मात्र
कुछ सैकेंड में हमारे ई-मेल देश के किसी भी कोने में पहुंच जाते हैं या
मोबाइल फोन के जरिए देश-विदेश के किसी भी कोने में हमारी बातचीत हो जाती
है। यह सारा कमाल है इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग का, जिसने
संचार की प्रकिया को न सिर्फ क्रांतिकारी बनाया है, बल्कि इतना उपयोगी बना
दिया है कि मोबाइल और इंटरनैट के बिना हम दुनिया से कटे-कटे लगते हैं।
क्या है इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग
फेसबुक, ट्विटर, ई-मेल जैसी सभी सुविधाएं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की ही देन हैं। 80 के दशक में आई.सी.टी. की शुरूआत हुई और आज भारत इंटरनैट यूकार्स में विश्व में तीसरे नम्बर पर आता है, जबकि सिर्फ भारत की 13 प्रतिशत जनता इसका इस्तेमाल करती है। अभी भी भारत में आई.सी.टी. को लेकर खासा काम होना बाकी है। देश के कोने-कोने में संचार की सुविधाएं जैसे इंटरनैट और ई-मेल पहुंचाने के लिए बहुत बड़े सूचना यंत्र की जरूरत है, जिसको बनाने और चलाने के लिए देश में कम्युनिकेशन इंजीनियर्स की खासी मांग है। अन्य इंजीनियरिंग कोर्सिस की तरह यह कोर्स भी चार वर्षीय है जिसमें पहले साल में इंजीनियरिंग के सामान्य विषय पढ़ाए जाते हैं।
योग्यता
इस कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं पास होना चाहिए और फिजिक्स और मैथेमैटिक्स जैसे विषय जरूर होने चाहिएं। इंजीनियरिंग में रुचि और अच्छे ज्ञान के चलते ही कोर्स करने के बाद प्लेसमैंट में मदद मिलती है।
कोर्स
विश्व की नई तकनीकें जैसे इंफॉर्मेशन टैक्रोलॉजी; आई.टी., इंटरनैट, परिवहन, वायरलैस कम्युनिकेशन, मोबाइल टैक्नोलॉजी, टैलीफोन, एविएशन, विमानन, कृषि, रिमोट सैंसिग, रोबोटिक्स, टी.वी., डिसप्ले, कम्प्यूटर्स, सैटेलाइट, मैडीकल, सुरक्षा जैसे तमाम क्षेत्र एवं तकनीकों में मूलभूत रूप से इलैक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए कम्युनिकेशन इंजीनियर बनने के लिए इलैक्ट्रॉनिक्स का ज्ञान होना बहुत जरूरी है।
कौशल इलैक्ट्रॉनिक्स, टैली कम्युनिकेशन, इलैक्ट्रीकल कम्युनिकेशन और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग आदि में बी.टैक या डिप्लोमा करने वाले छात्रों को कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में सफलता पाने के लिए डिग्री या डिप्लोमा के साथ-साथ विषयों की अच्छी समझ, गहन जानकारी होनी खासी जरूरी है। ध्यान रहे प्रतियोगिता के इस युग में सिर्फ डिग्री या डिप्लोमा लेने से जॉब की कोई गारंटी नहीं होती है।
संभावनाएं
आप प्राइवेट और पब्लिक दोनों क्षेत्रों में जा सकते हैं जैसे डिफैंस सर्विसिज, टैलीकम्युनिकेशन सर्विसेज, सिस्टम डिवैल्पमैंट, पॉवर सैक्टर, टी.वी. इंडस्ट्री, म्यूजिक इंडस्ट्री, ऑटोमोबाइल, स्पेस टैक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन, आई.टी होम एप्लायंसेज डिवैल्पमैंट तमाम क्षेत्र आपको रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
संस्थान
रेवा यूनिवसिर्टी, बेंगलूर, कर्नाटक
दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, नॉर्थ कैम्पस, नई दिल्ली।
इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, बनारस, उत्तर प्रदेश-221005
क्या है इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग
फेसबुक, ट्विटर, ई-मेल जैसी सभी सुविधाएं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की ही देन हैं। 80 के दशक में आई.सी.टी. की शुरूआत हुई और आज भारत इंटरनैट यूकार्स में विश्व में तीसरे नम्बर पर आता है, जबकि सिर्फ भारत की 13 प्रतिशत जनता इसका इस्तेमाल करती है। अभी भी भारत में आई.सी.टी. को लेकर खासा काम होना बाकी है। देश के कोने-कोने में संचार की सुविधाएं जैसे इंटरनैट और ई-मेल पहुंचाने के लिए बहुत बड़े सूचना यंत्र की जरूरत है, जिसको बनाने और चलाने के लिए देश में कम्युनिकेशन इंजीनियर्स की खासी मांग है। अन्य इंजीनियरिंग कोर्सिस की तरह यह कोर्स भी चार वर्षीय है जिसमें पहले साल में इंजीनियरिंग के सामान्य विषय पढ़ाए जाते हैं।
योग्यता
इस कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं पास होना चाहिए और फिजिक्स और मैथेमैटिक्स जैसे विषय जरूर होने चाहिएं। इंजीनियरिंग में रुचि और अच्छे ज्ञान के चलते ही कोर्स करने के बाद प्लेसमैंट में मदद मिलती है।
कोर्स
विश्व की नई तकनीकें जैसे इंफॉर्मेशन टैक्रोलॉजी; आई.टी., इंटरनैट, परिवहन, वायरलैस कम्युनिकेशन, मोबाइल टैक्नोलॉजी, टैलीफोन, एविएशन, विमानन, कृषि, रिमोट सैंसिग, रोबोटिक्स, टी.वी., डिसप्ले, कम्प्यूटर्स, सैटेलाइट, मैडीकल, सुरक्षा जैसे तमाम क्षेत्र एवं तकनीकों में मूलभूत रूप से इलैक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए कम्युनिकेशन इंजीनियर बनने के लिए इलैक्ट्रॉनिक्स का ज्ञान होना बहुत जरूरी है।
कौशल इलैक्ट्रॉनिक्स, टैली कम्युनिकेशन, इलैक्ट्रीकल कम्युनिकेशन और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग आदि में बी.टैक या डिप्लोमा करने वाले छात्रों को कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में सफलता पाने के लिए डिग्री या डिप्लोमा के साथ-साथ विषयों की अच्छी समझ, गहन जानकारी होनी खासी जरूरी है। ध्यान रहे प्रतियोगिता के इस युग में सिर्फ डिग्री या डिप्लोमा लेने से जॉब की कोई गारंटी नहीं होती है।
संभावनाएं
आप प्राइवेट और पब्लिक दोनों क्षेत्रों में जा सकते हैं जैसे डिफैंस सर्विसिज, टैलीकम्युनिकेशन सर्विसेज, सिस्टम डिवैल्पमैंट, पॉवर सैक्टर, टी.वी. इंडस्ट्री, म्यूजिक इंडस्ट्री, ऑटोमोबाइल, स्पेस टैक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन, आई.टी होम एप्लायंसेज डिवैल्पमैंट तमाम क्षेत्र आपको रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
संस्थान
रेवा यूनिवसिर्टी, बेंगलूर, कर्नाटक
दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, नॉर्थ कैम्पस, नई दिल्ली।
इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, बनारस, उत्तर प्रदेश-221005