छायाचित्रों का स्वर्णिम संसार- फोटोग्राफी


एक अरसा पूर्व तक लोग फोटोग्राफी को एक शैक से अधिक महत्त्व नहीं देते थे। ब्लैक एंड व्हाइट के बाद रंगीन छायाचित्रों के ग्लैमर ने इस क्षेत्र में बहुत कुछ कर गुजरने के अवसर प्रदान कर दिए हैं। फैशन फोटोग्राफरों तथा फोटो पत्रकारों की बढ़ती मांग व इस कला के प्रति विस्तारिता होते क्रेज ने इसे एक पूर्णकालिक कैरियर की गरिमा प्रदान की है। अब आप छायाचित्रों में खोज सकते हैं अपने सुनहरे भविष्य के अक्स।
तेजी से बदलते आज के परिवेश में फोटोग्राफी अपना अहम स्थान रखती है। फोटोग्राफ्स के अभाव में आज कोई भी काम अधूरा-सा समझा जाता है। विवाह समारोह हो अथवा बर्थ-डे फंक्श, सांस्कृतिक कार्यक्रम हो या पब्लिक मीटिंग, राजनैतिक गोष्ठिïयां, बौद्धिक सेमिनार, प्रेस कवरेज अथवा सर्जरी अध्यापन-सभी जगह और सभी मौकों पर फोटोग्राफी अपने महत्त्व का डंका बजवाती रही है। फोटोग्राफी का अविष्कार यूं तो पश्चिमी देशों में हुआ लेकिन आज दुनिया के प्रत्येक देश में इसकी लोकप्रियता को चैलेंज नहीं किया जा सकता।
पेंटिंग, संगीत, मूर्तिकला, ग्राफिक्स, अभिनय आदि कलाओं की भांति फोटोग्राफी भी एक कला है। साहित्यिक रुझान के युवक-युवतियों तथा कल्पनाशील लोगों के लिए इस क्षेत्र में व्यावसायिक तौर पर भारी संभावनाएं हैं। फोटोग्राफी के प्रति नई पीढ़ी का आकर्षण इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में रोमांच और ग्लैमर के साथ-साथ काफी धनार्जन भी किया जा सकता है। सौंदर्य प्रतियोगिताएं तािा फैशन शोज में कामयाबी का पहला चरण फोटोग्राफी ही है। मिस यूनिवर्स, मिस इंडिया तथा मिस वल्र्ड बनने के लिए पहले 'मिस फोटोजनिकÓ के रूप में सफल होना होता है। फोटाग्राफी की बदौलत ही व्यक्ति का आकर्षण कई गुणा बढ़ाया जा सकता है। अंतर्राष्टï्रीय स्तर पर अपने सौंदर्य का हल्ला मचानेवाली रूपसियां यदि सौ-सौ नखरों व हजारों अंदाजोंवाली होती हैं तो उनके फेवरिट फोटोग्राफरों के नाज-नखरे भी कुछ कम नहीं होते। क्योंकि विश्व स्तर पर उनके व्यक्तित्व को चमकाने में फोटोग्राफर्स का महत्वपूर्ण हाथ होता है।
आज  फोटोग्राफी के विधिवत प्रशिक्षण की व्यवस्था है। विभिन्न विश्वविद्यालय, निजी संस्थाओं तथा यू.जी.सी. से मान्यताप्राप्त महाविद्यालय इस कला का व्यावसायिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। इन रोजगारोन्मुखी पाठ्ïयक्रमों की अवधि तीन माह से लेकर तीन वर्ष तक है। इन पाठ्ïयक्रमों में प्रवेश के लिए उच्च शिक्षा तथा ज्यादा उम्र राह का रोड़ा नहीं है। किसी भी उम्र के व्यक्ति इस विधा में निपुणता प्राप्त कर सकते हैं। फोटोग्राफी की सम्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स किया जा सकता है।
इस कोर्स के अंतर्गत फोटोग्राफी की समुन्नत आधुनिक तकनीकों का ज्ञान कराया जाता है। इसके अलावा अनेक संस्थान 'सर्टिफिकेट कोर्सÓ भी संचालित करते हैं। तीन, छह तथा बारह माह के इस कोर्स में इस विद्या की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की जा सकती है। इन कोर्सों के बूते जब आप इस क्षेत्र की मौलिक व बेसिक जानकारी प्राप्त कर लेते हैं तो आप अपना स्टूडियो खोलकर श्वेत-श्याम अथवा रंगीन छायाचित्रों के जरिए यकीनन अपनी आमदनी का श्रीगणेश कर सकते हैं। परंतु फैशन फोटोग्राफी, मॉडलिंग तथा फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में सफलता अर्जित करने के लिए 'डिप्लोमाÓ अथवा 'डिग्री कोर्सÓ विशेष महत्व रखता है। इस कला की तकनीकी बारीकियों, सूक्ष्म फार्मूलों, कलात्मक छायाचित्रों व आकर्षक पारदर्शियों के निर्माण के लिए पूरे समर्पणण् धैर्य व प्रतिभा की आवश्यकता होती है।
एक वर्षीय पाठ्ïयक्रम में छह माह की अवधि 'बेसिक कोर्सÓ के लिए रखी गई है, जबकि शेश छह माह एडवांस कोर्स कराया जाता है। बेसिक कोर्स के तहत उपयुक्त कैमरे का चुनाव, कैमरा हैंडलिंग, लैंसेज, एंगल्स, एक्सपोजर फिल्टर्स, कम्पोजीशन सब्जेक्ट, कलर डेवलपिंग तथा प्र्रिंटिंग आदि की बारीकियों का ज्ञान कराया जाता है। आज अनेक विश्वविद्यालयों में फोटोग्राफी के लिए सर्टिफिकेट तथा डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध हैं। किसी भी संकाय अथवा श्रेणी में इंटरमीडिएट युवक-युवती इन कोर्सों में प्रवेश की पात्रता रखते हैं। अनेक निजी संस्थान आठवीं-दसवीं कक्षा उत्तीर्ण लोगों को भी प्रवेश देते हैं। किसी भी प्रशिक्षु के लिए हिंदी तथा अंग्रेजी भाषा की जानकारी विशेष अहमियत रखती है।
प्रशिक्षण के दौरान लगभग हरेक संस्थान में अंग्रेजी भाषा का बहुतायत में प्रयोग होता है। फोटोग्राफी की समसत किताबेंं अंग्रेजी भाषा में भी उपलब्ध हैं। यही नहीं प्रशिक्षण पाठ्ïयक्रम में प्रयुक्त होनेवाले तकनीकी अंग्रेजी शब्दों का अभी तक हिंदी अनुवाद उपलब्ध नहीं होने की वजह से भी अंग्रेजी भाषा की समझ परिहार्य बन चुकी है। फोटोग्राफी से संबंधित कुछ पुस्तकें हिंदी लेखकों ने भी तैयार की हैं, जिनका अध्ययन इस क्षेत्र में पदार्पण करनेवालों के लिए लाभदायक साबित होगा।
फोटोग्राफी से संबंधित डिग्री कोर्स तीन वर्ष में किया जा सकता है। कई मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बी.ए. फोटोग्राफी ऑनर्स कोर्स भी किया जा सकता है। जिसमें प्रवेश के लिए 10 + 2 अथवा इंटरमीडिएट किसी भी संकाय में 50 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
इस व्यावसायिक कोर्स को करने का एक लाभ यह भी होगा कि स्नातक होने के पश्चात आप भारतीय सिविल सेवा, पी.सी.एस. तथा बैंकिंग आदि क्षेत्रों की अनेक प्रतियोगिताओं में भी किस्मत आजमा सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि आज लगभग प्रत्येक राज्य में एक या एक से अधिक ललित कला महाविद्यालय खुल चुके हैं। ये महाविद्यालय राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। जहां चित्रकला, मूर्तिकला, एप्लाइड आर्ट आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से देश के अधिकांश फाइन आट्ïर्स कॉलेजों में फोटोग्राफी का भी तकनीकी पाठ्ïयक्रम संचालित किया जा रहा है। इन व्यवसायिक कोर्सों में प्रवेश लिय जा सकता है। कई सरकारी संस्थाओं में चयन परीक्षा का भी प्रावधान है। कई स्थानों पर साक्षात्कार के बाद प्रवेश दिया जाता है। विशेषकर विश्वविद्यालयों तथा सरकारी फोटोग्राफिक संस्थाओं में चयन परीक्षा की भी प्रावधान है। कई स्थानों पर साक्षात्कार के बाद प्रवेश दिया जाता है। विशेषकर विश्वविद्यालयों तथा सरकारी फोटोग्राफिक संस्थाओं में चयन परीक्षा, साक्षात्कार का प्रावधान है। अनेक स्तरीय व ख्याति प्राप्त संस्थान ऐसे भी हैं जहां 'पहले आओ-पहले पाओÓ के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। ऐसे संस्थान सिर्फ साक्षात्कार लेते हैं। कहीं-कहीं स्कूल मैरिट के आधार पर भी प्रवेश संभव है। प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को ये संस्थान वीरयता क्रम में प्रवेश स्वीकृत करते हैं। किसी भी संकाय से 10 + 2 अथवा इंटर उत्तीर्ण युवक-युवतियां त्रिवर्षीय डिग्री कोर्स में प्रवेश ले सकते हंै।
फोटोग्राफी से संबंधित समस्त विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया आमतौर पर जुलाई-अगस्त में प्रारंभ होती है। यदि सरकारी संस्थाओं अथवा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री कोर्स में प्रवेश नहीं मिले तो फोटोग्राफी का प्रशिक्षण निजी क्षेत्र में अथवा स्तरीय, विश्वसनीय संस्थानों में भी लिया जा सकता है।
आज ऐसे अनेक प्रशिक्षण केंद्र अस्तित्व में हैं जहाँ फोटोग्राफी के सभी दांवपेचों को आसानी से सीखा-समझा जा सकता है। यदि आप कहीं नौकरी आदि करने में विश्वास नहीं करते तो स्वयं का स्टूडियो खोलकर अच्छा-खासा धन अर्जित कर सकेते हैं। सामान्यत: अधिकाधिक लोग फोटो खिंचवाने के लिए नजदीक के फोटो स्टूडियो ही जाते हैं।
आज पत्रकारिता की दुनिया में फोटोग्राफी का महत्त्व किसी की भी नजरों से छिपा नहीं है। पिं्रट मीडिया के अंतर्गत आनेवाले समाचार-पत्र, पत्रिकाएं तथा पुस्तकें उच्च तकनीक तथा प्रकाशन की गुणवत्ता के कारण अच्छा-खासा बाजार कब्जाए बैठी हैं। इन सभी की सफलता में उच्चकोटि की फोटोग्राफी का हाथ है।
लगभग प्रत्येेक संस्थान, प्रतिष्ठïान अपनी जरूरत के मुताबिक स्टाफ फोटोग्राफर्स रखता है लेकिन फिर भी बाहर से मंगाए गए छायाचित्रों के बिना उनका काम चल ही नहीं सकता। वैसे भी कोई कितना भी बड़ा संस्थान क्यों न हो प्रत्येक शहर व स्थान पर अपने वेतनभागी कर्मचारी नहीं रख सकता। इस सारी कमी की पूर्ति फ्री-लांसिंग करनेवाले फोटो पत्रकार करते हैं।
दरअसल, जो काम एक संवाददाता करता है वही काम फोटोग्राफर भी करता है। फर्क इतना-सा है कि पत्रकार 'शब्दशिल्पीÓ होता है। वह अक्षर, शब्दों व वाक्यों के मासध्यम से समाचार प्रस्तुत करता है जबकि फोटो जर्नलिस्ट समूचे घटनाक्रम को कैमरे की आँख से देखता है। फोटोग्राफी के जरिए फोटो फीचर के रूप में घटना के ज्यों के त्यों दिए गए चित्र अधिक प्रभाव छोड़ते हैं। एक बहुप्रचलित सूक्ति के मुताबिक एक बढिय़ा फोटोग्राफ दो हजार शब्द सीमावाली खबर से अधिक प्रभावी होता है। शब्दों के माध्यम से की गई रिपोर्टिंग पर अविश्ïवास का प्रश्रचिह्नï लग सकता है लेकिन छायाचित्रों के द्वारा की गई पत्रकारिता की विश्वसनीयता तथा प्रमाणिकता को चैलेंज नहीं किया जा सकता। क्योंकि छायाचित्र यथार्थ का प्रतिबिंब होते हैं।
प्रशिक्षण संस्थान
फग्र्युसन कॉलेज, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे (महाराष्टï्र)
बी. जे.बी. कॉलेज, उत्कल वि.वि. भुवनेश्वर (उड़ीसा)
गवर्नमेंट माूडल साइंस कॉलेज, जीवाजी विश्विद्यालय, ग्वालियर (म.प्र.)
इंडो-अमेरिकन फोटोग्राफिक सोसाइटी, किताब महल 5-डी, सुखाडवाल मार्ग, फोर्ट, मुंबई-400001
सोसाइटी ऑफ फोटोग्राफी एंड फाइन आट्र्ïस 21/34 नवाबगंज, कानपुर-208002 (उ.प्र.)
इलाहाबाद विश्ïवविद्यालय, इलाहाबाद, 211002 (उ.प्र.)
गोरखपुर, विश्वविद्यालय, गोरखपुर 273009 (उ.प्र.)
फोटोग्राफिक सोसाइटी ऑफ बिहार, बी.के. सिन्हा 9/4 आर्य कुमार रोड, राजेंद्र नगर, पटना (बिहार)
रांची पिक्टोरियलिस्ट स्टूडियो, दि एवेन्यू मेन रोड, रांची (बिहार)
फोटोग्राफिक सोसाइटी ऑफ इंडिया, 195 डॉ. डी. एन. रोड, सेंट्रल कैमरा के ऊपर, 5 वां माला फोर्ट, मुंबई-400001
आंध्र प्रदेश फोटोग्राफर्स सोसाइटी, तुलसी 11/2 बेगमपेट, हैदराबाद 500016 (आंध्र प्रदेश)
जे.जे. स्कूल ऑफ आट्ïर्स, मुंबई
आंध्र प्रदेश स्टेट अकादमी ऑफ फोटोग्राफी, प्रेमबाग एच. नं. 8-2-334 रोड नं. 12, बंजारा हिल्स, हैदराबाद-500016 (आंध्र प्रदेश)
कैमरा क्लब, असम पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज, डेगन-785614
चंडीगढ़ कैमरा क्लब, 2010 सेक्टर 15-सी, चंडीगढ़-160017
एमेच्योर फोग्राफिक सासाइटी यी-डी.डी.ए. फ्लैट, सफदरगंज एन्क्लेव नई दिल्ली-110016
फोटोग्राफी एक ऐसा कैरियर है जिसका दायरा अत्यंत वृहद है। इस क्षेत्र में मानवीय मूल्यों और सामाजिक संस्कारों से जुडऩे का बहुत अच्छा अवसर मिलता है। क्योंकि समाज के सभी वर्गों से इसका सीधा संबंध होता है। इसलिए इस पेशे में भरपूर सम्मान है और ग्लैमर की तो कोई सीमा ही नहीं। देश के विविध भागों तथा मनोरम स्थलों, पर्यटन केंद्रों, मशहूर दर्शनीय स्थलों, सांस्कृतिक केंद्रो की कवरेज करना अपने आप में एक असीम आनंद की अनुभूति देता है।

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