भाग्य को सौभाग्य में बदलने का मार्ग

भागवत महापुराण में कहा गया है कि आप चाहते हैं कि आपका भाग्य फले, भाग्य सौभाग्य बन जाए तो 6 चीजें अपनाएं। सबसे पहली चीज है पुरुषार्थ। पुरुषार्थ लगातार कीजिए, काम से जी चुराकर मत बैठें। हाथ जोडऩे से ही बात नहीं बनती, पुरुषार्थ भी जरूरी है। दूसरी चीज है हिम्मत। हिम्मत कभी नहीं छोडऩा, साहस बनाए रखना। जीवन में समस्याएं तो पग-पग पर हैं, निराश होकर न बैठें, साहस के साथ समस्या का सामना करें।

भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जीवन में जागना है, भागना नहीं। विषाद को प्रसन्नता में, कायरता को वीरता में बदलो। वीर तो एक बार मरकर वीरगति को प्राप्त करता है, कायर तो दिन में हजार बार मरता है। जो व्यक्ति आलस्य में सोया पड़ा है उसके लिए कलियुग है, जिसने अंगड़ाई लेनी शुरू की उसके लिए द्वापर युग है, जो उठकर खड़ा हो गया उसके लिए त्रेता युग है और जो कार्य में लग गया उसके लिए सत्युग शुरू हो गया तथा उसका भाग्य सौभाग्य में बदल गया। बुद्धि से कार्य करें। योजनाबद्ध तरीके से कार्य में लगें और सोच-समझकर बुद्धि द्वारा कार्य करें। छोटी-सी गलती की सजा बहुत देर तक भोगनी पड़ती है। गलती छोटी हो या बड़ी आपकी पूरी योजना को नीचे गिरा सकती है इसलिए पूर्ण सावधानी बहुत जरूरी है।

शक्ति संगठित करके कार्य में जुट जाइए। कार्य के लिए एड़ी से चोटी तक का पूरा जोर लगा दीजिए। जिंदगी की यात्रा में छोटे से छोटा गरीब व्यक्ति भी काम आएगा। पैसे देकर काम करवाने के साथ प्यार के दो बोल भी चाहिए, इससे इंसान पूरी ताकत लगाकर आपके साथ खड़ा हो जाएगा।

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