सीखें खुद को ‘स्विच ऑफ’ करना

बेशक कहा जाता है कि अच्छे दिनों का फायदा जरूर उठाना चाहिए परंतु ऐसा करना हमेशा संभव नहीं होता। इसी तरह हर समय एक समान जोश तथा ध्यान से काम भी नहीं किया जा सकता है। परेशान न हों क्योंकि कभी-कभार खुद को आराम देना अपराध नहीं होता। इसके अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं-

सेना तथा प्रांतीय टीमों के लिए कमाल की हॉकी खेलने के बाद ध्यानचंद 19 फरवरी 1928 के दिन खर्राटे भरते हुए सो रहे थे। इसी दिन राष्ट्रीय हॉकी टीम की घोषणा होनी थी। उन्हें टीम में चुना गया और एम्सटर्डम ओलिम्पिक्स में भारत ने स्वर्ण पदक जीता जबकि कोई टीम हमारे खिलाफ एक भी गोल नहीं कर सकी।  1948 में एटॉमिक एनर्जी कमीशन की स्थापना हुई तथा होमी जहांगीर भाभा को इसका चेयरमैन नियुक्त किया गया। 18 मई 1974 को पोखरण में परमाणु परीक्षण के साथ भारत दुनिया की छठी परमाणु शक्ति बना। अत्यधिक व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद भाभा कुशल चित्रकार थे। उनके बनाए पैंसिल स्कैच काफी मशहूर रहे।

करियर के 50 सालों के दौरान टाटा घराने का नेतृत्व जे.आर.डी. टाटा के हाथों में रहा, जिसे उन्होंने अत्यधिक तरक्की दिलाई। जे.आर.डी. दफ्तर में काफी समय बिताते थे परंतु काम से ब्रेक लेने के लिए वह गोल्फ खेला करते और घर पर बने अपने वर्कशॉप में मिनी प्लेन्स की मुरम्मत करते। जब उनकी पत्नी थैले आघात के बाद गम्भीर रूप से बीमार पड़ गईं तो उन्होंने गोल्फ के स्थान पर उनके पास बैठ  कहानियां पढ़ कर सुनाना शुरू कर दिया था।

1923 में देशबंधु चितरंजन दास के स्वराज दल ने बंगाल लैजिस्लेटिव काऊंसिल चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल की। कलकत्ता कार्पोरेशन चुनावों में भी दास तथा उनके साथी आसानी से जीते। उन्हें मेयर तथा सुभाषचंद्र बोस को चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर बना दिया गया परंतु सुभाष को एक यूरोपीय की हत्या का षड्यंत्र रचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। तब दास ने इसके विरोध में अनेक बैठकों का आयोजन किया। लगातार काम का असर उनके स्वास्थ्य पर होने लगा तो अपने अंतिम दिनों में आराम के लिए वह दार्जीलिंग चले गए।  उपरोक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि आपके मोबाइल फोन की ही तरह कभी-कभार आपका भी ‘स्विच ऑफ’ होना भी आवश्यक है।

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