एक रोचक व्यवसाय दुभाषिया का


भाषाओं का अतिरिक्त ज्ञान रोजगार के आकर्षक अवसर प्रदान कर सकता है। समस्त विश्व बहुत सीमित दायरे में सिमट गया है। विश्व के लोग परिवहन तािा संचार माध्यमों की प्रगति के कारण एक-दूसरे के बहुत ही निकट आ गए हैं। इसके बावजूद विभन्न देशों की  विभिन्न भाषाओं के कारण लोगों के एक दूसरे के संपर्क में आने की दुविधा बनी रहती है।
यह सर्वविदित है कि विश्व के ज्यादातर देशों में अंग्रेजी भाषा बोली व समझी जाती है, परंतु अनेक देश ऐसे हैं जिनकी भाषा बिल्कुल अलग है। हमारे ही देश में हिंदी व अंग्रेजी के अलावा विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न भाषाएं बोली जाती हैं। विश्व में कितनी भाषाएं हो सकती हैं। इसका मात्र अनुमान ही लगाया जा सकता है। संयुक्त राष्टï्र संघ ही ऐसा स्थान है, जहाँ अधिक भाषाएं बोली जाती हैं। ऐसे स्थानों पर एक-दूसरे की बातों को समझने के लिए दुभाषिए की आवश्यकता होती है।
दुभाषिए का कार्य है एक भाषा को विभिन्न भाषा-भाषी लोगों तक उनकी भाषा में पहुँचाना। हिंदी-अंग्रेजी के साथ-साथ किसी क्षेत्रीय ीााषा को भी जानकारी दुभाषिए के रोजगार की संभावना को बढ़ाती है, पर किसी  विदेशी भाषा का अतिरिक्त ज्ञान इन संभावनाओं को सरल बनाता है। दुभाषिए का दूसरा काम अनुवादक जैसा ही है पर दोनों में थोड़ा अंतर है। अनुवादक लिखित रूप से भाषा का स्पांतरण करता है, वहीं दुभाषिए को बातचीत या भाषण के दौरान भाषानुवाद कर वक्ता का भावार्थ अन्य को समझाना होता है।
एक अच्छा दुभाषिया अच्छा अनुवादक तो हो सकता है, पर जरूरी नहीं कि अनुवादक दुभाषिए का काम कुशलता से कर ले। दुभाषिए के कार्य में निपुणता परम आवश्यक है। दुभाषिए की जरूरत अंतर्राष्टï्रीय स्तर के सभा सम्मेलनों और सेमिनारों के अलावा आपसी बातचीत में भाषा सहायक के रूप में होती है। वक्ता की बात को दूसरों की भाषा में स्पष्टï करना दुभाषिए का प्रमुख कार्य है। दुभाषिए का कार्य समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता हैँ, जब दो व्यक्तियों की आपसी बातचीत में उसे भाषा सहायक की भूमिका निभानी होती है। दुभाषिए का कार्य सिर्फ वक्ता की बात शाब्दिक रूप से दूसरी भाषा में रूपांतरण रकना नहीं है, बल्कि वक्ता की बात का मूल उद्देश्य भी रूपांतरित करना है।
विभिन्न देशों में बढ़ते राजनीतिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्तों को देखते हुए दुभाषिए के कैरियर में व्यापक संभावनाएं उभर आई है।
अब दुभाषियों का काम सिर्फ विदेशी सरकारी। मेहमानों के आने तक ही सीमित नहीं है, दूतावास, बहुराष्टï्रीय कंपनियों, व्यापारिक, संस्थाएं, अंतर्राष्टï्रीय बैंक, होटल एवं ट्रैवल एजैंसिया भी दुभाषियों की मांग रखती हैं। इसके अलावा उड्डïयन व पर्यटन सेवाएं तथा राष्टï्रीय फिल्म विकास निगम जैसे संस्थान भी दुभाषिों की सहायता लेते हैं। भारतीय पर्यटन विकास निगम ऐसे लोगों की तलाश में रहता है जो गाइड के साथ-साथ दुभाषिए का भी काम कर सके। पांच सितारा होटलों को भी दुभाषिया की जरूरत पड़ती है।
यदि आप विदेशी भाषा सीखना खहते हैं तो इसके लिए मेक्समूलर भवन तथा एलियांस फैं्रसे देा ही व्यवहारिक संगठन हैं, जो भारत में विदेशी भाषाएं सिखाते हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्व विद्यालय, दिलली आजकल विदेशी भाषाओं के अध्ययन का मुख्य केन्द्र बना हुआ है। यहां पर स्नातक पाठ्ïयक्रम की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें स्पेनिश, फे्रंच, रूसी, जर्मन, जापानी, चीनी भाषाएं सिखाई जाती हैं।
दूसरे महानगरों में भी विदेशी भाषाओं की शिक्षा देने की व्यवस्था है, जिसमें मुम्बई शहर मुख्य है। दुभाषियों की आवश्यकता द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति और संयुक्त राष्टï्र संघ की स्थापना के साथ ही एकाएक महसूस की गई। आज यह एक आकर्षक वेतन वाला कैरियर बन गया है। 50 के दशक में भारत प्राय: विदेशी दुभाषियों पर निर्भर रहना पड़ता था। आज स्थिति पहले जैसी नहीं रही। देश में विदेशी भाषा सीखने के कई महत्वपूर्ण सरकारी, गैर सरकारी संस्थान उपलब्ध हैं।
अंतर्राष्टï्रीय संबंधों और भारत के अन्य देशों के रिश्तों की नब्ज पहचानते हुए संबंध भाषा को सीखने के पश्चात्ï अपने आप को दुभाषिए के रूप में ढालकर रोजगार पाया जा सकता है। यह कैरियर असीम संभावनाओं से भरा है। संभावनाओं को साकार करने में नीचे दिए गए पते महत्वपूर्ण सहायता दे सकते हैं।
जवाहरलाल नेहरू विश्व विद्यालय, स्कूल आफ फारेन लैंग्वेजेज, न्यू महरौली रोड, नई दिल्ली-110067
एसोसिएशन आफ कांफैंस ट्रांसलेटर्स एंड इंटरपिंटर्स, 4, अमर चैम्बर 11, प्राताप भवन एन-112 कनाट सर्कस, नई दिल्ली-110001.
दुभाषिए का कार्य है एक भाषा को विभिन्न भाषा-भाषी लोगों तक उनकी भाषा में पहुँचाना। हिंदी-अंग्रेजी के साथ-साथ किसी क्षेत्रीय ीााषा को भी जानकारी दुभाषिए के रोजगार की संभावना को बढ़ाती है, पर किसी  विदेशी भाषा का अतिरिक्त ज्ञान इन संभावनाओं को सरल बनाता है। दुभाषिए का दूसरा काम अनुवादक जैसा ही है पर दोनों में थोड़ा अंतर है।

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