मानवीय सभ्यता के इतिहास की जानकारी उन दस्तावेजों और अभिलेखों से होती है, जो कि विभिन्न रूपों में प्राप्त होते हैँं। ऐसे प्रलेख मिट्टïी के पट्टिïयों, ताम्र पत्रों, ताड़ के पत्तों, वृक्ष की छालों, पेपीरस आदि पर लिखे मिलते हैं, जिनसे उस समय के इतिहास की जानकारी मिलती है। किंतु सर्वाधिक महत्वपूर्ण कागज के दस्तावेज होते हैं। ऐसे दस्तावेज समय के साथ-साथ नष्टï होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें सुरक्षित करने की आवश्यकता होती है ताकि उन्हें आने वाली पीढिय़ों के लिए संभालकर रखा जा सके। देश के विभिन्न संग्रहालयों, अभिलेखागारों तथा प्रलेखन कार्यालयों में अन्हें सुरक्षित रखा जाता है। इन अभिलेखों व प्रलेखों को सुरक्षित रखना ही आर्काइव कीपिंग कहलाता है। यह मूलत: इतिहास विषय की एक शाखा है जो कि पुरातत्व व पुस्तकालय विज्ञान से भी संबंध रखती है। ऐसे अभिलेखों का उपयोग जहां विगतकालीन सभ्यताओं को जानने में किया जाता है, वहीं कई शोध कार्यों में भी इसका प्रयोग होता है। प्रारंभ में एक नीरस विषय माना जाता था, किंतु आज इसे एक तकनीकी विषय के रूप में देखा जाता है, क्योंकि अभिलेखों को संरक्षित करने में विभिन्न प्रकार की नयी तकनीकों व साधनों का प्रयोग किया जाता है।
ये अभिलेख कई प्रकार के रासायनिक तत्वों से बने होते हैं। जिन पर मौसम जलवायु, तापमान और वातावरण के अन्य तत्व भी प्रभाव डालते हैं। जिससे ये अभिलेखों के नष्टï होने की आशंका बनी रहती है। आर्काइव कीपिंग में अभिलेखों के वर्गीकरण, संरक्षण, रखरखाव आदि की विधियां सिखाई जाती है, ताकि उन्हें नष्टï होने से बचाया जा सके। आर्काइव कीपिंग के अंतर्गत जहां अभिलेखों व प्रलेखों को सुरक्षित रखना सिखाया जाता है, वहीं उनके रखरखाव में प्रयुक्त होने वाली तकनीकों व विभिन्न विधियों की भी जानकारी दी जाती है। एक आर्काइव कीपर को अत्यंत बारीकी व कुशलता से कार्य करना पड़ता है। कुछ पुस्तकालय भी पुस्तकों व अभिलेखों के संरक्षण में इन विधियों का प्रयोग करते हैं। आज देश के अनेक पुस्तकों व अभिलेखों के संरक्षण में इन विधियों का प्रयोग करते हैं। आज देश के अनेक पुस्तकालयों, संग्राहालयों व अभिलेखागारों में ऐसे असंख्य ऐतिहासिक व अनमोल अभिलेख सुरक्षित रखें हुए हैं, जिन्हें निरंतर संरक्षित किया जाता है।
'आर्काइव कीपिंग के महत्व को देखते हुए देश के विभिन्न शिक्षा संस्थाओं में इसे एक विशेष विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। इतिहास, पुरातत्व व पुस्तकालय विज्ञान के छात्रों के लिए यह अतिरिक्त तकनीकी योग्यता मानी जाती है। जो उन्हें रोजगार दिलाने में मदद करती है। साथ ही देश में समाचार पत्रों व पत्रिकाओं के फोटो लाइब्रेरी, विभाग में इस क्षेत्र के लोगों की मांग रहती है। चाहे आज प्रलेखों को कम्प्यूटर के माध्यम से रखा जाने लगा है किंतु वारुतविक अभिलेखों को संरक्षित करना भी उतना ही जरूरत होता है। ऐसे में आर्काइव विशेषज्ञों की आवश्यकता जरूरी होती है।
आर्काइव कीपिंग में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद संग्राहलों, अभिलेखागारों या विभिन्न पुस्तकालयों में रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि इस पाठ्ïयक्रम में इतिहास विषय के छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता है। किंतु कुछ संस्थान पुस्तकालय विज्ञान के छात्रों को भी प्रवेश की छूट देते हैं। ये पाठ्ïयक्रम विभिन्न अवधि के होते हैं और पूर्णकालीन व अंशकालीन रूप से भी चलाये जाते हैं। ये अवधि 2 माह से लेकर 2 साल की हो सकती है। इसमें अभिलेख संरक्षण संबंधी सैद्धांतिक व प्रायोगिक दोनों प्रकार की शिक्षा दी जाती है तथा संरक्षण में प्रयोग होने वाली विभिन्न विधियों व तत्वों से अवगत कराया जाता है। इसमें प्रवेश हेतु विज्ञापन समाचार पत्रों में प्रकाशित होते हैं। साथ ही इन संस्थाओं से संपर्क करके भी संबंधित पाठ्ïयक्रमों संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। ये संस्थान व उनमें चलाये जाने वाले पाठ्ïयक्रम इस प्रकार हैं:
राष्टï्रीय अभिलेखाकार, जनपथ, नई दिल्ली -110001
यह आर्काइव कीपिंग में डिप्लोमा प्रदान करता है, जिसमें प्रवेश हेतु आधुनिक इतिहास में स्नातकोत्तर होना आवश्यक है। उसकी अवधि एक वर्ष है।
अन्नामलाई विश्वविद्यालय, चेन्नई
इसके एक वर्षीय अभिलेख व पुरालेख संरक्षण में डिप्लोमा पाठ्ïयक्रम में स्नातक योग्यता धारकों को प्रवेश मिलता है।
गांधी ग्राम, ग्रामीण संस्थान, सूरत, गुजरात
यह संस्थान 2 वर्षीय अभिलेख व प्रलेखन डिप्लोमा पाठ्ïयक्रम को संचालित करता है। इसमें पुस्तकालय विज्ञान में प्रमाणपत्र धारी आवेदकों को प्रवेश मिलता है। इसके अलावा स्नातक के साथ अभिलेख क्षेत्र में अनुभव रखने वाले लोगों को भी प्रवेश दिया जाता है।
गुजरात विद्यापीठ, गुजरात (अहमदाबाद)
यह एक वर्षीय अभिलेख में डिप्लोमा पाठ्ïयक्रम का संचालन करता है, जिसमें स्नातक उपाधि धारकों को प्रवेश दिया जाता है।
पांडिचेरी विश्वविद्यालय
यह संस्थान अभिलेख स्टडीज में एक वर्ष के डिप्लोमा का संचालन करता है, जिसमें स्नातकोत्तर उपाधि धारक प्रवेश ले सकते हैं।
अजमेर विश्वविद्यालय, राजस्थान
यह अभिलेख विज्ञान में स्नातक स्तरीय पाठ्ïयक्रम का संचालन करता है, जिससे अंटरमीडिएट योग्यता रखने वाले अभ्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है। यदि आवेदक किसी भाषा विशेष में पारंगत हो तो यह उसके कैरियर में लाभकारी पक्ष सिद्ध हो सकता है। आर्काइव कीपिंग के माध्यम से फिल्म आर्काइव विभाग, प्रेस फोटो आर्काइव जैसे सरकारी व गैर सरकारी विभागों में भी रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।