नेवीगेट योर करियर

प्राचीन काल से ही समुद्र हमारे जीवन के हर हिस्से को प्रभावित करता आया है।शायद इसी तथ्य के चलते मध्य काल में भारत आए अरब यात्री रज्जाक ने दरिया को कुदरत की देन कहा है। आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो इसका महत्व कतईकम नहीं हुआ है। ताकतवर नेवी सभी देशों की बडी जरूरत है। यही कारण हैकि दुनिया के ज्यादातर देश अपनी नौसैनिक ताकत में इजाफा कर रहे हैं। समुद्र पर राज करने की इस तेज प्रतिस्पर्धा के बीच भारत भी कमर कसता दिख रहा है। इन सबको देखते हुए इस क्षेत्र मे आज अवसरों में बढोत्तरी हुईहै। हर वर्ष चार दिसंबर को इंडियन नेवी डे मनाया जाता है, ताकि युवा अधिक से अधिक इसे जान सके और अपनी काबिलियत दिखा सकें।
बढी अहमियत, बुलंद क्रेज
सामरिक परिचर्चाओं में हम अक्सर एक शब्द सुनते है ब्लू वॉटर नेवी। ब्लू वाटर नेवी से मतलब एक ऐसी नौसेना से है जो मिनिमम रिस्पांस टाइम में दुनिया के किसी भी सागरीय क्षेत्र में ऑपरेशन की क्षमता रखती हो। अपनी विशिष्ट सामरिक स्थिति, विशाल समुद्री सीमाओं, वाच् खतरों, व्यवसायिक प्रतिबद्धताओं के चलते आज भारत में नौसेना की अहमियत पहले से बढी है। उस पर 26/11 जैसे आतंकी हमलों की आशंका ने देश को समुद्र में अपनी डिफेंस लाइन को मजबूत करने को बाध्य किया है। यही कारण हैकि सरकार, समुद्री सुरक्षा को गंभीरता से ले रही है। स्वदेशी टेक्नोलॉजी व विदेशी सैन्य साजो-सामान की खरीद के जरिए आज भारतीय नौसेना पहले से सशक्त हुई है और धीरे-धीरे ही सही ब्लू वाटर नेवी बनने की ओर कदम बढा रही है। अपने 170 जहाजों के विशाल फ्लीट व 55,000 कíमयों व प्रभावशाली एविएशन आर्म के साथ भारतीय नौसेना आज दुनिया की पांचवी सबसे बडी नौसेना है।
टैलेंट को रौनक देती ट्रेनिंग
भविष्य की बढी चुनौतियों के बीच नौसेना युवा रंगरूटों को आधुनिकतम ढंग से प्रशिक्षण देने में विश्वास करती है। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में नेवी ट्रेनिंग सेंटर्स स्थापित किए गए हैं। यहां मेरीटाइम वारफेयर, अंडरवाटर डाइविंग, इंजीनियरिंग समेत कई तरह के कोर्स आयोजित किए जाते हैं। इझीमाला (केरल) स्थित इंडियन नेवल एकेडमी (आइएनएस जमोरिन)नेवी का सबसे बडा प्रशिक्षण कें द्र है। गैर ऑफिसर कर्मियों को प्रशिक्षण देने का काम उडीसा के सेलर्स ट्रेनिंग सेंटर आइएनएस चिल्का करता है।
वर्किग है थ्रीडायमेंशनल
तीन ओर मौजूद सागर के कारण भारतीय नौसेना को त्रिआयामी नेवी कहा जाता है। भारतीय नौसेना इन तीनों सागरों में अपनी मौजूदगी के जरिए देश की सुरक्षा कवच का निर्माण करती है। यहां दरकार भी ऐसे ही लोगों की होती है, जो चुनौतियों का लुत्फ लेते हैं। नेवी में कार्यकरने वाले लोगों के दो स्तर होते हैं -एक एक्जीक्यूटिव ऑफिसर व दूसरा सेलर। नेवीगेशन, ऑब्जर्वर, हाइड्रोग्राफी, लॉ, एटीसी, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, एजूकेशन जैसे क्षेत्रो में स्पेशलाइजेशन जरूरी होता है। सेलर जिनको नेवी में सैनिक का दर्जा प्राप्त होता है, उपरोक्त चीजों के संचालन गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
एक कॅरियर कई दरवाजे
नेवी में इंट्री का सबसे प्रमुख रास्ता एनडीए/नेवल एकेडमी/सीडीएस परीक्षा होती हैं, जिसके लिए आपको यूपीएससी द्वारा साल में दो बार आयोजित होने वाली परीक्षाओं में सफल होना होता है। इस लिखित परीक्षा को पास करने के बाद कैंडिडेट की मानसिक क्षमताओं की परख होती है, जिसके लिए कैंडिडेट्स 5 दिवसीय एसएसबी टेस्ट में हिस्सा लेते हैं। इसमें कामयाब होने वाले शारीरिक व मानसिक रूप से सबसे फिट उम्मीदवारों को ही नेवी में कमीशन मिलता है। इसके अलावा नॉन यूपीएससी,10+2, बीटेक इंट्री, स्पेशल नेवल आर्किटेक्ट इंट्री स्कीम, यूनिवर्सिटी इंट्री स्कीम के माध्यम से भी आप नौसेना मे जगह बना सकते हैं। नॉन कमीशंड पदों के लिए भी समय-समय पर परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
बारहवीं है इंट्री की सीढी
इन परीक्षाओं में शामिल होने के लिए आपको न्यूनतम 10+2 (पीसीएम) से उत्तीर्णहोना आवश्यक है। सीडीएस परीक्षा के लिए सांइस ग्रुप से ग्रेजुएट युवाओं की दरकार होती है। नेवल आर्किटेक्चर स्कीम में प्रवेश के लिए आपको चुने हुए कॉलेजों से नेवल आर्किटेक्ट में बीटेक होना होगा।
एडवेंचरस टर्न
मर्चेट नेवी आपको हर दम अलग वातावरण व लाइफ स्टाइल से परिचित कराती रहती है। व्यापार की धुरी व रोमांचक होने के कारण लोग इसे वरीयता देते हैं ..
बहुत कम सेक्टर ऐसे होते हैं, जो आपको काम के दौरान हर पल रोमांच का अनुभव देते हैं। मर्चेट नेवी एक ऐसा ही कॅरियर है, जहां आपके पास पूरी दुनिया की सैर, तरह-तरह के लोगों, उनकी संस्कृ ति को जानने समझने का अवसर होता है। आज के समय में कार्गो ट्रांसपोर्ट के चलन ने इस काम को काफी आसान बना दिया है। समुद्री रास्तों से होने वाले इस संपूर्ण व्यापार को मर्चेट नेवी ही अंजाम देती है। देशों के बीच बढे आपसी व्यापार के बीच इस क्षेत्र की महत्ता बढी है।
पीसीएम है जरूरी
मर्चेट नेवी में जाने के लिए आपको बारहवीं में पीसीएम के साथ इंग्लिश अनिवार्य है। ऐसे ही डेक कैडेट कोर्स के लिए भी आपको 10+2 मैथ्स से होना आवश्यक है। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए अविवाहित कैंडिडेट्स ही पात्र होते हैं। इससे संबंधित कोर्स के लिए देश में कई विश्वविद्यालय व संस्थान हैं।
तकनीक बनाएकाम आसान
मर्चेट नेवी में शिप्स का संचालन तकनीकी रूप से दक्ष नेवीगेटर्स, मरीन इंजीनियर्स व क्रू द्वारा किया जाता है। काम के लिहाज से देखा जाए तो तीन डिपार्टमेंट की मुख्य भूमिका होती हैं
डेक डिपार्टमेंट -इस विभाग का सर्वोच्च अधिकार कैप्टन होता है, जो जहाज के नेवीगेशन से लेकर यात्रियों, उनके सामान या फिर उस पर लोड चीजों के लिए जवाबदेह होता है।
सर्विस डिपार्टमेंट -इनका काम जहाज पर मौजूद कईतरह की सेवाओं से जुडा है, जिसमें किचन, लॉन्ड्री, मेडिकल जैसी चीजें शामिल होती हैं। इस डिपार्टमेंट में ज्यादातर हॉस्पिटैलटी सेक्टर के डिग्री/डिप्लोमा धारियों को वरीयता दी जाती है।
इंजन डिपार्टमेंट -इस डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी मरीन इंजीनियर्सकी होती है। इनका सबसे महत्वपूर्ण काम जहाज के इंजन रूम की देखभाल करना होता है। रेडियो ऑफिसर्स इसी विभाग में आते हैं।
प्रमुख संस्थान
मरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कोलकाता
डायरेक्टर जनरल ऑफशिपिंग,मुंबई
शिपिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमटेड,मंबई
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पोर्ट मैनेजमेंट,चेन्नई
नेशनल मेरीटाइम एकेडमी,विशाखापत्तम
इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी,चेन्नई
इंस्टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम स्टडीज, गोवा
बढता व्यापार, चढता कॅरियर
जिस तरह से भारत दुनिया में औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र बन रहा है, मर्चेट नेवी पर हमारी व्यापारिक निर्भरता भी बढती जा रही है। इसे इसी बात से समझ सकते हैं कि आज देश के करीब 90-95 फीसदी पेट्रोल, कैरोसिन, कोयला, अयस्क, खाद्यान्न, खाने पीने के दूसरे जरूरी सामान का परिवहन समुद्र से ही होता है। शायद इसी के चलते मर्चेट नेवी कॅरियर का पसंदीदा इनकै चमेंट जोन बनकर उभरा है। वैसे भी इन दिनों देश में शिपिंग ट्रांसपोर्ट कंपनियों की संख्या बढ रही है। खुद सरकार भी इस क्षेत्र की अहमियत समझ चुकी है और आने वाले दस सालों मे यहां 5 लाख करोड निवेश की योजना है। ऐसे में यदि आप देश की बेहतर होती आर्थिक सेहत में योगदान देना चाहते हैं, तो मर्चेट नेवी एक बढिया च्वाइस है।
कारगर है कॉमन टेस्ट
मरीन इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री के लिए इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित होने वाला कॉमन टेस्ट सबसे खास हैं। इसमें सफलता के बाद छात्रों को देश के विभिन्न कॉलेजों, संस्थानों में दाखिला मिलता है। तो वहीं देश में कई अन्य संस्थान भी हैं जो इस फील्ड में बैचलर डिग्री प्रदान करते हैं। इसके लिए वे सामान्यतय: मई के प्रथम पखवाडे में प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं।
वर्क रांउड द क्लॉक
बतौर मर्चेट ऑफिसर आपका काम काफी चुनौती पूर्ण होता है, साथ ही जोखिम भी यहां कम नहीं होते। इसलिए रात हो या दिन हर समय आपको चौकन्ना रहना होगा। शिप पर प्राय: अलग-अलग शिफ्ट में काम होता है।
प्रात: 4से 8 बजे-मॉर्निग वॉच
सुबह 8से 12-फोरनून वॉच
12 से 4 बजे-ऑफरनून वॉच
शाम 4 से 8-फ‌र्स्ट डॉग वॉच
रात 8 से 12 बजे-सेकेंड डॉग वॉच
12 से प्रात:4 बजे -थर्ड डॉग वॉच
ाढी नौकरियों की रंगत
आज सागर आर्थिक तरक्की का साधन बन चुका है, जो देश इसका जितने बेहतर ढंग से उपयोग कर सकता है, उतना ही कामयाब है। इस बात को गवर्नमेंट व प्राइवेट दोनों ही सेक्टर ने गंभीरता से लिया है। इसके लिए सरकार 2015 तक मर्चेट नेवी के अपने कर्मचारियों की संख्या डेढ लाख तक बढाना चाह रही है। वैश्विक तौर पर देखें तो हमारे देश में मर्चेंट नेवी ऑफिसरों का अनुपात 6.3 फीसदी का है, जिसे भविष्य में 9 फीसदी करने का लक्ष्य है। इसके लिए ट्रेनिंग शिप की भी संख्या बढाए जाने की उम्मीद है। इन सबके चलते बडी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं के पास शिपिंग कंपनियों में जॉब के अवसर जन्म ले चुके हैं। इस सेक्टर में मिलने वाली सैलरी व फैसिलिटीज का कोई जोड नहीं है। यही कारण है कि इसमें नौकरी करने के लिए काफी युवा आते हैं।
महिलाओं के लिए भी अवसर
नौसेना में महिलाओं की इंट्री के दरवाजे 1992 के बाद से ही खुले, लेकिन तब से लेकर अब तक महिलाओं के लिए यहां च्वाइसेज बहुत बढ चुकीहैं। नेवी, अपनी कुछ चुनी हुई शाखाओं मसलन लॉ, एजूकेशन, लॉजिस्टिक्स, एटीसी, नेवल आर्किटेक्चर आदि में महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमीशन (10 से 14 साल) देती है। ऐसे में वे महिलाएं जो लीक से हट, अपने कॅरियर को नई पहचान देना चाहती हैं, तो नेवी उनक ा मनमाफिक क्षेत्र हो सकता है।
वयं रक्षाम: यानि हम रक्षा करते हैं। 1978 में अपनी स्थापना से भारतीय तटरक्षक बल इस मोटो को सार्थक करता आया है।
लाइन ऑफ डिफेंस
आज देश के तटों की सुरक्षा का दूसरा नाम बन चुका है कोस्ट गार्ड। यह एक ऐसा काम है जिसमें आपके हौसले, सूझबूझ व शारीरिक क्षमताओं की परख कदम-कदम पर होती है। यदि आपमें ये सभी चीजें हैं तो आप भी बन सकते हैं सागर प्रहरी..
भारतीय कोस्ट गार्डका मोटो है वयं रक्षाम:यानि हम रक्षा करते हैं। 1978 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय तटरक्षक बल इस मोटो को सार्थक करता आया है। आज कोस्ट गार्ड के कामों का दायरा विस्तृत हो चुका है। सामुद्रिक रास्तों से होने वाली घुसपैठ से लेकर, रेस्क्यू ऑपरेशन, तस्करी नियंत्रण तक सब इसके ही दायित्वों में शुमार होते हैं। शायद यही कारण है कि इसे समुद्र में देश की फ‌र्स्ट लाइन ऑफडिफेंसभी कहा जाता है। कोस्ट गार्ड का मुख्य काम देश के सामुद्रिक हितों की रक्षा व सामुद्रिक कानूनों का अनुपालन कराना होता है। ऐसे में यहां जोशीले युवाओं की सख्त दरकार होती है।
कॅरियर की एडवेंचरस राहें
देश केविशाल तटवर्ती क्षेत्र व खासतौर पर मुंबई पर हुए आतंकी हमले को देखते हुए सरकार आज कोस्ट गार्डको और धारदार बनाने में लगी है। इसके चलते कोस्ट गार्डमें दक्ष लोगों के लिए अच्छे अवसर बन चुके हैं।
शारीरिक और शक्षिक योग्यता अहम
कोस्ट गार्ड में प्रवेश के लिए आपको सटीक शरीरिक मापदंडों के साथ उचित शक्षिक योग्यता की भी जरूरत होती है। जनरल ड्यूटी के लिए आपको 10+2+3 पीसीएम से पास होना जरूरी है। वहीं पायलट/नेवीगेशन की पोस्ट के लिए 12वीें के साथ कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस या फिर बीएससी स्नातक होना आवश्यक है। टेक्निकल ब्रांच में प्रवेश के लिए आपको मैकेनिकल, मरीन, आर्किटेक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजाइन इंजीनियरिंग आदि में स्नातक डिग्री की जरूरत होती है।
ैसे होता हैसेलेक्शन
इस परीक्षा के पहले चरण को मेंटल एबीलिटी टेस्ट (मैट) कहते हैं, जिसमें रीजिनिंग, जनरल अवेयरनेस, जनरल इंटेलिजेंस से संबधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें सफल कैंडिडेट्स को दूसरे चरण मे पिक्चर परसेप्शन एंड डिस्कशन टेस्ट (पीपीडीटी) से गुजरना होता है। इसमें कामयाब कैंडिडेट्स अंतिम दौर यानि शारीरिक मानक परीक्षण को पार कर जॉब पाते हैं।

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