Wood Technologist डू गुड विद वुड

Wood Technologist डू गुड विद वुड
वुड का युटिलाइजेशन पॉपुलेशन बढने के साथ और बढ गया है। शहरों में इनका सबसे ज्यादा यूज घरेलू प्रोडक्ट्स, डेकोरेशन, स्टेशनरी आदि में किया जाता है। जाहिर है, जो लोग टिंबर का बेहतर इस्तेमाल करना जानते हैं, वे वुड साइंस और टेक्नोलॉजी के स्पेशलिस्ट बनकर करियर बना सकते हैं।
प्रॉपर यूज
वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी में स्टूडेंट को वुड की प्रॉपर नॉलेज और क्वॉलिटी इंप्रूव करना सिखाया जाता है। इसके कोर्सेज में वुड की लाइफ कैसे बढाई जाए, इसी पर मेन फोकस रहता है। एक वुड टेक्नोलॉजिस्ट वुड स्ट्रक्चर, क्लाइमेट और केमिकल्स के इफेक्ट, उसकी लाइफ और क्वॉलिटी और वर्क के हिसाब से वुड का सेलेक्शन आदि की नॉलेज रखता है। साथ ही, वह इस फील्ड में आ रही नई टेक्नोलॉजी के बारे में भी अपडेट रहता है। जैसे-जैसे यह सेक्टर आगे बढ रहा है, वैसे-वैसे इसमें नई-नई टेक्नोलॉजी भी सामने आ रही है।
स्किल्स
फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैटेरियल साइंस, स्ट्रक्चरल और केमिकल इंजीनियरिंग की नॉलेज के साथ एनालिटिकल और क्रिएटिव स्किल्स का होना इस फील्ड के लिए जरूरी है। लेबर से काम कराने और उन्हें मैनेज करने की क्वॉलिटी अगर नहीं है, तो इस फील्ड में आगे बढने में प्रॉब्लम आएगी। स्वरोजगार करना है, तो इसके लिए मार्केट में अच्छे कॉन्टैक्ट्स होने चाहिए।
वर्क शेड्यूल
वुड टेक्नोलॉजिस्ट्स का वर्क शिड्यूल टफ होता है। उसे प्रोजेक्ट पर कंपनी के हेड और जूनियर्स से लंबा डिस्कशन करना पडता है। प्रोजेक्ट शुरू करने से लेकर अंत तक यह प्रॉसेस चलता रहता है।
वुड से रिलेटेड सारे प्रोडक्शन को आगे बढाना उसी की लीडरशिप में होता है। प्रोडक्शन आउटपुट का रिव्यू करना और अगले दिन के वर्क की प्लॉनिंग डेली रूटीन में शामिल है।
बेनिफिट
अर्बनाइजेशन होने से यह इंडस्ट्री भी तेजी से ग्रोथ कर रही है। करियर के लिहाज से इसे नई फील्ड माना जा रहा है, लेकिन चैलेंजेज बाकी दूसरी फील्ड्स की तरह इसमें भी कम नहीं हैं, हालांकि इसमें जितने चैलेंजेज हैं, आगे बढने के चांसेज भी उतने ही ज्यादा हैं, लेकिन अभी भी इस सेक्टर को अनऑर्गेनाइज्ड माना जा रहा है।
सैलरी
वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स करने के बाद इस इंडस्ट्री में एंट्री करने वाले फेशर्स को करियर के शुरुआती दिनों में ट्रेनी के तौर पर तकरीबन 10 से 20 हजार रुपये प्रति माह मिल जाते हैं। तीन से चार साल के एक्सपीरियंस होल्डर्स की सैलरी 40 से 70 हजार रुपये तक हो जाती है।
फील्ड में एंट्री
फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ में बीएससी या फॉरेस्ट्री में बीएससी की डिग्री का होना, इस फील्ड में एंट्री के लिए कंपल्सरी है। स्टूडेंट अगर चाहें, तो वह वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी में डाक्टरेट तक की एजुकेशन लेकर भी इस सेक्टर में एंट्री कर सकते हैं।
मेन इंस्टीट्यूट्स
-एफआरआई यूनिवर्सिटी, देहरादून
-कन्नूर यूनिवर्सिटी, केरल
-इंडियन प्लाईवुड इंडस्ट्रीज रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, बंगलुरु
-इंस्टीट्यूट ऑफ वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, बंगलुरु
बेसिक नॉलेज का खेल
वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी में करियर बनाना है, तो कोर्स में बताई गई वुड से रिलेटेड बेसिक नॉलेज पर कमांड होनी चाहिए। जिन स्टूडेंट्स को वुड की क्वॉलिटी की ही परख नहीं होगी, वह इस सेक्टर में एजुकेशन लेने के बाद भी आगे नहीं बढ पाएंगे। किस वर्क के लिए किस तरह की वुड का प्रयोग करना है, वुड की लाइफ कितनी है, यह पता लगाना आ गया, तो आगे की मंजिल आसान हो जाती है।

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