सालों से बातें होती रही हैं कि एजुकेशन के वर्तमान ढांचे को समाज की जरूरत के मुताबिक ढाला जाना चाहिए ताकि जो स्टूडेंट्स पढ रहे हैं उनका प्रैक्टिकल इस्तेमाल भी वे सीख सकें। मेटा यूनिवर्सिटी का कॉन्सेप्ट यही है, जहां प्रोग्राम, एक्टिविटीज और इंस्टीट्यूशंस के तालमेल के जरिए स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री व सोसायटी की जरूरत के मुताबिक तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि यहां स्टूडेंट्स के पास एक डिग्री व कोर्स के उबाऊ दायरे से परे अपनी डिग्री को खुद डिजाइन करने के आजादी होती है। डीयू में मेटा यूनिवर्सिटी को मिल रहे पॉजिटिव रुझान को देखते हुए पेरियार यूनिवर्सिटी, सलेम भर्तहरि यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर और भारतिदासन यूनिवर्सिटी तिरुची भी इस कॉन्सेप्ट पर काम कर रही हैं।
क्या है मेटा यूनिवर्सिटी कॉन्सेप्ट
डीयू के अंतर्गत सीआईसी क्लस्टर इनोवेशन सेंटर के डायरेक्टर प्रोफेसर एमएम चतुर्वेदी बताते हैं कि मेटा यूनिवर्सिटी स्टूडेंटस के सामने क्लास, सिलेबस और पैटर्न की बंदिशों को हटा उन्हें डीयू के बेस्ट कॉलेजों में पढने का ऑप्शन देती है। यानी यूनिवर्सिटी के जिन कॉलेजों से उन्हें बेस्ट मिल रहा है, वे वहां का रुख कर सकते हैं। इसके अंतर्गत 4 साल के कोर्स डयूरेशन में कम से कम दो सेमेस्टर एक कॉलेज से कर सकते हैं। वे बताते हैं कि मेटा कॉलेज कॉन्सेप्ट पर सीआईसी बीटेक ह्यूमेनिटीज (मेटा कॉलेज कॉन्सेप्ट) व मास्टर्स ऑफ मैथमेटिक्स (मेटा यूनिवर्सिटी कॉन्सेप्ट, जामिया मिलिया इस्लामिया के साथ)। डीयू-बीटेक /बीएससी इन इनोवेशन विद मैथमेटिक्स एंड आईटी कोर्स चलाता है।
क्यों है पॉपुलर
आज एजुकेशन के लिए कोर्स तो बहुत हैं, लेकिन बदलते जॉब मार्केट के हिसाब से स्टूडेंट्स तैयार कर पाने वाले कोर्स अभी भी कम ही हैं। मेटा कॉलेज एजुकेशन में इस गैप को कम किया जा रहा है। यह मानना है बी-टेक इनोवेशन कोर्स के सेकेंड इयर स्टूडेंट मयंक जैन का।
वे बताते हैं कि मैथ्स मेरा फेवरेट सब्जेक्ट है और जब सीआईसी में इसका कोर्स स्ट्रक्चर देखा तो इंट्रेस्टिंग लगा। यही नहीं, जिस तरह सोशल प्रोजेक्ट वर्क को इसमें मैथमेटिकली सॉल्व किया जाता है, वो स्टडी को क्लास के बंद दायरों से बाहर निकालता है। इसका बेनिफिट सभी स्टूडेंट्स को मिलता है।
प्रैक्टिकल बेस्ड है स्टडी
सीआईसी की एसोसिएट प्रोफेसर शोभा बागई कहती हैं कि इन कोर्सेज में पहले साल से ही इंटर्नशिप की पूरी व्यवस्था रहती है। ऐसे में स्टूडेंट्स को एडमिशन लेते ही प्रैक्टिकल एक्सपोजर मिलना एक तरह से तय हो जाता है। यहां इस तरह के कोर्सो में थ्योरी व प्रोजेक्ट में 60 व 40 का रेशियो रहता है। अमूमन 40 स्टूडेंट्स पर 8 प्रोजेक्ट दिए जाते हैं।
कोर्स के तहत चल रहे प्रोजेक्ट केबारे में वे कहती हैं कि ट्रैफिक से लेकर, स्लम, डि्रंकिंग वॉटर सप्लाई, बाल बंदीगृह, मूक बधिर बच्चों केलिए पूरी तरह तक नीक आधारित प्रोजेक्ट कार्य अंजाम दिए जाते हैं। इन प्रोजेक्ट की खासियत इनके सॉल्यूशन में मैथ्स की भूमिका है।
इस बारे में कोऑर्डिनेटर बीटेक ह्यूमेनिटीज डॉ. सुक्रिता पॉल का मानना है कि चूंकि प्रोजेक्ट स्टूडेंट्स के इंट्रेस्ट पर आधारित होते हैं, इस कारण खास तरह का प्रोजेक्ट लेने की बाध्यता नहीं होती।
कोर्स स्ट्रक्चर
मास्टर ऑफ मैथमेटिक्स एजुकेशन (मेटा यूनिवर्सिटी)
कोर्स डयूरेशन: चार समेस्टर (दो साल से अधिक)
एक समेस्टर का डयूरेशन : 16 हफ्ते 1 क्रेडिट : 16 घंटे की थ्योरी/गाइडेड प्रोजेक्ट वर्क कोर्स के लिए जरूरी क्रेडिट मार्क्स : 96
सीट डिस्ट्रीब्यूशन
दिल्ली यूनिवर्सिटी : 10 सीट
जामिया मिलिया इस्लामिया : 10 सीट
दोनों इंस्टीट्यूशंस में 10-10 सीटों का डिस्ट्रीब्यूशन दोनों कॉलेजों की रिजर्वेशन पॉलिसी के आधार पर है।
कौन-कौन से हैं कोर्स
बी-टेक ह्यूमेनिटीज
इस चार वर्षीय कोर्स में स्टूडेंट्स के पास डीयू के किसी एक कॉलेज में अधिकतम दो सेमेस्टर (6 सेमेस्टर तीन कॉलेजों से) पढने का ऑप्शन होता है। बाकी सेमेस्टर्स के लिए उन्हें सीआईसी का रुख करना होगा। कोर्स में जर्नलिज्म, एजुकेशन, हिस्टोरिकल टूर, आर्ट्स एंड डिजाइन, काउंसलिंग जैसे सब्जेक्ट्स शामिल हैं।
मास्टर ऑफ मैथमेटिक्स एजुकेशन
कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली यूनिवर्सिटी ने जामिया मिलिया इस्लामिया के साथ एकेडमिक सेशन 2012-13 से द्विवर्षीय मास्टर ऑफ मैथमेटिक्स एजूकेशन के रूप में की है। इस बारे में सीआईसी के डायरेक्टर प्रोफेसर एमएम चतुर्वेदी कहते हैं कि भविष्य में हमारी कोशिश जेएनयू, आईआईटी जैसे संस्थानों को भी अपने साथ जोडने की होगी। मेटा यूनिवर्सिटी पर आधारित इस कोर्स में आप एक कोर्स दो अलग-अलग यूनिवर्सिटी से कर पाते हैं। इस दौरान आपको दोनों ही यूनिवर्सिटी की ज्वाइंट डिग्री मिलेगी।
बी-टेक, बीएससी इन इनोवेशन विद मैथमेटिक्स एंड आईटी
यह 4 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम है। हालांकि यह कोर्स मेटा पर बेस्ड नहीं है, पर इसके सभी सेमेस्टर्स की पढाई सीआईसी कैंपस में होती है।
क्या कहते हैं प्रोफेसर्स..
प्रैक्टिकल वर्क से निकला कंक्लूजन सडकों पर ट्रैफिक बिहैवियर समझने में हमारे स्टूडेंट्स ने गत दिनों बेहतरीन रोल निभाया। रोड पर प्रति घंटा फ्लो होने वाले ट्रैफिक, टू व्हीलर, फोर व्हीलर की वीडियो रिकॉर्डिग से स्टूडेंटस ने न सिर्फ ट्रैफिक प्रॉब्लम की असली वजहों को जाना बल्कि उनके सॉल्यूशन के लिए फैक्चुअल सजेशन भी दिए।
(डॉ. शोभा बागई, एसोसिएट प्रोफेसर, मैथमेटिक्स)
एजुकेशन का सही इस्तेमाल
क्लास रूम स्टडी तो सभी जगह होती है, लेकिन उस पढाई से हम दूसरों की जिंदगी कैसे संवारें, वो कम ही जगह बताया जाता है। मेटा कॉन्सेप्ट में इस पर फोकस किया जाता है।
(डॉ. पंकज त्यागी, को-ऑर्डिनेटर,मेटा यूनिवर्सिटी प्रोग्राम )
गवर्नमेंट एजेंसीज भी हैं अफेक्टेड
मेटा कॉलेज कॉन्सेप्ट में मुख्य रूप से क्लस्टर, सोसायटी, इंडस्ट्री जैसी तीन चीजों को आधार बनाकर पढाई होती है। कोशिश होती है कि स्टडी का पूरा एक्सपोजर बच्चों को मिल सके। खुद पुलिस, ट्रैफिक डिपार्टमेंट की ओर से हमारे प्रोजेक्ट वर्क्स को सपोर्ट मिला है। वे हमारी रिकमंडेशन के लिए क्यूरियस हैं।
डॉ. सुक्रिता पॉल (कॉर्डिनेटर, बीटेक-ह्यूमेनिटीज)
क्या कहते हैं स्टूडेंट्स..
एप्लीकेशन से आता इंट्रेस्ट
कोर्स स्ट्रक्चर व अपनी नॉलेज को इप्लीमेंट करने के मौके को देखते हुए मैने यहां दाखिला लिया था। वैसे भी मैथ्स मेरा फेवरिट सबजेक्ट है और उसके एप्लीकेशन की जो ऑपच्र्युनिटीज यहां मिली, मुझे नहीं लगता कहीं और मुमकिन थी।
मयंक जैन, बीटेक इनोवेशन
नहीं है बाउंडेशन
यहां काम और प्रैक्टिकल की कोई बाउंडेशन नहीं है। आप अपने प्रोजेक्ट को अपने टीचर्स की मदद से जैसे चाहें एक्सप्लोर कर सकते हैं। ग्राउंड पर काम करने से दिमाग खुलता है। बाकी संस्थानों के बंद क्लासों में होने वाली पढाई से यह बेहतर है।
संदीप, सीआईसी स्टूडेंट
बेहद इनोवेटिव
एक कॉलेज में दाखिला और पढाई यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों से, इससे अच्छा क्या हो सकता है। यहां हमें खुद के टैलेंट से वाकि फ होने का पूरा चांस मिलता है। साथ में दो यूनिवर्सिटीज की ज्वाइंट डिग्री तो वेटेज देगी ही।
संतोषी, सीआईसी स्टूडेंट
बदलेगा एजुकेशन का दायरा
-आखिर क्या खास है मेटा कॉलेज कॉसेप्ट में? दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंतर्गत 77 कॉलेजेज हैं। हर कॉलेज की सब्जेक्ट वाइज अपनी खासियत है। ऐसे में कितना बेहतर होता कि एक कॉलेज में एडमिशन लेकर स्टूडेंट्स को सभी बेस्ट कोर्स पढने को मिलते। इसके पीछे यही विचार है।
-कोर्सो को इंडस्ट्री व आस-पास की समस्याओं से भी जोडे जाने की बात है। करियर व आस-पास की प्रॉब्लम्स के प्रैक्टिकल सॉल्यूशन में मेटा कॉन्सेप्ट क्या भूमिका निभा सकता है?
यह कॉन्सेप्ट न केवल भूमिका निभा सकता है बल्कि निभा रहा है। कोर्सेज में शामिल किए गए प्रैक्टिकल वर्क का मकसद यही है कि स्टूडेंट्स अपनी पढाई को रोज की लाइफ से जोडें। डि्रंकिंग वॉटर प्रोजेक्ट, ट्रैफिक जैसी असल जिंदगी से संबंधित कई मुद्दों पर हमारे स्टूडेंट्स ने काम किया है।
-करियर के मामले में ये कोर्स कितने हेल्पफुल हैं?
इन कोर्सेज में जो कॉमन है, वो यह कि इसमें पहले ही साल से स्टूडेंट्स और इंडस्ट्री में सिनर्जी बैठाने की कोशिश की जाती है। कोर्सो में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स को पहले ही साल डीआरडीओ, भाभा, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन जैसे प्रीमियम ऑर्गनाइजेशन में इंटर्नशिप का मौका मिला। इंडस्ट्री एक्सपोजर उन्हें करियर चैलेंजेज के लिए तैयार करेगा।
-क्या डीयू के बाहर के स्टूडेंट्स को भी इन कोर्सेज में जगह मिलेगी?
हमारा भी सोचना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाहर के स्टूडेंट्स को भी मेटा कोर्सेंज में एडमिशन मिले। लेकिन अभी हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर इतना विशाल और मजबूत नहीं है कि इतनी तादाद में स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जा सके। सीटों को संख्या भी फिलहाल सीमित रखी गई है। फ्यूचर में इस पर विचार किया जा सकता है।
-इस तरहके अनट्रेडिशनल कोर्सेज में टीचर्स की क्या भूमिका होती है?
रेगुलर क्लासेज के साथ प्रोजेक्ट टूर में टीचर्स की भूमिका मेंटर की होती है। चूंकि प्रोजेक्ट वर्क ग्रुप में होते हैं लिहाजा स्टूडेंट्स को गाइड करने, ग्राउंड लेवल पर पेश आती दिक्कतों को दूर करने में इनका खास रोल होता है। टीचर वैसे भी कहीं भी हो, स्टूडेंट्स की हेल्प करना उसका कर्तव्य होता है।