकग्राउंड के साथ ही एनवॉयरनमेंट की नॉलेज जरूरी है। अगर आपके पास साइंटिफिक अप्रोच व अंग्रेजी अच्छी है और इसके साथ ही मैथ्स स्किल्स व कंप्यूटर से बेहतर रिजल्ट निकालने में सक्षम हैं, तो आपके लिए जॉब की कमी नहीं है।
फॉरेंसिक स्टैटिशियन
फॉरेंसिक साइंस एप्लायड साइंस है। इसी का एक पार्ट है फॉरेंसिक स्टैटिशियन। क्रिमिनल्स का पता लगाने के लिए वे साइंटिफिक मेथड्स व टेक्नोलॉजी का यूज करते हुए उसका रिकॉर्ड खंगालते हैं और अपने सहयोगियों को जरूरत पडने पर उस घटना से जुडे आंकडे उपलब्ध कराते हैं। ऑर्गनाइज्ड क्राइम की बढती घटनाओं के कारण इस तरह के प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ रही है। आप चाहें तो फॉरेंसिक साइंस के अंतर्गत कोर्स कर सकते हैं। इसमें अधिकतर उन्हें प्रिफरेंस दी जाती है, जो इस क्षेत्र में रिसर्च वर्क से जुडे हुए हैं या कहीं संबंधित कोर्स पढा रहे हैं। इसके लिए अलग से कोई कोर्स उपलब्ध नहीं है। कम्युनिकेशन स्किल्स के साथ ही लॉ की जानकारी जरूरी है।
फार्मास्युटिकल स्टैटिशियन
मेडिसिन की दुनिया डॉक्टरों, मरीजों के इलाज और दवाओं तक ही सीमित नहीं है। फार्मास्युटिकल का क्षेत्र आज दुनिया की सबसे तेजी से बढती इंडस्ट्री में से एक है। यही वजह है कि आज इसमें दवाओं के डिस्ट्रीब्यूशन, मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशंस, फार्मा मैनेजमेंट आदि में फार्मास्युटिकल स्टैटिशियन की मांग बढी है। कंपनियां इन्हीं के माध्यम से डाटा कलेक्ट करती हैं और इन्हीं के आधार पर नई दवा लॉन्च भी करती हैं। इस क्षेत्र में काम करने के लिए हायर एजुकेशन जैसे पीएचडी होने के साथ ही दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पदार्थो एवं तकनीक की नॉलेज होनी चाहिए। इस क्षेत्र के प्रोफेशनल्स को कंपनियां अच्छी सैलरी पर अपाइंट करती हैं।
मार्केट रिसर्च स्टैटिशियन
बाजार में किस प्रोडक्ट की डिमांड अधिक है और किसकी सप्लाई मार्केट में बेहतर है, किस प्रोडक्ट को लोग यूज कर रहे हैं और किसे नेगलेक्ट कर रहे हैं, डाटा के माध्यम से ये अपडेट रहते हैं। इन्हीं की सहायता से कंपनियां पैकेजिंग और प्रोडक्ट से रिलेटेड एडवरटिजमेंट के बारे में फैसला लेती हैं। यह कस्टमर्स के टेस्ट और उनकी प्रिफरेंस दोनों की जांच करता है और इससे संबंधित डाटा कलेक्ट करता है। अगर आप हार्ड वर्कर हैं, तो आपके लिए यह क्षेत्र बेस्ट है।
स्टैटिस्टिकल कंसल्टेंट
किसी भी ऑर्गनाइजेशन की तरक्की में स्टैटिस्टिकल कंसल्टेंट का अहम योगदान होता है। कंसल्टेंट डाटा के माध्यम से ऑर्गेनाइजेशन की दशा सुधारने के लिए पहले बिजनेस की मौजूदा समस्याओं का विश्लेषण करते हैं और जरूरत के मुताबिक आगे की योजनाओं का खाका तैयार करते हैं। कंसल्टेंसी से एक्सपोजर मिलता है। कंसल्टेंट के पास एनालिटिकल माइंड होना जरूरी है, तभी आप इंडस्ट्री के मौजूदा ट्रेंड को समझ पाएंगे।

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