सोचिए किआपके पास ऐसी इलेक्ट्रिक कार हो, जो आपके मोबाइल फोन से हमेशा कनेक्ट रहे। आप फोन पर ही उसकी लोकेशन ट्रैक कर लें। स्मार्टफोन में मौजूद टेलीमैटिक्स एप्लीकेशन से आप पता लगा लें कि कार की बैटरी कितनी चार्ज है। यहां तक कि कार का डोर ओपन करने और एसी ऑन या ऑफ करने के लिए आपको बस स्मार्टफोन पर हल्का सा टच करना पडे। अब ये ड्रीम नहीं रहा, बल्कि ऐसा रियलिटी में होने जा रहा है। इस तरह के कुछ और इनोवेशंस हैं, जो हमारी डे-टु-डे लाइफ की एक्टिविटीज को आसान बना रहे हैं। जानना चाहेंगे कि कार को स्मार्टफोन से कनेक्ट करने जैसे नए थॉट्स और कॉन्सेप्ट्स के पीछे कौन काम कर रहा है? यह है बेंगलुरु बेस्ड मूनराफ्ट इनोवेशन लैब, जिसे कुछ समय पहले इंफोसिस के चार एक्स एम्प्लाइज ने स्टार्ट किया था और अपनी डिजाइनिंग और टेक्नोलॉजी स्किल्स से नई बुलंदियों को छुआ है।
ब्लेंडिंग डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी
साल 2008 में बना था मूनराफ्ट इनोवेशन लैब, जिसके आधे एम्प्लाइज डिजाइनर्स थे और आधे टेक्नोलॉजिस्ट्स। कंपनी के को-फाउंडर सोम कुमार कोलाथर मूनराफ्ट की हिस्ट्री के बारे में बताते हैं कि इंफोसिस में डिजाइन और टेक्नोलॉजी टीम के साथ करीब 15 साल काम करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि दोनों को एक ही रूफ के नीचे लाकर कुछ नया क्रिएटिव करना चाहिए। इस तरह इंफोसिस में डिजाइन टीम के हेड श्रीधर मारी, एक्सपीरियंस बेस्ड डिफरेंसिएशन टीम के श्रीकुमार परामू, टेक्नोलॉजिस्ट्स कृष्णा कादिरी और वे एक साथ मिले। इन सभी का मानना था कि कस्टमर्स को वही टेक्नोलॉजी अपील करती है, जिसका डिजाइन अट्रैक्टिव हो। श्रीधर कहते हैं, हम फिजिकल और डिजिटल वर्ल्ड के बीच रिलेशन एस्टैब्लिश करना चाहते थे, इसलिए दोनों को साथ लेकर काम करना शुरू किया। आज प्रोडक्ट इनोवेशन सेक्टर में मूनराफ्ट ने अपनी एक स्पेशल जगह बना ली है। कंपनी में 50 के करीब एम्प्लाइज हैं, जिनमें इंजीनियर्स और क्रिएटिव लोगों की पूरी टीम है। हर कोई अपने एरिया का एक्सपर्ट है। सोम कुमार के अनुसार, कंपनी के सक्सेस का यही सीक्रेट है कि इसके टैलेंट पूल के लिए क्वॉलिटी से किसी तरह कॉम्प्रोमाइज नहीं किया जाता।
एसोसिएशन विद ई2-ओ
को-फाउंडर सोम कुमार बताते हैं मूनराफ्ट के लिए टर्निग प्वाइंट तब आया, जब 2009 में महिंद्रा एंड महिन्द्रा रेवा के लिए टेलीमैटीक्स टेक्नोलॉजी डेवलप करने की कोशिश कर रही थी। कंपनी को ई2-ओ कार लॉन्च करनी थी। इसी दौरान उन्होंने मूनराफ्ट को इसकी रिस्पॉन्सिबिलिटी सौंपी। दरअसल, महिंद्रा कस्टमर्स को कुछ ऐसा एक्सपीरियंस कराना चाहती थी, जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया था। स्मार्टफोन से अपने कार को कंट्रोल करना। इसी के बाद मूनराफ्ट ने आइडिया कंसीव कर, उसे डिजाइन और डेवलप किया। कंपनी के को-फाउंडर और चीफ डिजाइन ऑफिसर श्रीकुमार परामू ने बताया कि इसी के बाद पहली बार इंडिया में स्मार्टफोन बेस्ड टेलीमैटीक्स एप्लीकेशन से कार को हैंडल किया जा सका।
रीडिफाइनिंग कम्युनिकेशन
मूनराफ्ट के चीफ बिजनेस ऑफिसर शांताराम कहते हैं, हमारे सामने ब्लैंक कैनवास था। हमें कस्टमर को कम्युनिकेशन का बिल्कुल नया एक्सपीरियंस कराना था। हम फोन को कार के एक हिस्से के तौर पर देख रहे थे, जिसे पॉकेट में रखा जा सकता हो। मकसद था स्मार्टफोन के जरिए कस्टमर को स्मार्टकार एक्सपीरियंस देने का। हमने आर्ट, डिजाइन और टेक्नोलॉजी को मिलाकर एक यूनीक इंटरफेस तैयार किया, जो किसी कार के डैशबोर्ड जैसा फील दे रहा था। मसलन, कस्टमर को बटन प्रेस की जगह डायल करने की फैसिलिटी दी गई थी। यह एक ऐसा एप्लीकेशन था, जिससे कार को लॉक-अनलॉक करने के साथ एसी ऑन-ऑफ भी किया जा सकता था।
फ्यूचर प्लांस
सोम कुमार के अनुसार, इस मोबाइल एप में वायरलेस और कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जो कि दुनिया की सबसे सॉफिस्टिकेटेड और एडवांस टेक्नोलॉजी है, क्योंकि यह किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल सकती है। कंपनी के सीओओ चिंकू साइमन ने बताया कि मूनराफ्ट ऐसे एप्लीकेशन पर काम कर रहा है जो यूजर्स को अलर्ट कर सके कि वॉशिंग मशीन में कब वॉशिंग पाउडर डाला जाए या फिर रेफ्रिजरेटर में कब दूध या अंडा रखा जाए। टीम का मानना है कि ये डिजिटल इनवेंशन का दौर है, जिसमें इनोवेशन के काफी स्कोप हैं। कंपनी ने अब तक 20 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर काम किया है जिनमें एशियन पेंट्स, इंफोसिस, एक्सिस बैंक, माइंड ट्री के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।