आभूषण एवं रत्न मानव सभ्यता को पुरातन काल से प्रभावित करते रहे हैं। सौंदर्य को परखने के लिए मानदंड निर्धारण के बाद आज वस्त्राभूषणों की दुनिया ही बदल गई है। रामायण काल में भी आभूषणों के चलन के उदाहरण मिलते हैं। सीता की खोज में भटक रहे श्रीराम व लक्ष्मण को वनों में पड़े मिले आभूषणों से ही सुराग मिला था। यही नहीं मोहनजोदड़ो व हड़प्पा की खुदाई में मिले प्रमाण भी यही सिद्ध करते है कि आभूषणों का चलन अति प्राचीन है। आज जब समय के साथ-साथ गहनों की धातु और शिल्प में बदलाव आता जा रहा है, तब भी आभूषणों की परंपरा अक्षुण्ण है। परंपरागत रूप से पुश्तैनी माना जाने वाला यह धंधा आज एक चमकदार कैरियर बनकर उभरा है। यह व्यवसाय कला और अभिनव प्रयोगों के साथ चुनौतीपूर्ण तो है ही, साथ ही बेहद संभावनाओं से परिपूर्ण भी है।
आपकी बाट जोहती रत्नों तथा आभूषणों की दुनिया
इतिहास व सभ्यता के सुनहरे पन्नों पर अंकित अक्षर इस तथ्य के साक्षी हैं कि मानवीय सभ्यता के शुरुआती चरण में भी आभूषणों का प्रचलन था। तब स्त्री व पुरुष दोनों ही आभूषण पहनते थे। उस समय के आभूषण बहुधा तांबा व कांस्य धातुओं द्वारा निर्मित होते थे। बाद में रत्नों की पहचान की गई। कालांतर में स्वर्ण व रजत निर्मित आभूषण सभ्य समाज की जीवन शैली का एक जरूरी हिस्सा बन गए। नारियों के लिए आभूषणों का महत्त्व किसी की नजरों से छिपा नहीं है।
खासे पारंपरिक डिजाइनों, विशिष्टï पैटर्न तथा कलात्मकता के कारण भारतीय आभूषण की खेप में नूतन प्रयोग करने में जुटी स्वर्णकारों की कई पीढिय़ां काल के गाल में समा गईं, लेकिन आज नजारा सबसे जुदा है। मौजूदा दौर के भारतीय कारीगर बेहद सिद्धहस्त, निपुण व तकनीकी समझवाले हैं। बीते कुछ सालों में जिस रफ्तार से भारत में तराशे हुए हीरों, रत्नों और आभूषणों के निर्यात में तेजी आई है, उसने इस व्यवसाय को सर्वाधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला दूसरा व्यवसाय बना दिया है। यह कारोबार आज पुश्तैनी हाथों की पकड़ से निकलकर सर्वसुलभ हो गया है। वर्ष 1999 के वित्तीय वर्ष में भारत ने पांच अरब डॉलर से अधिक मूल्य के हीरे निर्यात करके इस क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। यह कारोबार शनै: शनै: 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की ओर अग्रसर है जो बेहतर रोजगार की उम्मीदों का सूचक है।
आज भारत में दस लाख से भी अधिक लोग इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में विश्व हीरा आभूषण बाजार में भारत की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। जबकि परिमाण के दृष्टिïकोण से यही प्रतिशतता 70 तक जा पहुंची है। इसकी एक खास वजह यह भी है कि भारतीय हीरे अन्य देशों की तुलना में काफी सस्ते होते हैं।
भारत में हीरों के निर्यात का जिम्मा 'रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषदÓ के सुपुर्द है। सरकार ने हाल ही में रत्नाभूषण उद्योग के विकास व प्रगति के लिए कई कदम उठाए हैं, जिससे इस कारोबार में और भी तेजी व परिमार्जन का संचार हुआ है।
भारत में मध्य प्रदेश के 'पन्नाÓ तथा 'रायपुरÓ आदि क्षेत्रों में हीरे की खुदाई का कार्य किया जाता है। यहां का सालाना उत्पादन एक लाख कैरेट है। यह उत्पादन हीरा उद्योग की वास्तविक जरूरतों के मुकाबले कम है। इस मात्रा की अधिकांश खपत घरेलू तौर पर हो जाने के कारण विदेशों से बिना तराशे हीरे मंगवाने पड़ते हैं। हीरा सामान्यत: अपने तीन स्वरूपों में उपलब्ध होता है। 'जेम क्वालिटीÓ का सर्वाधिक सफेद व पारदर्शी हीरा सबसे महंगा माना जाता है। 'येलो डायमंडÓ का दूसरा स्थान है। जबकि 'इंडस्ट्रियल डायमंडÓ तीसरे नंबर पर आता है। पारखी लोग तीसरे नंबर के हीरे को छोटे काले धब्बों के कारण दोषयुक्त मानते हैं।
सर्वाधिक महंगे रत्नों की श्रेणी में होने के कारण हीरे की पॉलिशिंग व तराशगिरी का काम बहुत सजगता से किया जाता है। थीड़ी-सी लापरवाही से भी यह चटक या फूट सकता है। इसीलिए इस कार्य में कुशल, प्रशिक्षित कारीगरों को लगाया जाता है। हीरा उद्योग में आजकल लेजर तकनीक व अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन समस्त तकनीकों के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था ने इस क्षेत्र की दिक्कतों को कम करने का काम किया है। इसीलिए डायमंड कटिंग एवं पॉलिशिंग के बाकायदा पाठï्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इस कारोबार में संलग्न कई इकाइयां 'ऑन द जॉबÓ प्रशिक्षण भी देती हैं। देशभर में अनेक संस्थान रत्न व आभूषण डिजाइनिंग के पाठï्यक्रम चला रहे हैं। कई निर्यात इकाइयां शोध व परीक्षण की सुविधा भी मुहैया कराती हैं।
जहां अनवरत शोध एवं परीक्षण के जरिए नवीनतम तकनीकों की खोज की जाती है। भारतीय रत्नाभूषण उद्योग में निर्यात की वृद्धि ने भी इस क्षेत्र में मार्केटिंग, प्रेजेंटेशन तथा सेल्स की शिक्षा को प्रोत्साहित किया है।
रत्नशिल्प एवं आभूषण डिजाइनिंग में स्नातक स्तर के कोर्स चलाए जा रहे हैं। मुंबई स्थित 'जेमोलॉजिकल इंस्टीटï्यूट ऑफ इंडियाÓ जेमोलॉजी एवं डायमंड ट्रेडिंग में डिप्लोमा पाठï्यक्रम चला रहा है। यहां से कोई भी स्नातक साढ़े तीन महीने में रत्नशिल्प का कोर्स कर सकता है। संस्थान होम स्टडी पाठï्यक्रम भी चलाता है, जिसके तहत पत्राचार द्वारा घर बैठे यह कोर्स किया जा सकता है। रत्नशिल्प में कोर्स करने के बाद यहां से डायमंड ग्रेडिंग का सर्टिफिकेट कोर्स भी किया जा सकता है, जबकि आभूषण डिजाइनिंग का कोर्स तीन माह की अवधि का है।
यही नहीं संस्थान गहने ढालने, मोती पहचानने, अंतरराष्टï्रीय स्तर की डायमंड ग्रेडिंग और जेमोलॉजी में कई तरह के अल्पावधि पाठï्यक्रम भी संचालित करता है। जिनकी अवधि दो सप्ताह से लेकर एक माह तक की हो सकती है। कुछ संस्थान 6 माह अथवा एक वर्ष की अवधि का प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठï्यक्रम भी संचालित करते हैं।
जेम स्टोन्स आर्टिजेंस ट्रेनिंग स्कूल (जेटï्स) एक ऐसा ही संस्थान है, जहां हीरा कटिंग, पॉलिशिंग, शेपिंग तथा मार्केटिंग संबंधी प्रशिक्षण दिया जाता है। इस संस्थान द्वारा हीरा कटाई, छंटाई तथा पॉलिशिंग में डिप्लोमा तथा प्रमाणमात्र पाठï्यक्रम चलाए जाते हैं। दोनों पाठï्यक्रमों में हीरा तराशने से लेकर इसके विपणन तक के कारोबारी हुनर सिखाए जाते हैं। श्रमोन्मुखी होने के बावजूद भी इसकी काफी मांग है तथा पाठï्यक्रम की अवधि में ही प्रशिक्षुओं को ज्वैलरी निर्माताओं द्वारा नियुक्ति दे दी जाती है।
ये पाठï्यक्रम हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। 16 से 35 वर्ष के अभ्यर्थी जो माध्यमिक अथवा उसके समकक्ष शैक्षिक योग्यता रखते हैं, संस्थान में प्रवेश पा सकते हैं। साक्षात्कार के बाद नामांकन किया जाता है। इस संस्थान की प्रतिष्ठïा का आलम यह है कि प्रतिवर्ष इन कोर्सों के लिए तकरीबन दस हजार युवक-युवती आवेदन करते हैं। संस्थान द्वारा महिला अभ्यर्थियों, अनुसूचित जाति, जनजाति के उम्मीदवारों के शुल्क में 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। इस संस्थान का संबंध विदेशी विश्वविद्यालयों से भी है तथा यहां विदेशी छात्र भी अध्ययन हेतु आते हैं।
संस्थान द्वारा प्रशिक्षित व्यक्ति यदि अपनी स्वयं की हीरा कार्यशाला स्थापित करना चाहता है। इस संस्थान के सौ से भी अधिक छात्रों ने आज अपना रत्न एवं हीरा व्यवसाय स्थापित कर लिया है। यही नहीं संस्थान द्वारा प्रशिक्षित अनेक छात्र दुबई, जापान, कतर, यमन, बेल्जियम, हालैंड तथा इटली आदि देशों में नाम व दाम अर्जित करने में जुटे हैं।
स्माल इंडस्ट्रीज सर्विस इंस्टीटï्यूट, चेन्नई भी जेम्स एंड डायमंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सहयोग से रत्न तराशने और पॉलिशिंग प्रशिक्षण पाठï्यक्रम चलाता है। हायर सैकण्डरी शैक्षिक योग्यताधारक व्यक्ति इस इंस्टीटï्यूट में प्रवेश की पात्रता रखता है। 6 माह की अवधि वाले इस कोर्स में युवतियों को प्राथमिकता दी जाती है।
एक्सेसरी डिजाइन में राष्टï्रीय फैशन तकनीक संस्थान (हृढ्ढस्नञ्ज) दिल्ली त्रिवर्षीय डिप्लोमा पाठï्यक्रम चलाता है। 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10+2 अथवा इंटरमीडिएट कर चुके युवक-युवतियां यहां प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। एस.एन.डी.टी. वुमंस यूनिवर्सिटी, मुंबई ने भी आभूषण डिजाइनिंग का कोर्स प्रारंभ किया है। दिल्ली स्थित जेमोलॉजिकल इंस्टीटï्यूट भी जेम आइडेंटिफिकेशन (रत्न परिचय) पाठï्यक्रम चलाता है। यहीं के ज्वैलरी प्रॉडक्ट डेवलपमेंट सेंटर में भी डिजाइनिंग तथा मैन्युफैक्चरिंग के प्राथमिक व एडवांस कोर्स कराए जाते हैं।
नोएडा (गाजियाबाद) में भी ज्वैलरी डिजाइन एंड टेक्नालॉजी इंस्टीटï्यूट विभिन्न क्षेत्रों में इस विधा का प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। इस ंसंस्थान का नेतृत्व जर्मन विशेषज्ञ माइकल ब्वॉय कर रहे हैं वल्र्ड गोल्ड काउंसिल द्वारा समर्थित इस संस्थान से इस क्षेत्र में उत्कृष्टï व उल्लेखनीय पाठï्यक्रम चलाए जाने की संभावनाएं जागी हैं।
प्रशिक्षण संस्थान
जेमोलॉजिकल इंस्टीटï्यूट ऑफ इंडिया, 29, गुरुकुल चैम्बर्स, 187 मुलादेवी रोड, मुंबई
जेमस्टोंस आर्टिजेंस ट्रेनिंग स्कूल, झालाना महल, जयपुर (राजस्थान)
इंडियन डायमंड इंस्टीटï्यूट अमूल डेयरी स्ट्रीट, कतरग्राम जी.आई.डी.सी. पी.ओ. पटेल नगर, सूरत (गुजरात)
इंडियन जेमोलॉजिकल इंस्टीटï्यूट एफ-32, झंडेवालान फ्लैटिड फैक्टरी कॉम्पलेक्स, रानी झांसी रोड, नई दिल्ली-55
जे.डी. इंस्टीटï्यूट (सभी शाखाओं में)
स्माल इंडस्ट्रीज सर्विस इंस्टीटï्यूट, 65/1, जी.एस.टी. रोड, गुईण्डी, चेन्नई
डायमंड प्रोसेसिंग इंस्टीटï्यूट, बी-307 वीरावानी इंडस्ट्रियल एस्टेट, गोरेगांव (पूर्व) मुंबई
ज्वैलरी प्रॉडक्ट डेवलपमेंट सेंटर, एफ-ब्लॉक, झंडेवाला फ्लैटिड फैक्टरी कॉम्पलेक्स, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-55
ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, डी-15 कामर्स सेंटर, ताड़देव-मुंबई
राष्टï्रीय फैशन तकनीक संस्थान (हृढ्ढस्नञ्ज), हृढ्ढस्नञ्ज कैंपस, हौजखास नई दिल्ली-110016
ज्वैलरी डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीटï्यूट, ए-89 सेक्टर-ढ्ढढ्ढ नोएडा-201301 (उ.प्र.)
एस.एन.डी.टी. वुमंस यूनिवर्सिटी, मुंबई