किसी
भी कम्पनी में प्रबंधन की नीतियां एवं रणनीतियां तभी फलदायक परिणाम देती
हैं जब इन्हें एक मजबूत सूचना तंत्र का साथ मिले जो प्रासंगिक एवं
गुणवत्ता परक हो। ऐसे में कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटिंग के पेशे का यहां
महत्व काफी बढ़ जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के वक्त से ही इस विषय का
अस्तित्व सामने आ चुका था जब रक्षा संगठनों की कॉस्ट एंड प्रॉफिट
कांट्रैक्ट पर नजर रखने के लिए इसकी जरूरत पड़ी। तब से अब तक इस पेशे में
आमूल-चूल परिवर्तन आ चुका है। आज यह एक व्यवस्थित पेशा बन चुका है जो
औद्योगिक घरानों को अपनी सेवाएं प्रदान करने से लेकर समाज के हित में भी
काम कर रहा है।
क्या है कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटिंग?
किसी भी औद्योगिक घराने के उत्पादों के उत्पादन या सेवाओं के सृजन की लागत का आकलन करना कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स का मूल कार्य होता है। वे अपने संस्थान को सलाह देते हैं कि किसी उत्पाद या सेवा की कीमत में परिवर्तन होने पर कड़ी प्रतियोगिता के बीच किस तरह से प्रतिक्रिया की जाए। मंदी के दौर में तो उनके कौशल की कड़ी परीक्षा होती है। आज के अत्यधिक प्रतियोगी युग में वे कम्पनियां ही अपना अस्तित्व बचा सकती हैं जिनके पास मजबूत कॉस्ट एंड अकाऊंटिंग सिस्टम हो। अपनी क्षमता के प्रभावी उपयोग, पूंजी पुनर्निर्धारण फैसले, परियोजनाओं के विश्लेषण से लेकर किसी वैकल्पिक कार्रवाई आदि मुद्दों पर सलाह के लिए इन पर ही कम्पनियों का प्रबंधन निर्भर करता है।
यह एक ऐसा साधन है जो एक तरफ उपयुक्त फैसले लेने तो दूसरी तरफ लक्ष्यों की पूर्ति की दिशा में किए गए प्रदर्शन के विश्लेषण में कम्पनी प्रबंधन की दोहरी सहायता करता है।
इस क्षेत्र के पेशेवर अकाऊंटिंग सिस्टम्स द्वारा उपलब्ध करवाए जाने वाले सैकेंडरी डाटा का प्रयोग करते हैं जिनका विश्लेषण वे आधुनिक मैनेजमैंट साधनों द्वारा करते हैं ताकि विभिन्न स्तरों के वरिष्ठ प्रबंधकों को वे विशेष महत्व की जानकारी उपलब्ध करवा सकें।
योग्यता
कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स का पेशा कॉस्ट एंड वक्र्स अकाऊंटैंट्स एक्ट 1959 तथा इस कानून के तहत निर्धारित नीतियों एवं नियमों द्वारा नियंत्रित है। भारत में इस पेशे के नियमन तथा विकास में सहायता के लिए भारत सरकार ने इंस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स की स्थापना एक वैधानिक संस्थान के रूप में मिनिस्ट्री ऑफ कार्पोरेट्स अफेयर्स के तहत की। इसके तहत देश में चार क्षेत्रीय काऊंसिल सक्रिय हैं ताकि संस्थान, इसके छात्रों तथा सदस्यों के मध्य बेहतर सम्पर्क स्थापित किया जा सके।
यही संस्थान कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए कॉस्ट अकाऊंटैंसी कोर्स संचालित करता है। कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट के रूप में कार्य करने के लिए भारत में यही एकमात्र मान्यता प्राप्त योग्यता है। यह कोर्स तीन चरणों में है- फाऊंडेशन कोर्स, इंटरमीडिएट कोर्स तथा फाइनल कोर्स। इसमें थ्यूरी के साथ ही सीनियर मैम्बर्स या किसी कम्पनी में इन्टर्नशिप के रूप में प्रैक्टिकल अभ्यास भी करवाया जाता है।
यह कोर्स आमतौर पर पत्राचार माध्यम से ही किया जाता है। संस्थान के दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई तथा चेन्नई स्थित रीजनल काऊंसिल्स में ओरल कोचिंग का बंदोबस्त भी है परंतु अधिकतर छात्र पत्राचार माध्यम से ही इसे करना पसंद करते हैं। छात्रों को पाठ्य सामग्री के साथ ही असाइनमैंट्स भेजे जाते हैं जिन्हें पूरा करके उन्हें संस्थान को भेजना होता है। इनका विश्लेषण करने तथा मापदंडों के अनुरूप उपयुक्त पाए जाने पर छात्रों को कोचिंग कम्प्लीशन सर्टीफिकेट (सी.सी.सी.) जारी किया जाता है। सी.सी.सी. के आधार पर ही वे परीक्षा में बैठ सकते हैं। यह परीक्षा साल में दो बार होती है।
फाऊंडेशन कोर्स में दाखिले के लिए 12वीं कक्षा पास होना जरूरी है। इसके बाद इंटरमीडिएट कोर्स में दाखिले के लिए फाऊंडेशन तथा फाइनल कोर्स में दाखिले के लिए इंटरमीडिएट कोर्स की परीक्षाएं पास करनी होती हैं। वैसे ग्रैजुएट छात्र सीधे इंटरमीडिएट कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इस दौरान उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के रूप में कुछ सालों की इंटर्नशिप भी करनी होती है।
संस्थान की सदस्यता : फाइनल परीक्षा पास करने के बाद उन्हें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग एवं असिस्टैंटशिप करनी पड़ती है। तीन सालों के अनुभव के बाद वे संस्थान की एसोसिएट मैम्बरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं।
सम्भावनाएं
चूंकि इस पेशे के साथ गहन विश्लेषणात्मक दक्षता एवं बेहद कड़ा प्रशिक्षण जुड़ा है, कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स के पास रोजगार के मौकों की कोई कमी नहीं होती है। उन्हें बड़े औद्योगिक घराने नौकरी देते हैं। शुरूआत मैनेजमैंट या अकाऊंट ट्रेनी के रूप में होती है तथा ट्रेनिंग के बाद उन्हें उच्च पदों पर नियुक्ति दी जाती है। वे चीफ अकाऊंट्स अफसर, चीफ फाइनांशियल कंट्रोलर, चीफ इंटरनल ऑडिटर आदि महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हैं। भारत सरकार के इंडियन कॉस्ट अकाऊंट्स सर्विस में नियुक्ति पाने के लिए यू.पी.एस.सी. की परीक्षा पास करनी पड़ती है।
अपनी प्रैक्टिस
कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट के रूप में अपनी प्रैक्टिस करने वालों के लिए तरक्की की कोई सीमा नहीं है। इसके तहत वे इन क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं-
1. कॉस्ट ऑडिट
2. स्टॉक ऑडिट
3. ऑडिट ऑफ सैंट्रल वैल्यू एडेड टैक्स क्रैडिट एंड स्पैशल ऑडिट
4. क्लाइंट्स के केस रिप्रैजैंट करना
5. स्टेट सेल्स टैक्स लॉज
6. क्लाइंट्स को अकाऊंटिंग, ऑडिट एवं कंसल्टैंसी आदि से संबंधित सेवाएं देना
संस्थान मुख्यालय
द इंस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वक्र्स अकाऊंटैंट्स ऑफ इंडिया, 12, साद्देर स्ट्रीट, कोलकाता-700016
उत्तर भारतीय रीजनल काऊंसिल
द इंस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वक्र्स अकाऊंटैंट्स ऑफ इंडिया, 3, इंस्टीच्यूशनल एरिया, लोधी रोड, नई दिल्ली-110003
क्या है कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटिंग?
किसी भी औद्योगिक घराने के उत्पादों के उत्पादन या सेवाओं के सृजन की लागत का आकलन करना कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स का मूल कार्य होता है। वे अपने संस्थान को सलाह देते हैं कि किसी उत्पाद या सेवा की कीमत में परिवर्तन होने पर कड़ी प्रतियोगिता के बीच किस तरह से प्रतिक्रिया की जाए। मंदी के दौर में तो उनके कौशल की कड़ी परीक्षा होती है। आज के अत्यधिक प्रतियोगी युग में वे कम्पनियां ही अपना अस्तित्व बचा सकती हैं जिनके पास मजबूत कॉस्ट एंड अकाऊंटिंग सिस्टम हो। अपनी क्षमता के प्रभावी उपयोग, पूंजी पुनर्निर्धारण फैसले, परियोजनाओं के विश्लेषण से लेकर किसी वैकल्पिक कार्रवाई आदि मुद्दों पर सलाह के लिए इन पर ही कम्पनियों का प्रबंधन निर्भर करता है।
यह एक ऐसा साधन है जो एक तरफ उपयुक्त फैसले लेने तो दूसरी तरफ लक्ष्यों की पूर्ति की दिशा में किए गए प्रदर्शन के विश्लेषण में कम्पनी प्रबंधन की दोहरी सहायता करता है।
इस क्षेत्र के पेशेवर अकाऊंटिंग सिस्टम्स द्वारा उपलब्ध करवाए जाने वाले सैकेंडरी डाटा का प्रयोग करते हैं जिनका विश्लेषण वे आधुनिक मैनेजमैंट साधनों द्वारा करते हैं ताकि विभिन्न स्तरों के वरिष्ठ प्रबंधकों को वे विशेष महत्व की जानकारी उपलब्ध करवा सकें।
योग्यता
कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स का पेशा कॉस्ट एंड वक्र्स अकाऊंटैंट्स एक्ट 1959 तथा इस कानून के तहत निर्धारित नीतियों एवं नियमों द्वारा नियंत्रित है। भारत में इस पेशे के नियमन तथा विकास में सहायता के लिए भारत सरकार ने इंस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स की स्थापना एक वैधानिक संस्थान के रूप में मिनिस्ट्री ऑफ कार्पोरेट्स अफेयर्स के तहत की। इसके तहत देश में चार क्षेत्रीय काऊंसिल सक्रिय हैं ताकि संस्थान, इसके छात्रों तथा सदस्यों के मध्य बेहतर सम्पर्क स्थापित किया जा सके।
यही संस्थान कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए कॉस्ट अकाऊंटैंसी कोर्स संचालित करता है। कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट के रूप में कार्य करने के लिए भारत में यही एकमात्र मान्यता प्राप्त योग्यता है। यह कोर्स तीन चरणों में है- फाऊंडेशन कोर्स, इंटरमीडिएट कोर्स तथा फाइनल कोर्स। इसमें थ्यूरी के साथ ही सीनियर मैम्बर्स या किसी कम्पनी में इन्टर्नशिप के रूप में प्रैक्टिकल अभ्यास भी करवाया जाता है।
यह कोर्स आमतौर पर पत्राचार माध्यम से ही किया जाता है। संस्थान के दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई तथा चेन्नई स्थित रीजनल काऊंसिल्स में ओरल कोचिंग का बंदोबस्त भी है परंतु अधिकतर छात्र पत्राचार माध्यम से ही इसे करना पसंद करते हैं। छात्रों को पाठ्य सामग्री के साथ ही असाइनमैंट्स भेजे जाते हैं जिन्हें पूरा करके उन्हें संस्थान को भेजना होता है। इनका विश्लेषण करने तथा मापदंडों के अनुरूप उपयुक्त पाए जाने पर छात्रों को कोचिंग कम्प्लीशन सर्टीफिकेट (सी.सी.सी.) जारी किया जाता है। सी.सी.सी. के आधार पर ही वे परीक्षा में बैठ सकते हैं। यह परीक्षा साल में दो बार होती है।
फाऊंडेशन कोर्स में दाखिले के लिए 12वीं कक्षा पास होना जरूरी है। इसके बाद इंटरमीडिएट कोर्स में दाखिले के लिए फाऊंडेशन तथा फाइनल कोर्स में दाखिले के लिए इंटरमीडिएट कोर्स की परीक्षाएं पास करनी होती हैं। वैसे ग्रैजुएट छात्र सीधे इंटरमीडिएट कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इस दौरान उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के रूप में कुछ सालों की इंटर्नशिप भी करनी होती है।
संस्थान की सदस्यता : फाइनल परीक्षा पास करने के बाद उन्हें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग एवं असिस्टैंटशिप करनी पड़ती है। तीन सालों के अनुभव के बाद वे संस्थान की एसोसिएट मैम्बरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं।
सम्भावनाएं
चूंकि इस पेशे के साथ गहन विश्लेषणात्मक दक्षता एवं बेहद कड़ा प्रशिक्षण जुड़ा है, कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट्स के पास रोजगार के मौकों की कोई कमी नहीं होती है। उन्हें बड़े औद्योगिक घराने नौकरी देते हैं। शुरूआत मैनेजमैंट या अकाऊंट ट्रेनी के रूप में होती है तथा ट्रेनिंग के बाद उन्हें उच्च पदों पर नियुक्ति दी जाती है। वे चीफ अकाऊंट्स अफसर, चीफ फाइनांशियल कंट्रोलर, चीफ इंटरनल ऑडिटर आदि महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हैं। भारत सरकार के इंडियन कॉस्ट अकाऊंट्स सर्विस में नियुक्ति पाने के लिए यू.पी.एस.सी. की परीक्षा पास करनी पड़ती है।
अपनी प्रैक्टिस
कॉस्ट एंड मैनेजमैंट अकाऊंटैंट के रूप में अपनी प्रैक्टिस करने वालों के लिए तरक्की की कोई सीमा नहीं है। इसके तहत वे इन क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं-
1. कॉस्ट ऑडिट
2. स्टॉक ऑडिट
3. ऑडिट ऑफ सैंट्रल वैल्यू एडेड टैक्स क्रैडिट एंड स्पैशल ऑडिट
4. क्लाइंट्स के केस रिप्रैजैंट करना
5. स्टेट सेल्स टैक्स लॉज
6. क्लाइंट्स को अकाऊंटिंग, ऑडिट एवं कंसल्टैंसी आदि से संबंधित सेवाएं देना
संस्थान मुख्यालय
द इंस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वक्र्स अकाऊंटैंट्स ऑफ इंडिया, 12, साद्देर स्ट्रीट, कोलकाता-700016
उत्तर भारतीय रीजनल काऊंसिल
द इंस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वक्र्स अकाऊंटैंट्स ऑफ इंडिया, 3, इंस्टीच्यूशनल एरिया, लोधी रोड, नई दिल्ली-110003