लोगों में नई-नई जगहों को देखने व जानने की अभिलाषा बढ़ रही है। एक जगह से दूसरी जगह जाना काम का हिस्सा है जो अनजान जगहों पर घर का विकल्प है और उसमें इतने आयाम जोड़ दिए हैं कि आराम और सुविधा को नया नाम मिल गया है। यकीनन होटल इंडस्ट्री हर उस व्यक्ति के लिए स्वागतम का इंतजार कर रही है जो या तो सुविधाओं को अपनी हैसियत के अनुसार भोगना चाहता है या स्वागत-सत्कार के गुणों के लिए अपने करियर की तलाश कर रहा है।
होटल इंडस्ट्री में कैसा काम
होटल इंडस्ट्री में बतौर प्रशिक्षु से लेकर प्रबंधक तक न जाने कितने अवसर हैं, जहां से आप अपने करियर की राहें आसानी से तय कर सकते हैं। प्रबंधक, फ्रंट ऑफिस, रिसैप्शनिस्ट, फूड एंड बेवरेज, हाऊसकीपिंग, बुक कीपिंग, काऊंटर सर्विस,मार्कीटिंग विभाग इत्यादि।
मैनेजर
होटल का सारा काम सुचारू रूप से चले और अतिथियों को किसी किस्म की तकलीफ या परेशानी न हो, यह जिम्मेदारी मैनेजर के कंधों पर होती है। उसे ही यह सुनिश्चित करना होता है कि हाऊसकीपिंग ठीक हो, किचन में कोई रुकावट न हो, अतिथियों को समय पर उनके द्वारा मांगी गई चीजें मिल जाएं वगैरह।
फ्रंट ऑफिस
फ्रंट ऑफिस ही वह जगह है जहां सबसे पहले अतिथि आते हैं। वहां उनके लिए कमरे की उपलब्धता बताने से लेकर उन्हें कमरे में ले जाने तक का काम करना होता है। इस काम के लिए बैल बॉय, बैल कैप्टन जैसा स्टाफ होता है। अतिथियों के लिए कोई संदेश या सूचना आती है तो उन तक उन्हें पहुंचाना इनकी जिम्मेदारियों के दायरे में आता है।
फूड एंड बेवरेज
यह विभाग खान-पान की व्यवस्था देखता है। इसके तीन हिस्से होते हैं-एक खाने का आर्डर लेता है, दूसरा खाना पकाता है और तीसरा उसे परोसता है। यह एक महत्वपूर्ण विभाग है क्योंकि सब कुछ ठीक हो और खाना ठीक न हो तो होटल की साख खराब होती है और अतिथि आने से कतराने लगते हैं। बर्तन करीने से हों, परोसने की कला आती हो तो खाने वाले को अच्छा लगता है, रेस्तरां व फूड सर्विस के मैनेजर इन जिम्मेदारियों को निभाते हैं।
हाऊसकीपिंग
चाहे कमरा हो, लॉबी हो, बैंक्वेट हाल हो या रेस्तरां, चारों ओर सलीका और सफाई दिखनी चाहिए। इस इंडस्ट्री का यह अहम हिस्सा है। इसमें जो बेहतर होगा, गैस्ट उसे ही पसंद करेंगे। इसमें एग्जीक्यूटिव हाऊसकीपर की निगरानी में सारा काम होता है। यह काम चौबीसों घंटे का है इसलिए इस विभाग में लोग पालियों में काम करते हैं।
मार्कीटिंग
होटल में क्या-क्या और किस स्तर की सेवाएं व सुविधाएं उपलब्ध हैं, इन्हें अपने ग्राहकों के पास पहुंचाने की जिम्मेदारी मार्कीटिंग विभाग की होती है। तरह-तरह के पैकेज तैयार कर ग्राहकों को आकर्षित करना इनका काम होता है। जितनी बेहतर पैकेजिंग होगी उतने ही गैस्ट इनकी तरफ आएंगे। इस विभाग की अहमियत आज काफी बढ़ गई है।
ट्रेनिंग कहां से लें?
होटल मैनेजमैंट में सर्टीफिकेट कोर्स से लेकर पी.जी. कोर्स तक उपलब्ध हैं। सरकारी संस्थाओं के अलावा निजी संस्थानों की भी भरमार है। सरकारी संस्थान संयुक्त प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिला लेते हैं और निजी संस्थान साक्षात्कार व अंक प्रतिशत के आधार पर।
संयुक्त प्रवेश परीक्षा
नैशनल काऊंसिल फॉर होटल मैनेजमैंट एंड केटरिंग टैक्नोलॉजी की स्थापना 1982 में केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी। इसके तत्वावधान में होटल मैनेजमैंट के 21 केन्द्रीय संस्थान, 12 प्रदेश संस्थान तथा 18 निजी होटल प्रबंधन संस्थान हैं। इनकी 7,741 सीटों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है।
नैशनल कौंसिल फॉर होटल मैनेजमैंट एंड केटरिंग टैक्नोलॉजी के संस्थानों में बी.एससी. इन हॉस्पिटैलिटी एंड होटल मैनेजमैंट कोर्स में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जे.ई.ई.) होती है। इस परीक्षा के लिए आवेदन हर वर्ष फरवरी में किए जाते हैं। अप्रैल में परीक्षा की तारीख तय की जाती है।
इसके लिए अभ्यर्थी ने 12वीं में 50 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की होनी चाहिए। इसकी परीक्षा में कुल 200 प्रश्र पूछे जाते हैं और उन्हें 3 घंटों में हल करना होता है। इसमें न्यूमैरिकल एबिलिटी एंड साइंटिफिक एप्टीच्यूड के 30 सवाल, रीजनिंग एंड लॉजिकल डिडक्शन के 30 सवाल, सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स के 30 सवाल, अंग्रेजी भाषा के 80 सवाल और एप्टीच्यूड फॉर सर्विस सैक्टर के 30 सवाल पूछे जाते हैं। कुछ अन्य संस्थानों में लिखित परीक्षा पास करने के बाद ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू भी होता है।
कोर्स
कुछ कोर्स दसवीं के बाद किए जा सकते हैं तो कुछ को बारहवीं के बाद। स्नातक करने के बाद भी रास्ता खुला है।
- बेकरी एंड कंफैक्शनरी या होटल रिसैप्शन एंड बुक कीपिंग या रेस्तरां व काऊंटर सर्विस में एक साल का डिप्लोमा।
- होटल मैनेजमैंट एंड केटरिंग टैक्नोलॉजी में चार साल की स्नातक डिग्री।
- होटल मैनेजमैंट में तीन साल की बी.एससी.।
- हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म मैनेजमैंट में तीन साल की बी.ए.।
- हॉस्पिटैलिटी एडमिनिस्ट्रेशन में दो साल की एम.एससी.।
- होटल एंड केटरिंग मैनेजमैंट में छ: महीने का सर्टीफिकेट कोर्स।
इसके अलावा पी.जी. डिप्लोमा इन होटल मैनेजमैंट, फ्रंट ऑफिस एंड टूरिज्म मैनेजमैंट, एकम्मोडेशन ऑप्रेशन जैसे कोर्स प्रचलन में हैं।
योग्यता
इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय में 12वीं या स्नातक होना जरूरी है। 12वीं में अंग्रेजी एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ी जानी चाहिए।
अवसर
रिसॉर्ट से लेकर फाइव स्टार होटलों तक, हर राज्य के पर्यटन विभाग से लेकर एविएशन तक अनगिनत नौकरियां हैं। फास्ट फूड चेन, रेलवे या बैंक या बड़े संस्थानों में केटरिंग कैंटीन, एयरलाइंस, हॉस्पिटल, मॉल, मल्टीप्लैक्स, हैल्थ क्लब जैसी जगहों पर रोजगार पा सकते हैं। विदेशों में भी होटल मैनेजमैंट में डिग्री/डिप्लोमा कर चुके छात्रों की खूब मांग है। आप स्वरोजगार भी शुरू कर सकते हैं।
होटल इंडस्ट्री में कैसा काम
होटल इंडस्ट्री में बतौर प्रशिक्षु से लेकर प्रबंधक तक न जाने कितने अवसर हैं, जहां से आप अपने करियर की राहें आसानी से तय कर सकते हैं। प्रबंधक, फ्रंट ऑफिस, रिसैप्शनिस्ट, फूड एंड बेवरेज, हाऊसकीपिंग, बुक कीपिंग, काऊंटर सर्विस,मार्कीटिंग विभाग इत्यादि।
मैनेजर
होटल का सारा काम सुचारू रूप से चले और अतिथियों को किसी किस्म की तकलीफ या परेशानी न हो, यह जिम्मेदारी मैनेजर के कंधों पर होती है। उसे ही यह सुनिश्चित करना होता है कि हाऊसकीपिंग ठीक हो, किचन में कोई रुकावट न हो, अतिथियों को समय पर उनके द्वारा मांगी गई चीजें मिल जाएं वगैरह।
फ्रंट ऑफिस
फ्रंट ऑफिस ही वह जगह है जहां सबसे पहले अतिथि आते हैं। वहां उनके लिए कमरे की उपलब्धता बताने से लेकर उन्हें कमरे में ले जाने तक का काम करना होता है। इस काम के लिए बैल बॉय, बैल कैप्टन जैसा स्टाफ होता है। अतिथियों के लिए कोई संदेश या सूचना आती है तो उन तक उन्हें पहुंचाना इनकी जिम्मेदारियों के दायरे में आता है।
फूड एंड बेवरेज
यह विभाग खान-पान की व्यवस्था देखता है। इसके तीन हिस्से होते हैं-एक खाने का आर्डर लेता है, दूसरा खाना पकाता है और तीसरा उसे परोसता है। यह एक महत्वपूर्ण विभाग है क्योंकि सब कुछ ठीक हो और खाना ठीक न हो तो होटल की साख खराब होती है और अतिथि आने से कतराने लगते हैं। बर्तन करीने से हों, परोसने की कला आती हो तो खाने वाले को अच्छा लगता है, रेस्तरां व फूड सर्विस के मैनेजर इन जिम्मेदारियों को निभाते हैं।
हाऊसकीपिंग
चाहे कमरा हो, लॉबी हो, बैंक्वेट हाल हो या रेस्तरां, चारों ओर सलीका और सफाई दिखनी चाहिए। इस इंडस्ट्री का यह अहम हिस्सा है। इसमें जो बेहतर होगा, गैस्ट उसे ही पसंद करेंगे। इसमें एग्जीक्यूटिव हाऊसकीपर की निगरानी में सारा काम होता है। यह काम चौबीसों घंटे का है इसलिए इस विभाग में लोग पालियों में काम करते हैं।
मार्कीटिंग
होटल में क्या-क्या और किस स्तर की सेवाएं व सुविधाएं उपलब्ध हैं, इन्हें अपने ग्राहकों के पास पहुंचाने की जिम्मेदारी मार्कीटिंग विभाग की होती है। तरह-तरह के पैकेज तैयार कर ग्राहकों को आकर्षित करना इनका काम होता है। जितनी बेहतर पैकेजिंग होगी उतने ही गैस्ट इनकी तरफ आएंगे। इस विभाग की अहमियत आज काफी बढ़ गई है।
ट्रेनिंग कहां से लें?
होटल मैनेजमैंट में सर्टीफिकेट कोर्स से लेकर पी.जी. कोर्स तक उपलब्ध हैं। सरकारी संस्थाओं के अलावा निजी संस्थानों की भी भरमार है। सरकारी संस्थान संयुक्त प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिला लेते हैं और निजी संस्थान साक्षात्कार व अंक प्रतिशत के आधार पर।
संयुक्त प्रवेश परीक्षा
नैशनल काऊंसिल फॉर होटल मैनेजमैंट एंड केटरिंग टैक्नोलॉजी की स्थापना 1982 में केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी। इसके तत्वावधान में होटल मैनेजमैंट के 21 केन्द्रीय संस्थान, 12 प्रदेश संस्थान तथा 18 निजी होटल प्रबंधन संस्थान हैं। इनकी 7,741 सीटों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है।
नैशनल कौंसिल फॉर होटल मैनेजमैंट एंड केटरिंग टैक्नोलॉजी के संस्थानों में बी.एससी. इन हॉस्पिटैलिटी एंड होटल मैनेजमैंट कोर्स में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जे.ई.ई.) होती है। इस परीक्षा के लिए आवेदन हर वर्ष फरवरी में किए जाते हैं। अप्रैल में परीक्षा की तारीख तय की जाती है।
इसके लिए अभ्यर्थी ने 12वीं में 50 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की होनी चाहिए। इसकी परीक्षा में कुल 200 प्रश्र पूछे जाते हैं और उन्हें 3 घंटों में हल करना होता है। इसमें न्यूमैरिकल एबिलिटी एंड साइंटिफिक एप्टीच्यूड के 30 सवाल, रीजनिंग एंड लॉजिकल डिडक्शन के 30 सवाल, सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स के 30 सवाल, अंग्रेजी भाषा के 80 सवाल और एप्टीच्यूड फॉर सर्विस सैक्टर के 30 सवाल पूछे जाते हैं। कुछ अन्य संस्थानों में लिखित परीक्षा पास करने के बाद ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू भी होता है।
कोर्स
कुछ कोर्स दसवीं के बाद किए जा सकते हैं तो कुछ को बारहवीं के बाद। स्नातक करने के बाद भी रास्ता खुला है।
- बेकरी एंड कंफैक्शनरी या होटल रिसैप्शन एंड बुक कीपिंग या रेस्तरां व काऊंटर सर्विस में एक साल का डिप्लोमा।
- होटल मैनेजमैंट एंड केटरिंग टैक्नोलॉजी में चार साल की स्नातक डिग्री।
- होटल मैनेजमैंट में तीन साल की बी.एससी.।
- हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म मैनेजमैंट में तीन साल की बी.ए.।
- हॉस्पिटैलिटी एडमिनिस्ट्रेशन में दो साल की एम.एससी.।
- होटल एंड केटरिंग मैनेजमैंट में छ: महीने का सर्टीफिकेट कोर्स।
इसके अलावा पी.जी. डिप्लोमा इन होटल मैनेजमैंट, फ्रंट ऑफिस एंड टूरिज्म मैनेजमैंट, एकम्मोडेशन ऑप्रेशन जैसे कोर्स प्रचलन में हैं।
योग्यता
इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय में 12वीं या स्नातक होना जरूरी है। 12वीं में अंग्रेजी एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ी जानी चाहिए।
अवसर
रिसॉर्ट से लेकर फाइव स्टार होटलों तक, हर राज्य के पर्यटन विभाग से लेकर एविएशन तक अनगिनत नौकरियां हैं। फास्ट फूड चेन, रेलवे या बैंक या बड़े संस्थानों में केटरिंग कैंटीन, एयरलाइंस, हॉस्पिटल, मॉल, मल्टीप्लैक्स, हैल्थ क्लब जैसी जगहों पर रोजगार पा सकते हैं। विदेशों में भी होटल मैनेजमैंट में डिग्री/डिप्लोमा कर चुके छात्रों की खूब मांग है। आप स्वरोजगार भी शुरू कर सकते हैं।
