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समझाया बहुत है मैंने अपने दिल को
तेरी यादों को कैसे खुद से जुदा कर दूं।
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मेरे वश में हो तो मैं तुझे खुदा कर दूं ।
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तू कहे तो हर शाम को मैं सहर कर दुं।
रोके से कहां रुकती है लहर इश्क की
तू दे साथ तो मैं फर्श को भी अर्श कर दूं।
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मैं अपने पर आऊं तो झील को समंदर कर दुं।
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तू कहे तो मैं जमाने का रुख मोड़ दुं।
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तू कहे तो मैं इस पर मैं पूरी ग्रंथ लिख दुं।
