कार्यालय में काम करने के दौरान...

एक निजी स्कूल में अध्यापिका का काम करने वाली फाल्गुनी अक्सर अपनी बेढंगी वेशभूषा और बातूनीपन की वजह से अपने छात्र-छात्राओं और सहकर्मियों के बीच मजाक का विषय बन जाती है। जब उसकी शुभचिंतक पड़ोसन नीता इस ओर उसका ध्यान दिलाती है तो वह उसकी बात अनसुनी कर देती है। जिसके परिणामस्वरूप स्कूल की प्राध्यापिका की नजरों में वह कभी आ ही नहीं पाती। 

इसी तरह एक निजी ऑफिस में कार्यरत शारदा अपने गहरे-चटक वस्त्रों व तड़क-भड़क वाले अंदाज की वजह से सहकर्मियों के बीच उपहास का विषय बन चुकी है। उसके खुले व्यवहार का अक्सर लोग गलत अर्थ भी लगा लेते हैं लेकिन शारदा अपने मन में ही मस्त रहती है।

सिर्फ फाल्गुनी या शारदा ही नहीं, आज मध्यवर्गीय शिक्षित महिलाओं में से बहुत-सी ऐसी महिलाएं हैं जो अपनी लापरवाही की वजह से अपने कार्यस्थल में काम करते वक्त कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखना भूल जाती हैं जिसकी वजह से कई बार उन्हें नीचा भी देखना पड़ सकता है। अत: नौकरीपेशा महिलाओं को कई बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए:

1 अपनी आयु व पद के अनुसार वस्त्रों का चयन करें। वस्त्र अच्छी तरह प्रैस किए हों और सही फिटिंग के हों, इस बात का विशेष ध्यान रखें।

2 अपनी कमजोरियों और मजबूरियों का अपने बॉस या सहकर्मियों के सामने जिक्र करने से बचें क्योंकि बाद में इनमें कोई आपका नाजायज फायदा भी उठा सकता है।

3 किसी सहकर्मी या बॉस की खुशामद करने की गलती न करें।

4 कार्यालय में समय से आएं और समय से जाएं।

5 थोड़ी-सी परेशानी पडऩे पर सबके सामने आंसू न बहाएं क्योंकि इससे आपकी ही छवि हल्की होगी।

6 सहकर्मियों के सामने अपनी घरेलू परेशानियों व आर्थिक कमजोरी की चर्चा न करें क्योंकि इससे सब आपको बेचारी समझने लगेंगे।

7 गलत समझौते या द्विअर्थी बातों को हजम न करें।

8 सबसे कम और मीठा बोलें। किसी को उपदेश देने की गलती न करें।

9 कार्यालय में आधा-अधूरा काम न करें। अपना पूरा कार्य समय से करें। उसका लेखा-जोखा अपने पास रखें।

10 महिला होने की वजह से पुरुष सहकर्मियों से अपना कार्य करवाने की नीयत न रखें।

11 अपनी ऊब, थकान, खीज व कुढऩ सहकर्मियों के सामने प्रकट न करें।

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