फार्मेसी और व्यावसायिक चिकित्सा क्षेत्र में हैं असीमित संभावनाएं


रोजगारों की किल्लत वाले इस जमाने में अभी फार्मेसी का क्षेत्र तमाम संभावनाओं से परिपूर्ण है। बारहवीं के बाद जब छात्र अपने कैरियर के संबंध में चिंतित होता है तभी फार्मेसी क्षेत्र में अचदी संभावनाओं से भरी राह उसका इंतजार कर रही होती हैं। वास्तव में देखा जाए तो फार्मेसी भी चिकित्सा क्षेत्र का ही ऐ पूरक पाठयक्रम है और इसे चिकित्सा पेशों से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। विभिन्न प्रकार की दवाइयों के निर्माण तथा उपयोग के संबंध में सैद्धान्तिक तथा व्यावसायिक शिक्षा देना ही फार्मेसी का प्रमुख उद्देश्य होता है। फार्मेसी शिक्षा का विकल्प बारहवीं पास करने के साथ ही किसी उत्कृष्टï व्यावसायिक पाठ्ïयक्रम की तलाश में होते हैं। उनके लिए यह क्षेत्र सबसे बेहतर और लाभदायक है।
बी. फार्मा और डी. फार्मा यानी दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्ïयक्रम तथा चार वर्षीय डिग्री पाठ्ïयक्रम फार्मेसी क्षेत्र में प्रमुख दो पाठयक्रम हैं। फार्मेसी में बी. फार्मा यानी डिग्री पाठ्ïयक्रम में प्रवेश पाने के लिए इंटरमीडिएट की परीक्षा विज्ञान विषयों के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके अलावा विज्ञान विषयों के साथ दसवीं या बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र डी. फार्मा यानी दो वर्षीय डिप्लोमा पाठयक्रम के लिए अर्हता रखते हैं। लेकिन इन दोनों ही पाठ्ïयक्रमों में प्रवेश पाने के लिए छात्रों को एक लिखित प्रतियोगिता परीक्षा से गुजरना पड़ता है। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के पश्चात्ï ही प्रवेश के हकदार बन सकते हैं। ज्ञात हो कि इस परीक्षा से इंटरमीडिएट के विज्ञान विषयक प्रश्ïन ही शामिल किए जाते हैं। इसके अलावा डिप्लोमा या डिग्री कार्स संचालित करने वाले कुछ संस्थान ऐसे भी हैं जो लिखित परीक्षा के बिना इंटरमीडिएट परीक्षा में अर्जित अंकों के आधार पर प्रवेश देते हैं। जो छात्र बी. फार्मा के पश्चात्ï भी अध्ययन करनाचाहते हों उनके लिए एम.फार्मा यानी मास्टर ऑफ फार्मेसी (स्नातकोत्तर पाठयक्रम) भी उपलब्ध है। इसमें मुख्यतया बी. फार्मा में हासिल अंकों के आधार पर ही प्रवेश दिया जाता है।
अवसर
फार्मेसी में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों को औषधि निरीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पर्दा पर नियुक्ति किया जाता है। गौरतलब है कि यह पद केन्द्र तथा राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभाग के अन्तर्गत सृजित किए जाते हैं। किसी औषधि निरीक्षक को मुख्य तौर पर विभिन्न दवा कंपनियों तथा दवा विक्रेताओं द्वारा उत्पादित तथा उनके पास उपलब्ध और बिक्री की जाने-वाली दवाइयों की गुणवत्ता संबंधी जांच करनी होती है।
इसके अलावा अन्य तमाम विभागों में भी योग्यता प्राप्त फार्मेसिस्टों की नियुक्तियां अनिवार्यत: की जाती हैं। इसके लिए रोजगार के कई अवसर उपलब्ध हैं इस दौर में । रेलवे भर्ती मंडलों द्वारा समय-समय पर फार्मेसी में डिग्री तथा डिप्लोमा धारकों की भर्तियां उनके अधीनस्थ अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए  की जाती रहती हैं। केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा चलाए जा रहे अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केन्द्रों में भी फार्मेसिस्टों की नियुक्तियां होती रहती हैं। इसके अतिरिक्त निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की दवा का उत्पादन करने वाली फार्मास्यूटिकल कंपनियां भी फार्मेसी में डिग्री रो$जगार का समुचित अवसर-उपलब्ध कराती हैं। फार्मेसी में योग्य छात्रों को मेडिकल रिप्रजेंटिव के तौर पर भी रखा जाता है। इसके अलावा मैनेजमेंट से लेकर उत्पादन इंजीनियर, पैकेजिंग विशेषज्ञ, रसायन इंजीनियर, दवा निर्माण अनुसंधान, बिक्री प्रबंधन तथा गुणवत्ता से जुड़े तमाम पदों के लिए भी योग्यता प्राप्त फार्मास्स्टिों की भतियां की जाती हैं। इन उच्च पदों पर पहुँचने के लिए आवश्यक है कि आप फार्मेसी में डिग्री अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त करें, इसके अलावा औषधि निर्माण तथा बिक्री से संबंधित स्वरोजगार का रास्ता भी खुला है।
प्रमुख संस्थान
1. बिड़ला इंस्टीटयूट ऑफ टेक्रोलॉजी, मसेरा, रांची।
2.महाराज सूरजमल कॉलेज फार्मेसी, जानकपुरी, नई दिल्ली।
3. बॉम्बे कॉलेज ऑफ फार्मेसी, सांताक्रुज, मुबई।
4. पी.जे इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल एजेकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़
5. महिला पॉलिटेक्राीक, महारानी, बोग नई दिल्ली।
6. यूनिवर्सिटी इंस्टीटयूट ऑफ फार्मास्यूटिकले टेक्रोलॉजी, अन्नमलाई।
7. राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंसेज, जयनगर, बंगलौर।
8. लागपुर विश्व विद्यालय, रवीन्द्रनाथ  टैगोर मार्ग, नागपुर
9. कॉलेज ऑफ फार्मेसी साइंसेज, गांधीनगर उड़ीसा।
10. हमदर्द कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मदनगीर, नई दिल्ली।
11. मुजफ्फनगर इंस्टीटयूट ऑफ टेक्रोलाजी, मुजफ्फरपुर।
12. यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा फार्मेसी विभाग, बड़ोदरा।
13.फार्मस्यूटिकल प्रोद्योगिक विभाग, जादवपुर विश्व विद्यालय ,कलकत्ता
14. डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी, कश्मीर विश्व विद्यालय, श्री नगर।
व्यावसायिक चिकित्सा
व्यावसायिक चिकित्सा विशेषज्ञों की मांग पूरे देश में बहुत अधिक है। ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट यानी व्यावसायिक चिकित्सा विशेषज्ञों के पाठयक्रम संचालित करने वाली कई स्तरीय संस्थाएं इस समय देश में हैं। इसके लिए आवश्यक है कि छात्र भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र तथा जीवविज्ञान एवं गणित विषयों के साथ बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण हो। अमूमन कोई आँक्यूपेशनल थिरेपिस्ट किसी रोगी के खंडित जीवन को पुन: आशा एवं विश्वास से भर देता है। खासतौर पर विकलांगों के पुनर्वास व उपचार में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रमुख संस्थान
1. शारीरिक विकलांग संस्थानख् मेडिसिन काँलेज, नागपुर।
2. आँक्यूथेरेपी ट्रेनिंग स्कूल एवं सेंटर, मेडिकल काँलेज, परेल, मुंबई।
3. आँक्यूपेशनल थेरेपी स्कूल, पटना मेडिकल काँलेज, पटना।
4. आँक्यूपेशनल थेरेपी ट्रेनिंग स्कूल, हुगली, कलकत्ता।
5. आँक्यूपेशनल थेरेपी विद्यालय, मेडिकल काँलेज, जयपुर
6. आँक्यूपेशनल थेरेपी एजुकेशनल क्रिश्चिन मेडिकल काँलेज एवं अस्पताल, बेल्लौर तलिमनाडु
7. शारीरिक विकलांग संस्थान, विष्णु दिगम्बर मार्ग, नई दिल्ली।
तमाम विभागों में भी योग्यता प्राप्त फार्मेसिस्टों की नियुक्तियां अनिवार्यत: की जाती हैं। इसके लिए रोजगार के कई अवसर उपलब्ध हैं इस दौर में । रेलवे भर्ती मंडलों द्वारा समय-समय पर फार्मेसी में डिग्री तथा डिप्लोमा धारकों की भर्तियां उनके अधीनस्थ अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए  की जाती रहती हैं।
रोजगारोन्मुखी व्यावसायिक शिक्षा का श्रेष्टïतम विकल्प : फार्मेसी पाठ्ïयक्रम
चिकित्सा शिक्षा का ही एक पूरक पाठ्ïयक्रम है-फार्मेसी। इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की दवाईओं के निर्माण एवं उनके उपयोग से संबंधिक सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक शिक्षा छात्रों को प्रदान की जाती है। वैसे जो छात्र बारहवीं कक्षा विज्ञान विषयों के साथ उत्र्तीण होने के बाद किसी रोजगारोन्मुखी व्यावसायिक पाठ्ïयक्रम की तलाश में है, उनके लिए फार्मेसी पाठ्ïयक्रम एक श्रेष्ठïतक विकल्प हो सकता है।
फार्मेसी पाठ्ïयक्रम मुख्यत : दो तरह का होता है।
1. फार्मेसी शिक्षा का द्विवर्षीय डिप्लोमा पाठ्ïयक्रम अर्थात्ï डी. फार्मा।
2. चार वर्षीय डिग्री पाठ्ïयक्रम अर्थात्ï बी.फार्मा।
छात्र जो फार्मेसी के डिप्लोमा अर्थात्ï डी.फार्मा पाठ्ïयक्रम में दाखिला लेना चाहते है, उनके लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता के अन्तर्गत विज्ञान विषयों के साथ दसवीं अथवा बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। फार्मेसी में डिग्री अर्थात्ï बी. फार्मा के पाठ्ïयक्रम में विज्ञान विषयों के साथ बारहवीं उत्तीर्ण छात्र प्रवेश पा सकते हैं। उपरोक्त दोनों ही पाठ्ïयक्रमों में प्रवेश हेतुृ एक लिखित प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बारहवीं (विज्ञान) स्तर के प्रश्र पूछे जाता हैं। फार्मेसी शिक्षा में डिप्लोमा अथवा डिग्री पाठ्ïयक्रम संचालित करने वाली कुछ संस्थाएं, छात्रों के बारहवीं के प्राप्तांक के आधार पर भी प्रवेश देती है। फार्मेसी के स्नातकोत्तर (एम. फार्मा) पाठ्ïयक्रम में प्रवेश आमतौर पर बी.फार्मा में प्राप्त अंकों के आधार पर होता है। लेकिन बी.फार्मा अथवा डी. फार्मा की योग्यता हासिल करने वाले युवकों के लिए रोजगार के कई द्वार अब तक खुल चुके हैं।
फार्मेसी में स्नातक की उपाधि धारकों की नियुक्ति केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभाग के अन्तर्गत सृजित औषधि निरीक्षक के पद पर की जाती है। औषधि निरीक्षक का कार्य विभिन्न औषधि निर्माण कंपनियों व दवा विक्रेताओं द्वारा उत्पादित तथा बिक्री की जाने वाली दवा की गुणवत्ता एवं उनके रख-रखाव से संबंधित कार्यों का निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण करना होता है। केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा संचालित अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर फार्मासिस्ट के रूप में फार्मेसी में डिग्री/डिप्लोमा धारक अभ्यार्थी की नियुक्ति तो की ही जाती है साथ-ही रेलवे भर्ती बोर्डो तथा सेवा भर्ती मंडलों द्वारा भी समय-समय पर इस पाठ्ïयक्रम में डिग्री अथवा डिप्लोमा प्राप्त अभ्यार्थियों की नियुक्ति उनके अधीनस्थ अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों के लिए की जाती है। इसके अतिरिक्त दवा का निर्माण करने वाली निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की फार्मास्युटिकल कंपनियां भी अपनी आवश्यकता के अनुरूप फार्मेसी में डिग्री/डिप्लोमा धारक युवकों की नियुक्ति करती है। अब तो मेडिकल रिप्रजेंटेटिव के पदों पर भी फार्मेसी योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों को वरीयता दी जाती है। इतना ही नहीं स्वतंत्र रूप से दवा का निर्माण अथवा व्यवसाय करने वाले फार्मेसी शिक्षा के उपाधि धारकों को सरकार द्वारा विशेष सुविधा व सहुलियतें प्रदान की जाती हैं इसके अलावा फार्मेंसी में डिग्री अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले योग्यताधारी मैनेजमेंट, उत्पादक इंजीनियर, गुणवत्ता नियंत्रण तथा बिक्री प्रबंधन से सम्बद्ध कई प्रकार के पदों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं।
वर्तमान समय में चिकित्सा सेवाओं में हो रहे लगातार विस्तार तथा दवाओं के निर्माण एवं उनके वितरण से संबंधित कार्यों के लिए आवश्यक श्रम शक्ति के मद्देनजर फार्मेसी शिक्षा का महत्व दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इस क्षेत्र में अपेक्षित योग्यता प्राप्त अभ्यर्थी न केवल सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्र के विभिन्न सार्वजनिक व गैर सार्वजनिक क्षेत्रों के विभिन्न पदों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं बल्कि दवा निर्माण व वितरण प्रविधि पर आधारित अपने स्वयं का उद्यम भी स्थापित कर आजीविका की एक सशक्त नींव डाल सकते हैं।
देश भर में फार्मेसी शिक्षा का पाठ्ïयक्रम संचालित करने वाली कुछ चुनिंदा संस्थानों की सूची नीचे प्रस्तुत है वैसे इससे संबंधित विस्तृत जानकारी भारतीय विश्वविद्यालय संघ द्वारा प्रकाशित 'हैड बुक आँफ मेडिकल एजूकेशनÓ का अवलोकन करने से प्राप्त हो सकता है।
प्रमुख संस्थान
1. महिला पाँलिटेक्रिक, महारानीबाक, नई दिल्ली
2. महाराजा सूरजमल काँलेज आँफ फार्मेसी, जनकपुरी, नई दिल्ली।
3. हमदर्द काँलेज आँफ फाँर्मेसी, मदनगीर, नई दिल्ली
4. बाँम्बे काँलेज आँफ फार्मेसी, शान्ताक्रुज, मुम्बई
5. फार्मास्युटिकल प्रौद्योगिक विभाग, यादवपुर वि.वि. कलकत्ता
6. नागपुर विश्वविद्यालय, रवीन्द्रनाथ टैगोर मार्ग, जयपुर।
7. काँलेज आँफ फार्मेसी साईसेज, गांधी नगर, उड़ीसा
8. पी.जी. इन्स्टीट्ïयूट आँफ मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च चंडीगढ़
9. फार्मेसी विभाग, यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा, बड़ोदरा
10. डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी, कश्मीर वि.वि., श्रीनगर
11. यूनिवर्सिटी इंस्टीटï्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल टेक्नोलॉजी अन्नामलाई
12. राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, जयनगर, बंगलोर
13. बिड़ला इन्स्टीटï्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची
14. मुजफ्फरपुर इन्स्टीटï्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुजफ्फरपुर (बिहार)
छात्र जो फार्मेसी के डिप्लोमा अर्थात्ï डी.फार्मा पाठ्ïयक्रम में दाखिला लेना चाहते है, उनके लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता के अन्तर्गत विज्ञान विषयों के साथ दसवीं अथवा बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। फार्मेसी में डिग्री अर्थात्ï बी. फार्मा के पाठ्ïयक्रम में विज्ञान विषयों के साथ बारहवीं उत्तीर्ण छात्र प्रवेश पा सकते हैं। उपरोक्त दोनों ही पाठ्ïयक्रमों में प्रवेश हेतुृ एक लिखित प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बारहवीं (विज्ञान) स्तर के प्रश्र पूछे जाता हैं। फार्मेसी शिक्षा में डिप्लोमा अथवा डिग्री पाठ्ïयक्रम संचालित करने वाली कुछ संस्थाएं, छात्रों के बारहवीं के प्राप्तांक के आधार पर भी प्रवेश देती है। फार्मेसी के स्नातकोत्तर (एम. फार्मा) पाठ्ïयक्रम में प्रवेश आमतौर पर बी.फार्मा में प्राप्त अंकों के आधार पर होता है। लेकिन बी.फार्मा अथवा डी. फार्मा की योग्यता हासिल करने वाले युवकों के लिए रोजगार के कई द्वार अब तक खुल चुके हैं।
प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में नौकरी
आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी के  समानांतर अब प्राकृतिक के प्रति भी आकर्षण बढ़ रहा है। चिकित्सा विज्ञान का यह क्षेत्र अब काफी विकसित व बहुआयामी हो चुका है। देश-विदेश में प्राकृतिक चिकित्सकों की मांग बढ़ गयी है। इसलिए यह क्षेत्र कैरियर के लिहाज से वरदान सिद्ध हो रहा है। प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े सभी पाठ्ïयक्रम रोजगार देने में सक्षम है इसलिए इनमें प्रवेश के लिए होड़ लगी है। प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े सभी पाठ्ïयक्रम रोजगार देने में सक्षम हैं। इसलिए इनमें प्रवेश के लिए होड़ लगी है। प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान दरअसल एक जीवन पद्घति है। इस पद्घति के चिकित्सक यह मानकर चलते हैं कि मनुष्य के  अंदर रोग प्रतिरोधी क्षमता विद्यमान होती है। सिर्फ इसे विकसित व गतिशील करने की जरूरत है। सभ्यता के आरम्भ से ही लोग प्राकृतिक ढंग से इलाज करते आ रहे हैं। यह पद्धति इस विश्ïवास के साथ आगे बढ़ती है कि इलाज से बेहतर परहेज है। उपवास, खेलकूद, व्यायाम, दौड़, मालिश, संगीत व स्नान आदि से कई बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। वर्षों के अनुसंधान से प्राकृतिक चिकित्सा का आधुनिकीकरण अवश्य हो गया है लेकिन इसके मूल स्वरूप में रंचमात्र भी परिवर्तन नहीं हुआ। इसके विकास के पीछे उन तकनीकी पाठ्ïयक्रमों का भी अभूतपूर्व योदान है जिन्हें करने के उपरान्त प्रशिक्षु तुरंत नियोजित हो रहे हैं।
प्राकृतिक चिकित्सा की मूल भावना है बीमारी की जड़ सहित उखाडऩा। जबकि एलोपैथी में बीमारी को दबाया जाता है जो समय आने पर पुन: उभर आती है। प्राकृतिक चिकित्सा इलाज में मिट्टïी पानी, सूर्य की किरणों, शकाहार, व्यायाम के जरिये उपचार करते हैं। भारतीय जीवन शैली के बुनियादी सिद्घान्तों में शामिल योग और प्राकृतिक चिकित्सा की आधुनिक समाज में लोकप्रिय बनाने के लिए इस क्षेत्र में डिप्लोमा, डिग्री कार्सों की नयी शुरूआत की गयी है। अल्प व दीर्धकालिक कोर्स करने के उपरांत सरकारी व निजी क्षेत्र की अस्पताअलों में नियुक्ति हो सकती है। यदि आप नौकरी नहीं करना चाहते हैं तो स्वतंत्र प्रैक्टिस भी कर सकते हैं। बतौर नेचुरोपैथिक कैरियर बनाने के लिए जरूरी नहीं है कि आप विज्ञान संकाय के छात्र रहे हों। आर्ट्ïस व कॉमर्स के छात्र भी डिप्लोमा, सर्टीफिकेट कर सकते हैं। लेकिन कला संकाय के उन्हीं छात्रों का नामजद किया जाता है जो शरीर विज्ञान के मूलभूत सिद्घान्त से अवगत होते हैं और इस क्षेत्र में उनकी बेहद दिलचस्पी होती है। प्राय:  सभी संस्थानों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिले किये जाते हैं। कहीं-कहीं स्कूल मेरिट के आधार पर भी दाखिले का प्रावधान है। कोर्स से संबंधित पढ़ाई और वांछित अनुभव जुटाकर इस क्षेत्र में प्रर्याप्त धन और यश पाया जा सकता है। एक अनुमान के अनुसार इस वक्त करीब 50 हजार प्राकृतिक चिकित्सकों की आवश्यकता है क्योंकि सभी सरकारी अस्पतालों में अब नेचुरोपैथिक की भी सेवा लेना अनिवार्य किया जा रहा है। डिप्लोमा कार्स के उपरांत नेचुरोपैथिक को करीब 8000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। लेकिन निजी क्षेत्र की उच्चस्तरीय अस्पतालों में 10 हजार से 20-25 हजार रुपये तक वेतन मिल सकता है। अधिक जानकारी, प्रासपेक्टस, सिलेबस, आवेदन-पत्र आदि के लिए इन संस्थानों से संपर्क स्थापित करें :-
दीवानंचद्र इस्टीट्ïयूट आफ नेचर क्योर एंड हार्ड केयर फाउंडेशन आफ इंडिया नयी दिल्ली-110001
योग, प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय, देसराज परिसर, ईस्ट ऑफ कैलाश, नयी दिल्ली गांधी नेशनल अकादमी आफ नेचुरोपैथी, गांधी स्मारक प्राकृतिक चिकित्सा समिति, गांधी स्मारक निधि 15, राजघाट कालोनी, रिंग रोड, नयी दिल्ली-110002
देव अंतराराष्टï्रीय योग केन्द्र, मोती झील, कानपुर (उ.प्र.)
डिप्लोमा इन नेचुरोपैथिक साइंसेज एंड योगा, डिपार्टमेंट आफ सोशल वर्क लखनऊ विश्व विद्यालय , लखनऊ (उ.प्र.)
गांधी चिकित्सा विद्यापीठ, बेगम पेट 500016 (आंध्र प्रदेश)
श्री डी. एम. कॉलेज नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस इजोर, 574240 (कर्नाटक)
अरोग्य मंदिर, गोरखपुर (उ.प्र.)
प्राकृतिक एवं योग चिकित्सा धाम, बस्ती, जयपुर-303301 (राजस्थान)
प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र (स्वास्थ्य अरोग्य आश्रम) कल्याण , पानीपत (हरियाणा)

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