वर्तमान समय में इस क्षेत्र में करियर के उज्ज्वल अवसर उपलब्ध हैं

मानवाधिकार का स्तर अच्छे राज, विकास एवं लोकतंत्र को मापने का एक उत्तम संकेतक बन चुका है। ऐसे में अपने नागरिकों के साथ व्यवहार तथा संबंधों के लिए मानवाधिकारों का पालन करना सभी राष्ट्रों के लिए एक स्थापित मापदंड बन चुका है। मानवाधिकारों की सुरक्षा, उन्हें प्रोत्साहन देने तथा इनका उल्लंधन करने वालों पर अंकुश लगाने तथा उन्हें सजा देने की दिशा में काफी संगठन एवं सरकारें सक्रिय हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में रोजगार बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं।

क्या हैं मानवाधिकार?
मानवाधिकार सभी मनुष्यों के मूलभूत जन्मजात अधिकार हैं- चाहे वे हमारी राष्ट्रीयता, निवास स्थान, जाति, श्रेणी, लिंग, धर्म, भाषा या किसी अन्य स्थिति से संबंधित हों। सभी इंसान बिना भेदभाव अपने मानवाधिकारों के समान रूप से हकदार हैं। मानवाधिकारों के सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य में चार पहलू मुख्य रूप से शामिल हैं जैसे कि मनुष्य होने के फलस्वरूप सभी को समान रूप से मिलने वाले दावे, शक्ति, सुुविधा और सुरक्षा के अधिकार।

इतिहास

द्वितीय विश्व युद्ध में हुए भारी विनाश, विध्वंस, दुर्दशा एवं अत्याचारों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के तहत मानवाधिकारों का सिद्धांत पेश किया गया। तब सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा-1948 के माध्यम से मानवाधिकार की धारणा पेश की गई। इस घोषणा के 30 अनुच्छेदों में अनेक अधिकार दिए गए हैं जिनमें मानवता के सम्पोषण तथा विकास के लिए जीवन, स्वतंत्रता, समानता, सुुरक्षा तथा साधन आदि के विभिन्न अधिकार शामिल हैं।

प्रतिज्ञा पत्रों, सम्मेलनों, संघ पत्रों, प्रचलित अंतर्राष्ट्रीय परम्पराओं, सामान्य सिद्धांतों और अन्तर्राष्ट्रीय संधियों द्वारा मानवाधिकारों को कानूनी मान्यता प्राप्त है। इनका पालन सरकारों के लिए लाजमी है ताकि नागरिकों की मूलभूत स्वतंत्रता को प्रोत्साहन देने तथा उसकी सुरक्षा करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया जा सके। दूसरे शब्दों में इनके तहत अपने नागरिकों के प्रति सरकारों के दायित्व निर्धारित किए जाते हैं ताकि वे आजादी से जी सकें।

भारत में इन्हें ‘मानवाधिकार परिरक्षण अधिनियम’ के अंतर्गत परिभाषित किया गया है। अधिनियम में मानवाधिकारों के बेहतर परिरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा मानवाधिकार न्यायालयों के गठन का प्रावधान किया गया है। गत दो दशकों के अनुभव ने मानवाधिकार के संकटकालीन महत्व को दर्शाया है। परम्परागत रूप से राज्य या उसके कर्ताओं के कारण मानव अधिकारों का उल्लंघन होता है, तथापि समकालीन समय में मानवाधिकारों का उल्लंघन वैयक्तिक, संस्थाओं द्वारा तथा उच्च वर्ग के स्तर पर देखा गया है। भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग कई वर्षों से नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक अधिकारों सहित मानव अधिकार उल्लंघन के सैंकड़ों मामले दर्ज करता रहा है। ये उल्लंघन तथा अत्याचार खाद्य अधिकार, स्वास्थ्य अधिकार, शिक्षा अधिकार, हिंसा तथा शोषण के विरुद्ध महिला अधिकार, दुर्व्यवहार तथा शोषण के विरुद्ध बाल अधिकारों से संबंधित मामलों और प्रवासी अधिकार तथा जाति, सिद्धांत, क्षेत्र तथा धर्म पर आधारित उनके उल्लंघनों से संबंधित हैं।

सम्भावनाएं
वर्तमान समय में मानवाधिकार के क्षेत्र में करियर के उज्ज्वल अवसर उपलब्ध हैं। सामाजिक न्याय, बाल अपराध संबंधी न्याय, लिंग भेद संबंधी न्याय, परिक्षक न्याय तथा अब प्रत्यक्ष सेवा, निगरानी एवं मूल्यांकन, लाबिंग और नैटवर्किंग, एडवोकेसी, नीति विकास, प्रलेखन एवं अनुसंधान सहित जलवायु न्याय के उभर रहे क्षेत्रों में सामाजिक कार्यकर्ता के लिए रोजगार के उजले अवसर विद्यमान हैं। इन कार्यों में विश्व के सभी क्षेत्रों में मानवाधिकार अत्याचारों के निवारण तथा उन्हें समाप्त करने पर बल देते हुए अनुसंधान, मानव अधिकार विकास पर निगरानी रखने, तथ्य निष्कर्ष एवं अन्वेषण संचालन, मानव अधिकार की स्थितियों पर केस अध्ययन एवं रिपोर्ट लेखन, मानव अधिकार उल्लंघनों, मुकद्दमेबाजी एवं लाबिंग को उजागर करने तथा कमी लाने के लिए एडवोकेसी और सामाजिक तथा राजनीतिक ढांचों में मानव अधिकार प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने के कार्य सम्मिलित हैं।

इनके अतिरिक्त मानवाधिकार कार्यकर्ता, परामर्श एवं शैक्षिक सेवाएं, शरणार्थी सहायता, पीड़ितों के पुनर्वास, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के लिए नीति विश्लेषण, संस्था निर्माण तथा परियोजना विकास एवं मानवाधिकार आधारित नागरिक समाज संगठनों के क्षेत्र में प्रबंधन में सहायता देते हैं।  

Post a Comment

Previous Post Next Post
संस्कार News
संस्कार News

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume