पूरी दुनिया में चल रही आर्थिक तंगी के बीच लोगों को लगता है कि युवाओं को अपनी नौकरियों की चिंता ज्यादा रहती है और वरिष्ठ कर्मचारी इस बात से निश्चिंत रहते होंगे, लेकिन हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि अपनी पहली नियमित नौकरी पाने वाले युवा अपने वरिष्ठ अधिकारियों की अपेक्षा कहीं अधिक खुश रहते हैं और भविष्य में अपने कॅरियर को लेकर उनका दृष्टिकोण बहुत सकारात्मक रहता है।
अमेरिकी आर्थिक समाचार पत्र च्बिजनेस न्यूज डेली के अनुसार, नए शोध से पता चलता है कि नए कर्मचारी तथा वरिष्ठ कर्मचारी अपनी-अपनी नौकरियों के बारे में क्या सोचते हैं। इस नए शोध के अनुसार, 18 से 30 की आयु के बीच वाले युवा कर्मचारियों में से 62 प्रतिशत कर्मचारियों का मानना है कि वे वर्तमान कार्य वातावरण में अपने करियर के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं, जबकि वरिष्ठ कर्मचारियों में सिर्फ 48 फीसदी कर्मचारी ही अपने करियर से निश्चिंत पाए गए।
शोध के अनुसार, 37 प्रतिशत वरिष्ठ कर्मचारियों को सुरक्षित करियर किसी उपलब्धि की तरह लगती है, जबकि सिर्फ 26 प्रतिशत युवा कर्मचारी ऐसी सोच रखते हैं। वरिष्ठ कर्मचारी यह भी मानते हैं कि नौकरी से उन्हें जीवनपर्यंत आजीविका कमाने की सुविधा मिलती है, जबकि बहुत कम युवा कर्मचारियों को ऐसा लगता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि युवा कर्मचारियों की इस सोच का कारण वर्तमान आर्थिक मंदी में युवाओं पर पड़े सबसे अधिक प्रभाव के कारण भी ऐसा हो सकता है।
नौकरी पाने में सहायता करने वाली दुनिया की शीर्ष कंपनियों में से एक च्मॉन्स्टर डॉट कॉमज् ने सर्वेक्षण कंपनी जीएफके के सहयोग से 1008 लोगों पर यह शोधकार्य किया। शोधकर्ताओं के अनुसार युवाओं द्वारा अपनी नौकरियों के बारे में सोचने पर रुपये का भी बहुत प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, 42 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि अगर रुपये कमाने की चिंता न हो तो वे दूसरों को सहायता प्रदान करने वाली नौकरी करना चाहेंगे। अन्य कर्मचारियों ने कहा कि वे अध्यापक, खोजकर्ता, अन्वेषक या खिलाड़ी बनना चाहेंगे। सिर्फ पांच प्रतिशत कर्मचारी यह बताने में असमर्थ रहे कि वे क्या करना चाहेंगे।
अमेरिकी आर्थिक समाचार पत्र च्बिजनेस न्यूज डेली के अनुसार, नए शोध से पता चलता है कि नए कर्मचारी तथा वरिष्ठ कर्मचारी अपनी-अपनी नौकरियों के बारे में क्या सोचते हैं। इस नए शोध के अनुसार, 18 से 30 की आयु के बीच वाले युवा कर्मचारियों में से 62 प्रतिशत कर्मचारियों का मानना है कि वे वर्तमान कार्य वातावरण में अपने करियर के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं, जबकि वरिष्ठ कर्मचारियों में सिर्फ 48 फीसदी कर्मचारी ही अपने करियर से निश्चिंत पाए गए।
शोध के अनुसार, 37 प्रतिशत वरिष्ठ कर्मचारियों को सुरक्षित करियर किसी उपलब्धि की तरह लगती है, जबकि सिर्फ 26 प्रतिशत युवा कर्मचारी ऐसी सोच रखते हैं। वरिष्ठ कर्मचारी यह भी मानते हैं कि नौकरी से उन्हें जीवनपर्यंत आजीविका कमाने की सुविधा मिलती है, जबकि बहुत कम युवा कर्मचारियों को ऐसा लगता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि युवा कर्मचारियों की इस सोच का कारण वर्तमान आर्थिक मंदी में युवाओं पर पड़े सबसे अधिक प्रभाव के कारण भी ऐसा हो सकता है।
नौकरी पाने में सहायता करने वाली दुनिया की शीर्ष कंपनियों में से एक च्मॉन्स्टर डॉट कॉमज् ने सर्वेक्षण कंपनी जीएफके के सहयोग से 1008 लोगों पर यह शोधकार्य किया। शोधकर्ताओं के अनुसार युवाओं द्वारा अपनी नौकरियों के बारे में सोचने पर रुपये का भी बहुत प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, 42 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि अगर रुपये कमाने की चिंता न हो तो वे दूसरों को सहायता प्रदान करने वाली नौकरी करना चाहेंगे। अन्य कर्मचारियों ने कहा कि वे अध्यापक, खोजकर्ता, अन्वेषक या खिलाड़ी बनना चाहेंगे। सिर्फ पांच प्रतिशत कर्मचारी यह बताने में असमर्थ रहे कि वे क्या करना चाहेंगे।
