लक्ष्मी की बरसात

लक्ष्मी की बरसात
न्यू ट्रेंड ऑफ कैंपस
आइआइटी और आइआइएम का चार्म या दबदबा तो शायद ही कभी कम हो, लेकिन अब दूसरे इंस्टीट्यूट्स में भी मल्टीनेशनल कंपनियां खासा इंट्रेस्ट ले रही हैं। इन इंस्टीट्यूट्स से टैलेंट को न सिर्फ हायर किया जा रहा, बल्कि उन्हें बडे पैकेजेज भी ऑफर किए जा रहे हैं। दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) के हिमांशु जिंदल इसके ताजा एग्जांपल हैं, जिन्हें गूगल ने 93 लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर किया है। इसी तरह एनआइटी, वारंगल के कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट के.गोपी. कृष्णा को फेसबुक ने तकरीबन 84.6 लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया है। इस फेहरिस्त में कई और भी हैं, जिन्होंने नॉन-आइआइटी इंस्टीट्यूट्स से पढाई की और फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल जैसी टॉप कंपनीज से हैवी पे-पैकेज हासिल किया है। जाहिर है, ग्लोबल लेवल पर स्लोडाउन के बावजूद इंडियन टैलेंट पर लक्ष्मी का आशीर्वाद बरकरार है।
कंपनियां हुई मेहरबान
कोलकाता के इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (आइएसआइ) के 82 साल के इतिहास में पहली बार कंप्यूटर साइंस में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट को 63 लाख रुपये का ऑफर गूगल कंपनी की ओर से मिला है। आइएसआइ के स्टूडेंट प्लेसमेंट सेल के को-ऑर्डिनेटर रघु तेजा ने बताया कि अभी तक उनके किसी भी स्टूडेंट को इतनी सैलरी ऑफर नहीं की गई थी। पिछले साल सबसे बडा ऑफर गोल्डमैन सैक्स ने 28 लाख रुपये का दिया था। तेजा कहते हैं, अभी तक हम सिर्फ एकेडेमिक्स पर जोर देते थे, प्लेसमेंट पर नहीं, लेकिन आज हर स्टूडेंट किसी इंस्टीट्यूट के एंप्लॉयबिलिटी फैक्टर को जरूर देखता है। इस साल आइएसआइ के कैंपस में आईसीआईसीआई, एचएसबीसी, मॉर्गन स्टैनले और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां प्लेसमेंट में शामिल हुईं। इस इंस्टीट्यूट में प्लेसमेंट आमतौर पर अगस्त में शुरू होते हैं और फरवरी-मार्च तक होते रहते हैं। कुछ समय पहले ही ग्लोबल फर्म बॉमबार्डियर की रेल टेक्नोलॉजी ऐंड मैन्युफैक्चरिंग आर्म ने आइआइटी को दरकिनार कर कुरुक्षेत्र एनआईटी, गुजरात के जीएच पटेल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी और पंजाब कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से स्टूडेंट्स को हायर किया। शायद यही वजह है कि मारुति, इमरसन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी दूसरे कॉलेजेज से स्किल्ड हैंड्स रिक्रूट कर रही हैं।
स्टूडेंट ड्रिवन प्लेसमेंट
आइआइटी और आइआइएम में प्लेसमेंट सीजन दिसंबर महीने से शुरू होता है जबकि बाकी इंजीनियरिंग कॉलेजेज में अगस्त से। इसीलिए कंपनियां नॉन-आइआइटी कॉलेजेज में से अपना टैलेंट पूल बनाना चाह रही हैं और बडी तादाद में प्लेसमेंट किए जा रहे हैं। आइआइएम, लखनऊ के प्लेसमेंट सेल के चेयरपर्सन प्रोफेसर राजीव कुंद्रा मौजूदा ट्रेंड के बारे में कहते हैं कि इस समय ग्लोबल कंपनियां कॉस्ट कटिंग पर काफी जोर दे रही हैं। इसलिए वे टॉप इंस्टीट्यूट्स की जगह दूसरी कतार के कॉलेजेज और इंस्टीट्यूट्स में कैंपस प्लेसमेंट कर वहां से टैलेंटेड स्टूडेंट्स को हायर कर रही हैं। इससे दोनों को फायदा हो रहा है। कंपनियों को कम पैकेज पर क्वॉॅलिटी और स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स मिल जा रहा है और स्टूडेंट्स को बडा ब्रांड और अनएक्सपेक्टेड पैकेज। वैसे, प्रोफेसर राजीव ने इस बात से इनकार नहीं किया कि बी-ग्रेड कॉलेजेज में टैलेंट नहीं होता। उनका कहना है कि क्योंकि अच्छे कट-ऑफ के साथ कैट क्लियर करना ईजी नहीं होता, इसलिए कई बार मेरिटोरियस स्टूडेंट्स को इंस्टीट्यूट से कॉम्प्रोमाइज करना पडता है, यानी प्लेसमेंट के दौरान बडा ऑफर मिलना एक स्टूडेंट की खुद की कैपेबिलिटी पर डिपेंड करता है। इसलिए ये प्लेसमेंट्स इंस्टीट्यूट नहीं, बल्कि स्टूडेंट ड्रिवन कहे जा सकते हैं।
प्राइवेट कॉलेजेज परफॉमर्ेंस
इस समय कई कंट्रीज में इकोनॉमिक स्लोडाउन है, इस वजह से ग्लोबल कंपनियां छोटे शहरों के कॉलेजेज से टैलेंट हायर कर रही हैं। इसके अलावा, ये कंपनीज पोस्टग्रेजुएट से ज्यादा बीटेक स्टूडेंट्स को लेना प्रेफर करती हैं क्योंकि इन्हें सस्ते में हायर किया जा सकता है और इन्हें कंपनी की जरूरत के मुताबिक ट्रेन करना आसान भी होता है। एनआइटी राउरकेला के प्लेसमेंट को-ऑर्डिनेटर सौरव कार कहते हैं कि साउथ इंडिया के बेंगलुरु जैसे शहरों में कई प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजेज का परफॉमर्ेंस काफी अच्छा है। वहां पहुंचने की कनेक्टिविटी अच्छी है, इसलिए कंपनियां वहां जा रही हैं।
चेंज होते प्रेफरेंस
स्मॉल टाउंस इंस्टीट्यूट्स में भी टैलेंट बसता है, ये बात तो साफ हो गई है। इसमें कोई शक नहीं है कि मल्टीनेशनल कंपनियां आइटी और कंप्यूटर साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को अच्छे पे-पैकेज पर हायर कर रही हैं, लेकिन इन दिनों आइटी कंसल्टेंसी, पब्लिक सेक्टर, बायोटेक, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए सेक्टर्स के लिए भी स्किल्ड लोगों की अच्छी डिमांड है। जबकि मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग जैसे कोर ब्रांचेज के स्टूडेंट्स का प्लेसमेंट उतना नहीं हो पा रहा है। हालांकि इसे एक टेम्परेरी फेज कहा जा सकता है। एनआइटी, वारंगल के प्लेसमेंट सेल के हेड प्रोफेसर चंद्रशेखर ने बताया कि बडी कंपनियों की प्रेफरेंस हर साल चेंज हो रही है। इन दिनों वे दूसरे इंस्टीट्यूट्स के नए टैलेंट्स को अप्रोच कर रहे हैं। वैसे, कोर सेक्टर से ज्यादा आज भी आईटी और कंप्यूटर साइंस की ही डिमांड देखी जा रही है। इस साल भी अमेजन (इंडिया) और याहू (इंडिया) जैसी कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए आई हैं। वहीं, एनआइटी, जमशेदपुर में सीनियर फैकल्टी और प्लेसमेंट सेल के हेड डॉ. राजीव भूषण ने बताया कि आज सारे रिक्रूमेंट्स ग्लोबल क्लाइंट्स को देखते हुए किए जा रहे हैं। इस समय एमएनसी कंपनियां कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक और एमसीए स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा पैकेजेज ऑफर कर रही हैं। जहां तक एनआइटी, जमशेदपुर की बात है, तो यहां अमेजन, सैमसंग, आइबीएम, टीसीएस, व‌र्क्स एप्लीकेशन जैसी कंपनियों ने प्लेसमेंट में शिरकत की है और कुछ स्टूडेंट्स को 15 से 16 लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया है।
डिफरेंट रोल्स
मल्टीनेशनल कंपनियों के दूसरे कॉलेजेज या इंस्टीट्यूट्स में जाने की एक वजह यह भी है कि इन स्टूडेंट्स को आइआइटी या आइआइएम के स्टूडेंट्स की तरह कंपनी के फास्ट नहीं, नॉर्मल ट्रैक पर रखते हैं और जिन्हें फास्ट ट्रैक पर रखा जाता है, उन्हें बडे रोल और रिस्पॉन्सिबिलिटी दी जाती हैं। च्वाइनिंग के पांच साल के अंदर सीनियर पोजिशंस मिल जाती हैं, जबकि नॉर्मल कैडर वालों के साथ ऐसा नहीं होता है। डाबर कंपनी एक एग्जांपल है, जहां सेकंड लेवल इंस्टीट्यूट्स से हायर किए गए फ्रेशर्स को एग्जीक्यूटिव ट्रेनी के तौर पर रखा जाता है। इनकी पोस्टिंग कंपनी की सब्सिडियरी यूनिट में की जाती है, जबकि टॉप रैंक कॉलेज के स्टूडेंट्स को मैनेजमेंट ट्रेनी का दर्जा दिया जाता है और उन्हें कंपनी के कोर बिजनेस में इनवॉल्व किया जाता है। हां, अगर एग्जीक्यूटिव ट्रेनी का वर्क पसंद आता है, तो उसे मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर प्रमोट जरूर कर दिया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया की एनआईआईटी टेक में सीनियर कंसल्टेंट शाजिया ने बताया कि ग्लोबल इकोनॉमी के मौजूदा कंडीशंस को देखते हुए मल्टीनेशनल कंपनियां स्किल बेस्ड हार्डवर्कर्स तलाश कर रही हैं, जो थोडे कम पैकेज पर भी काम करने को तैयार हो जाएं। एक बार स्टूडेंट को हायर करने के बाद माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियां उन्हें ट्रेन करती हैं और कम कास्ट पर उनसे बेस्ट आउटपुट निकाल लेती हैं। हालांकि हैरान करने वाली बात यह है कि गूगल जैसी कंपनियां भुवनेश्वर या राउरकेला जैसे छोटे शहरों के कॉलेजेज में नहीं जा रही हैं, क्योंकि यहां पहुंचने के लिए सीधी फ्लाइट नहीं है। जबकि इंडिया बेस्ड कंपनियां जैसे माइक्रोसॉफ्ट, ऑरेकल, सैमसंग, महिंद्रा और हीरो होंडा, उनके कॉलेजेज के क्रीम स्टूडेंट्स को 8 से 12 लाख के पैकेजेज पर आसानी से रख लेती हैं।
ट्रेन करना होता है ईजी
आइआइटी और दूसरे ए-रैंकिंग इंस्टीट्यूट्स के स्टूडेंट्स बेशक अच्छे होते हैं, लेकिन कई केसेज में ये यंगस्टर्स कुछ बैकलॉग्स के साथ कंपनी को ज्वाइन करते हैं। इससे वे वर्क फंक्शन और सिस्टम में पूरी तरह से घुल-मिल नहींपाते हैं, लेकिन स्मॉल टाउंस या छोटे शहरों के कॉलेजेज के फ्रेशर्स के साथ ऐसा नहींहोता है। वे नए चैलेंजेज एक्सेप्ट करने को लेकर रेडी रहते हैं। वहीं, टेक्निकल स्किल्स के मामले में कई बार ये आइआइटी के स्टूडेंट्स को भी टक्कर देने वाले होते हैं। इसीलिए बॉम्बार्डियर ने बाकायदा यंग लीडर्स प्रोग्राम के जरिए गुजरात के बडौदा, सूरत, महाराष्ट्र के पुणे, उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद और हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित इंजीनियरिंग कॉलेजेज से करीब 34 टैलेंटेड स्टूडेंट्स को हायर किया। इसके बाद इन्हें कंपनी की जरुरतों के मुताबिक ट्रेनिंग दी। कंपनी को इस बात से ज्यादा फर्क नहींपडता है कि टैलेंट कहां से हायर किया जाए। स्मॉल टाउंस इंस्टीट्यूट्स में भी अच्छा टैलेंट मिल जाता है। वैसे, बॉम्बार्डियर महीने-दो महीने में कॉलेजेज में रोड शो करती रहती है। इसमें बिजनेस लीडर्स को इनवाइट किया जाता है और वे अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से स्टूडेंट्स की स्किल को टेस्ट कर, उनका अच्छे पैकेजेज पर प्लेसमेंट करते हैं।
हर्ष मेहता
डायरेक्टर कम्युनिकेशंस ऐंड पब्लिक अफेयर्स, बॉम्बार्डियर ट्रांसपोट्र्रेशन
आइआइटी और आइआइएम का चार्म या दबदबा तो शायद ही कभी कम हो, लेकिन अब दूसरे इंस्टीट्यूट्स में भी मल्टीनेशनल कंपनियां खासा इंट्रेस्ट ले रही हैं। इन इंस्टीट्यूट्स से टैलेंट को न सिर्फ हायर किया जा रहा, बल्कि उन्हें बडे पैकेजेज भी ऑफर किए जा रहे हैं। दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) के हिमांशु जिंदल इसके ताजा एग्जांपल हैं, जिन्हें गूगल ने 93 लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर किया है। इसी तरह एनआइटी, वारंगल के कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट के.गोपी. कृष्णा को फेसबुक ने तकरीबन 84.6 लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया है। इस फेहरिस्त में कई और भी हैं, जिन्होंने नॉन-आइआइटी इंस्टीट्यूट्स से पढाई की और फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल जैसी टॉप कंपनीज से हैवी पे-पैकेज हासिल किया है। जाहिर है, ग्लोबल लेवल पर स्लोडाउन के बावजूद इंडियन टैलेंट पर लक्ष्मी का आशीर्वाद बरकरार है।
कंपनियां हुई मेहरबान
कोलकाता के इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (आइएसआइ) के 82 साल के इतिहास में पहली बार कंप्यूटर साइंस में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट को 63 लाख रुपये का ऑफर गूगल कंपनी की ओर से मिला है। आइएसआइ के स्टूडेंट प्लेसमेंट सेल के को-ऑर्डिनेटर रघु तेजा ने बताया कि अभी तक उनके किसी भी स्टूडेंट को इतनी सैलरी ऑफर नहीं की गई थी। पिछले साल सबसे बडा ऑफर गोल्डमैन सैक्स ने 28 लाख रुपये का दिया था। तेजा कहते हैं, अभी तक हम सिर्फ एकेडेमिक्स पर जोर देते थे, प्लेसमेंट पर नहीं, लेकिन आज हर स्टूडेंट किसी इंस्टीट्यूट के एंप्लॉयबिलिटी फैक्टर को जरूर देखता है। इस साल आइएसआइ के कैंपस में आईसीआईसीआई, एचएसबीसी, मॉर्गन स्टैनले और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां प्लेसमेंट में शामिल हुईं। इस इंस्टीट्यूट में प्लेसमेंट आमतौर पर अगस्त में शुरू होते हैं और फरवरी-मार्च तक होते रहते हैं। कुछ समय पहले ही ग्लोबल फर्म बॉमबार्डियर की रेल टेक्नोलॉजी ऐंड मैन्युफैक्चरिंग आर्म ने आइआइटी को दरकिनार कर कुरुक्षेत्र एनआईटी, गुजरात के जीएच पटेल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी और पंजाब कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से स्टूडेंट्स को हायर किया। शायद यही वजह है कि मारुति, इमरसन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी दूसरे कॉलेजेज से स्किल्ड हैंड्स रिक्रूट कर रही हैं।
स्टूडेंट ड्रिवन प्लेसमेंट
आइआइटी और आइआइएम में प्लेसमेंट सीजन दिसंबर महीने से शुरू होता है जबकि बाकी इंजीनियरिंग कॉलेजेज में अगस्त से। इसीलिए कंपनियां नॉन-आइआइटी कॉलेजेज में से अपना टैलेंट पूल बनाना चाह रही हैं और बडी तादाद में प्लेसमेंट किए जा रहे हैं। आइआइएम, लखनऊ के प्लेसमेंट सेल के चेयरपर्सन प्रोफेसर राजीव कुंद्रा मौजूदा ट्रेंड के बारे में कहते हैं कि इस समय ग्लोबल कंपनियां कॉस्ट कटिंग पर काफी जोर दे रही हैं। इसलिए वे टॉप इंस्टीट्यूट्स की जगह दूसरी कतार के कॉलेजेज और इंस्टीट्यूट्स में कैंपस प्लेसमेंट कर वहां से टैलेंटेड स्टूडेंट्स को हायर कर रही हैं। इससे दोनों को फायदा हो रहा है। कंपनियों को कम पैकेज पर क्वॉॅलिटी और स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स मिल जा रहा है और स्टूडेंट्स को बडा ब्रांड और अनएक्सपेक्टेड पैकेज। वैसे, प्रोफेसर राजीव ने इस बात से इनकार नहीं किया कि बी-ग्रेड कॉलेजेज में टैलेंट नहीं होता। उनका कहना है कि क्योंकि अच्छे कट-ऑफ के साथ कैट क्लियर करना ईजी नहीं होता, इसलिए कई बार मेरिटोरियस स्टूडेंट्स को इंस्टीट्यूट से कॉम्प्रोमाइज करना पडता है, यानी प्लेसमेंट के दौरान बडा ऑफर मिलना एक स्टूडेंट की खुद की कैपेबिलिटी पर डिपेंड करता है। इसलिए ये प्लेसमेंट्स इंस्टीट्यूट नहीं, बल्कि स्टूडेंट ड्रिवन कहे जा सकते हैं।
प्राइवेट कॉलेजेज परफॉमर्ेंस
इस समय कई कंट्रीज में इकोनॉमिक स्लोडाउन है, इस वजह से ग्लोबल कंपनियां छोटे शहरों के कॉलेजेज से टैलेंट हायर कर रही हैं। इसके अलावा, ये कंपनीज पोस्टग्रेजुएट से ज्यादा बीटेक स्टूडेंट्स को लेना प्रेफर करती हैं क्योंकि इन्हें सस्ते में हायर किया जा सकता है और इन्हें कंपनी की जरूरत के मुताबिक ट्रेन करना आसान भी होता है। एनआइटी राउरकेला के प्लेसमेंट को-ऑर्डिनेटर सौरव कार कहते हैं कि साउथ इंडिया के बेंगलुरु जैसे शहरों में कई प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजेज का परफॉमर्ेंस काफी अच्छा है। वहां पहुंचने की कनेक्टिविटी अच्छी है, इसलिए कंपनियां वहां जा रही हैं।
चेंज होते प्रेफरेंस
स्मॉल टाउंस इंस्टीट्यूट्स में भी टैलेंट बसता है, ये बात तो साफ हो गई है। इसमें कोई शक नहीं है कि मल्टीनेशनल कंपनियां आइटी और कंप्यूटर साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को अच्छे पे-पैकेज पर हायर कर रही हैं, लेकिन इन दिनों आइटी कंसल्टेंसी, पब्लिक सेक्टर, बायोटेक, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए सेक्टर्स के लिए भी स्किल्ड लोगों की अच्छी डिमांड है। जबकि मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग जैसे कोर ब्रांचेज के स्टूडेंट्स का प्लेसमेंट उतना नहीं हो पा रहा है। हालांकि इसे एक टेम्परेरी फेज कहा जा सकता है। एनआइटी, वारंगल के प्लेसमेंट सेल के हेड प्रोफेसर चंद्रशेखर ने बताया कि बडी कंपनियों की प्रेफरेंस हर साल चेंज हो रही है। इन दिनों वे दूसरे इंस्टीट्यूट्स के नए टैलेंट्स को अप्रोच कर रहे हैं। वैसे, कोर सेक्टर से ज्यादा आज भी आईटी और कंप्यूटर साइंस की ही डिमांड देखी जा रही है। इस साल भी अमेजन (इंडिया) और याहू (इंडिया) जैसी कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए आई हैं। वहीं, एनआइटी, जमशेदपुर में सीनियर फैकल्टी और प्लेसमेंट सेल के हेड डॉ. राजीव भूषण ने बताया कि आज सारे रिक्रूमेंट्स ग्लोबल क्लाइंट्स को देखते हुए किए जा रहे हैं। इस समय एमएनसी कंपनियां कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक और एमसीए स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा पैकेजेज ऑफर कर रही हैं। जहां तक एनआइटी, जमशेदपुर की बात है, तो यहां अमेजन, सैमसंग, आइबीएम, टीसीएस, व‌र्क्स एप्लीकेशन जैसी कंपनियों ने प्लेसमेंट में शिरकत की है और कुछ स्टूडेंट्स को 15 से 16 लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया है।
डिफरेंट रोल्स
मल्टीनेशनल कंपनियों के दूसरे कॉलेजेज या इंस्टीट्यूट्स में जाने की एक वजह यह भी है कि इन स्टूडेंट्स को आइआइटी या आइआइएम के स्टूडेंट्स की तरह कंपनी के फास्ट नहीं, नॉर्मल ट्रैक पर रखते हैं और जिन्हें फास्ट ट्रैक पर रखा जाता है, उन्हें बडे रोल और रिस्पॉन्सिबिलिटी दी जाती हैं। च्वाइनिंग के पांच साल के अंदर सीनियर पोजिशंस मिल जाती हैं, जबकि नॉर्मल कैडर वालों के साथ ऐसा नहीं होता है। डाबर कंपनी एक एग्जांपल है, जहां सेकंड लेवल इंस्टीट्यूट्स से हायर किए गए फ्रेशर्स को एग्जीक्यूटिव ट्रेनी के तौर पर रखा जाता है। इनकी पोस्टिंग कंपनी की सब्सिडियरी यूनिट में की जाती है, जबकि टॉप रैंक कॉलेज के स्टूडेंट्स को मैनेजमेंट ट्रेनी का दर्जा दिया जाता है और उन्हें कंपनी के कोर बिजनेस में इनवॉल्व किया जाता है। हां, अगर एग्जीक्यूटिव ट्रेनी का वर्क पसंद आता है, तो उसे मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर प्रमोट जरूर कर दिया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया की एनआईआईटी टेक में सीनियर कंसल्टेंट शाजिया ने बताया कि ग्लोबल इकोनॉमी के मौजूदा कंडीशंस को देखते हुए मल्टीनेशनल कंपनियां स्किल बेस्ड हार्डवर्कर्स तलाश कर रही हैं, जो थोडे कम पैकेज पर भी काम करने को तैयार हो जाएं। एक बार स्टूडेंट को हायर करने के बाद माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियां उन्हें ट्रेन करती हैं और कम कास्ट पर उनसे बेस्ट आउटपुट निकाल लेती हैं। हालांकि हैरान करने वाली बात यह है कि गूगल जैसी कंपनियां भुवनेश्वर या राउरकेला जैसे छोटे शहरों के कॉलेजेज में नहीं जा रही हैं, क्योंकि यहां पहुंचने के लिए सीधी फ्लाइट नहीं है। जबकि इंडिया बेस्ड कंपनियां जैसे माइक्रोसॉफ्ट, ऑरेकल, सैमसंग, महिंद्रा और हीरो होंडा, उनके कॉलेजेज के क्रीम स्टूडेंट्स को 8 से 12 लाख के पैकेजेज पर आसानी से रख लेती हैं।
फ्लाइट ऑफ इनोवेशंस
प्रियांशु ने दूसरे आम बच्चों की तरह अहमदाबाद के शाहीबाग से स्कूलिंग की, फिर मेहसाणा में गणपत यूनिवर्सिटी के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया। बी.टेक. लास्ट ईयर में उनके कॉलेज में टीसीएस, विप्रो जैसी देश की जानी-मानी कंपनियां कैंपस सेलेक्शन के लिए आईं, लेकिन उन्होंने कैंपस प्लेसमेंट में हिस्सा ही नहीं लिया।
बडे सपने ने दिलाई सक्सेस
प्रियांशु का सपना कुछ और था। यहां से प्रियांशु सिंगापुर चले गए और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में एम.टेक. किया। प्रियांशु माइक्रोसॉफ्ट में काम करना चाहते थे और उनका ये सपना सिंगापुर यूनिवर्सिटी से एम.टेक. करने के बाद पूरा हो गया। माइक्रोसॉफ्ट ने उन्हें 1 करोड 10 लाख सैलरी का ऑफर दिया।
इंटरव्यू का लंबा प्रॉसेस
सिंगापुर में इंटरव्यू के लंबे प्रॉसेस को प्रियांशु ने काफी अच्छे से हैंडल किया। वन-टु-वन इंटरव्यू के अलावा कंपनी के ऑफिसर्स से घंटों टेलिफोनिक इंटरव्यू हुए। प्रियांशु बताते हैं कि माइक्रोसॉफ्ट जैसी बडी कंपनियां कैंडिडेट्स की पर्सनैलिटी के हर पहलू की बारीकी से स्टडी करती हैं, चाहे वो टेक्निकल नॉलेज हो या कम्युनिकेशन स्किल्स, लेकिन सबसे जरूरी है इनोवेटिव अप्रोच, जो इंडिया में डेवलप नहीं हो पाता।
हाई सैलरी फॉर क्रिएटिविटी प्रियांशु बताते हैं, नई चीज बनाने में ज्यादा दिमाग लगता है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल के केस में हम अननोन फील्ड में काम करते हैं, जिसमें क्रिएटिविटी और इनोवेटिव अप्रोच की बहुत जरूरत होती है। ज्यादा दिमाग और स्किल्स वाले लोगों के लिए ज्यादा पैसे भी देने पडते हैं। इसीलिए फॉरेन कंपनियां बेस्ट को चूज करती हैं और उसे बेस्ट पे करती हैं, ताकि वो फ्री होकर प्रॉपर इनोवेटिव तरीके से काम कर सकें, जबकि इंडियन कंपनियां एंप्लॉइज को कम पे करती हैं और उनसे काम ज्यादा लेती हैं।
इंडिया : कंपनियों की फ‌र्स्ट च्वाइस
प्रियांशु बताते हैं, यूएस में आईटी इंडस्ट्री बूम पर है। कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा इंजीनियर्स की जरूरत है, लेकिन कंपनियों की पहली च्वाइस यूएस नहींबल्कि इंडियन स्टूडेंट्स हैं। वजह यूएस में काफी कम स्टूडेंट इस स्ट्रीम में स्टडी करते हैं। इसलिए ये कंपनियां बाहर से स्टूडेंट्स हायर करती हैं। इंडिया इन कंपनियों की पहली पसंद है, लेकिन कोई भी कंपनी कम से कम ट‌र्म्स ऐंड कंडीशंस चाहती है, इसीलिए वे आईआईटीज के अलावा दूसरे कॉलेजेज भी जा रही हैं।
गूगल के ब्रांड एम्बेस्डर
दुनिया के बडे बिजनेज हाउसेस को अब कंपनियां चलाने के लिए भारतीय टैलेंट्स की जरूरत महसूस हो रही है। आज कंपनियां इंडिया के छोटे-छोटे शहरों में बेस्ड इंस्टीट्यूट से टैलेंट सर्च कर अपने यहां जॉब ऑफर कर रही हैं। इसी तर्ज पर ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के देवांशु गर्ग को गूगल ने अपना ब्रांड एम्बेस्डर बनाया है। कई राउंड के इंटरव्यू के बाद देवांशु गर्ग को यह अपॉ‌र्च्युनिटी मिली है। इस अपॉ‌र्च्युनिटी से न सिर्फ देवांशु बल्कि ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के बाकी स्टूडेंट्स और स्टाफ भी खुश है।
सेलेक्शन प्रॉसेस
देवांशु बताते हैं कि गूगल के लिए करीब दो हजार स्टूडेंट्स ने पार्टिसिपेट किया था। उनमें से सिर्फ दो सौ कैंडिडेट ही शॉर्टलिस्ट किए गए। इसके बाद कई राउंड टेलिफोनिक इंटरव्यू हुआ। फाइनल राउंड में कई तरह के क्वैश्चंस किए गए। कुछ टेक्निकल नॉलेज से जुडे थे और कुछ कस्टमर ओरिएंटेड।
ऑनलाइन प्रॉसेस
देवांशु टॉप कोडर ऑनलाइन कोडिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेते रहते थे। यह एक तरह का कोडिंग कॉम्पिटिशन है, जिसमें व‌र्ल्ड वाइड हजारों लोग पार्टिसिपेट करते हैं। इस कॉम्पिटिशन में आपकी परफामर्ेंस के बेस पर रेटिंग दी जाती है, जो लोग अपनी रेटिंग मेनटेन करके चलते हैं, कंपनियां ऐसे कैंडिडेट्स पर नजर रखती हैं और इंटरव्यू के दौरान आप से ऑनलाइन कॉम्पिटिशन के बारे में क्वैश्चंस जरूर करती हैं।
इंटरव्यू
देवांशु बताते हैं कि इंटरव्यू के दौरान उनसे कई तरह के क्वैश्चन किए गए। इसमें स्कूल और कॉलेज की लाइफ से जुडे क्वैश्चन थे। सबसे इंपॉटर्ेंट क्वैश्चन गूगल सेल्फ ड्राइविंग कार से जुडा था।
गूगल रीप्रेजेंटेटिव
सेलेक्शन के बाद देवांशु गूगल के रिप्रेजेंटेटिव के रूप में वर्क करेंगे। देवांशु के पास गूगल के किसी भी प्रोग्राम को ऑर्गेनाइज कराने की अथॉरिटी है।
ऑलवेज टेक इट ईजी
गूगल हुआ मेहरबान
लाइफ में सक्सेस चाहिए तो किसी भी काम को प्रेशर में नहीं करना चाहिए। अगर आप काम प्रेशर में करेंगे, तो उसमें अपनी 100 परसेंट परफॉर्मेस नहीं दे पाएंगे। वर्क करते समय एन्जॉय करें। अपने काम में खुशी तलाशेंगे, तो देखेंगे कि सक्सेस कितनी जल्दी आपको मिल जाएगी। दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के स्टूडेंट हिमांशु जिंदल को अपनी यूनिवर्सिटी में अब तक का सबसे बडा जॉब पैकेज मिला है। इन्हें इंटरनेशनल लेवल पर टॉप कंपनी गूगल ने 93 लाख रुपये सालाना का पैकेज दिया है। अपनी इस सक्सेस के बारे में हिमांशु बताते हैं कि उन्होंने इसके लिए मेहनत की, घर वालों ने आशीर्वाद दिया और सक्सेस मिल गई। अपनी इस शानदार उपलब्धि में वे फैमिली मैंबर्स के साथ अपने टीचर्स को भी बराबर का क्रेडिट देते हैं।
मनचाही फील्ड
किसी भी व्यक्ति को अच्छी जॉब तभी मिल सकती है, जब वह उसी फील्ड से रिलेटेड सब्जेक्ट में एडमिशन ले, जिसमें उसका बचपन से एंट्रेस्ट है। अगर मनचाही फील्ड नहीं होती है, तो कई बार आधे रास्ते में ही एजुकेशन से मन उखड जाता है और आगे का पूरा करियर बरबाद हो जाता है। अच्छा पैकेज पाना है, तो सबसे पहले मनचाही फील्ड में ही एडमिशन लेना चाहिए। किस सब्जेक्ट और स्ट्रीम को चूज किया जाए, इस बारे में हम एडवाइज तो सभी की ले सकते हैं, लेकिन हमेशा अंतिम डिसीजन खुद के विवेक पर लिया जाना चाहिए।
डिजाइन-कोडिंग के क्वैश्चंस
बीटेक फाइनल ईयर में एजुकेशन ले रहे हिमांशु ने गूगल एग्जाम के लिए कोई खास प्रिपरेशन नहीं की थी। वे अपने इस सफर के बारे में बताते हैं कि गूगल कंपनी के ऑफिसर कैंपस सेलेक्शन के लिए यूनिवर्सिटी आए थे। यहां उन्होंने हम लोगों का एग्जॉम लिया। यहां से आठ स्टूडेंट्स को चूज किया गया। इसके बाद बेंगलुरु में इंटरव्यू लिया गया। इंटरव्यू में उनसे डिजाइन और कोडिंग से जुडे क्वैश्चन्स पूछे गए। इन दोनों ही चीजों में उनकी पहले से ही ठीक-ठाक कमांड थी। आंसर देते समय किसी खास तरह की प्रॉब्लम नहीं हुई और फाइनल रिजल्ट में उन्हें यह पैकेज मिल गया।
कॉन्फिडेंस का रोल
सक्सेस के लिए केवल हार्डवर्क जरूरी नहीं है। इसके लिए कॉन्फिडेंस और स्मॉर्ट वर्क भी उतना ही इंपॉर्टेट है। इसीलिए केवल और केवल पढाई से सक्सेस नहीं मिलती है। हमें अपनी लाइफ भी एन्जॉॅय करनी चाहिए। जब इन दोनों चीजों के बीच बैलेंस हो जाएगा, तभी एजुकेशन, जॉब आदि में हमारा मन लगेगा।
यूज योर टाइम
एक स्टूडेंट के लिए टाइम का सही यूज करना सबसे जरूरी है। अगर हम अपने टाइम का सही यूज नहीं करेंगे, तो लाइफ में पीछे रह जाएंगे। मुझे अक्टूबर 2014 में जॉब ज्वॉइन करनी है। इस पीरियड में मैं अपनी पर्सनल और टेक्निकल स्किल्स को और भी डेवलप करने की पूरी कोशिश करूंगा, जितना च्यादा सीख लूंगा, उतना ही अच्छा आगे के लिए होगा।
IIIT के होनहार
टैलेंट चाहे छोटी जगह पर हो या बडी जगह पर सामने आ ही जाता है। आईआईआईटी इलाहाबाद के ऐसे ही दो जीनियस स्टूडेंट अंकित गुप्ता और योगेश शर्मा को फेसबुक ने 60 लाख का ऑफर दिया। लंबे प्रॉसेस और कई राउंड के इंटरव्यू के बाद दोनों स्टूडेंट्स का सेलेक्शन फाइनल हुआ। दोनों बीटेक इनफारमेशन टेक्नोलॉजी के छात्र हैं। हालांकि दोनों ही स्टूडेंट्स को उम्मीद नहीं थी कि फेसबुक जैसी बडी कंपनी उन्हें इतना बडा पैकेज का ऑफर करेगी।
रिटेन से इंटरव्यू तक
फेसबुक में सेलेक्शन के लिए अंकित और योगेश को सारे राउंड क्लीयर करने के बाद यह ऑफर हासिल हुआ। सेलेक्शन प्रॉसेस के दौरान दोनों को कई बार रिटेन और टेलीफोनिक राउंड से गुजरना पडा। कोर्स और टेक्निकल फील्ड से जुडे क्वैश्चन किए गए। पूरा इंटरव्यू सेशन काफी लंबा था।
इंटरैक्टिव सेशन
कैंपस इंटरव्यू का पूरा सेशन काफी इंटरैक्टिव था। इंटरव्यू बोर्ड की तरफ से कहींपर भी कोई प्रेशर का अहसास नहीं हुआ। बोर्ड ने इंटरव्यू में अंकित और योगेश दोनों से कुछ प्रैक्टिकल क्वैश्चन भी किए।
फैमिली ऐंड टीचर्स का सपोर्ट
अंकित और योगेश ने बताया कि फैमिली और इंस्टीट्यूट का उन्हें पूरा सपोर्ट मिला। इंटरव्यू को कैसा क्लियर करना है, इसके लिए सभी ने गाइड किया। आर्ईआईआईटी के डायरेक्टर डॉ. एमडी तिवारी ने बताया कि गूगल, फेसबुक, वॉलमार्ट, जैसी कंपनियों ने कैंपस सेलेक्शन किया। इस बार भी इंस्टीट्यूट में प्लेसमेंट 100 फीसद रहा है। कंपनियों ने स्टूडेंट्स को 12 से 60 लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया।
आंसर्स मेड द विनर
इस बार एनआइटी वारंगल के पुराने सारे प्लेसमेंट रिकॉ‌र्ड्स टूट गए। कंपनियों ने दिल खोलकर स्टूडेंट्स को लुक्रेटिव पैकेजेज ऑफर किए। इसमें कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजीनियरिंग के फाइनल इयर के स्टूडेंट नीतीश राव भी एक हैं। नीतीश को गूगल कंपनी ने एक लाख यूएस डॉलर यानी 63 लाख रुपये के करीब का पैकेज ऑफर किया है।
ऐसे मिला ऑफर
एनआइटी में माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, पेप्सिको, डीई शॉ, गोल्डमैन सैक्स, फेसबुक, ओरेकल, गूगल जैसी कई सारी कंपनियां प्लेसमेंट के लिए पहुंची थीं।
नीतीश ने बताया कि वे शुरू से ही गूगल में जाना चाहते थे, उनका रिटेन टेस्ट हुआ। टेस्ट में करीब 200 से 300 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे, लेकिन उनमें से सिर्फ 10 का ही सेलेक्शन हुआ। नीतीश इसमें से एक थे। इसके बाद हैदराबाद स्थित गूगल ऑफिस में चार राउंड इंटरव्यू हुआ और दो हफ्ते में उनके पास गूगल का एक लाख यूएस डॉलर का ऑफर था। इसमें 15 परसेंट बोनस, 125 शेयर्स और इंश्योरेंस आदि फैसिलिटीज शामिल हैं।
टफ इंटरव्यू
नीतीश कहते हैं कि रिटेन के क्वैश्चंस तो ईजी थे, लेकिन इंटरव्यू टफ था। पहले राउंड में मुझसे 3 क्वैश्चन पूछे गए, जिनमें से मैंने दो का आंसर किया। इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे राउंड में दो-दो सवाल पूछे गए। ये क्वैश्चन एलगोरिदम, इंक्रिप्टिंग और कोडिंग स्किल्स से रिलेटेड थे। इसके अलावा इंप्लीमेंटेशन, सिस्टम डिजाइन से भी सवाल पूछे गए।
मेड इंप्रेशन
नीतीश ने बताया कि उन्होंने अमेजन में दो महीने की इंटर्नशिप के दौरान एक प्रोजेक्ट किया था, वह काफी काम आया। इंटरव्यू में उससे रिलेटेड सवाल भी किए गए, जिनका उन्होंने कॉन्फिडेंटली आंसर किया। इसके अलावा ऑप्टिमिस्टिक सॉल्युशन, सिस्टम डिजाइन से रिलेडेट क्वैश्चंस के आंसर्स से इंटरव्यू बोर्ड के मेंबर्स पर अच्छा इंप्रेशन गया। वे उनके आंसर्स से पूरी तरह सैटिस्फाइड नजर आए। वे कहते हैं कि इंटरव्यू के अलग-अलग राउंड्स एक से डेढ घंटे के होते हैं, जिसमें आपको कूल रख कर आंसर करना होता है, जो उन्होंने किया।
यूएसपी
नीतीश हार्ड वर्क, पेशेंस, कूल बिहैवियर और पॉजिटिव एटीट्यूड को अपना यूएसपी मानते हैं। गूगल में जाना उनके लिए एक ड्रीम कम ट्रु जैसा है।
माइन ऑफ टैलेंट्स
09 सितंबर 2013 को इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद के चार स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप पूरी होने पर स्कलंबर्गर एशिया सर्विसेज लिमिटेड ने 58 लाख की प्री-प्लेसमेंट जॉब ऑफर की। इनमें तीन स्टूडेंट्स प्रतीक भारद्वाज, जलज डागर और शुभम मिश्रा पेट्रोलियम इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के स्टूडेंट हैं जबकि अदिति शर्मा अप्लाइड जियोफिजिक्स डिपार्टमेंट की।
थिंक बियॉन्ड द लिमिट्स
इंडियन स्कूल ऑफ माइंस के 2013 बैच के चारों स्टूडेंट्स ने कंपनी के लिए सेकंड ईयर से ही तैयारी शुरु कर दी थी। कैंपस में क्लास रिप्रजेंटेटिव रहे शुभम मिश्रा बताते हैं कि सेलेक्शन का बेस ओवरऑल पर्सनालिटी और टेक्निकल नॉलेज का बेस रहा। कंपनी का इंटरव्यू बोर्ड स्टूडेंट में बोल्डनेस और फ्रैंकनेस देख रहे थे। कंपनी ऐसे स्टूडेंट्स चाहती है, जो आउट ऑफ द बॉक्स जा कर सोच सकते हों, और ज्यादा से ज्यादा इनोवेटिव आइडिया रखते हों।
ऐसे हुआ इंटरव्यू
बोर्ड : खुद को डिस्क्राइब करें
शुभम : आई एम अ रिजॉल्यूट स्काईवॉकर।
बोर्ड : व्हाइ शुड वी हायर यू ?
शुभम : आपकी पॉलिसी है पीपुल, टेक्नॉलॉजी ऐंड प्रॉफिट। मैं किसी भी हालात को एडॉप्ट कर सकता हूं। आईएसएम में स्टडी कर रहा हूं। इसलिए जाहिर है कि मैं टेक्निकली साउंड हूं और मैंने आपकी कंपनी में इंटर्नशिप की है, तो आप ये जज कर सकते हैं कि मैं आपके लिए प्रॉफिटेबल हूं या नहीं।
बोर्ड : व्हाट डु यू प्रिफर, ऑफिस ऑर फील्ड ?
शुभम : मैं दोनों में कंफर्टेबल हूं। मेरी कम्युनिकेशन और इंटरपर्सनल स्किल्स अच्छी है, तो मैं फील्ड टास्क प्रिफर करुंगा।
बोर्ड : अगले पांच साल में खुद को कहां देखते हैं?
शुभम : अगले पांच सालों में मैं खुद को कंपनी के साथ सिंबॉयोटिक रिलेशनशिप में देखना चाहता हूं, जिसमें मैं भी आगे बढूं और कंपनी को भी आगे बढाने में भरपूर मदद करूं।
टैलेंट्स ऑफ धनबाद
अदिति शर्मा
आईएसएम धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग फाइनल ईयर की स्टूडेंट 2012 में स्लमबर्जर के इंटर्नशिप प्रोग्राम के लिए चुनी गई थीं। आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में स्लमबर्जर बेस पर अदिति ने मई-जून के दौरान इंटर्नशिप की। इंटर्नशिप के दौरान उनके परफॉर्मेंस के बेस पर कंपनी ने 58 लाख सैलरी पैकेज पर प्री-प्लेसमेंट ऑफर दिया। अदिति बताती हैं, कंपनी का इंटरव्यू बोर्ड किसी भी कैंडिडेट से उम्मीद करता है कि वो फ्लेक्सिबल हो, कोई भी चैलेंज फेस करने को हरदम तैयार रहे। अच्छी टेक्निकल नॉलेज हो। अदिति को लगता है कि उनकी फास्ट लर्निग एबिलिटीज और कई तरह के एक्सपिरिएंसेज ने बोर्ड को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। अदिति अपनी इस सफलता के लिए सबसे ज्यादा क्रेडिट अपनी फैमिली को देती है और फिर टीचर्स और सीनियर्स को।
रचना नंदन
2013 बैच की ही रचना नंदन ने आइएसएम के लिए एक तरह से इतिहास रच दिया। पटना की रचना नंदन को फेसबुक ने 56 लाख का सैलरी पैकेज ऑफर किया। कैंपस सेलेक्शन के दौरान फेसबुक ने चार राउंड्स में इंटरव्यू लिया। इस इंटरव्यू में आइएसएम के अलावा दूसरे कई इंजीनियरिंग संस्थान के छात्रों ने भी हिस्सा लिया था। फ‌र्स्ट राउंड में ऑनलाइन कोडिंग से जुडे सवाल किए गए थे, जिनमें चार छात्रों का सेलेक्शन कर उन्हें इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया गया था। चार राउंड इंटरव्यू के बाद रचना का सेलेक्शन हुआ। रचना बताती हैं, लास्ट राउंड में मुझसे कठिन सवाल पूछे गए थे। उनके बारे में बिल्कुल पता नहीं था, तब मुझे लगा कि शायद मेरा सेलेक्शन नहीं होगा। हालांकि नर्वस होने के बाद भी मैं उस सवाल को दो तीन तरह से सुलझाने में सफल रही। रचना सेल्फ कॉन्फिडेंस और सवाल को समझकर उसका बेस्ट सॉल्यूशन निकालने को ही अपनी यूएसपी मानती हैं। रचना के पिता असम के नौगांव स्थित हिन्दुस्तान पेपर कॉर्प लिमिटेड में सीनियर मैकेनिकल इंजीनियर हैं। रचना अपने पिता को ही अपना रोल मॉडल मानती हैं। अपने प्लान के बारे में रचना बताती हैं कि फेसबुक के लिए कुछ ऐसा करना चाहती हूं, जो शायद अब तक किसी ने नहीं किया होगा। फेसबुक अपने कर्मचारियों को बेस्ट सैलरी देता है और उन्हें उम्मीद है कि अगले पांच साल में उनकी सैलरी 7 करोड रुपये हो जाएगी।
जलज डागर
2013 बैच के ही जलज डागर को भी स्लमबर्जर कंपनी ने 58 लाख सैलरी पैकेज पर जॉब ऑफर की है।?जलज को इस जॉब की कोई उम्मीद नहीं थी। वे बताते हैं, कंपनी मुझे हायर करने के मूड में नहीं थी। मेरे ग्रेड्स लो थे। मैं इंटरव्यू के लिए तैयार भी नहीं था, उस वक्त मैं बुरी तरह उलझा हुआ था, बस मुझे खुद पर यकीन था, अपनी सीखने की क्षमता और पर्सनैलिटी की वजह से ही उन्होंने मुझ पर भरोसा किया। जलज के मुताबिक, सेलेक्शन का बेस पर्सन-टु-पर्सन वैरी करता है। उन्हें लगता है कि वो कई तरह की को-करिकुलर एक्टिविटीज जैसे किक बॉक्सिंग, वेट लिफ्टिंग करते रहे हैं, इसने उनके सेलेक्शन में इंपॉर्टेंट रोल प्ले किया।
सूरज सिंह
आईएसएम, धनबाद से पेट्रोलियम ऐंड मैनेजमेंट में एमटेक करने वाले सूरज सिंह आबू धाबी में स्लमबर्जर कंपनी से ऑफर मिला। सूरज बताते हैं, प्लेसमेंट के दौरान पेट्रोलियम क्षेत्र से संबंधित कई सवाल किए गए, मैंने उसी अंदाज में जवाब भी दिया। इंटरव्यू में एक सवाल था कि बेटर मैनेजमेंट के साथ प्रोडक्टिविटी को कैसे बढाया जा सकता है। लगता है इसी क्वैश्चन के आंसर ने उन्हें अधिक प्रभावित किया। कंपनी में सेलेक्शन के बाद एक साल की ट्रेनिंग के दौरान कंपनी ने उनकी वर्रि्कग स्टाइल देखी। सूरज अपने पिता को ही अपना रोल मॉडल मानते हैं और अपनी सफलता का क्रेडिट अपने फैमिली के साथ-साथ?अपने टीचर्स को भी देना चाहते हैं। सूरज को पूरी उम्मीद है कि अगले पांच साल में उनकी सैलरी तीन करोड से ज्यादा हो जाएगी।
कौस्तुभ पेनी
आईएसएम धनबाद से पेट्रोलियम ऐंड मैनेजमेंट में एमटेक करने वाले कौस्तुभ पेनी को बहरीन में स्लमबर्जर कंपनी से फील्ड इंजीनियर पोस्ट के लिए ऑफर मिला। आईएसएम के टैलेंटेड स्टूडेंट्स में शुमार कौस्तुभ पेनी कहते हैं कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि स्लमबर्जर जैसी कंपनी में सेलेक्शन हो जाएगा, लेकिन सेलेक्टर्स को यह भरोसा हो गया था कि किसी भी प्रोजेक्ट को यह स्टूडेंट बखूबी पूरा कर लेगा। कौस्तुभ बताते हैं कि ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने कई सारे रिसर्च किए और कम खर्च पर प्रोडक्शन का मेथड तैयार किया, जो कंपनी को पसंद आया। इसी ने उन्हें अच्छे मुकाम पर ला खडा किया। जब 58 लाख के सैलरी पैकेज की सूचना मिली, तो मेरे माता-पिता ने कहा, आज बेटे का जीवन सफल हो गया।
प्रो. एस लायक को रोल मॉडल मानने वाले कौस्तुभ अगले पांच साल में तरक्की के उस पायदान पर पहुंचना चाहते हैं जहां कोई न पहुंचा हो और इसके लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
पंक्चुएलिटी काम आई
एनआइटी जमशेदपुर में कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजीनियरिंग के फाइनल इयर के स्टूडेंट लोकेश खंडेलवाल ने इंस्टीट्यूट के इतिहास में वो हासिल कर दिखाया है, जो अब से पहले किसी ने नहीं किया था। इन्हें टोक्यो (जापान) स्थित कंपनी व‌र्क्स एप्लीकेशन ने 5 मिलियन येन यानी तकरीबन 33 लाख रुपये का ऑफर दिया है, जिसमें बोनस और दूसरी फैसिलिटीज शामिल हैं।
ऐसे मिला ऑफर
लोकेश थर्ड इयर में थे, तभी इन्होंने तीन ऑनलाइन टेस्ट और एक नेशनल टेस्ट पास किया था। इसके बाद जापान की व‌र्क्स एप्लीकेशन कंपनी में इन्हें समर प्रोजेक्ट के तहत इंटर्नशिप का मौका मिला। लोकेश ने 52 दिन टोक्यो में एक प्रोजेक्ट पर काम किया और यही उनकी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट बन गया। फाइनल इयर में कंपनी ने उन्हें अपने यहां जॉब ऑफर कर दी।
उम्मीद से ज्यादा
लोकेश बताते हैं कि उन्हें इतना तो कॉन्फिडेंस था कि कंपनी से जॉब का ऑफर आ सकता है, लेकिन सैलरी पैकेज इतना बडा होगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। लोकेश को सैलरी के अलावा, फिक्स्ड बोनस, ट्रैवलिंग अलाउंस, शेयर, इंश्योरेंस आदि की सुविधा मिलेगी। इन्हें 2014 के अक्टूबर महीने में कंपनी का सिंगापुर ऑफिस च्वाइन करने को कहा गया है।
फैमिली से इंस्पीरेशन
लोकेश अपनी सक्सेस का क्रेडिट स्कूल और कॉलेज के टीचर्स के अलावा अपने पापा पवन खंडेलवाल को देते हैं, जिन्होंने डिसिप्लिन का मतलब सिखाया। वे कहते हैं, पापा ने मुझे बताया है कि कैसे बैलेंस रखते हुए टफ से टफ सिचुएशंस को हैंडल किया जा सकता है। उनकी इस सीख ने मुझे लाइफ के हर मोड पर हेल्प की है और मैं आगे बढता गया हूं।
यूएसपी
लोकेश का कहना है कि उनकी टेक्निकल कोडिंग स्किल्स शुरू से काफी स्ट्रॉन्ग रही है। इसके अलावा पंक्चुएलिटी और बिहैवियर ने भी हायरिंग कंपनी ऑफिशियल्स पर अच्छा इंपैक्ट डाला। साथ ही ऑनलाइन साइट्स पर होने वाले टेस्ट्स में अच्छी रैंकिंग ने भी मदद की। लोकेश को व‌र्ड्स एप्लीकेशन के अलावा अमेजन (इंडिया) और सैमसंग (इंडिया) कंपनी से भी जॉब के ऑफर मिले हैं, लेकिन फिलहाल वे अपनी स्टडीज पर फोकस कर रहे हैं। इनका कहना है कि अगर आप में टैलेंट है, तो उसकी पहचान हो ही जाती है, फिर चाहे आप टॉप इंस्टीट्यूट से एजुकेशन हासिल करें या किसी दूसरे इंस्टीट्यूट से।
पॉजिटिव एटीट्यूड
सभी माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक, याहू, ओरेकल जैसी बडी कंपनियों में काम करना चाहते हैं। अगर आप दुनिया की इन बडी कंपनीज में काम करते हैं, तो आपको अपना टैलेंट बताने की जरूरत नहीं है, लोग कंपनी की इमेज से ही आपके टैलेंट का अंदाजा लगा लेंगे। इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वूमन की जागृति नरूला को कडी मेहनत के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने सिलेक्ट किया।
कई राउंड के बाद मौका मिला
जागृति कहती हैं इंटरव्यू की शुरुआत ऑनलाइन टेस्ट से हुई, जिसमें आपसे कोर्स और दूसरे टेक्निकल ऑस्पेक्ट से जुडे क्वैश्चन किए गए। रिटेन टेस्ट में कोडिंग एप्लीकेशन के बारे में क्वैश्चन किए गए। रिटेन टेस्ट का रिजल्ट करीब 25 दिन में आया, जिसके अगले ही दिन टेक्निकल राउंड और इंटरव्यू शुरू हुआ। टेक्निकल राउंड क्लियर करने के बाद एचआर राउंड शुरू हुआ। इस राउंड में कोर्स के दौरान हैंडेल किए गए प्रोजेक्ट, माइक्रोसॉफ्ट के बारे में, स्मार्टफोन एप्लीकेशन और सोशल प्रॉब्लम्स से जुडे क्वैश्चन किए गए थे।
ड्रीम था माइक्रोसॉफ्ट
बीटेक की पढाई स्टार्ट की, तो जागृति का सपना था कि वो भी माइक्रोसॉफ्ट जैसी बडी कंपनी का हिस्सा बनें, लेकिन यह सपना इतनी जल्दी पूरा हो जाएगा, इसका उन्हें अंदाजा नहीं था। जागृति का यह पहला बैच है, जो माइक्रोसॉफ्ट में सिलेक्ट हुआ था। जागृति को करीब 12 लाख रुपये का ऑफर दिया है।
अप्रोचिंग एटीट्यूड
जागृति कहती हैं कि इंटरव्यू में अप्रोचिंग माइंड होना बहुत जरूरी है। इंटरव्यू के दौरान यही नोटिस किया जाता है कि आपकी अप्रोच कैसी है। किसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने में आपका एटीट्यूड कैसा है। निगेटिविटी शो नहीं करना चाहिए और पॉजिटिव माइंड होना चाहिए।
वी मेक गुड स्टूडेंट्स
भारतीय इंस्टीट्यूट हमेशा से ही विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षण का सेंटर रहे हैं। विदेशी कंपनियां इंडियन इंस्टीट्यूट्स में हर साल प्लेसमेंट आर्गेनाइज करती हैं और काफी संख्या में स्टूडेंट्स को हायर करती हैं। पिछले कुछ सालों से फॉरेन कंपनियां इंडिया के दूसरे इंस्टीट्यूटशंस पर भी फोकस करने लगी हैं। कंपनियां इंस्टटीट्यूट में कई राउंड इंटरव्यू कराने के बाद स्टूडेंट्स को सिलेक्ट करती हैं। आइआइआइटी इलाहाबाद के डायरेक्टर एमडी तिवारी ने बताया कि फॉरेन कंपनीज अब टॉप लेवल के इंस्टीट्यूट के अलावा दूसरे इंस्टीट्यूशंस पर भी फोकस करने लगी हैं। उन्होंने बताया कि कंपनियां किसी भी इंस्टीट्यूट में जाने से पहले वहां का पूरा डेटा कलेक्ट करती हैं, इससे उन्हें इंस्टीट्यूट और स्टूडेंट्स के बारे में सारी जानकारी मिल जाती है। आइआइआइटी इलाहाबाद में करीब 40-50 कंपनियां हर साल प्लेसमेंट के लिए आती हैं। गूगल और फेसबुक ने भी 3-4 साल से कैंपस प्लेसमेंट में पार्टिसिपेट करना शुरू किया है।
कोर्स की वैल्यू
एमडी तिवारी कहते हैं कि इंस्टीट्यूशंस के अलावा कोर्सेज की भी वैल्यू होती है। फॉरेन कंपनीज में इंडियन कोर्सेज की काफी डिमांड है। आइआइआइटी में इस समय करीब 16 कोर्सेज चलाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ कोर्स की तो काफी डिमांड है और इनमें एडमिशन के लिए हर साल हजारों एप्लीकेशंस आती हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में शुरू साइबर लॉ ऐंड इंफॉर्मेशन सिक्यूरिटी कोर्स में 78 सीट हैं और एडमिशन के लिए 70 हजार से ज्यादा एप्लीकेशंस आई थीं। इसी तरह फाइव ईयर इंटीग्रेटेड एमटेक इन बॉयो मेडिकल इंजीनियरिंग और फाइव ईयर इंटीग्रेटेड एमटेक इन स्टेम सेल इंजीनियरिंग कोर्स भी काफी पॉपुलर हैं। कंपनियां अभी से प्लेसमेंट के लिए टाईअप कर रही हैं।
स्टूडेंट्स पर फोकस
गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनीज में काम करने के लिए स्टूडेंट्स का प्रेजेंटेशन अच्छा होना चाहिए। कंपनियां स्टूडेंट्स की नॉलेज को देखती हैं कि कैसे वो किसी प्रॉब्लम को सॉल्व करते हैं। इंटरव्यू में कम्युनिकेशन स्किल पर भी खास ध्यान दिया जाता है। प्लेसमेंट के दौरान स्टूडेंट्स अच्छा परफॉर्म कर सकें, इसके लिए इंस्टीट्यूट में उन्हें प्रॉपर तैयारी कराई जाती है। स्टूडेंट्स कीकम्युनिकेशन स्किल पर खास ध्यान दिया जाता है। पहले और दूसरे सेमेस्टर में स्टूडेंट्स की कम्युनिकेशन स्किल डेवलप की जाती है।
प्रॉपर तैयारी से ही प्लेसमेंट
कैंपस प्लेसमेंट के लिए स्टूडेंट के साथ-साथ पूरे इंस्टीट्यूट को एक स्ट्रेटेजी बनाकर प्रॉपर तैयारी करनी पडती है, तभी इसका बेटर रिजल्ट सामने आता है।
कैंपस सेलेक्शन के लिए कुछ चीजों पर खास फोकस किया जाता है। यही चीजें स्टूडेंट्स को कैंपस प्लेसमेंट के दौरान काम आती हैं।
बेसिक स्किल्स डेवलपमेंट
महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. एस.के कॉकने बताया कि जब कैंपस सेलेक्शन का क्राइटेरिया नहीं था, तब शायद ही किसी यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट की बेसिक स्किल्स को डेवलप करने का काम किया जाता था, लेकिन अब अधिकतर यूनिवर्सिटीज इस बारे में संजीदा हो गई हैं। वे स्टूडेंट को स्पेशल प्रोग्राम्स के अंतर्गत कम्युनिकेशन एटिट्यूड, जिसमें टेक्निकल राइटिंग, लेटर राइटिंग, ईमेल, चैटिंग टिप्स और एथिक्स, बॉडी लैंग्वेज, ड्रेस सेंस आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। ये चीजें कंपनियों को अट्रैक्ट करती हैं।
एनॉलिसेस डेवलपमेंट स्किल्स
कैंपस प्लेसमेंट के लिए जो भी कंपनियां आती हैं, उनकी सेकंड रिक्वॉयरमेंट होती है कि स्टूडेंट में चीजों को एनॉलाइज करने की क्वॉलिटी है या नहीं। जो स्टूडेंट्स कंपनी के इस प्रोफाइल पर खरे नहीं उतरते, उन्हें कैंपस प्लेसमेंट के दौरान जॉब नहीं मिलती है।
कंपनी सर्च क्वॉलिटीज
गूगल, फेसबुक, याहू, कॉग्निजेंट, वॉलमार्ट जैसी बडी कंपनियों में जॉब मिलना अपने आप में एक चैलेंज है। क्योंकि ये कंपनियां टैलेंट को प्रिफरेंस देती हैं। इंटरव्यू के दौरान आपको प्रूव करने की जरूरत होती है कि आप बेस्ट हैं। आइये जानते हैं कॉग्निजेंट के सीनियर एसोसिएट मुकेश कुमार सिंह से कैंपस इंटरव्यू के कुछ टिप्स..
लर्रि्नग कैपेसिटी
कैंपस इंटरव्यू के दौरान जब किसी फ्रेशर को हायर किया जाता है, तो कंपनी उसकी लर्निंग कैपेसिटी को चेक करती हैं। किसी चीज को सीखने में वह कितना टाइम लगाता है। शुरुआती स्टेज में कंपनी किसी भी फ्रेश एंप्लॉई पर काफी टाइम और पैसा खर्च करती हैं और उस स्टेज में कंपनी को कोई खास बेनिफिट उस फ्रेश कैंडिडेट से नहीं मिलता है। इसलिए कंपनी का मोटो होता है कि जो भी कैंडिडेट सिलेक्ट किया जाए, वह कम से कम टाइम में चीजों को सीख कर काम की शुरुआत कर सके।
कंपनियों की रिक्वॉयरमेंट
कैंपस सिलेक्शन के लिए कंपनियां अपनी रिक्वॉयरमेंट लेकर आती हैं। इंटरव्यू में कंपनी देखती हैं कि कैंडिडेट्स उनकी रिक्वॉयरमेंट को कितना पूरा कर सकते हैं। जैसी जरूरत होती है ऑफर भी वैसा ही दिया जाता है।
नो कॉम्प्रोमाइज विद क्वॉलिटी
कंपनी छोटी हो या बडी, कोई भी कंपनी क्वॉलिटी से कॉम्प्रोमाइज नहीं करती है। सब कंपनियां यही चाहती हैं कि जो भी कैंडिडेट हायर किया जाए, वह अच्छा हो और कंपनी को ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट अर्न कर दे। इसके लिए कंपनियां अच्छा अमाउंट भी देती हैं। इंस्टीट्यूट बडा हो या छोटा, अगर कैंडिडेट इंटरव्यू के दौरान सैटिस्फाई नहीं कर पाता है, तो कंपनी उसे हायर नहीं करती है।
साइकोलॉजिकल अप्रोच
इंटरव्यू में ही कंपनी कैंडिडेट को साइकोलॉजिकली चेक कर लेती हैं कि उसका एप्टिट्यूड कैसा है, वह सिचुएशन को कैसे हैंडल कर सकता है और वह कितना पॉजिटिव है। कंपनी जो अमाउंट उसे ऑफर कर रही है वह उसे कितना पॉजिटिवली लेता है। ऐसा तो नहीं कि जो अमाउंट उसे दिया जा रहा है वह उससे सैटिस्फाई न हो या सिर्फ कुछ टाइम के लिए वह कंपनी ज्वाइन करना चाहता है और बाद में किसी दूसरी कंपनी में स्विच करने का मन हो। इंटरव्यू में इस तरह की तमाम छोटी-छोटी चीजों को साइकोलॉजकिली चेक किया जाता है।
सैलरी नेगोसिएशन
सैलरी नेगोसिएशन इंटरव्यू का अहम हिस्सा होता है। सभी कंपनियों की स्ट्रेटेजी होती है कि कम से कम अमाउंट में कैंडिडेट को हायर किया जाए, लेकिन कंपनी क्वॉलिटी और पोस्ट दोनों को बैलेंस कर चलती हैं। अच्छी कंपनियां का अपना एक सैलरी स्ट्रक्चर होता है और वे उसे फॉलो करती हैं।
समझें खुद को प्रोडक्ट
इंटरव्यू में एक कैंडिडेट को खुद को एक प्रोडक्ट बनाकर पेश करना होता है। उसे यह शो करना चाहिए कि कंपनी की जो डिमांड है, वह उसे फुलफिल कर सकता है। जो कैंडिडेट ऐसा करने में सक्सेस हो जाते हैं, कंपनी उन्हें हायर कर लेती हैं।
दूसरे इंस्टीट्यूट्स पर फोकस
कंपनियां अब टॉप इंस्टीट्यूट की बजाय स्मॉल टाउंस इंस्टीट्यूट में प्लेसमेंट के दौरान स्टूडेंट्स का सिलेक्शन करती हैं। यहां कंपनीज सफिशियंट अमाउंट ऑफर करतीं हैं जिसे स्टूडेंट्स एक्सेप्ट कर लेती है क्योंकि टॉप इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स की एक्सपेक्टेशन हाई होती है। कंपनियां टॉप इंस्टीट्यूट में जो पैकेज ऑफर करती हैं स्टूडेंट्स उससे ज्यादा की डिमांड करते हैं।

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