बिना बात के बतंगड़ में माहिर है कांग्रेस






भारतीय राजनीति में अक्सर बिना के बतंगड़ होते रहे हैं। ऐसे राजनेता चर्चित माने जाते हैं वास्तविक उपलब्धियों एवं सकारात्मक की भी आलोचना एवं छिद्रान्वेषण करने चतुर होते।।।। बिना बात का बतंगड़ करने में के नेता राहुल गांधी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस कोई मुकाबला नहीं।।।।।।। कांग्रेस ने जी -20 सम्मेलन के में कमल को चित्रित करने आपत्ति जताकर बैठे बैठे-ठाले न अपनी प्रतिष्ठा को बटा है बल्कि इस प्रकार उद्देश्यहीन, उच्छृंखल, विध्वंसात्मक नीति ही प्रदर्शित किया।।।। है है है है है है है है है आग्रह, पूर्वाग्रह एवं दुराग्रह से ऐसे आरोपों एवं आलोचनाओं से का भी हित सधता हो हो प्रतीत नहीं होता।।।।।। ऐसा लगता है कि इस पार्टी उसके नेताओं को मोदी के हर काम और निर्णय का विरोध की आदत पड़ गई।।।। ऐसा तभी होता है, जब कोई अंधविरोध से ग्रस्त हो जाता है। जो बहुचर्चित होता है उसका विरोध भी होत। पर विरोध का भी कोई उद्देश्य औ्तर होता है। निरूद्देश्य एवं स्तरहीन विरोध, विरोधी खेमे की एवं संकीर्णपूर्ण मनोवृत्ति, ईर्ष्या और विध्वंस की नीति ही स्वयंभू प्रमाण।।।। भारत के लिये गर्व एवं करने के जी जी -20 की के क्षणों में भी उसने ईर्ष्या एवं मात्सर्य भावना से प्रेरित विरोध का स्वर बुलन्द कर अपनी बुद्धि दिवालियापन उजागर किया है।।। है है है है है है है है है है उपलब्धियों का बतंगड़ बनाना सीखना तो कांग्रेस से सीखना चाहिए। क्या कांग्रेस पार्टी द्वारा इस तरह का ताड़ बनाना उचित है है? . भारत के लिये गर्व एवं करने के जी जी -20 की के क्षणों में भी उसने ईर्ष्या एवं मात्सर्य भावना से प्रेरित विरोध का स्वर बुलन्द कर अपनी बुद्धि दिवालियापन उजागर किया है।।। है है है है है है है है है है उपलब्धियों का बतंगड़ बनाना सीखना तो कांग्रेस से सीखना चाहिए। क्या कांग्रेस पार्टी द्वारा इस तरह का ताड़ बनाना उचित है है? . भारत के लिये गर्व एवं करने के जी जी -20 की के क्षणों में भी उसने ईर्ष्या एवं मात्सर्य भावना से प्रेरित विरोध का स्वर बुलन्द कर अपनी बुद्धि दिवालियापन उजागर किया है।।। है है है है है है है है है है उपलब्धियों का बतंगड़ बनाना सीखना तो कांग्रेस से सीखना चाहिए। क्या कांग्रेस पार्टी द्वारा इस तरह का ताड़ बनाना उचित है है?
आम जनता को गुमराह करने एवं सत्ता पहुंचने के लिए इस प्रकार के उजालों पर कालिख पोतने की मनोवृत्ति निश्चित अंधेरे सायों से प्यार करने वालों की हो सकती है है लोगों की आंखों किरणें आंज दी जायें भी यथार्थ को को को को को को को को को को को को को HI देख सकते। क्योंकि उन्हें नरेन्द्र मोदी रूपी उजाले नाम से ही एलर्जी है है, तरस आता है ऐसे लोगों की पर पर, जो सूरज के उजाले कालिख पोतने का असफल प्रयास हैं हैं, आकाश के पैबंद लगाना चाहते और सछिद्र नाव पर सवार राजनीति रूपी सागर की यात्रा करना हैं।। निश्चित ही इससे सबके मन अकल्पनीय सम्भावनाओं की सिहरन उठती।। प्रजातंत्र में टकराव होता है। विचार फर्क भी होता है। मन-मुटाव भी होता है पर मर्यादापूर्वक। अब इस आधार को कांग्रेस ने ताक पर रख दिया है। राजनीति में दुश्मन स्थाई नहीं होते। अवसरवादिता दुश्मन को दोस्त और को दुश्मन बना देती है। यह भी बडे़ रूप में देखने को मिला। भारतीय संस्कृति में कमल के की महत्ता किसी से छिपी।। यह शुभ, श्रेयस्कर, सौंदर्य, समृद्धि का तो है ही, अनेक देवी-देवताओं से भी है।।। इसका उपयोग विभिन्न धार्मिक एवं अनुष्ठानों में शताब्दियों से किया जाता है। चूंकि जी -20 के समृद्ध 20 देशों नेतृत्व करने का ऐतिहासिक एवं स्वर्णित अवसर भारत को है है,
देश मंे न जाने कितने प्राचीन और विशेष रूप से में कमल को उकेरा गया।। स्वतंत्रता संग्राम का संदेश देने लिए रोटी और कमल का उपयोग किया गया। स्वतंत्रता के उपरांत भी विभिन्न संस्थाओं प्रतीक चिह्नों, सरकारी आयोजनों के साथ टिकटों में इसका उपयोग किया रहा।।। आज भी कई सरकारी गैर गैर-सरकारी संस्थाओं लोगो में कमल को शोभायमान देखा जा है।। वस्तुतः इसी कारण उसे राष्ट्रीय की तरह देखा जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि देश सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस संस्कृति में कमल की महत्ता से तरह अनजान।।।। यह एक विडंबना ही है भारत जोड़ो यात्रा पर निकली भारतीय संस्कृति में कमल के महत्व नहीं समझ पा रही।।।।। इस दृष्टि से कांग्रेस के भाजपा एवं नरेन्द्र मोदी का कोई नई बात नहीं है। कभी- कभी तो ऐसा होने लगता है भाजपा भाजपा-विरोध इसकी है।।। , दीर्घ एवं तीक्ष्ण विरोध के भाजपा के अस्तित्व पर कोई नहीं आ सकी सकी सकी बल्कि हस्ति को और अधिक प्रखर एवं बनती।।।।।। उल्लेखनीय बात यह है कि निन्दक आलोचक लोगों को सब गलत ही गलत दिखाई देता।।
एक सफल नेता एवं राजनीति होने के लिए आपको अपने समर्थन जुटाना होगा और जनता के अपनी पकड़ मजबूत करनी।।।।। इसके लिए नेता को सहृदय, उदार, सकारात्मक और दृढ़ होना चाहिए। . यही कारण है कि उसे के रूप में केवल भाजपा चुनाव चिह्न ही देता है। इससे भी बड़ा विचित्र एवं विरोधाभास देखने को मिला उसे जी -20 सम्मेलन के लोगो में कमल ठीक वैसा ही दिखाई रहा है जैसा भाजपा का चुनाव में।।।।। है यदि कांग्रेस को यह लगता कि जी जी -20 सम्मेलन लोगो में कमल को दर्शाए जाने से को राजनीतिक लाभ मिलेगा उसे स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसा कैसे होगा होगा होगा होगा होगा होगा क्या जी -20 समूह के देशों भारत में होने वाले चुनावों में कोई भूमिका रहने है है है है है है? ?? भाजपा में कहीं कोई आहट होती है तो कांग्रेस भूकल्प भूकल्प-सा आ जाता।। मजे की बात तो यह कि कांग्रेस को भाजपा की भी विशेषता दिखाई नहीं देती। उसने कितनी बड़ी-बड़ी उपलब्धियां की झोली में डाली है। What is it? शरीर कितना ही सुन्दर क्यों न हो, मक्खियों को तो घाव ही अच्छा लगेगा। इसी प्रकार क निन्दक लोगों तो अच्छाई में भी बुराई ही दर्शन होगा।





कोई कमल का विरोध कर हैं तो कोई लक्ष्मी गणेश की तस्वीर नोटों पर छापने वकालत कर रहे।।।। जाने- अनजाने इन समय समय-समय पर भी प्रतीति कराई कि भारतीय और संस्कृति के जो भी प्रतीक हैं, वे इन्हंे स्वीकार्य।।। वास्तव में कमल पर आपत्ति खड़ी कांग्रेस ने एक बार फिर प्रकट किया कि भारत की संस्कृति एवं उसके प्रतीकों से सीधा लाभ भाजपा को मिलता।।।। इसका अर्थ यह हुआ कि इस दल ने भारत की संस्कृति कितनी कितनी दूरी बना है है है है? यह सब उसने भाजपा वालों के मान लिया है, उसकी झोली में डाल दिया।। यदि कांग्रेस देश की संस्कृति के के प्रति सम्मानभाव नहीं कर सकती तो कम से कम उसे विरोध भी नहीं करना।।।। इस तरह की सिद्धांत एवं संस्कृतिविहीन करके वह भारत को नहीं नहीं, तोड़ने का ही काम।।

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