सीमा सड़क संगठन में रोजगार

जनगणना के आंकड़ों के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों के सभी रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत बेरोजगार युवाओं की संख्या 3,68,22,000 थी, लेकिन इसके साथ ही सीमा सड़क संगठन में निर्धारित तकीनीकी और गैर-तकनीकी योग्यताओं वाले अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की कमी महसूस की जा रही थी। यहां तक कि इसके पास कुशल, अर्धकुशल और अकुशल ट्रेड्समेन की भी कमी थी। इसका कारण यह है कि आम जनता को इस शानदार संगठन के बारे में शायद ही कोई जानकारी है, इससे परिचित होना तो दूर की बात है।
सीमा सड़क संगठन का स्वरूप
सीमर सड़क संगठन भारत की सशस्त्र सेनाओं से जुड़ा एक अपेक्षाकृत नया संगठन है। 7 मई 1960 को इसका गठन हुआ था। उद्देश्य था देश के उत्तर पश्चिमी और उत्तर पूर्वी इलाकों में दुर्गम हिमालय क्षेत्र में सड़कों का निर्माण करना। यह सड़कों के निर्माण से संबंधित सिविल इंजीनियरी के काम करने वाला संगठन है। बाहरी तौर पर इसका कार्य भारत सरकार और राज्य सरकारों के लोकनिर्माण विभागों जैसा है। मगर कुल मिलाकर देखें तो इसका काय्र सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स जैसा है। यह हिमालय और रेगिस्तान के ऐसे सीमांत क्षेत्रों में जहां अन्य एजेंसियां आम तौर पर काम नहीं कर पातीं, नई सड़कें बनाता है और उन्हें तारकोल से पक्का करता है। इसके अलावा यह इन क्षेत्रों में पुरानी सड़कों की मरम्मत और रख-रखाव का काम भी करता है। इस संगठन के अधिकारी पर्यवेक्षक और कर्मचारी कुछ तो सशस्त्र सेनाओं से लिए जाते हैं और कुछ संगठन के अपने कार्यों के लिए भर्ती किए जाते हैं।
इस संगठन के लिए खास तौर पर भर्ती किए जाने वालों को सामूहिक रूप से जनरल रिजर्व इंजीनियर्स फोर्स (ग्रेफ) के नाम से पुकारा जाता है। सेना, खासतौर पर कोर ऑफ इंजीनियर्स के लिए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सामान्य सैन्य सेवा में माना जाता है। इस संगठन के तकनीकी प्रमुख को महानिदेशक सीमा सड़क (डी.जी.बी.आर.) कहा जाता है और उसका कार्यालय नई दिल्ली में है। वह सेना (कोर ऑफ इंजीनियर्स) का अधिकारी होता है और उसका दर्जा या रेंक लेफ्टिनेन्ट जनरल के समकक्ष होता है।
सीमा सड़क संगठन की इकाइयां
सीमा सड़क संगठन की सबसे निचले स्तर की स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाली इकाई को रोड कंस्ट्रक्शन कम्पनी या आर.सी.सी. कहा जाता है। यह राज्यों के लोक निर्माण विभागों के डिवीजन या मंडलों के समान है। आर.सी.सी. का प्रमुख जनरल रिजर्व इंजीनियरी फोर्स के अधिशासी अभियंता या कोर ऑफ इंजीनियर्स के मेजर के स्तर का अधिकारी होता है।  इस इकाई में नई सड़कें बनाने के लिए फॉर्मेशन कटिंग प्लाटून, पुलिया, रिटेनिंग वॉल, ब्रेस्ट वॉल, नालों और पैरापैट आदि के लिए परमानेन्ट वर्क प्लाटून, सड़कों को कोलतार बिछाकर पक्का करने के लिए सर्फेसिंग प्लाटून और तैयार सड़कों के रख-रखाव के लिए रोड मेंटीनेंस प्लाटून जैसी कई कामकाजी पलटनें होती हैं। इन प्लाटूनों के प्रभारी को प्लाटून ऑफीसर कहते हैं जो सहायक अधिशासी अभियंता या कैप्टन के स्तर का अधिकारी होता है। दो या तीन रोड कन्स्ट्रक्शन कम्पनियों से मिलाकर बॉर्डर रोड टास्क फोर्स (बी.आर.टी.एफ.) का गठन होता है। यह लोक निर्माण विभाग के सर्किल या सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स की  इंजीनियरी रेजीमेन्ट के समान है। टास्क फोर्स की कमान सुपरिंटेन्डिंग इंजीनियर (सिविल इंजीनियर) या कोर ऑफ इंजीनियर्स के लेफ्टिनेंट कर्नल अथवा कर्नल के हाथों में होती है। दो या तीन बी.आर.टी.एफ. से मिलकर एक परियोजना बनती है। प्रोजेक्ट की कमान जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स के चीफ इंजीनियर (सिविल इंजीनियर) या कोर ऑफइंजीनियर्स के ब्रिगेडियर के हाथों में होती है। रोड कन्स्ट्रक्शन कंपनियां और बॉर्डर रोड आस्क फोर्स ठीक तरीके से कार्य कर सकें इसके लिए संगठन की कुछ सामान्य सेवा इकाइयां भी होती हैं। जैसे इंजीनियर स्टोर और ट्रांसपोर्ट कंपनी साज-सामान की ढुलाई करती हैं, फील्ड वर्कशॉप विभागीय वाहनों और मशीनरी की मरम्मत करता है। मेडिकल स्टेजिंग सैक्शन, मेडीकल इन्स्पेक्शन रूम और डेन्टल यूनिट जवानों के स्वास्थ्य औश्र दंत रोगों के इलाज का काम करती हैं। इसी तरह सिगनल यूनिट, पोस्टल यूनिट और पायनियर कंपनी भी अपना-अपना निर्धारित कार्य करती हैं। इस सामान्य सेवा इकाइयों की कमान अपने-अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले अधिकारियों के हाथों में होती है। जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग कोर्स की पायनियर कंपनियों में गैर-तकनीकी कर्मचारी काम करते हैं जिन्हें पायनियर कहा जाता है। उनकी कमान तकनीकी प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में होती है जिन्हें सिविलियन ऑफीसर कहा जाता है।
लागू होने वाले विनियम
जनरल जिर्व इंजीनिया फोर्स के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भर्ती, छुट्टïी, वेतन व भत्ते, सेवानिवृत्ति, पेंशन और ग्रेच्युटी के बारे में भारत सरकार की सिविल सेवा नियमावली के कायदे-कानून लागू होते हैं। इसके साथ ही उन पर सेना अधिनियम-1950 कुद संशोधनों के साथ लागू होता है। बल में अनुशासन बनाए रखने के लिए सिविलियन कर्मचारियों के भर्ती, सेवानिवृत्ति, पेंशन संबंधी शर्तों को ध्यान में रखते हुए इसे आवश्यक संशोधनों के साथ लागू किया जाता है।
श्रम शक्ति
बल के अधिकांश कर्मी सड़क निर्माण संबंधी गतिविधियों में लगाए जाते हैं। कभी-कभी उन्हें भवन निर्माण के कार्य में लगाया जाता है। इनमें पायनियर, राजमिस्त्री, बढ़ई, मेट और ओवरसियर आदि शामिल हैं। इसके अलावा क्लर्क, नर्सिंग असिस्टेन्ट, वायरलैस ऑपरेटर, सफाई कर्मचारी, खानसामा जैसे कर्मचारी भी अपना कार्य करते हैं। अधिकारियों में सबसे अधिक संख्या सिविल इंजीनियरों की होती है। इसके बाद इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियर तथा प्रशासनिक अधिकारी होते हैं।
भर्ती
ग्रेफ के अधिकारियों की भर्ती संघ लोक सेवा आयोग द्वारा की जाती है। कई अणिकारी निचले रैंकों से विभागीय तरक्की पाकर भी ऊपर पहुंच जाते हैं। अधीनस्थ स्तर के विभिन्न श्रेणियों  के अधिकारियों की भर्ती कमांडर, जनरल इंजीनियरी रिजर्व फोर्स सेंटर एंड रिकॉर्ड्स, पुणे (महाराष्टï्र) द्वारा केन्द्रीकृत रूप से की जाती है। अधिकारी संवर्ग में रिक्तियों की सूचना संघ लोक सेवा आयोग, नई दिल्ली द्वारा प्रमुख समाचार-पत्रों में प्रकाशित की जाती है। अधीनस्थ कर्मचारियों के बारे में कमांडर ग्रेफ सेन्टर का विज्ञापन रोजगार समाचार और एम्पलॉयमेन्ट न्यूज में प्रकाशित होते हैं।
सेवा संबंधी लाभ
केन्द्र सरकार के कर्मचारियों  को मिलने वाले सेवा और भत्तों संबंधी सभी लाभ ग्रेफ के कर्मचारियों को भी मिलते हैं। इसके अलावा उन्हें दूर-दराज के इलाकों में रहने पर नियुक्ति स्थान और वेतन के आधार पर रिमोट लोकेलिटी भत्ता या विशेष प्रतिपूरक भत्ता भी मिलता है। इसकी न्यूनतम सीमा 125 रुपए मासिक और अधिकतम सीमा 650 रुपए मासिक है। पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात लोगों को मूल वेतन के 12.5 प्रतिशत की दर से विशेष ड्ïयूटी भत्ता भी मिलता है। इसके अलावा ग्रेफ के अधिकारियों को कुछ विशेष रियरयतें भी मिलती हैं जो बहुत कुछ सशस्त्र सेना कर्मियों के समान होती हैं। ये इस प्रकार हैं:
1. केवल अपने लिए ऑफीसर मैस / सुपरवाइजर मैस या लंगर में मुफ्त राशन और मुफ्त आवास सुविधा के साथ साथ मुफ्त बिजली-पानी।
2. वर्ग-ख और वर्ग-क के अधिकारियों को नौकरी के पहले पांच वर्षों के लिए क्रमश: 2400 रुपए और 32 रुपए और इसके बाद क्रमश: 86 रुपए और 215 रुपए वार्षिक वर्दी भत्ता। सुपरवाइजरों और अन्य रैंक के अधिकारियों को सरकार की ओर से वर्दी भी दी जाती है।
3. बीमारी की गंभीरता के अनुसार मेडीकल इंस्पेक्शन रूम या ग्रेफ अस्पताल या सैन्य चिकित्सालय में मुफ्त चिकित्सा सहायता।
4. अपने आश्रितों को हर महीने मनीऑर्डर कमीशन के बिना 4000 रुपए भेजने की सुविधा। मनिऑर्डर कमीशन का खर्च सरकार उठाती है।
5. सरकारी विमान सेवाओं जैसे इंडियन एयरलाइंस और वायुदूत आदि से यात्रा करने पर किराये में 50 प्रतिशत की रियायत।
6. कैंटीन स्टोर्स से अपने लिए दैनिक उपयोग की वस्तुओं की रियायती दरों पर खरीद की सुविधा।
7. योग्य लोगों को अपने व्यवसाय में तरक्की के लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण।
पदोन्नति के अवसर
सिविल इंजीनियरी में स्नातक ग्रेफ में सहायक अधिशासी अभियंता के पद से नौकरी शुरू करके अतिरिक्त महानिदेशक पद तक तरक्की पा सकता है। मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल संवर्ग के स्नातक अधिकारी और प्रशासनिक संवर्ग के अधिकारी निदेशक के पद तक पहुंच सकते हैं। अराजपत्रित अधिकारियों को भी अपने काम, योग्यताओं और मेहनत के अनुसार पदोन्नति मिलती है।
निष्कर्ष :
सीमा सड़क संगठन ऐसे मेहनती नौजवानों का स्वागत करता है जो सिविल, मैकेनिकल इलेक्ट्रीकल या ऑटोमोबाइल इंजीनियरी या सिविल इंजीनियरी से संबंधित किसी व्यवसाय में शैक्षिक अध्ययन पूरा कर चुके हैं या पूरा करने वाले हैं। कला या विज्ञान विषयों के ऐसे स्नातक जिन्होंने कार्मिक या भंडार प्रबंधन में प्रशिक्षण लिया है या अनुभव प्राप्त हैं उनकी भी संगठन को आवश्यकता है। जिन युवाओं में घर से बाहर काम करने की पर्याप्त क्षमता है। जिनके मन में देश प्रेम की ज्वाला जल रही है और जो देश सेवा करना चाहते हैं, जो एक संगठित और अनुशासित संस्था का अंग होने पर गर्व महसूस करते हैं उनके लिए सीमा सड़क संगठन सबसे अच्छी पसंद है। एक शानदार रोजगार के सपने को साकार करने के लिए यह एक आदर्श जगह है।

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