एनवॉयरनमेंट के टॉप करियर

एनवॉयरनमेंट के टॉप करियर
फॉरेस्ट्री
फॉरेस्ट्री के तहत पेडों की सुरक्षा, ट्री-फॉर्मिग जैसी कोर्सेज आती हैं। फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी से पास इंटरमीडिएट कैंडिडेट्स बीएससी इन फॉरेस्ट्री की राह चुन सकते हैं। मास्टर लेवल पर इसका फॉरेस्ट मैनेजमेंट, फॉरेस्ट इकोनॉमी, वुड सांइस टेक्नोलॉजी, फॉरेस्ट मैनेजमेंट जैसे विषयों में क्लासिफिकेशन हो जाता है। भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, फॉरेस्ट मैनेजमेंट में कई कोर्स ऑफर करता है। इस क्षेत्र में बैचलर डिग्री रखने वाले कैंडिडेट्स यूपीएससी के इंडियन फॉरेस्ट सर्विसेज एग्जाम की भी तैयारी कर सकते हैं।
एनवॉयरनमेंट मैनेजमेंट
यह फील्ड उन स्टूडेंट्स के लिए है जो पर्यावरण से जुडी विभिन्न संस्थाओं के प्रोजेक्ट्स को प्रबंधक के तौर पर पूरा करना चाहते हैं। इन कोर्सेस के तहत छात्रों को एनवॉयरमेंटल मैनेजमेंट के सिद्धांतों, पर्यावरण पर प्रभाव, पर्यावरण काूनन, वेस्ट मैनेजमेंट के बारे में पढाया जाता है। यहां गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी हरियाणा, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जैसे संस्थान कोर्स ऑफर करते हैं।
प्लांट पैथोलॉजी
इस फील्ड में पौधों को होने वाली बीमारियों, हानिकारक पेस्टीसाइड्स के इस्तेमाल से पैदा हुई परेशानियों और बैक्टीरिया व फंगस से निपटा जाता है। स्पेशलाइजेशन की बात करें तो इस क्षेत्र में बीएससी डिग्री कोर्स पॉपुलर हैं। माइक्रोबायोलॉजी, बॉटनी, जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी के बैचलर कोर्सो में भी आपको इस विषय का जिस्ट मिलता है। ग्रेजुएशन के बाद आपके पास मास्टर्स व पीएचडी के अलावा सरकारी नौकरियों/ यूनिवर्सिटीज में काम के मौके होते हैं। यहां रिसर्च एंव डेवलेपमेंट के मामले में इंडियन फायटो पैथोलॉजिकल सोसायटी पेशेवर भूमिका निभाती है।
एक्वाकल्चर
एक्वाकल्चर में सागर, नदियों व ताजे जल के कंजरवेशन, उनके मौलिक रूप व पारिस्थितिकी की सुरक्षा से संबंधित स्टडी की जाती है। इन दिनों घटते जल स्रोतों, कम होते पेय जल संसाधनों के चलते इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की मांग में इजाफा हुआ है। इस फील्ड में बीएससी व एमएससी इन एक्वा साइंस जैसे कोर्स मुख्य हैं, जिनमें प्रवेश के लिए आपके पास 10+2 में बायोलॉजी होना अनिवार्य है। यदि आप भी यहां एंट्री लेना चाहते हैं तो शैक्षिक योग्यता के साथ जल संरक्षण व उसके पारिस्थितिकीय तंत्र के बारे में गहरा रुझान आवश्यक है।
इंटेमोलॉजी
इंटेमोलॉजी जूलॉजी के ही एक सब्जेक्ट की तरह पढा जाता है। लेकिन बढते स्कोप के दौर में इसे अलग ब्रांच के तौर पर पहचान मिली है। इसमे कीटों, पतंगों, जमीन पर रेंगने वाले जीवों के बारे में जानकारियां जुटाई जाती हैं। मार्फोलॉजी, टॉक्सोनॉमी, बिहेवियर, इकोलॉजी जैसे नए सेगमेंट्स इंटेमोलॉजी में ही आते हैं।
बायो-टेक्नोलॉजी
बायोटेक्नोलॉजी मुख्यत: रिसर्च बेस्ड सबजेक्ट है। जहां बायोलॉजी और टेक्नोलॉजी दोनों की स्टडी की दरकार होती है। इसमें फसल, मानव स्वास्थ्य, दवा निर्माण, रिसर्च, पशु प्रजनन, खाद्य पदार्थो का निर्माण, संरक्षण जैसी चीजें आती हैं। देश में कई संस्थान बीएससी बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स चलाते हैं। कोर्स में एंट्री के लिए साइंस ग्रुप से 12वीं होना जरूरी है। साइंस, इंजीनियरिंग, मेडिसिन में ग्रेजुएट सभी स्टूडेंट्स एमएससी इन बायो-टेक्नोलॉजी कोर्स की पात्रता रखते हैं।
एनवॉयरनमेंट इंजीनियरिंग
एनवॉयरनमेंट कंजर्वेशन के क्षेत्र में बढती टेक्नोलॉजी के एक्सपेरिमेंट्स सेआज एनवॉयरनमेंट इंजीनियर्स की मांग बढी है। अलग-अलग सेक्टर्स के कई इंजीनियर्स आज एनवॉयरनमेंट इंजीनियरिंग में अपना योगदान दे रहे हैं। इनमें एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, बायोलॉजिस्ट केमिकल इंजीनियरिंग, जियोलॉजिस्ट, हाइड्रोजियोलॉजिस्ट, वाटर ट्रीटमेंट कारगर भूमिका निभाते हैं।
दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस इस फील्ड में 4 वर्षीय एमटेक कोर्स चलाते हैं।
एनवॉयरनमेंट लॉ
इसमें एनवॉयरनमेंटल पॉलिसीज, उनके इफेक्ट्स और इम्प्लीमेंटेशन के बारे में पढाया जाता है। ये क्षेत्र खास तौर पर उन स्टूडेंट्स के लिए हैं, जो एनवॉयरनमेंटल पॉलिसीज से संबंधित कानून के जरिए अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, भोपाल,
सिंबॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, पुणे, नेशनल लॉ स्कूल, बैंगलुरु इस फील्ड में कोर्स चलाते हैं।
खास कोर्सेज खास मुकाम
एनवॉयरनमेंट पर पॉल्यूशन के बढते असर के चलते कई ऐसे कोर्सेज भी आ गए हैं, जो स्पेशलाइच्ड होने के साथ आज के वक्त के मुताबिक डिजाइन किए गए हैं। यही वजह कि ये हॉट च्वाइस बने हुए हैं..
एमएससी इन क्लाइमेट चेंज
यह एशिया में अपनी तरह का पहला कोर्स है जिसे सेंटर फॉर एनवॉयरनमेंटल एजुकेशन व गुजरात यूनिवर्सिटी के सहयोग से तैयार किया गया है। इस कोर्स में छात्रों को क्लाइमेट चेंज से संबंधित विषयों की विस्तृत जानकारी दी जाती है। यह कोर्स दो साल का है। फिलहाल गुजरात यूनिवर्सिटी में एमएससी इन क्लाइमेट चेंज इंपेक्ट मैनेजमेंट नाम से यह कोर्स चलाया जा रहा है।
एनवॉयरनमेंटल इकोनॉमिक्स
इस सबजेक्ट में एनवॉयरनमेंट पर सरकारी व औद्योगिक क्षेत्र की एनवॉयरनमेंटल पॉलिसीज के पडने वाले इकोनॉमिक इफेक्ट्स की स्टडी की जाती है। अन्य शब्दों में कहें तो कोपेनहेगन सम्मेलन में होने वाले समझौतों और उसके असर के आकलन के लिए एनवॉयरनमेंटल इकोनॉमिस्ट की अहम भूमिका होगी। यह कोर्स मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, चेन्नई, यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद, मोहन लाल सुखाडिया यूनिवर्सिटी, उदयपुर, अवधेश प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी रीवा जैसे कुछ संस्थान कोर्स ऑफर करते हैं।
Books On Cycle
सोचिए कि सुबह सात बजे अचानक घर की घंटी बजे और दरवाजा खोलते ही एक पब्लिशिंग कंपनी का मैनेजिंग एडिटर आपके घर साइकिल से बुक की डिलीवरी करने आ जाए, तो शायद आपको सरप्राइज लगेगा। लेकिन यह सच है। लेफ्टवर्ड बुक्स के ऑनर सुधनवा देशपांडे खुद संडे को साइकिल से लोगों के घर बुक्स की डिलीवरी करते हैं। सुधनवा देशपांडे एक कंपनी के ऑनर होने के अलावा फेमस थियेटर ऑर्टिस्ट भी हैं और पिछले कई सालों से प्रसिद्ध थियेटर ऑर्टिस्ट सफदर हाशमी के थिएटर ग्रुप जन नाट्य मंच में एक्टर और डॉयरेक्टर हैं। उन्होंने बकायदा दिल्ली में बुक्स-ऑन-ए-बाइक कैंपेन चलाया हुआ है। देशपांडे कहते हैं उनका शादीपुर के पास पब्लिशिंग हाउस है, जिसमें कैफे के साथ एक बुकस्टोर भी है। जो लोग ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, वे उसकी खुद होम डिलिवरी करने जाते हैं। वह बताते हैं कि सुबह 7 से 10 बजे तक वे पूरी दिल्ली में साइकिल से बुक्स की डिलिवरी करते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें डिलिवरी ब्वॉय बनने में भी कोई शर्म नहीं आती। ऐसा नहीं है उनका इसके पीछे कोई कॉमर्शियल एजेंडा है बल्कि वे दिल्ली को इको फ्रेंडली होने का संदेश देना चाहते हैं। वह कहते हैं कि उनके पास फोर व्हीलर भी है, लेकिन साइकिल इको-फ्रेंडली भी है और इसे एक्सरसाइज भी होती है। वह कहते हैं कि भारत अब युवाओं का देश है और साइकिलिंग के फायदों के बारे में बताने के लिए यह उपयुक्त समय है कि उन्हें इको-फ्रेंडली होने के लिए प्रेरित किया जाए। उनका कहना है कि लोग आसपास जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करें। वह कहते हैं कि कार-बाइक्स प्रदूषण फैलाती हैं और जाम लगता है। लेकिन साइकिल से हमारी सेहत बनने के साथ पर्यावरण की भी सेहत बनती है।
एक्सप‌र्ट्स टॉक
दिमाग से करना होगा तकनीक का इस्तेमाल
एनवॉयरनमेंट कंजर्वेशन को लेकर देशभर के इंस्टीट्यूशंस में तमाम कोशिशें हो रही हैं। कुछ ऐसे ही इनोवेशंस आईआईटी दिल्ली में भी हो रहे हैं। जहां इनोवेटर्स को आगे लाने के लिए तमाम तरह की कोशिशें की जा रही हैं। बता रहे हैं आईआईटी दिल्ली के डीन -रिसर्च एंड डेवलेपमेंट सुनीत तूली
डीन, आर एंड डी, आईआईटी, दिल्ली
दिमाग से करना होगा तकनीक का इस्तेमाल
नए-नए इनोवेटिव आइडियाज को आगे बढाने में आईआईटी दिल्ली किस तरह स्टूडेंट्स की हेल्प करता है?
दरअसल, यह स्टूडेंट्स की प्रतिभा है कि वे इतने बेहतरीन आइडियाज न केवल लाते हैं बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने में भी सहयोग देते हैं। आईआईटी की पूरी कोशिश होती है कि इन विचारों को आगे बढाने में बेहरीन इनफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराए साथ ही संसाधनों की कमी आडे न आने दी जाए। आखिर स्टूडेंट्स और इंस्टीट्यूट के सहयोग से ही बेहतर रिजल्ट मिलते हैं।
किसी स्टूडेंट के इनवेंशन की सक्सेस बाजार के हाथों में होती है। प्रोडक्ट को कॉमर्शियली सक्सेसफुल बनाने के लिए क्या स्ट्रेटजी बनाते हैं?
आइडियाज के जरिए क्रिएशन एक अलग चीज है और उसका मार्केट में सफल या असफल होना दूसरी चीज है। एक इंटेलेक्चुअल से उम्मीद नहीं की जा सकती कि वो मार्केट का रुख देख कर अपने विचारों को मोड-तोड देगा। वैसे भी मार्केट में कामयाब होने के लिए बहुत सी चीजों की दरकार होती है। शायद यही कारण है कि आज बाजार में लॉन्च होने वाले हर दस प्रोडेक्ट्स में एक ही सफल होता है। फिर भी हमारा प्रयास है कि स्टूडेंट्स की क्रिएशन पॉवर को कॉमर्शियली भी सक्सेसफुल बनाया जाए। जहां तक बात स्टूडेंट्स के इनोवेंशंस की है, तो आईआईटी में इसके लिए टेक्नोलॉजी बिजनेस इनकंबेशन यूनिट बनाई गई है, जो स्टूडेंट्स के इनोवेशंस को शुरुआती दो सालों तक कॉमर्शियली प्रमोट करने में मदद करती है। इस दौरान उनके प्रोडक्ट्स को पूरी फाइनेंशियल मदद दी जाती है। हमारी कोशिश होती है कि स्टूडेंट्स के प्रोडक्ट्स को मार्केट में नाम और दाम दोनों मिले।
टेक्नोलॉजी किस तरह से हमें इको-फ्रेंडली बनाने में हेल्प कर सकती है?
मेरा हमेशा से ही सोचना रहा है कि तकनीक के जरिए विकास को नई दिशा दी जा सकती है। लेकिन इसके लिए टेक्नोलॉजी का इंटेलिजेंटली इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। बायो फ्यूल प्लांट से लेकर सोलर पैनल, एंटी ग्लोबल वार्मिग, हाइड्रोजन चलित आटो जैसी न जाने कितनी चीजें हैं जो आज केवल और केवल टेक्नोलॉजी के बूते ही बनाई और कामयाब की जा सकी हैं।
अभीसबजेक्ट के तौर पर एनवॉयरनमेंट साइंस को वो पॉपुलरिटी हासिल नहीं हो सकी है जो कुछ अन्य सब्जेक्ट्स को मिली है?
मैं इस बात से सहमत हूं। लेकिन बात यह है कि किसी भी सब्जेक्ट की मान्यता के लिए उसका स्टैंडर्डाइजेशन होना अनिवार्य है। स्टैंडर्डाइजेशन के क्षेत्र में एनवॉयरनमेंट साइंस अभी थोडा पीछे है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
संस्कार News
संस्कार News

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume