टाइपोग्राफर: स्टाइलिश फॉन्ट क्रिएटर

टाइपोग्राफर: स्टाइलिश फॉन्ट क्रिएटर
क्रिएटिव अप्रोच रखते हैं.. स्टाइलिश फॉन्ट्स के नए-नए डिजाइंस बनाने का शौक है, तो टाइपोग्राफी फील्ड में ब्राइट करियर बना सकते हैं..
आर्ट और डिजाइन का मतलब सिर्फ पेंटिंग, ड्राइंग या डिजिटली पिक्चर्स क्रिएट करना ही नहीं, बल्कि नए स्टाइल में लेटर, फॉन्ट, टाइपफेस और अल्फाबेट डेवलप करना भी एक तरह का आर्ट है, जिसे टाइपोग्राफी कहते हैं। अगर आपमें भी ऐसा कुछ क्रिएट करने की क्षमता है, तो इस फील्ड में संभावनाओं की कमी नहींहै।
जॉब ऑफ टाइपोग्राफर्स
नया टाइपफेस और फॉन्ट्स बनाने वाले एक्सप‌र्ट्स को टाइपोग्राफर्स कहते हैं। ये कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से न्यूजपेपर, एडवर्टिजमेंट, ग्राफिक नॉवेल्स, ब्लॉग्स और दूसरे पब्लिकेशंस के लिए सिग्नेचर स्टाइल्स क्रिएट करते हैं।
बेसिक स्किल्स
टाइपोग्राफी फील्ड में टेक्नोलॉजी और डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर के बदलते रहने से कुछ मुश्किलें आती हैं। ऐसे में ग्राफिक डिजाइनिंग एप्लीकेशंस से अपडेट रहना अच्छा रहता है। साथ ही, इन स्किल्स पर ध्यान देना भी जरूरी है :
-डिफरेंट लैंग्वेज की वोकेबुलरी की नॉलेज
-डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर्स की नॉलेज
-क्रिएटिव ऐंड विजुअलाइजेशन पावर
जॉब ऑप्शंस
कैंडिडेट्स पार्ट टाइम, फुलटाइम या कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम कर सकते हैं। डेस्कटॉप पब्लिशर्स, ग्राफिक डिजाइनर्स और लेआउट आर्टिस्ट्स के रूप में भी इनकी काफी मांग है।
-प्रिंट ऐंड पब्लिशिंग इंडस्ट्री
-एडवर्टाइजिंग एजेंसीज
-ग्राफिक डिजाइन कंपनियां
सैलरी
बड़ी कंपनियां 40 से 50 हजार रुपये मंथली
तक देती हैं। फ्रीलांसर के रूप में वर्क करने पर
20 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह मिल सकते हैं।
कोर्स ऐंड एलिजिबिलिटी
टाइपोग्राफी ज्यादातर संस्थानों में डिजाइनिंग कोर्स का हिस्सा होता है। बैचलर ऑफ फाइन आ‌र्ट्स या बैचलर ऑफ विजुअल आ‌र्ट्स का कोर्स करके इस फील्ड में एंट्री कर सकते हैं। मिनिमम क्वालिफिकेशन सीनियर सेकंडरी है।
प्रमुख इंस्टीट्यूट्स
-एनआईडी, अहमदाबाद
www.nid.edu
-दिल्ली कॉलेज ऑफ आ‌र्ट्स, नई दिल्ली
www.colart.delhigo1t.nic.in
-सर जेजे स्कूल ऑफ आ‌र्ट्स, मुंबई
www.jjiaa.org
-आईआईटी, मु़ंबई
www.idc.iitb.ac.in
गुडविल से वर्क
इस फील्ड में सक्सेस होने के लिए मार्केट में अपनी गुडविल बनानी होगी। यह क्लाइंट सैटिस्फैक्शन से ही हो सकता है। गुडविल बन जाने के बाद काम आसानी से मिलने लगता है। हालांकि कई बार ऐसा भी होता है कि कोई क्लाइंट आपके फॉन्ट्स को रिजेक्ट कर दे और दूसरा उसे खरीद ले। इसलिए अपने किसी भी क्रिएशन को वेस्ट न समझें। रिजेक्ट किए गए फॉन्ट्स को नया रूप देने की कोशिश करते रहें। जिस टाइपोग्राफर के पास फॉन्ट्स का जितना ज्यादा स्टॉक होता है, वह इस फील्ड में उतना ही आगे बढ़ सकता है।

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