यदि
तुम इस बार क्लास में फर्स्ट रैंक पर नहीं आई, तो याद रखना कि तुम्हारे
सारे गिफ्ट्स कैंसल..., गोवा का ट्रिप तो कैंसल ही समझना यदि तुमने टॉप
नहीं किया..., देखो बेटा कम नंबर लाकर हमारी नाक मत कटवा देना, यदि 90
प्रतिशत नहीं आए तो मनपसंद कालेज में एडमिशन नहीं मिलेगा..., ये सब एग्जाम
से पहले हर पेरैंट्स को कहते हुए सुना जा सकता है, जो बच्चों में एग्जाम की
टैंशन दोगुना कर देते हैं।
वास्तव में परीक्षा की घड़ी ऐसा समय होता है, जब बच्चे हों या बड़े हर कोई घबरा जाता है। छोटे बच्चों के लिए परीक्षा किसी हौव्वे से कम नहीं होती। एक ओर पेरैंट्स की उनसे अपेक्षाएं और दूसरी ओर उनका चंचल मन, दोनों उनके लिए दुविधा का कारण बन जाते हैं। परीक्षा में जहां तनाव के कारण बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता, वहीं दूसरी ओर बच्चों के लिए परीक्षा में अच्छे अंक लाना भी मजबूरी बन जाती है।
सफलता का मूल मंत्र
1 सबसे पहले पढ़ाई करने के लिए एक टाइम टेबल बनाएं और उसी के अनुसार अपनी पढ़ाई करें।
2 पढ़ाई करते वक्त एकाग्रता होनी बहुत जरूरी होती है। इसके लिए सुबह जल्दी उठ कर ध्यान करें, जिससे आपकी एकाग्रता बनी रहे।
3 हर रोज कोई टैस्ट पेपर बना कर एक निर्धारित समय सीमा में उसको हल करने का प्रयास करें। उसके बाद अपनी उत्तर पुस्तिका को जांच कर अपना मूल्यांकन स्वयं करें।
4 लगातार घंटों बैठ कर पढ़ाई करने से बेहतर है कुछ समय एकाग्रचित्त होकर पढ़ाई की जाए।
5 पढ़ाई के बीच-बीच में दो-तीन घंटे बाद एक ब्रेक अवश्य लें।
6 देर रात तक पढऩे की अपेक्षा सुबह जल्दी उठ कर पढ़ाई करें।
7 आप चाहें तो अपने दोस्तों के साथ बैठ कर भी पढ़ाई कर सकते हैं।
8 पढ़ाई के दौरान और परीक्षा के लिए जाते समय कभी भी ऐसे नकारात्मक विचार मन में न आने दें कि जो पेपर में आएगा वह हल कर पाऊंगा या नहीं।
9 पूरे आत्मविश्वास के साथ पेपर देने जाएं। इससे पेपर हल करने में काफी मदद मिलेगी।
10 हमेशा यह सोचें कि मेहनत करके आप भी अव्वल आ सकते हैं।
11 परीक्षा में सबसे पहले पूरा प्रश्नपत्र पढ़ें और उसके बाद ही उसे हल करें। हड़बड़ी में प्रश्नपत्र हल करने की भूल न करें।
12 जिस प्रश्न को हल कर रहे हैं, उस पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित रखें। इस दौरान अन्य प्रश्नों के बारे में विचार न करें, परंतु समय का ध्यान जरूर रखें।
न बनाएं दबाव
अपने बच्चे की क्षमता, रुचियों, इच्छा और क्लास में उसकी पोजीशन जानने की पेरैंट्स की कोई इच्छा नहीं रहती तथा बच्चे पर हर संभव तरीके से दबाव डाला जाता है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चा बीमार भी हो सकता है तथा फेल होने पर घातक कदम तक उठा लेता है। अत: बच्चे को बिना किसी दबाव के इम्तिहान देने देना ही उसे तनाव मुक्त बनाता है।
उस पर कभी ज्यादा अंक लाने या किसी अन्य बच्चे जैसा बनने का दबाव न डालें। हर बच्चा अपने आप में विलक्षण होता है, बस उसे पहचानने की कोशिश करें। उसे आपके विवेकपूर्ण मार्गदर्शन की आवश्यकता है, इसलिए उसकी असफलताओं पर उसे धिक्कारें नहीं, बल्कि विषम परिस्थितियों में उसे संभले रहने की शिक्षा दें।
प्रेरित करें
हर बच्चे की बुद्धि, योग्यता और दक्षता भिन्न-भिन्न होती है, इसलिए तुलना विपरीत परिणाम सामने ला सकती है। किसी बच्चे पर अधिक अंक लाने के दबाव का परिणाम अक्सर उल्टा होता है। अपने बच्चे को परीक्षा के लिए अधिक से अधिक तैयारी करने के लिए प्रेरित करना तो अच्छी बात है, परंतु उसके लिए लक्ष्य निर्धारित कर प्राप्त करने का दबाव बनाना गलत है।
इससे वह प्रेरित होने की अपेक्षा कुंठित ज्यादा होता है। यदि बच्चा पेरैंट्स की इच्छानुसार परिणाम नहीं ला पाता तो उसे प्रताडि़त न करें। इस बात का विश्वास रखें कि हर बच्चा अपने पेरैंट्स की अपेक्षाओं पर हमेशा खरा उतरने का प्रयास करता है।
बच्चे का संबल बनें
जब वह ऐसा नहीं कर पाता तो वह खुद ही बहुत निराशा, हताशा और आत्मग्लानि महसूस करता है। इस नाजुक समय में बच्चे को पेरैंट्स से संबल की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में बच्चे को अपमानित करने से बचें, क्योंकि यह वह संवेदनशील स्थिति होती है कि बच्चा आत्महत्या जैसे घातक कदम तक उठा सकता है।
बदलें दृष्टिकोण
यदि आशानुरूप परिणाम नहीं आए, तो उसे धीरज बंधाएं और समझाएं कि कोई एक परीक्षा उनके लिए उससे महत्वपूर्ण नहीं है। अभी जीवन बहुत बड़ा है और उसे खुद को सिद्ध करने के अनेक मौके मिलेंगे। अभिभावकों का यह दृष्टिकोण बच्चे को अच्छा प्रदर्शन करने को प्रेरित करेगा।
रखें ध्यान
1 हर बच्चा किसी विशेष प्रतिभा के साथ पैदा होता है। इस बात को समझें व बच्चे को भी समझाएं।
2 अपने बच्चे को कामयाब नहीं, काबिल बनने के लिए पढऩे को कहें।
3 उसे अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का साधन मत समझें।
4 उसकी रुचियों और आदतों को समझते हुए उसे समझने का प्रयास करें तथा उसी के अनुरूप करियर चयन में उसका साथ दें।
5 किसी बात को उस पर थोपें नहीं, बल्कि उसे सिर्फ सुझाव दें।
वास्तव में परीक्षा की घड़ी ऐसा समय होता है, जब बच्चे हों या बड़े हर कोई घबरा जाता है। छोटे बच्चों के लिए परीक्षा किसी हौव्वे से कम नहीं होती। एक ओर पेरैंट्स की उनसे अपेक्षाएं और दूसरी ओर उनका चंचल मन, दोनों उनके लिए दुविधा का कारण बन जाते हैं। परीक्षा में जहां तनाव के कारण बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता, वहीं दूसरी ओर बच्चों के लिए परीक्षा में अच्छे अंक लाना भी मजबूरी बन जाती है।
सफलता का मूल मंत्र
1 सबसे पहले पढ़ाई करने के लिए एक टाइम टेबल बनाएं और उसी के अनुसार अपनी पढ़ाई करें।
2 पढ़ाई करते वक्त एकाग्रता होनी बहुत जरूरी होती है। इसके लिए सुबह जल्दी उठ कर ध्यान करें, जिससे आपकी एकाग्रता बनी रहे।
3 हर रोज कोई टैस्ट पेपर बना कर एक निर्धारित समय सीमा में उसको हल करने का प्रयास करें। उसके बाद अपनी उत्तर पुस्तिका को जांच कर अपना मूल्यांकन स्वयं करें।
4 लगातार घंटों बैठ कर पढ़ाई करने से बेहतर है कुछ समय एकाग्रचित्त होकर पढ़ाई की जाए।
5 पढ़ाई के बीच-बीच में दो-तीन घंटे बाद एक ब्रेक अवश्य लें।
6 देर रात तक पढऩे की अपेक्षा सुबह जल्दी उठ कर पढ़ाई करें।
7 आप चाहें तो अपने दोस्तों के साथ बैठ कर भी पढ़ाई कर सकते हैं।
8 पढ़ाई के दौरान और परीक्षा के लिए जाते समय कभी भी ऐसे नकारात्मक विचार मन में न आने दें कि जो पेपर में आएगा वह हल कर पाऊंगा या नहीं।
9 पूरे आत्मविश्वास के साथ पेपर देने जाएं। इससे पेपर हल करने में काफी मदद मिलेगी।
10 हमेशा यह सोचें कि मेहनत करके आप भी अव्वल आ सकते हैं।
11 परीक्षा में सबसे पहले पूरा प्रश्नपत्र पढ़ें और उसके बाद ही उसे हल करें। हड़बड़ी में प्रश्नपत्र हल करने की भूल न करें।
12 जिस प्रश्न को हल कर रहे हैं, उस पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित रखें। इस दौरान अन्य प्रश्नों के बारे में विचार न करें, परंतु समय का ध्यान जरूर रखें।
न बनाएं दबाव
अपने बच्चे की क्षमता, रुचियों, इच्छा और क्लास में उसकी पोजीशन जानने की पेरैंट्स की कोई इच्छा नहीं रहती तथा बच्चे पर हर संभव तरीके से दबाव डाला जाता है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चा बीमार भी हो सकता है तथा फेल होने पर घातक कदम तक उठा लेता है। अत: बच्चे को बिना किसी दबाव के इम्तिहान देने देना ही उसे तनाव मुक्त बनाता है।
उस पर कभी ज्यादा अंक लाने या किसी अन्य बच्चे जैसा बनने का दबाव न डालें। हर बच्चा अपने आप में विलक्षण होता है, बस उसे पहचानने की कोशिश करें। उसे आपके विवेकपूर्ण मार्गदर्शन की आवश्यकता है, इसलिए उसकी असफलताओं पर उसे धिक्कारें नहीं, बल्कि विषम परिस्थितियों में उसे संभले रहने की शिक्षा दें।
प्रेरित करें
हर बच्चे की बुद्धि, योग्यता और दक्षता भिन्न-भिन्न होती है, इसलिए तुलना विपरीत परिणाम सामने ला सकती है। किसी बच्चे पर अधिक अंक लाने के दबाव का परिणाम अक्सर उल्टा होता है। अपने बच्चे को परीक्षा के लिए अधिक से अधिक तैयारी करने के लिए प्रेरित करना तो अच्छी बात है, परंतु उसके लिए लक्ष्य निर्धारित कर प्राप्त करने का दबाव बनाना गलत है।
इससे वह प्रेरित होने की अपेक्षा कुंठित ज्यादा होता है। यदि बच्चा पेरैंट्स की इच्छानुसार परिणाम नहीं ला पाता तो उसे प्रताडि़त न करें। इस बात का विश्वास रखें कि हर बच्चा अपने पेरैंट्स की अपेक्षाओं पर हमेशा खरा उतरने का प्रयास करता है।
बच्चे का संबल बनें
जब वह ऐसा नहीं कर पाता तो वह खुद ही बहुत निराशा, हताशा और आत्मग्लानि महसूस करता है। इस नाजुक समय में बच्चे को पेरैंट्स से संबल की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में बच्चे को अपमानित करने से बचें, क्योंकि यह वह संवेदनशील स्थिति होती है कि बच्चा आत्महत्या जैसे घातक कदम तक उठा सकता है।
बदलें दृष्टिकोण
यदि आशानुरूप परिणाम नहीं आए, तो उसे धीरज बंधाएं और समझाएं कि कोई एक परीक्षा उनके लिए उससे महत्वपूर्ण नहीं है। अभी जीवन बहुत बड़ा है और उसे खुद को सिद्ध करने के अनेक मौके मिलेंगे। अभिभावकों का यह दृष्टिकोण बच्चे को अच्छा प्रदर्शन करने को प्रेरित करेगा।
रखें ध्यान
1 हर बच्चा किसी विशेष प्रतिभा के साथ पैदा होता है। इस बात को समझें व बच्चे को भी समझाएं।
2 अपने बच्चे को कामयाब नहीं, काबिल बनने के लिए पढऩे को कहें।
3 उसे अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का साधन मत समझें।
4 उसकी रुचियों और आदतों को समझते हुए उसे समझने का प्रयास करें तथा उसी के अनुरूप करियर चयन में उसका साथ दें।
5 किसी बात को उस पर थोपें नहीं, बल्कि उसे सिर्फ सुझाव दें।