मानव
संसाधन प्रबंधन एक ऐसा विषय है, जिसकी जरूरत हमेशा पड़ती रहेगी। अगर आप
लोगों की सहायता करने में रुचि रखते हैं, तो मानव संसाधन प्रबंधन विषयों
में स्नातक या स्नात्कोत्तर कर अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सकते हैं।
मानव संसाधन (एचआर) परामर्शकों तथा कार्यकारी खोज कंपनियों के अनुमानों के
अनुसार, भारतीय कंपनियों को 2015 में अपनी मौजूदा कारोबारी जरूरतों के लिए
12 से 14 लाख नई भर्तियों की जरूरत होगी। यह विषय हैं प्रभावी ‘परिवर्तन
प्रबंधन’, ‘श्रम संबंध’, ‘मानव संसाधन विकास’, ‘मुआवजे का प्रबंधन’ और
‘मानव संसाधन विज्ञान’, मानव संसाधन प्रबंधन के ऐसे विषय हैं जिनमें रोजगार
की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं।
दरअसल इन विषयों के
अंतर्गत प्राकृतिक और सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की तकनीक, निर्णय लेना,
कार्यक्रम का व्यवसायिक प्रबंधन, प्रशासन, वित्त, अर्थशास्त्र, प्रशासनिक
फैसलों और रणनीति बनाने के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। यदि आपकी
अंग्रेजी, अच्छी है तो इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को विदेशों में भी काफी
अवसर मिलते हैं।
पाठ्यक्रम
इस
क्षेत्र में कॅरियर बनाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए मुख्य रूप से दो
पाठ्यक्रम हैं- पहला तीन वर्षीय बैचलर इन सोशल वर्क है और दूसरा है मास्टर
ऑफ सोशल वर्क। इसके अलावा, कई संस्थान इस क्षेत्र में सर्टिफिकेट व
डिप्लोमा कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं।
प्रवेश के लिए योग्यताएं
स्नातक
स्तरीय पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अनिवार्य योग्यता 50 फीसदी अंकों के
साथ 10+2 है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम मास्टर ऑफ सोशल वर्क के लिए अभ्यार्थी
का स्नातक होना जरूरी है। सर्टिफिकेट व डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के
लिए अभ्यार्थी को बारहवीं में पास होना जरूरी है। सोशल वर्क से जुड़े
स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश, 'प्रवेश परीक्षा' के बाद ही
मिलता है।
यदि आपने स्नातक स्तर पर समाजशास्त्र या सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई की है तो वरीयता दी जाती है।
यदि आपने स्नातक स्तर पर समाजशास्त्र या सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई की है तो वरीयता दी जाती है।
यहां है नौकरी
मानव
संसाधन विभाग अमूमन हर निजी और शासकीय कार्यालयों में रहता है। इसके अलावा
आप शिक्षण कार्य, सामुदायिक विकास स्वास्थ्य केंद्रों, गैर सरकारी संस्थान
(एनजीओ), परिवार परामर्श
केंद्र, नशामुक्ति केंद्र, चिकित्सालय, शहरी एवं ग्रामीण परियोजनाओं, औद्योगिक एवं कॉरपोरेट सेक्टर के अलावा अंतरराष्ट्रीय गैरसरकारी संगठन, सरकारी एजेंसियों में बेहतर वेतन में रोजगार हासिल कर सकते हैं। आप अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे यूनिसेफ, यूएनएचसीआर में भी काफी अच्छे अवसर उपलब्ध है।
केंद्र, नशामुक्ति केंद्र, चिकित्सालय, शहरी एवं ग्रामीण परियोजनाओं, औद्योगिक एवं कॉरपोरेट सेक्टर के अलावा अंतरराष्ट्रीय गैरसरकारी संगठन, सरकारी एजेंसियों में बेहतर वेतन में रोजगार हासिल कर सकते हैं। आप अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे यूनिसेफ, यूएनएचसीआर में भी काफी अच्छे अवसर उपलब्ध है।
वेतन
सोशल
वर्क से शिक्षित अभ्यार्थियों को उसकी योग्यता के अनुसार 5 हजार से लेकर
25 हजार तक का वेतन आसानी से मिल जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनका वेतन
कई गुना अधिक हो सकता है।
स्वरोजगार के अवसर
वर्तमान
में सामाजिक कार्यों का बेहतर तरीके से क्रियान्वयन करने में स्वयंसेवी
संस्थाओं (एनजीओ) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं
रह गया है, जिसमें ये संस्थाएं अपना योगदान न दे रही हों। समाज कार्य से
जुड़ा पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद कोई भी व्यक्ति निजी प्रयास व सरकारी
अनुदान से अपनी खुद की स्वयंसेवी संस्था (एनजीओ) बना सकता है। इस तरह वह
स्वरोजगार के साथ-साथ अन्य लोगों को रोजगार भी प्रदान कर सकता है।
संस्थान
दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली।
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
काशी विद्यापीठ, वाराणसी श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय।
तिरुपति मंगलौर यूनिवर्सिटी, मंगलौर।
टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई।
गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद।
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली।
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
काशी विद्यापीठ, वाराणसी श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय।
तिरुपति मंगलौर यूनिवर्सिटी, मंगलौर।
टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई।
गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद।
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़।