तैयारी आर्मी की


बहुत से युवाओं की तरह उसके पास भी कॅरियर विकल्पों की कमी नहीं थी। वह चाहता तो किसी भी कॅरियर में जाकर बेहतर पैसा, सेफ्टी, आरामदेह जिंदगी आसानी से पा सकता था, लेकिन उसने चुना अग्निपथ। दरअसल कारगिल की चोटियों को दुश्मनों के कब्जे से वापस लेने की जिद्द ने उसके भीतर वह आग लगाई,जो दुश्मनों के लिए दावानल साबित हुई। दुश्मनों की लाशों पर से अपना सफर बनाते हुए एक के बाद एक हिमालय की प्वांइट 5140, प्वाइंट 4750, प्वाइंट 4875 पर फ तेह हासिल की। और आखिर में अपनी जान देकर आने वाली पीढियों को गर्व करने की वजह दे दी। हम बात कर रहे हैं कारगिल युद्ध के शहीद परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा की। तीन साल के छोटे से सेना के कॅरियर में उन्होंने कुछ वे मुकाम स्थापित कर दिए, जिसके लिए आम लोग पूरी जिंदगी मेहनत के बाद भी तरसते हैं। आज विक्की द्वारा स्थापित इन ऊंचे मुकामों के करीब पहुंचने की हसरत आर्मी ज्वाइन करने वाला हर युवा रखता है। सबसे पहले देश, फिर अपनी रेजीमेंट, अपने साथी और सबसे आखिरी में अपनी जिंदगी का ख्याल। आज भारतीय सेना अपनी इन्हीं परंपराओं के कारण पूरी दुनिया में एक अलग पहचान रखती है। यदि सेना को कॅरियर के लिहाज से देखें, तो यह महज एक अवसर भर नहीं है, बल्कि यह तो फर्जअदायगी की वह राह है, जिसमें देश के करोडों लोग आप भर असीम भरोसा करते हैं और मानते हैंकि जब तक आप सरहद पर अपलक बैठे हैं दुश्मन देश में झांकने क ी जुर्रत भी नहीं कर सकता। 15 जनवरी, सेना दिवस के ऐसे ही खास अवसर पर हम सेना को कॅरियर विकल्प के तौर पर आपके सामने रख रहे हैं।
आर्मी ही क्यों ?
वैसे तो देश की सुरक्षा में तीनों ही सेनाएं अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं, लेकिन जहां तक थल सेना का सवाल हैतो उसकी अहमियत सर्वाधिक है। अब चाहे आकार की बात हो या फिर डिफेंस बजट में कुल हिस्सेदारी की। थल सेना को सर्वाधिक वरीयता दी जाती है। आखिर ऐसा हो भी क्यों न। देश की सीमावर्ती क्षेत्रों की निगहबानी हो या आतंक प्रभावित क्षेत्रों में कई-कईदिन चलने वाले कठिन ऑपरेशन, या फिर युद्धकालीन परिस्थितियां,थल सेना हर दम फ्रंट लाइन रोल में होती है। यही कारण हैकि सेना को हरदम बेहद जुनूनी, कठिन से कठिन परिस्थितयों में हार न मानने वाले जूझारू युवाओं की जरूरत होती है। इन्हीं सबके चलते करीब 12 लाख की शक्तिशाली भारतीय सेना में आज अवसरों की कोईकमी नहीं है। केवल कॉम्बेट फ्रंट पर ही नहीं इंजीनियरिंग सिग्नल, मेडिकल, एजूकेशन जैसे बहुत से क्षेत्र हैं, जो युवाओं को आर्मीमें इंट्री की राह देते हैं। यदि आप भी आर्मीमें जाकर उसकी बेहतरीन लाइफ स्टाइल, एडवेंचर, देश के लिए कुछ करने के जुनून से सीधे दो चार होना चाहते हैं तो आपके लिए यहां करने व सीखने को बहुत कुछ है।
बेहतर लाइफकी गारंटी
सेना आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती है, जहां आप एडवेंचर से लेकर बेहतरीन प्रोफेशनल कोर्सेज तक के न जाने कितने विकल्प चुन सकते हैं। आप चाहें तो सेना के जरिए कार रैली, बाइक रैली, माउंटियनेरिंग आदि में हिस्सा लेकर अपने एडवेंचरस नेचर को नेक्स्ट लेवल तक ले जा सकते हैं, तो वहीं मुक्केबाजी, घुडसवारी, शूटिंग, फेंसिंग (तलवारबाजी), गोल्फ जैसे तमाम खेलों में भी यहां हाथ अजमाने का पूरा मौका होता है। केवल सेना में रहने तक ही नहीं बल्कि इसके बाद भी आपके पास एक बेहतरीन लाइफ का विकल्प होता है। रक्षा मंत्रालय पुर्नवास महानिदेशालय ऐसे ही मामले देखता है। इसने सेना के स्थाई कमीशन व एसएससी ऑफिसरों के प्रशिक्षण के लिए आईआईएम, एमिटी जैसे संस्थानों से समझौते किए हैं, वहीं सैनिकों के पुर्नवास के लिए भी यह कईस्किल इनहैंसमेंट प्रोग्राम चलाता है।
कैसे ले सकते हैं इंट्री
सेना में दो तरह के ऑफिसर होते हैं- एक वे जो शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए थोडे समय के लिए आर्मी से जुडते हैं। दूसरे जो सेना में स्थाईकमीशन ले उसे लॉन्ग टर्म कॅरियर अॅाप्शन के रूप में देखते हैं। स्थाई कमीशंड अधिकारियों की नियुक्ति जहां यूपीएससी करता है तो वहीं अल्पकालीन क मीश्ाड अधिकारियों, तकनीकी, महिला, एनसीसी डायरेक्ट इंट्री स्कीम आदि से संबधित भर्तियां संबधित रिक्रूटमेंट डायरेक्टोरेट बोर्डक रता है।
एसएसबी है कसौटी
एसएसबी, डिफेंस सर्विसेज ज्वाइन करने से पहले आपकी काबिलियत जानने की महत्वपूर्ण कसौटी होती है। रिटेन टेस्ट में सफल होने वाले कैंडिडेट्स एसएसबी में भाग लेते हैं। इस पांच दिवसीय टेस्ट में देश के भावी सैन्य ऑफिसरों को हर लिहाज से परखा जाता है। यहां शामिल होने वाले कैंडिडेट्स को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर खुद को फिटेस्ट साबित करना होता है। यह प्रक्रिया पूरे पांच दिन चलती है, जिसमें हर दिन कैंडिडेट्स को अनेक टेस्टों, परीक्षणों, डिस्कशन के बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरना होता है। इन टेस्टों में कामयाब कुछ कैंडिडेट्स ही आखिरी दिन के एसएसबी तक पहुंच पाते हैं।
पहला दिन - एसएसबी इंटरव्यू का पहला दिन कैंडिडेट्स के लिए खासा महत्वपूर्णहोता है, जिसमें कैंडिडेट्स वर्बल, नॉन वर्बल टेस्ट देते हैं। इसके बाद टीएटी (थिमेटिक एपरसेप्शन टेस्ट) होता है। इसमें कैंडिडेट्स दिए हुए चित्र पर स्टोरी लिखकर उस पर डिस्कशन करते हैं।
दूसरा दिन - उम्मीदवारों को पुन: टीएटी से गुजरने के बाद वर्ड एसोसिएशन टेस्ट होता है, जिसमें कु छ शब्द दिखाकर उन पर वाक्य लिखने को कहा जाता है। जबकि विभिन्न परिस्थितियों में कैंडिडेट्स की मानसिक प्रतिक्रिया जांचने के लिए सिचुएशन रिएक्शन टेस्ट से गुजारा जाता है।
तीसरा दिन - एसएसबी के तीसरे दिन कैंडिडेट्स ग्रुप डिस्कशन, प्रोग्रेसिव ग्रुप टास्क (समूह टास्क) जैसे टेस्ट में हिस्सा लेते हैं। इसके बाद उन्हें हाफ ग्रुप टास्क, ग्रुप प्लानिंग, स्नेक टेस्ट (फिजिकल ऑब्सटेकल क्लियरेंस टेस्ट),इंडीविजुअल ऑब्सटेकल टेस्ट पूरे करने होते है ं।
चौथा दिन - टेस्ट के चौथे दिन सबसे पहले कैंडिडेट्स कमांड टेस्ट में भाग लेते हैं, जहां उनकी नेतृत्व क्षमताओं का आकलन किया जाता है। वहीं इसके बाद उम्मीदवारों की फिजिकल क्षमताएं जानने के लिए फाइनल प्रोग्रेसिव ग्रुप टास्क कंडक्ट किया जाता है।
पांचवां दिन - इसमें आप जीटीओ, डिप्टी कमांडेट, कमांडेट, साइकोलॉजिस्ट के साथ एक फॉर्मल डिकस्क्शन सेशन में भाग लेते हैं। इस दौरान आपके अनुभव, प्रक्रिया में सुधार के सूझाव भी मांगे जाते हैं।
तैयारी करती हैराह आसान
रक्षा सेवाओं में अधिकारी के तौर पर अपनी जगह बनाने के लिए तैयारी का अहम रोल होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वाकई आप एनडीए में जगह बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं तो बेहतर है कि कक्षा 9 या 10 से इसकी तैयारी शुारू कर दें ताकि 11वीं पास होते-होते आप एनडीए परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। इस बावत ला मिलेटेअर एकेडमी के कर्नल एसएम शुाक्ला कहते हैं कि इस परीक्षा का पैटर्न कुछ ऐसे डिजाइन किया गया है कि छात्र के दिमाग की पूरी परख हो सके। ऐसे में यदि आप मैथ्स, इंग्लिश की कॉन्सेप्चुअल नॉलेज व पिछले 6 महीने के करेंट इवेंट्स की अच्छी जानकारी रखते हैं तो आपके इस परीक्षा में क्वालीफाई करने के मौके बढ जाते हैं।
इंग्लिश की जरूरी है तैयारी
कर्नल शुक्ला कहते हैं कि अब यह परीक्षा इंग्लिश व हिंदी दोनों भाषाओं में होती है, लेकिन बावजूद इसके इंग्लिश विषय की भूमिका इस परीक्षा में कम नहीं हो जाती। यहां मुख्यतय: कैंडिडेट्स की बेसिक ग्रामर, वोकेब्यूलरी, अंडरस्टैडिंग ऑफ लैंग्वेज, लॉजिकल एबिलिटी ऑफ इंग्लिश आदि परखी जाती हैं। कक्षा 12 की इंग्लिश की एनसीआरटी, सीबीएसई की किताबें तैयारी के लिहाज से कारगर हो सकती है।
मैथ्स का नहीं हैअल्टरनेटिव
इस परीक्षा में मैथ्स का कोईविकल्प नहीं है। इसलिए जरूरी हैकि आप मैथ्स की तैयारी को लेकर ढिलाई न बरते। यहां कक्षा 12 स्तर की मैथ्स पूछी जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि आप कक्षा 11 व 12 की गणित पर अच्छी पकड रखते हैं, तो एनडीए,सीडीएस समेत एसएसबी में भी यह फायदा पहुंचा सकता है।
जीएस व जीए: अवेयरनेस की दरकार
जनरल अवेयरनेस का इन पेपरों में अच्छा खासा हिस्सा होता है। अत: उसे कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। जनरल स्टडीज की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की सामाजिक विषय व सांइस की किताबें बेहतर मानी जाती हैं।
एसएसबी: तैयारी पर अंतिम मोहर
अंतिम तौर पर सेना में जगह बनाने का रास्ता एसएसबी से होकर जाता है, जहां आपकी नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता, विपरीत परिस्थितियों में काम करने के कौशल की जांच की जाती है। यहां कामयाब होने के लिए जरूरी हैकि आप अपनी कम्युनिकेशन क्षमताएं, इंग्लिश स्पीकिं ग व तार्कि क क्षमताओं में बढोत्तरी करें। बकौल कर्नल एसएम शुाक्ला एसएसबी में आपकी वे जन्मजात प्रतिभाएं परखी जाती हैं, जिनकी दरकार हर इंसान को होती है। वैसे भी आर्मी, कैंडिडेट्स के समूह में केवल उनको ही चुनती है,जो सेना के मापंदडों पर खरे उतरें। लगातार अभ्यास से अपनी इन क्षमताओं में इजाफा किया जा सकता है।
आर्मी: एक दरवाजा, कई राहें
एनडीए (नेशनल डिफें स एकेडमी)
हौसलों की चौखट आर्मीको बतौर ऑफिसर ज्वाइन करने का सबसे बडा रास्ता एनडीए देता है। यह वह सीढी हैजो आपको आर्मी का टॉप ब्रास बना सकती है। इसके लिए न्यूनतम 12वीं (सांइस स्ट्रीम)से होना आवश्यक है। साढे सोलह से उन्नीस वर्ष के आयु वर्गवाले अविवाहितमेल कैंडीडेट्स इस परीक्षा के पात्र है। इस परीक्षा का आयोजन यूपीएससी यानि संघ लोकसेवा आयोग द्वारा साल में दो बार किया जाता है। एग्जाम का पैटर्न बहुविकल्पीय, सीबीएसई 12वीं पैटर्न पर आधारित होता है। रिटेन टेस्ट पूरी तरह बहुविकल्पीय होते हैं, जिसमें आपको मैथ्स (120अंक) व अंग्रेजी+जीके (150 अंक) के दो पेपर हल करने होते हैं। रिटेन क्वालीफाई करने के बाद स्टेट सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) के अंतर्गत पांच दिवसीय इंटरव्यू होता है। इन सबको सफलतापूर्वक पार करने वालेकैंडिडेट्स प्री-कमीशन ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग एकेडमी में भेजे जाते हैं।
एजूकेशन कोर
रास्ते हैं बरकरार
देश के कई विवि डिफेंस स्टडीज में कोर्स ऑफर करते हैं। इन कोर्सेज में पीजी, ग्रेजुएशन, डिप्लोमा कर आप सेना की शिक्षा कोर में जगह बना सकते हैं। ऐसे लोगों को सेना की शिक्षा कोर में ग्रांउड ड्यूटी ऑफिसर के तौर पर स्थाई कमीशन मिलता है। वैसे भी आज के पल-पल में बदलते भू-राजनैतिक परिदृश्य, पडोस से आती चुनौतियों के बीच उपयुक्त वॉर स्ट्रेटजी सेना की जरूरत है। इसके चलते सेना को बडे पैमाने पर योग्य मेंटर्स, ट्रेनर्स व शिक्षकों की आवश्यकता है। ये लोग सैन्य ऑफिसरों व जवानों को समय-समय पर आयोजित होने वाले शार्ट टर्म वॉर फेयर कोर्सेज, स्पेशल कोर्सो के जरिए दक्ष बनाती है। ऐसे में मिलेट्री संाइस में एमफिल, पीजी, पीएचडी लोगों के लिए यहां अच्छे अवसर हैं।
सीडीएस
मौका फाइनल पंच का
सीडीएस यानि कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज एग्जाम ग्रेजुएट युवाओं को आर्मी में जाने का मौका देता है। पात्रता- इस परीक्षा के लिए अविवाहित सांइस ग्रेजुएट इलीजिबिल हैं। यहां मैथ्स, जीके, इंग्लिश के तीन अलग- अलग पेपर होते हैं (नॉन टेक्निकल के लिए मैथ्स का पेपर देने की आवश्यकता नहीं होती)। इस परीक्षा का आयोजन भी यूपीएससी साल में दो बार करता है।
यूनिवर्सिटी डायरेक्ट स्कीम
इस स्कीम से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट या इंजीनियर फाइनल इयर के 19 से 25 वर्ष आयु समूह वाले छात्रों को प्रवेश मिलता है। यहां प्रवेश कैंपस सेलेक्शन व एसएसबी के जरिए होता है। इस एग्जाम से इंट्री लेने वाले छात्रों क ो सेना की तकनीकी शाखाओं में जगह दी जाती है। यहां 10+2 मैथ्स के छात्रों को आईएमए में सीधे इंट्री मिलती है। इस परीक्षा में साढे सोलह से साढे उन्नीस वर्ष के उम्र के कैंडीडेट्स हिस्सा ले सकते हैं । इस कोर्स का आयोजन जनवरी व जुलाई में होता है। इसमें इंट्री के लिए आपको सीधे रिक्रूटमेंट डॉयरेक्टोरेट के पास एप्लीकेशन भेजना होगा।
बायो कैंडिडेट्स
अवसरों की कैमिस्ट्री
मेडिकल कोर, सेना का एक अहम अंग है, जो युद्धकालीन परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि आतंक प्रभावित इलाकों में भी सेना के घायल जवानों के उपचार के साथ उनकी फिजिकल व मेंटल फिटनेस की देखरेख करती है। ऐसे में बायो स्ट्रीम के वे छात्र, जो सेना को बतौर चिकित्सक ज्वाइन करना चाहते हैं, के लिए मौक ों की कमी नहीं है। वे डायरेक्टर जनरल ऑफ मेडिकल सर्विसेज द्वारा हर साल ऑल इंडिया लेवल पर आयोजित होने वाली परीक्षा उत्तीर्णकर आर्मी की चुनौती भरी दुनिया में कदम रख पाते हैं।
शॉर्ट सर्विस कमीशन: अहम है आपकी च्वॉइस
इंडियन आर्मीमेंअल्टरनेटिव कॅरियर का भी रास्ता होता है, जिसे शॉर्ट सर्विस कमीशन अथवा एसएससी के नाम से जाना जाता है। इसमें आप न्यूनतम दस सालों के लिए सेना में अपनी सेवाएं देते हैं। 2006 से शॉर्ट सर्विस की अवधि 5 से बढाकर 10 वर्ष की जा चुकी है। यहां आपके पास स्थाईकमीशन का भी विकल्प होता है।
ओटीए: टेक्नोफ्रै ंडली लोगों की है जरूरत
टेक्निकल ग्रेजुएट्स को सीधे एसएसबी के माध्यम से सेना में जगह दी जाती है। अंतिम रूप से मेडिकल टेस्ट में क्वालीफाई करने वाले कैंडीडेट्स को 10 महीने के कोर्स के लिए ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) चेन्नईभेजा जाता है। जहां से पास आउट होने के बाद वे सेना की टेक्निकल ब्रांचेस को अधिकारी के तौर पर ज्वाइन करते हैं।
एनसीसी स्पेशल इंट्री स्कीम
एनसीसी, युवाओं का आर्मी में रिक्रूटमेंट का बढिया लॉन्च पैड है। इसके अंतर्गत वे सभी अविवाहित ग्रेजुएट जिनके पास एनसीसी सीसर्टिफि केट (न्यूनतम बीग्रेड के साथ) है, शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए एप्लाईकर सकते हैं। इस स्कीम में कैंडिडेट्स सीधे एसएसबी में हिस्सा ले सकते हैं।
वुमेन डायरेक्ट इंट्री
भारतीय सेना में महिलाएं बडी संख्या में वे मेडिकल ऑफिसर्स व नर्स के तौर पर काम करती हैं। इस स्कीम में 19 से 27 वर्ष की वे अविवाहित महिलाएं, जिनके पास बीए, बीएससी, बीसीए, बीकॉम, बीएससी (पीसीएम) आदि की डिग्री हो, अप्लाईकर सकती हैं।
शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल)
एसएससी के माध्यम से इजीनियरिंग ग्रेजुएट क ो सेना में अस्थाईकमीशन दिया जाता है। शॉर्ट लिस्टेड कैंडिडेट्स को एसएसबी के अंतर्गत ग्रुप डिस्क शन,साइको टेस्ट, इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया से गुजारा जाता है। यहां उत्तीर्ण होने वाले मेडिकल फिट कैंडिडेट्स को इस कोर्स के लिएओटीए, चेन्नईभेजा जाता है।

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