चाक से संवारें भविष्य


स्वावलम्बी होना समय की जरूरत बन चुका है। स्कूल-कालेजों आदि में प्रयोग की जाने वाली चाक का उद्योग लगाकर न सिर्फ आत्मनिर्भर बना जा सकता है बल्कि बेरोजगारी की समस्या को भी दूर किया जा सकता है। यह एक ऐसा सहज व सुलभ उद्योग है जिसमें किसी विशेष उपकरण या खास तकनीकी की आवश्यकता नहीं है। और युवाओं के लिए सकारात्मक पहलू यह भी है कि चाक की मांग निरन्तर बढ़ती रहती है। जिसकी पूर्ति कर पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसलिए निश्चय ही युवाओं की आर्थिक उन्नति का द्वार इस उद्योग के जरिए खुलेगा।
चाक बनाने के लिए प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों का विवरण इस प्रकार है-
प्लास्टर आफ पेरिस 2.5 किलोग्राम
सरसों का तेल 100 ग्राम
मिट्टïी का तेल 100 ग्राम
नील 5 ग्राम
सांचे (गन मैटल या एल्युमिनियम से निर्मित)
चाक बनाने के लिए एक बाल्टी में नील घोलकर उसमें प्लास्टर आफ पेरिस को पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाता है। एक-दो मिनट तक पानी में यू ही रखने के बाद घोल को हाथ से हिलाते हैं। ताकि प्लास्टर आफ पेरिस पानी में घुल जाए। अब इस घोल को सांचों में भरने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाती है। लेकिन घोल को सांचों में डालने से पहले सांचों की भली भांति मिट्टïी के तेल एवं सरसों के तेल के मिश्रण के जरिए चिकना कर लिया जाता है। चूंकि गनमैटल से बने सांचे महंगे होते हैं अत: एलुमिनियम निर्मित सांचो का प्रयोग किया जा सकता है तथा इसके कोई दुष्परिणाम नहीं हैं। इस घोल को जमने में 20 मिनट का समय लगता है। इस समय का सदुपयोग करने की दृष्टिï से इस दौरान सांचों को बिना खोले ऊपर नीचे से बाह्यï भाग को साफ कर सकते हैं। ताकि सांचों के इधर उधर लगा प्लास्टर आफ पेरिस साफ हो जाए। 20 मिनट तक घोल को सांचों में रखने के बाद चाक को निकाला जाता है। पूरी तरह से चाक को तैयार करने के उद्देश्य से इसे 2-3 दिनों तक धूप में सुखाना चाहिए। इस प्रकार चाक बनाकर तैयार हो गई। ध्यान रहे बचा हुआ घोल पुन: दुबारा उपयोग में नहीं लाया जा सकता है। इसलिए हमेशा नाम तौल कर घोल बनाना चाहिए। ताकि प्लास्टर आफ पेरिस बर्बाद न हो।
इस प्रकिया के जरिए बोर्ड या स्लेटों पर लिखने वाली रंगीन चाक भी बनाई जा सकती है। वर्ष पर्यन्त चाक आपूर्ति की मांग बनी रहती है। इसलिए बेरोजगार युवाओं के लिए फायदेमंद बात यह है कि इस उद्योग को स्थापित करने से मजदूर न रख घर के सभी सदस्यों को इसमें लगाकर खर्च से बच सकते हैं और जीवकोपार्जन की आधारशिला रख सकते हैँं।

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