करियर
का चयन एक बात है लेकिन उसमें लगातार बने रहना और अपनी अलग पहचान बनाना
दूसरी बात है। कॅरियर की राह को आसान बनाना चाहते हैं तो आपको नई चीजें
सीखने, सही समय पर सही फैसले लेने जैसे गुण सीखने चाहिए। यदि आप भी अपने
करियर में बेहतरी चाहते हैं तो करिए कुछ संकल्प और देखिए परिणाम।
1. बॉस से एक कॉम्प्लीमेंट जरूर लें, यह थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है। बॉस को संतुष्ट करना किले को जीतने से कम नहीं है। कई बार अपवाद भी होते हैं। फिर भी यदि आपको एक काम की तारीफ भी अपने बॉस से मिलती है तो काम करने का उत्साह दुगुना हो जाता है तथा संतुष्टि के साथ मानसिक संतोष भी मिलता है। किसी के करियर को चौपट करने या बनाने में उसके बॉस की भूमिका महत्वपूर्ण है। जहां तक हो सके अपनी तरफ से कमी न छोड़िए। इसे चुनौती मान कर स्वीकार करें।
2. बॉस को संतुष्ट करना किसी किले को जीतने से कम नहीं है। कई बार अपवाद भी होते हैं। फिर भी यदि आपको एक काम की तारीफ भी अपने बॉस से मिलती है तो काम करने का उत्साह दुगुना हो जाता है तथा संतुष्टि के साथ मानसिक संतोष भी मिलता है। अपने को पूरे तौर पर एक्सपोज करना होगा।
3. आज कोई भी क्षेत्र एेसा नहीं है जहां कम्प्यूटर का यूज ना होता हो। दूसरा यही वह माध्यम है जो आपको बाकी दुनियां से जोड़ता है इसलिए जब भी रिलेक्स करने का मन हो या खाली हों कम्प्यूटर पर समय बिताएं। दुनिया के किसी भी विषय की जानकारी लेने के लिए इससे बेहतर माध्यम अन्य कोई नहीं है।
4. आप सिर्फ मीटिंग में मौजूद रहकर नहीं बल्कि अपनी उपस्थिति को दर्ज कराने का एक भी मौका हाथ से न जाने दें। अपनी योग्यता, दूरदर्शिता तथा सोच को ठीक प्रकार से लोगों के सामने लाएं। दूसरों की हैल्प करने को तत्पर रहें। अपने कांटेक्ट को डेवलेप करें। केवल अपने कक्ष तक सीमित न रहें, उसके बाहर भी दुनिया है।
5. ऑफिस में दोस्ताना व्यवहार बनाना जरूरी है लेकिन आत्मीयता को हद से बढ़ाना प्रोफेशनल्स के लिए खतरनाक है। यह करियर के लिए कभी-कभी घातक सिद्ध हो जाता है इसलिए वर्कप्लेस में ना इमोशलन हों और ना ही पर्सनल। अपनी भावनाओं को काबू में रखने की कोशिश करें।
6. अपनी योग्यता यदि अपने भीतर ही छिपा कर रखेंगे तो भला किसका होगा। न कम्पनी का न आपका। यदि नौकरी बदलना भी चाहें तो भी एक्सपोजर की जरूरत तो पड़ेगी ही। कांउसलर का कहना है कि इंडिया में पै्रक्टिकल एक्सपोजर की कमी जबर्दस्त है। वर्कशॉप अटेंड करें, सेमिनार और कॉन्फेंरस में हिस्सा लेने से कतराएं नहीं। यह याद रखें कि किसी क्षेत्र में नीड्स ज्यादा होती है, कुछ में कम। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपनी स्किल को कैसे डेवलप करेंगे।
1. बॉस से एक कॉम्प्लीमेंट जरूर लें, यह थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है। बॉस को संतुष्ट करना किले को जीतने से कम नहीं है। कई बार अपवाद भी होते हैं। फिर भी यदि आपको एक काम की तारीफ भी अपने बॉस से मिलती है तो काम करने का उत्साह दुगुना हो जाता है तथा संतुष्टि के साथ मानसिक संतोष भी मिलता है। किसी के करियर को चौपट करने या बनाने में उसके बॉस की भूमिका महत्वपूर्ण है। जहां तक हो सके अपनी तरफ से कमी न छोड़िए। इसे चुनौती मान कर स्वीकार करें।
2. बॉस को संतुष्ट करना किसी किले को जीतने से कम नहीं है। कई बार अपवाद भी होते हैं। फिर भी यदि आपको एक काम की तारीफ भी अपने बॉस से मिलती है तो काम करने का उत्साह दुगुना हो जाता है तथा संतुष्टि के साथ मानसिक संतोष भी मिलता है। अपने को पूरे तौर पर एक्सपोज करना होगा।
3. आज कोई भी क्षेत्र एेसा नहीं है जहां कम्प्यूटर का यूज ना होता हो। दूसरा यही वह माध्यम है जो आपको बाकी दुनियां से जोड़ता है इसलिए जब भी रिलेक्स करने का मन हो या खाली हों कम्प्यूटर पर समय बिताएं। दुनिया के किसी भी विषय की जानकारी लेने के लिए इससे बेहतर माध्यम अन्य कोई नहीं है।
4. आप सिर्फ मीटिंग में मौजूद रहकर नहीं बल्कि अपनी उपस्थिति को दर्ज कराने का एक भी मौका हाथ से न जाने दें। अपनी योग्यता, दूरदर्शिता तथा सोच को ठीक प्रकार से लोगों के सामने लाएं। दूसरों की हैल्प करने को तत्पर रहें। अपने कांटेक्ट को डेवलेप करें। केवल अपने कक्ष तक सीमित न रहें, उसके बाहर भी दुनिया है।
5. ऑफिस में दोस्ताना व्यवहार बनाना जरूरी है लेकिन आत्मीयता को हद से बढ़ाना प्रोफेशनल्स के लिए खतरनाक है। यह करियर के लिए कभी-कभी घातक सिद्ध हो जाता है इसलिए वर्कप्लेस में ना इमोशलन हों और ना ही पर्सनल। अपनी भावनाओं को काबू में रखने की कोशिश करें।
6. अपनी योग्यता यदि अपने भीतर ही छिपा कर रखेंगे तो भला किसका होगा। न कम्पनी का न आपका। यदि नौकरी बदलना भी चाहें तो भी एक्सपोजर की जरूरत तो पड़ेगी ही। कांउसलर का कहना है कि इंडिया में पै्रक्टिकल एक्सपोजर की कमी जबर्दस्त है। वर्कशॉप अटेंड करें, सेमिनार और कॉन्फेंरस में हिस्सा लेने से कतराएं नहीं। यह याद रखें कि किसी क्षेत्र में नीड्स ज्यादा होती है, कुछ में कम। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपनी स्किल को कैसे डेवलप करेंगे।