लाभदायक नहीं होती मल्टीटास्किंग

आजकल अनेक लोग मल्टीटास्किंग यानी एक साथ कई कार्य  करने लगे हैं। एक अध्ययन के अनुसार उनमें से अधिकतर इसलिए मल्टीटास्किंग नहीं करते क्योंकि वे इसमें माहिर हैं, दरअसल ऐसा करके उन्हें अच्छा महसूस होता है। अध्ययन में इस बात पर रोशनी डाली गई है कि क्यों अनुत्पादक होने के बावजूद मल्टीटास्किंग इतनी लोकप्रिय है।

शोधकत्र्ताओं ने कॉलेज छात्रों से 28 दिनों तक की गई मीडिया संबंधी गतिविधियों का ब्यौरा देने तथा यह बताने को कहा कि उससे उन्हें क्या कुछ हासिल हुआ। शोध में पाया गया कि मल्टीटास्किंग करते हुए छात्रों को भावनात्मक स्तर पर अच्छा तो महसूस हुआ परंतु इससे उन्हें कोई खास लाभ नहीं मिला बल्कि उनकी पढ़ाई का ही नुक्सान हुआ।

शोध करने वालों का कहना है कि अधिकतर लोगों में यह भ्रम फैला है कि मल्टीटास्किंग उन्हें अधिक उत्पादक बनाती है परंतु असल में वे मल्टीटास्किंग से होने वाली अच्छी अनुभूति की वजह से गलतफहमी में थे। दरअसल, उनकी उत्पादकता में कोई इजाफा नहीं हुआ था बस वे अपने काम से भावनात्मक स्तर पर अधिक संतुष्ट महसूस कर रहे थे।

उदाहरण के लिए जो छात्र पाठ्यपुस्तक पढ़ते हुए टी.वी. देख रहे थे, उन्हें ऐसा करते हुए टी.वी. न देखने वाले छात्रों के स्थान पर कहीं अधिक संतुष्टि का एहसास हो रहा था परंतु उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ऐसा करते हुए वे पढ़ाई के अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सके। उन्हें संतुष्टि का अहसास इसलिए था क्योंकि साथ में टी.वी. देखने से उनकी पढ़ाई मनोरंजक बन गई। गतिविधियों के मिलान ने उन कार्यों को मनोरंजक बना दिया था।

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