जर्मनी के शहर ड्रैसडेन में क्रिस्टोफ ब्लोएडनर का दफ्तर किसी बच्चे के लिए स्वर्ग से कम नहीं है क्योंकि वह असंख्य नन्हे खिलौनों तथा हजारों रंग-बिरंगी लीगो ब्रिक्स से भरा है। उनका दफ्तर ब्रिक्सी डॉट कॉम का मुख्य केंद्र है। यह जर्मन कम्पनी इस्तेमाल हो चुकी लीगो ब्रिक्स का बड़े स्तर पर व्यापार करती है। यह सैकेंड हैंड चीजों को नए सिरे से जोड़ कर सैट बना कर इंटरनैट शॉपिंग वैबसाइट ईबे पर बेचकर मुनाफा कमाती है।
क्रिस्टोफ के अनुसार इटली, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका तथा सिंगापुर उनके सर्वाधिक महत्वपूर्ण बाजार हैं। उनकी कम्पनी इस वक्त 50 देशों में अपना सामान बेच रही है। 30 वर्षीय क्रिस्टोफ बचपन में लीगो से खूब खेला करते थे परंतु कॉलेज के दिनों में पैसे की जरूरत पडऩे पर उन्होंने अपना सारा संग्रह बेच दिया। तभी उन्हें एहसास हो गया कि एक-एक पीस की जगह पूरे सैट के लिए ज्यादा पैसे मिलते हैं।
उन्होंने सबसे पहले 100 किलो सैकेंड हैंड लीगो ब्रिक्स खरीदीं। उन्हें छांटने के लिए एक विधि विकसित करने पर उनके कई दिन बीत गए। वह हमेशा से अपना काम करके खुद के बॉस बनना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने यह उम्दा बिजनैस कान्सैप्ट तैयार किया। 2008 में कॉलेज खत्म करने के बाद इस इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग गै्रजुएट ने ब्रिक्सी डॉट कॉम की स्थापना की। उस समय कम्पनी की पूंजी केवल 1000 यूरो थी। आज उनकी कम्पनी हर साल 6 लाख डॉलर का टर्नओवर हासिल कर रही है।
यह कम्पनी पुरानी लीगो ब्रिक्स तथा लीगो खिलौनों को जमा करके सबसे पहले उन्हें एक वॉशिंग मशीन में धोती है, फिर उन्हें रंग व आकार के आधार पर छांट लिया जाता है। बेशक यह काम बेहद सरल लगे परंतु छांटने का काम काफी कठिन होता है क्योंकि तब तक लीगो अपने वास्तविक रूप से बदल चुके होते हैं। करीब 2000 अलग तरह के लीगो पाट्र्स हैं।
बच्चे कई तरह के ये खिलौने खरीदते हैं और समय के साथ उनके सभी पाट्र्स आपस में मिल चुके होते हैं। सैकेंड हैंड खिलौनों के तौर पर हासिल किए गए 40,000 पाट्र्स हर दिन ब्रिक्सी डॉट कॉम के पास पहुंचते है। इन्हें अलग-थलग करके क्रेट्स में रख दिया जाता है जिनमें हर एक के ऊपर प्रोडक्ट नंबर के साथ फोटो लगा दी जाती है जिससे कम्पनी के 4 फुलटाइम तथा 50 पार्टटाइम कर्मचारियों का काम कुछ हद तक आसान हो सके।
इन छांटे हुए पाट्र्स से नए सिरे से लीगो खिलौने तैयार किए जाते हैं। यहां ध्यान देना पड़ता है कि सारा सैट एक जैसे रंग तथा एक जैसे आकार के लीगो ब्रिक्स से बना हो। लीगो कम्पनी अपने उत्पादों को हर 2 से 3 सालों में बदलती रहती है जिस वजह से खिलौना प्रेमियों के लिए पुराने मॉडल हासिल करने के लिए सैकेंड हैंड ब्रिक्स से तैयार सैट्स ही एकमात्र विकल्प होते हैं। ब्रिक्सी डॉट कॉम 1980 के दशक से लेकर 2003 तक के हर प्रकार के तैयार किए सैट बेचती है, खासकर जिनकी मांग हो। योद्धा, किले तथा जलदस्यु के रूप में लीगो इन खिलौना प्रेमियों में काफी लोकप्रिय है।
जर्मनी में कुल खिलौना बिक्री का 17 प्रतिशत हिस्सा लीगो खिलौनों का है। कम्पनी के 27 उत्पाद देश के 50 पसंदीदा खिलौनों में शामिल हैं। लीगो के अलावा जर्मनी में करीब 670 खिलौना कम्पनियां हैं परंतु आज भी यह पसंदीदा है जिसका टर्नओवर साल 2012 में बढ़ते हुए 2.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।
क्रिस्टोफ के अनुसार इटली, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका तथा सिंगापुर उनके सर्वाधिक महत्वपूर्ण बाजार हैं। उनकी कम्पनी इस वक्त 50 देशों में अपना सामान बेच रही है। 30 वर्षीय क्रिस्टोफ बचपन में लीगो से खूब खेला करते थे परंतु कॉलेज के दिनों में पैसे की जरूरत पडऩे पर उन्होंने अपना सारा संग्रह बेच दिया। तभी उन्हें एहसास हो गया कि एक-एक पीस की जगह पूरे सैट के लिए ज्यादा पैसे मिलते हैं।
उन्होंने सबसे पहले 100 किलो सैकेंड हैंड लीगो ब्रिक्स खरीदीं। उन्हें छांटने के लिए एक विधि विकसित करने पर उनके कई दिन बीत गए। वह हमेशा से अपना काम करके खुद के बॉस बनना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने यह उम्दा बिजनैस कान्सैप्ट तैयार किया। 2008 में कॉलेज खत्म करने के बाद इस इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग गै्रजुएट ने ब्रिक्सी डॉट कॉम की स्थापना की। उस समय कम्पनी की पूंजी केवल 1000 यूरो थी। आज उनकी कम्पनी हर साल 6 लाख डॉलर का टर्नओवर हासिल कर रही है।
यह कम्पनी पुरानी लीगो ब्रिक्स तथा लीगो खिलौनों को जमा करके सबसे पहले उन्हें एक वॉशिंग मशीन में धोती है, फिर उन्हें रंग व आकार के आधार पर छांट लिया जाता है। बेशक यह काम बेहद सरल लगे परंतु छांटने का काम काफी कठिन होता है क्योंकि तब तक लीगो अपने वास्तविक रूप से बदल चुके होते हैं। करीब 2000 अलग तरह के लीगो पाट्र्स हैं।
बच्चे कई तरह के ये खिलौने खरीदते हैं और समय के साथ उनके सभी पाट्र्स आपस में मिल चुके होते हैं। सैकेंड हैंड खिलौनों के तौर पर हासिल किए गए 40,000 पाट्र्स हर दिन ब्रिक्सी डॉट कॉम के पास पहुंचते है। इन्हें अलग-थलग करके क्रेट्स में रख दिया जाता है जिनमें हर एक के ऊपर प्रोडक्ट नंबर के साथ फोटो लगा दी जाती है जिससे कम्पनी के 4 फुलटाइम तथा 50 पार्टटाइम कर्मचारियों का काम कुछ हद तक आसान हो सके।
इन छांटे हुए पाट्र्स से नए सिरे से लीगो खिलौने तैयार किए जाते हैं। यहां ध्यान देना पड़ता है कि सारा सैट एक जैसे रंग तथा एक जैसे आकार के लीगो ब्रिक्स से बना हो। लीगो कम्पनी अपने उत्पादों को हर 2 से 3 सालों में बदलती रहती है जिस वजह से खिलौना प्रेमियों के लिए पुराने मॉडल हासिल करने के लिए सैकेंड हैंड ब्रिक्स से तैयार सैट्स ही एकमात्र विकल्प होते हैं। ब्रिक्सी डॉट कॉम 1980 के दशक से लेकर 2003 तक के हर प्रकार के तैयार किए सैट बेचती है, खासकर जिनकी मांग हो। योद्धा, किले तथा जलदस्यु के रूप में लीगो इन खिलौना प्रेमियों में काफी लोकप्रिय है।
जर्मनी में कुल खिलौना बिक्री का 17 प्रतिशत हिस्सा लीगो खिलौनों का है। कम्पनी के 27 उत्पाद देश के 50 पसंदीदा खिलौनों में शामिल हैं। लीगो के अलावा जर्मनी में करीब 670 खिलौना कम्पनियां हैं परंतु आज भी यह पसंदीदा है जिसका टर्नओवर साल 2012 में बढ़ते हुए 2.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।
