हर दौर में इंसान ने खुद और अपने घर को औरों से अलग दिखाने की कोशिश की है। इस ह्यूमन नेचर के कारण ही इंटीरियर डिजाइनिंग के कॉन्सेप्ट में कुछ समय बाद नए-नए चेंजेज आते ही रहते हैं। इस समय जहां भी देखें, लोग अपने घरों में स्टाइलिस्ट टाइल्स लगवाने को प्रॉयरिटी दे रहे हैं। इस डिमांड को समझते हुए टाइल्स मैन्युफैक्चरर कंपनीज भी नई-नई डिजाइनर टाइल्स मार्केट में ला रही हैं। लोगों की थिंकिंग और मार्केट की सिचुएशन को देखते हुए आसानी से कह सकते हैं, टाइल डिजाइनिंग आज के दौर का एक पॉपुलर करियर है, जिसमें स्कोप लगातार बना रहेगा।
आइडिया का खेल
डिजाइनिंग का कॉन्सेप्ट आइडिया पर ही बेस्ड होता है। टाइल डिजाइनिंग के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अधिकतर लोगों की पसंद एक-दूसरे से अलग होती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए एक डिजाइनर को अपना डिजाइन कंप्लीट करना पडता है। टाइल्स को लेकर तो यह सिचुएशन और भी टिपिकल हो जाती है, क्योंकि यह मामलो सीधे-सीधे हम लोगों के स्टेटस सिंबल और च्वाइस से जुडा है। एक अच्छे टाइल डिजाइनर को इस बात का हमेशा ध्यान रखना पडता है। उसके डिजाइंस अट्रैक्टिव और न्यू पैटर्न वाले होने चाहिए, साथ ही सोबरनेस की भी दरकार हमेशा बनाए रखनी पडती है।
सैलरी
टाइल डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद एक ट्रेनी किसी रेपुटेटेड फर्म के साथ वर्क करके 15 से 20 हजार रुपये हर महीने कमा सकता है। अब अगर आप में डिजाइनिंग स्किल्स हैं और नए तरह के कॉन्सेप्ट को टाइल्स पर उतारने की काबिलियत रखते हैं, तो बहुत जल्द ही यह सैलरी दो से तीन गुना में कनवर्ट हो सकती है। इस फील्ड में एक्सपीरियंस के साथ-साथ सैलरी अपने आप बढती चली जाती है।
स्किल्स
इस फील्ड के लिए क्रिएटिविटी सबसे जरूरी है। जो स्टूडेंट इस सेक्टर में जाना चाहते हैं, उन्हें कलर्स, डिजाइन के पैटर्न, फोटोशॉप, कोरल ड्रॉ की नॉलेज होनी चाहिए। टाइल डिजाइनर में कस्टमर के फीडबैक को समझने की बेटर क्वॉलिटी भी बेहद जरूरी है। सोशल नेटवर्किग साइट्स का यूज करना भी उसे आना चाहिए।
चैलेंजिंग जॉब
टाइल डिजाइनिंग चैलेंजिंग जॉब्स में से एक है। आपको लगातार नए कॉन्सेप्ट्स पर काम करना होता है। इस फील्ड में टेक्निकली अपडेट रहने की जरूरत होती है, क्योंकि यहां काम डिजाइनिंग वर्क सॉफ्टवेयर्स के जरिए होता है और जैसे ही कोई नया सॉफ्टवेयर मार्केट में आता है, तो उसी पर वर्क करना होगा।
एवरी डे इज डिफरेंट
टाइल डिजाइनर के लिए हर दिन पहले दिन से डिफरेंट है। कुछ दिन ही बीतते हैं कि कोई नया कॉन्सेप्ट सामने आ जाता है। डिजाइनर को ध्यान रखना पडता है कि किस तरह का ट्रेंड चल रहा है या आने वाला है, साथ ही फॉरेन कंट्रीज में किस तरह के डिजाइंस की डिमांड चल रही है। अपने डिजाइन को फाइनल करने से पहले वह उसे एक्सपर्ट को दिखाता है। उनकी एडवाइज के आधार पर उसमें चेंज भी करता है।
फील्ड में एंट्री
सीनियर सेकंडरी कंप्लीट करने के बाद इससे रिलेटेड कोर्स कर सकते हैं। फाइन ऑर्ट्स से ग्रेजुएशन, सिरेमिक इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग आदि का कोर्स भी किया जा सकता है।
मेन इंस्टीट्यूट्स
-कॉलेज ऑफ ऑर्ट्स, दिल्ली
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद
-श्री जे.जे. स्कूल ऑफ ऑर्ट, मुंबई
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली