मानसिक
तनाव का सामना जो नहीं कर सकते ऐसे लोगों में प्रमुख रूप से 3 गुण होते
हैं- अति कार्यक्षमता अति महत्वाकांक्षा और सदा मन की सम्भ्रमित स्थिति।
यही दिखाने की कोशिश करते हैं कि वे हर चीज दूसरों से पहले कर सकते हैं।
सिग्रल पीला हो तो उसके लाल होने से पहले ही ये लोग उसे पार करते हैं। लिफ्ट के लिए थोड़ी राह देखना भी उनके बस की बात नहीं होती। सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे लोगों को जिम्मेदारी बांट लेना अच्छा नहीं लगता इसलिए कम्पनी में काम के लिए ये लोग आगे आकर जिम्मेदारी लेते तो हैं लेकिन उन्हें टीमवर्क की आदत नहीं होती।
ऐसे लोग असफल होने की बजाय मर जाना अच्छा समझते हैं। एक नौकरी पर टिके रहना उनके स्वभाव में नहीं होता। वे नौकरियां बदलते रहते हैं। वे हमेशा यही कहते हैं कि काम का तनाव ज्यादा है लेकिन सच्चाई यह होती है कि बॉस या अपने सहयोगियों के संबंध में इनके मन में नाराजगी छिपी रहती है। मन में इन्हें हमेशा यह महसूस होता है कि हम गलती कर रहे हैं हम अपने आप से भी दिल खोलकर बातें नहीं कर सकते लेकिन वे यह कल्पना भी नहीं कर सकते कि अपने मन को समझाने के लिए समय देना जरूरी है या किसी दूसरे की सहायता लेना जरूरी है। इससे ये भावनात्मक दृष्टि से अशांत रहते हैं। इन्हीं कारणों से ये अपनी बुद्धि व गुणों का प्रयोग भी नहीं कर पाते।
हमें अब यही सोचना है कि क्या हम इनमें से एक हैं नहीं हैं तो अच्छा ही है किन्तु अगर हैं तो हमें सोचना चाहिए कहीं इस आदत के कारण हम अपने परिवार, समाज या काम की जगह पर अकेले पड़ जाएं तो मानसिक तौर पर मुश्किल होगी। इसका असर हमारे शरीर पर भी होगा। इस खतरे को पहचानना जरूरी है।
सिग्रल पीला हो तो उसके लाल होने से पहले ही ये लोग उसे पार करते हैं। लिफ्ट के लिए थोड़ी राह देखना भी उनके बस की बात नहीं होती। सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे लोगों को जिम्मेदारी बांट लेना अच्छा नहीं लगता इसलिए कम्पनी में काम के लिए ये लोग आगे आकर जिम्मेदारी लेते तो हैं लेकिन उन्हें टीमवर्क की आदत नहीं होती।
ऐसे लोग असफल होने की बजाय मर जाना अच्छा समझते हैं। एक नौकरी पर टिके रहना उनके स्वभाव में नहीं होता। वे नौकरियां बदलते रहते हैं। वे हमेशा यही कहते हैं कि काम का तनाव ज्यादा है लेकिन सच्चाई यह होती है कि बॉस या अपने सहयोगियों के संबंध में इनके मन में नाराजगी छिपी रहती है। मन में इन्हें हमेशा यह महसूस होता है कि हम गलती कर रहे हैं हम अपने आप से भी दिल खोलकर बातें नहीं कर सकते लेकिन वे यह कल्पना भी नहीं कर सकते कि अपने मन को समझाने के लिए समय देना जरूरी है या किसी दूसरे की सहायता लेना जरूरी है। इससे ये भावनात्मक दृष्टि से अशांत रहते हैं। इन्हीं कारणों से ये अपनी बुद्धि व गुणों का प्रयोग भी नहीं कर पाते।
हमें अब यही सोचना है कि क्या हम इनमें से एक हैं नहीं हैं तो अच्छा ही है किन्तु अगर हैं तो हमें सोचना चाहिए कहीं इस आदत के कारण हम अपने परिवार, समाज या काम की जगह पर अकेले पड़ जाएं तो मानसिक तौर पर मुश्किल होगी। इसका असर हमारे शरीर पर भी होगा। इस खतरे को पहचानना जरूरी है।