क्या है स्पीच ऑडियोलॉजी?
यह हेल्थ सर्विस का अलाइड फील्ड है, जिसके प्रोफेशनल्स फिजीशियन नहीं, बल्कि स्पीच लैंग्वेज और हियरिंग के एक्सपर्ट होते हैं। इनका काम स्पीच (कम्युनिकेशन), वॉयस या लैंग्वेज डिसॉर्डर से ग्रसित बच्चों या वयस्क लोगों की पहचान, बचाव और फिर उन्हें रिहैबिलिटेट करना होता है। ऑडियोलॉजिस्ट्स लोगों में हियरिंग लॉस, ऑडिटरी, बैलेंस और दूसरे सेंसरी एवं न्यूरल प्रॉबलम्स के लक्षणों का परीक्षण करते हैं। ये ऑडियोमीटर्स, कंप्यूटर्स और टेस्टिंग डिवाइस की मदद से मरीजों के ऑडिटरी एवं बैलेंस प्रॉब्लम्स के प्रभाव का पता लगाते हैं। इसके बाद ही मरीज का लाइन ऑफ ट्रीटमेंट तय किया जाता है।
बेसिक स्किल्स
एक ऑडियोलॉजिस्ट को विभिन्न उम्र, संस्कृति, सोशल बैकग्राउंड के लोगों के साथ डील करना होता है। इसके लिए स्ट्रॉन्ग इंटरपर्सनल स्किल, साइंटिफिक एटीट्यूड के साथ पेशेंस होना जरूरी है। साथ ही, टेक्निकल अपग्रेडेशन करते रहना होगा, क्योंकि इन दिनों हियरिंग एड्स, कोकलियर इंप्लांट्स, लिसनिंग डिवाइस जैसे कई उपकरण बाजार में आ गए हैं, जिनकी मदद इस प्रोफेशन में ली जा रही है। इसके अलावा, लीडरशिप और मैनेजमेंट स्किल्स को भी तराशते रहना होगा।
एजुकेशनल क्वालिफिकेशन
स्पीच ऑडियोलॉजिस्ट बनने के लिए आपके पास स्पीच ऐंड हियरिंग साइंस में ग्रेजुएशन या मास्टर्स डिग्री जरूरी है। वैसे इस फील्ड में डिप्लोमा कोर्स करके भी आया जा सकता है। हालांकि, ऑडियोलॉजी ऐंड स्पीच, हियरिंग लैंग्वेज ऐंड स्पीच, ऑडियोलॉजी ऐंड स्पीच रिहैबिलिटेशन, स्पीच लैंग्वेज ऐंड हियरिंग साइंस या बैचलर इन स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी कोर्स करना सही रहेगा। इंडिया में करीब 20 यूनिवर्सिटीज में स्पीच पैथोलॉजी एवं ऑडियो से संबंधित कोर्स संचालित किए जाते हैं, जो रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त हैं। स्टूडेंट्स को एडमिशन मेरिट के आधार पर मिलता है। कई संस्थानों में एंट्रेंस एग्जाम के जरिए एडमिशन दिया जाता है।
जॉब प्रॉस्पेक्ट्स
ऑडियोलॉजिस्ट्स फिजिशियंस, साइकोलॉजिस्ट्स, या सोशल वर्कर्स के साथ काम करते हैं। आप चाहें तो स्कूल्स, हॉस्पिटल्स, रिहैबिलिटेशन सेंटर्स, नर्सिग केयर फैसिलिटीज, एडल्ट केयर सेंटर, रिसर्च लैबोरेटरी आदि को अपनी सेवाएं दे सकते हैं। आपके पास पैरा मेडिकल कॉलेज में शिक्षण कार्य से जुड़ने के अलावा साइन लैंग्वेज एंटरप्रेटर, लैंग्वेज स्पेशलिस्ट, लिंग्विस्ट के तौर पर काम करने के भी अवसर हैं। विदेशों में भी ऑडियोलॉजिस्ट्स के लिए बहुत अच्छे विकल्प हैं।
मास्टर्स करने पर मिलेगी ग्रोथ
2011 के सेंसस के अनुसार, इंडिया में करीब 7.5 फीसदी लोगों को स्पीच, जबकि 18.9 फीसदी को हियरिंग रिलेटेड प्रॉब्लम है। ऐसे में स्पेशलाइज्ड प्रोफेशनल्स यानी ऑडियोलॉजिस्ट्स या स्पीच पैथोलॉजिस्ट्स के लिए काफी स्कोप है। वे प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर में काम करने के अलावा निजी प्रैक्टिस कर सकते हैं। एक ग्रेजुएट ऑडियोलॉजिस्ट को शुरुआत में 18 से 20 हजार रुपये महीने मिलते हैं, जबकि ऑडियोलॉजी ऐंड स्पीज लैंग्वेज पैथोलॉजी आदि सब्जेक्ट में मास्टर्स या पीएचडी करने वालों को इनसे लगभग दोगुनी सैलरी मिलती है।
प्रियंका रावत, ऑडियोलॉजिस्ट,
सुंदरलाल जैन हॉस्पिटल, दिल्ली