जरा याद करें जोधा-अकबर, दिल्ली-6, गुरु, सांवरिया, रंग दे बसंती और देवदास जैसी फिल्में। इन सभी फिल्मों में एक खास बात थी, फिल्म का सेट, जो लोगों के दिलो-दिमाग में अब तक बसा है, क्योंकि ये रियलिटी के काफी करीब थे। दरअसल, यही तो खूबी है एक सेट डिजाइनर की, जो फिल्म की स्टोरी और प्लॉट के अकॉर्रि्डग पूरा लुक और एटमॉस्फेयर सेट पर क्रिएट कर देता है। इसीलिए आज टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में जितनी इंपॉर्र्टेस डायरेक्टर की है, उतनी ही आर्ट डायरेक्टर की भी, जो सीरियल या फिल्म मेकिंग के दौरान सेट डिजाइन के हर काम पर बारीक ध्यान रखता है। अब अगर आप में भी स्पेस, फॉर्म, विजुअल स्टोरी बोर्ड, डिजाइन ले-आउट और लाइटिंग स्कीम्स की समझ या नॉलेज हो, तो बतौर सेट डिजाइनर एक आर्टिस्टिक करियर बना सकते हैं।
एस्थेटिक एंड अदर स्किल्स
सेट डिजाइनर का जॉब कुछ ऐसा है कि उसे फिल्म या टीवी सीरियल का सेट तैयार करने के लिए प्रॉपर रिसर्च और प्लानिंग करनी पडती है। ऐसे में डिजाइनर के पास स्ट्रॉन्ग एस्थेटिक सेंस, रिसर्च स्किल्स के साथ सीन की इंपॉर्टेस के हिसाब से परफेक्ट बजट बनाने की आर्ट होनी चाहिए, क्योंकि हर सीन के हिसाब से अलग सेट बनाना, उसमें यूज आने वाली सामग्री की लिस्टिंग करना और उसे फिल्म फाइनेंसर से अप्रूव कराना सेट डिजाइनर का ही काम है। फाइनेंसर जितना बजट डिसाइड करता है, उसी में सेट डिजाइन करना होता है। यहां उसकी कम्युनिकेशन स्किल काफी काम आती हैं। अगर कम्युनिकेशन स्किल अच्छी नहीं होगी, तो न आप डायरेक्टर की बात समझ पाएंगे और न ही उसे अपनी बात से कन्वींस कर पाएंगे। वहीं, जिनमें टीमवर्क की कैपेसिटी नहीं है, वे सेट डिजाइनर के रूप में वर्क कर ही नहीं सकते, क्योंकि उन्हें कारपेंटर, इलेक्ट्रिशियन, लाइटमैन, साउंडमैन से लगातार टच में रहना होता है।
टेक्निकल नॉलेज
सेट डिजाइनिंग की फील्ड में इमेजिनेशन क्वॉलिटी के अलावा टेक्नोलॉजी की नॉलेज सबसे ज्यादा इंपॉर्टेट है। अगर आप लंबे समय तक इस फील्ड में बने रहना चाहते हैं, तो कंप्यूटर के साथ-साथ वेक्टरवर्क्स, रेंडरवर्क्स, फोटोशॉप, इलस्ट्रेटर मैक्स आदि सॉफ्टवेयर्स की नॉलेज होना जरूरी है।
फाइनेंशियल स्टैबिलिटी
इस फील्ड में एक असिस्टेंट सेट डिजाइनर को बहुत ज्यादा पैसा नहीं मिलता है। काफी कुछ प्रोजेक्ट पर डिपेंड करता है, जिस पर आप वर्क कर रहे हों। अगर प्रोडक्शन हाउस बडा होगा और आपके वर्क को एप्रीसिएशन मिलने लगेगी, तो आप हर प्रोजेक्ट पर 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक अर्न कर सकते हैं। वैसे भी इन दिनों आर्ट डायरेक्टर की काफी डिमांड है, जिनकी सैलरी भी काफी अट्रैक्टिव होती है। अगर फिल्म के सेट की तारीफ होती है, तो हो सकता है कि फिक्स्ड अमाउंट से ज्यादा आपको मिल सकते हैं।
कोर्स और एलिजिबिलिटी
अगर आप सेट डिजाइनर बनना चाहते हैं, तो इसके लिए बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स का कोर्स अच्छा रहेगा। यह कोर्स सीनियर सेकंडरी पास करने के बाद भी कर सकते हैं। इंटीरियर डिजाइनिंग एंड आर्किटेक्चर की जानकारी भी इस फील्ड में एंट्री करने की अपॉच्र्युनिटी देती है।
मेन इंस्टीट्यूट्स
- फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे
-बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
-एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टीवी, नोएडा
-एलएस रहेजा स्कूल ऑफ ऑर्ट्स, मुंबई
जॉब सिनेरियो
इंडिया में प्राइवेट टेलीविजन चैनल्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। चैनल चाहें नए हों या फिर पुराने सभी टीआरपी की रेस में एक दूसरे से बेहतर पोजीशन हासिल करना चाहते हैं। टीआरपी की रेस में आगे आने के लिए अच्छे से अच्छे स्टेज शो, रियलिटी शो, नए सीरियल्स की डिमांड लगातार बढ रही है। माना तो यह भी जा रहा है कि आने वाले दिनों में फिल्म इंडस्ट्री से कहीं ज्यादा सेट डिजाइनर्स की डिमांड टेलीविजन सेक्टर में होगी।