टैलेंट को दें प्लेटफॉर्म


 
ब्यूटी कॉन्टेस्ट्स से लेकर टेलीविजन पर आने वाले तमाम तरह के रियलिटी शोज के प्रतिभागियों में एक ख्वाहिश जरूर होती है, बॉलीवुड यानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री करना। इसके लिए वे डांस, म्यूजिक, एक्टिंग आदि सभी कलाओं में खुद को माजते हैं और फिर करते हैं एक अच्छे ब्रेक का इंतजार। इन दिनों जिस तरह से डांस से लेकर ड्रामा तक के रियलिटी शोज टीवी पर छाए हुए हैं, उसे देखते हुए कहना गलत नहीं होगा कि आज भारत में एक्टिंग और फिल्म मेकिंग में करियर बनान को लेकर युवाओं की दिलचस्पी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। यही कारण है कि वे सिर्फ नेचुरल टैलेंट के दम पर ही नहीं, बल्कि बाकायदा ट्रेनिंग लेकर आ रहे हैं क्योंकि इस फील्ड में कमाई के साथ-साथ शोहरत भी बेशुमार है।
कैसे करें शुरुआत ?
वैसे तो बॉलीवुड को हिंदी फिल्मों का मक्का कहा जाता है, लेकिन यहां पहुंचने से पहले कई पड़ाव तय करने पड़ सकते हैं, जैसे- अगर आपको एक्टिंग का शौक है, तो टीवी चैनल्स के जरिये एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एंट्री कर सकते हैं। टीवी की पहुंच आज काफी बढ़ चुकी है। आप टीवी पर आने वाले सीरियल्स, रियलिटी शोज, गेम शोज, डॉक्युमेंट्रीज, कॉमर्शियल्स में काम कर सकते हैं। इससे आपको अपना हुनर दिखाने का एक प्लेटफॉर्म तो मिलेगा ही, साथ में अपॉच्र्युनिटीज भी बढ़ेंगी।
स्किल्स पर करें काम
एक्टर के लिए मौकों की कमी नहीं होती है, लेकिन कड़ी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में खुद को बेहतर साबित करना एक बड़ा चैलेंज होता है। आप लंबी रेस के घोड़े तभी बने रह सकते हैं, जब आपमें धैर्य, आत्मविश्वास, एक्टिंग का पैशन, मेहनत करने की क्षमता और सीखने की ललक होगी। इसके अलावा, किसी प्रोफेशनल के मागदर्शन में एक्टिंग स्किल्स को पॉलिश करना भी जरूरी होगा। भारत में कई इंस्टीट्यूट ड्रामा और एक्टिंग में डिप्लोमा एवं डिग्री कोर्स संचालित करते हैं। इसके अलावा, आप चाहें तो शॉर्ट और लॉन्ग टर्म कोर्सेज भी कर सकते हैं।
तकनीकी पक्ष पर भी दें ध्यान
एक्टिंग में करियर बनाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी तो आपके अंदर नेचुरल टैलेंट का होना ही है। लेकिन इस हुनर को और तराशने से फायदा ही होगा, जैसे- अच्छी मॉड्यूलेटेड वॉयस, डांसिंग कैपिसिटी और रिदम की सेंस होने से आप कॉन्फिडेंस के साथ काम कर सकेंगे। आपमें अलग-अलग किरदारों में खुद को ढालने की क्षमता भी होनी चाहिए। ऐसे में अगर ये सारी क्वालिटीज आपके अंदर हैं, तो फिर एक्टिंग में भविष्य संवारने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।
स्टेप-बाइ-स्टेप आगे बढ़ें
अगर आपके पास नेटवर्किग स्किल है, तो कॉन्टैक्ट या नेटवर्क बनाना आसान होगा और आप एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में जल्दी सक्सेसफुल हो सकते हैं। इस स्किल की वजह से आप अपने रोल के लिए एजेंसीज से कॉन्टैक्ट कर सकेंगे। हां, इसमें पोर्टफोलियो की भूमिका भी अहम होती है। पोर्टफोलियो बनाने के लिए किसी स्थापित फोटोग्राफर की मदद ले सकते हैं, जो आपके अलग-अलग मूड्स और एक्सप्रेशंस को कैमरे में कैद कर सके। पोर्टफोलियो बनने के बाद आप कास्टिंग एजेंट से बात कर अपना रिज्यूमे दे सकते हैं। इसमें आपके अचीवमेंट्स, क्वालिटी और एक्सपीरियंस हाइलाइट होने चाहिए। इसके बाद जब भी आपको ऑडिशन के लिए बुलाया जाए, तो पूरे कॉन्फिडेंस के साथ इंटरव्यू और कैमरा फेस करने की कोशिश करें। शुरुआत में पॉजिटिव रिजल्ट न भी मिले, तो हताश न हों। अपनी कोशिश जारी रखें। जब कभी मौका मिले, उसके जरिए खुद को प्रूव करने का प्रयास करें। एक बार अभिनय क्षमता का लोहा मनवाकर अपनी पहचान बना सकते हैं।
संभावनाएं बेशुमार
एक अच्छा ब्रेक मिलने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में करियर की बुलंदियों को अपनी मेहनत से छूना ज्यादा मुश्किल नहीं होता है। थोड़ा-बहुत रोल टाइमिंग, नेटवर्किंग और लक का भी होता है। लेकिन खुद पर विश्वास हो, तो सफल होने से कोई रोक नहीं सकता। एनआरएआइ, दिल्ली के डायरेक्टर नलिन सिंह के अनुसार, एक एक्टर के तौर पर अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस, टीवी, रेडियो चैनल, स्टेज एक्टर, प्राइवेट वीडियोज, टीवी शोज, कॉमर्शियल्स आदि में काम करने के अनेक मौके होते हैं। शुरुआत में बेशक कुछ कम कमाई हो, लेकिन अनुभव और लोकप्रियता बढ़ने के साथ आप एक एपिसोड के लिए एक से दो लाख रुपये के बीच आसानी से कमा सकते हैं। फिल्मों में पांच लाख रुपये से शुरुआत कर करोड़ों रुपये की कमाई की जा सकती है।
फिल्म एवं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की ग्रोथ के साथ ही फिल्म मेकिंग एक उभरते हुए करियर के रूप में सामने आया है। आज इंडस्ट्री में अनेक ऐसे युवा प्रोफेशनल्स हैं, जिन्होंने टेक्नोलॉजी और क्रिएटिविटी के मिश्रण के जरिये शानदार फिल्में बनाई हैं। उन्होंने दर्शकों के साथ-साथ आलोचकों का दिल भी जीता है। अगर आपमें भी यह हुनर है, तो इस फील्ड में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर है।
क्या है फिल्म मेकिंग?
यह एक टीम वर्क है, जिसमें अलग-अलग तरह के स्किल्ड लोगों के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होता है। इसमें एक्टिंग, डायरेक्टिंग, प्रोड्यूसिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग, सिनेमेटोग्राफी, साउंड रिकॉर्डिंग, विजुअल मिक्सिंग, सिंगिंग एडिटिंग आदि शामिल हैं। ऐसे में एक फिल्ममेकर को इन सभी क्षेत्रों पर बराबर से ध्यान देना पड़ता है। इस तरह वह फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, न्यूज रील्स, प्रमोशनल फिल्म्स, टीवी कॉमर्शियल्स, म्यूजिक वीडियोज का निर्माण करता है।
कैसे होता है काम?
एक फिल्म मेकर बनने के लिए आपके पास क्रिएटिविटी, सेंसिटिविटी, फोकस, सेल्फ डिसिप्लिन, मोटिवेशन के साथ-साथ टेक्निकल नॉलेज होनी जरूरी है। आपको कई तरह के आइडिया, स्टोरी, स्क्रिप्ट, कास्ट, स्क्रीनप्ले, म्यूजिक, डायरेक्शन, बजट, सेट, लोकेशन आदि पर काम करना होता है, यानी एक फिल्म मेकर को फिल्म के लिए पूंजी का इंतजाम करने से लेकर उसके डिस्ट्रिब्यूशन, स्क्रीनिंग जैसे सभी पहलुओं को देखना होता है। भारत में कई इंस्टीट्यूट्स हैं, जो फिल्म मेकिंग में डिप्लोमा और डिग्री कोर्स ऑफर करते हैं।
करियर की संभावनाएं
वैसे तो फिल्म मेकिंग एक चैलेंजिंग जॉब है, लेकिन इसमें रोजगार की कमी नहीं है। अगर आपके पास किसी तरह की आर्टिस्टिक या टेक्निकल स्किल हो, तो इस फील्ड में अपना फ्यूचर सिक्योर कर सकते हैं। आप बतौर सिनेमेटोग्राफर, साउंड इंजीनियर, एडिटर काम का काम भी कर सकते हैं।

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