डैंटिस्ट बनें करियर चमकाएं

देश में दंत रोगियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या दंत क्षय तथा 95 प्रतिशत से अधिक ‘पेरियोडैंटल’ रोग से प्रभावित है। यदि हम देश में उपलब्ध दंत चिकित्सा सुविधाएं पर नजर डालें तो पता चलता है कि 80 हजार की जनसंख्या पर केवल एक प्रशिक्षित दंत चिकित्सक ही उपलब्ध हैं। विदित है कि भोर समिति तथा मुदालियोर समिति ने प्रति 4 हजार जनसंख्या पर एक दंत चिकित्सक होने की सिफारिश की थी किन्तु वास्तविक स्थिति बड़ी निराशाजनक है।

भारत के इस विकट दंत स्वास्थ्य मानचित्र के परिदृश्य में डैंटिस्ट्री के क्षेत्र में रोजगार के अवसर न केवल उज्ज्वल हैं बल्कि राष्ट्र को कुशल एवं प्रशिक्षित दंत चिकित्सकों की आवश्यकता भी है। बतौर दंत चिकित्सक प्रैक्टिस करने के लिए न्यूनतम बी.डी.एस. (बैचलर आफ डैंटल सर्जरी) डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु भौतिकी, रसायन एवं जीव विज्ञान विषयों सहित न्यूनतम 50 प्रतिशत प्राप्तांक के साथ 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए।

देश के प्राय: सभी राज्यों में डैंटल कालेज हैं, जहां से बी.डी.एस. कोर्स किया जा सकता है। इनमें से कुछ कालेज ऐसे भी हैं जिनमें प्रवेश अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर ही होता है। राज्य सरकार के अधीन संचालित डैंटल कालेजों में राज्यस्तरीय प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश दिया जाता है।

खुली बाजार अर्थव्यवस्था के फलस्वरूप अब तो निजी क्षेत्र में भी अनेक डैंटल कालेज खुल गए हैं, जहां से बी.डी.एस. की डिग्री प्राप्त की जा सकती है। इन तमाम डैंटल कालेजों में प्रवेश के लिए स्थानीय एवं राष्ट्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं किन्तु किसी भी डैंटल कालेज में प्रवेश लेने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लेना अत्यंत आवश्यक है कि वह ‘डैंटल काऊंसिल आफ इंडिया’ से अनुमोदित है भी या नहीं।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन यह एक स्वतंत्र संस्था है, जो देश में गुणवत्तापूर्ण दंत चिकित्सा शिक्षा हेतु जिम्मेदार है। डैंटल एजुकेशन के लिए वांछित मानदंड तैयार करना तथा उन्हें लागू करना इसी संस्था का कार्य है। बगैर डैंटल काऊंसिल की अनुमति के न तो कोर्ई नया पाठ्यक्रम शुरू किया जा सकता है और न ही चल रहे पाठ्यक्रम में सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। कालेज को राज्य सरकार द्वारा मान्यता तथा विश्वविद्यालय द्वारा संबंधन भी काऊंसिल के अनुमोदन  पर ही दी जाती है।

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