आर्ट डायरेक्शन-ग्लैमर से भरपूर एक व्यवसाय


एक ऐसे मनमोहक दृश्य की कल्पना कीजिए जहाँ पर एक झरना बह रहा है ......... कुछ ही दूरी पर एक झोपड़ी बनी हुई है ........ राजा का दरबार लगा हुआ है या फिर देखते-देखते अचानक कहीं से धुआँ निकले लगे ......। यह किसी फैन्टेसी सीरियल या किसी फिल्म का दृश्य हो सकता है। किसी भी जगह किसी किसी दृश्य को क्रिएट करने वाला जादूगर आर्ट डायरेक्टर कहलाता है। आर्ट डायरेक्ïशन का सीधा संबंध कला की सहज एवं सरल अभिव्यक्ति से जुड़ा हुआ है। आर्ट डायरेक्ïशन में कला अर्थात्ï द्ïश्य की अभिव्यक्ति जितनी वास्तविक होगी फिल्म उतनी ही भव्य और सुन्दर दिखायी देगी। इसलिए आर्ट डायरेक्ïशन फिल्म मीडिया में सबसे अधिक क्रिएटिव कार्य है। आर्ट डायरेक्टर का मुख्य कार्य किसी दृश्य को किसी भी जगह उपस्थित कर उसमें जीवंतता का समावेश कर देना है।
आर्ट डायरेक्शन से जुड़ा हुआ एक और प्रोफेशन होता है इंटीरियर डेकोरेशन। लेकिन इन दोनों में जमीन-आसमान का अन्तर है। ये दोनों ही प्रोफेशन एक दूसरे से कहीं भी मेल नहीं खाते हैं। इनमें सिर्फ एक ही समानता है और वह है सजावट। इंटीरियर डेकोरेशन की तुलना में आर्ट डायरेक्शन का क्षेत्र कहीं अधिक विस्तृत एवं चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए एक आर्ट डायरेक्टर अपना कार्य करते  समय इस बात का विशेष ध्यान रखता है कि कोई भी क्रिएट किया हुआ दृश्य बनावटी न लगे। कई आर्ट डायरेक्टर तो इस तरह से सीन को क्रिएट करते हैं कि दर्शकों को इस बात का सन्देह नहीं होता है कि दृश्य बनावटी है। मुगल-आजम, पाकीजा जैसी फिल्मों में कला का बेहतरीन नमूना देखने को मिलता है।
आजकल जिस तरह से फिल्मों के बनने में वृद्धि हो रही है उससे आर्ट डायरेक्टर का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक तरफ तो फिल्मों के निर्माण में आर्ट डायरेक्टर की माँग बढ़ रही है तो दूसरी तरफ टीवी चैनलों की आती बाड़ ने इस दिशा में कैरियर के द्वार खोले हैं। आज जिस तरह से टीवी कार्यक्रमों के बनने का क्रम तेजी से बढ़ा है उससे आने वाले समय में आर्ट डायरेक्टर की माँग का बढऩा भी अवश्यंभावी है। इसलिए इस क्षेत्र में खुद को स्थापित किया जा सकता है लेकिन इस क्षेत्र में कदम रखने से पहले खुद को अच्छी तरह से जाँच परख लेना चाहिए। यदि आपके अन्दर सृजनात्मक एवं प्रकृति को समझने की क्षमता है तो भाग्य आजमाया जा सकता है। इस क्षेत्र में ग्लैमर और पैसा दोनों ही है।
एक सफल आर्ट डायरेक्टर में दृश्य उपस्थित करने की क्षमता का होना आवश्यक है। वैसे तो आर्ट डायरेक्टर खुद सब कुछ अपनी क्षमता तथा क्रिएटीविटी से संचालित करता है। लेकिन अपवाद स्वरूप कई फिल्म निर्देशक आर्ट डायरेक्टर को दिशा-निर्देश देते हैं कि कहाँ कैसा दृश्य प्रस्तुत करता है, कहाँ किस तरह का समान चाहिए? एक निर्देशक भी तो यही चाहेगा कि उसके निर्देशन में फिल्माया गया सीन बेहद खूबसूरत हो। ऐसे में डायरेक्टर और आर्ट डायरेक्टर में आपसी सामंजस्य का होना बेहद जरूरी है। आजकल की फिल्मों में प्रोडï्यूसर सेट-डिजाइन करवाने में लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक खर्च कर डालते हैं, ऐसे में डायरेक्टर यही चाहेगा कि उसके दिशा-निर्देश के अनुसार ही आर्ट डायरेक्शन हो। आजकल सफल डायरेक्टर वही है जो सीन की डिमांड को पूरा करने के साथ-साथ डायरेक्टर को भी संतुष्टï कर सकता हो।
एक अच्छा और सफल आर्ट डायरेक्टर बनने के लिए प्रकृति की समझ का होना अति आवश्यक है और साथ ही साथ उसे कलर कम्बीनेशन का सेन्स होना भी जरूरी है। क्योंकि कलर कॉम्बीनेशन न आने पर बेहतरीन दृश्य भी बेजान हो जाता है। किसी दृश्य में यदि पेड़-पत्ते हैं तो ऐसे में लाल या काला रंग जो हरे रंग से मेल नहीं आता हो, दृश्य को अप्रभावी बना देगा। ेक दीपक का जलना आशा का सन्देश हो सकता है परन्तु यदि दीपक जलाकर चारों तरफ अंधेरा कर दिया जाय तो मृत्युशैया का सूचक हो जायेगा। किसी कमरे की शोभा बढ़ाने के लिए कमरे में कौन-कौन सी चीजें होनी चाहिए, इसकी बारीक जानकारी भी होनी चाहिए या फिर कमरे में कुछ ऐसा रख दिया जाए जिससे कमरे की शोभा और बढ़ जाए। इन सब बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। आर्ट डायरेक्टर सेट-डिजाइन करते समय सहयोगियों को भी साथ रखता है। इसे आर्ट डायरेक्टर की टीम भी कहा जाता है। इस टीम में कुछ ऐसे भी होते हैं जो बतौर असिस्टेन्ट का कार्य करते-करते एक दिन स्वंतत्र रूप से कार्य करना प्रारम्भ कर देते हैं।
हालांकि फिल्म और टीवी दोनों की आर्ट डायरेक्शन में बड़ा फर्क होता है लेकिन फिल्मों में आर्ट डायरेक्टर का अच्छा स्कोप होता है। क्योंकि फिल्मों में स्वतंत्र रूप से कुछ नया करने के लिए बहुत कुछ होता है। इसलिए अगर किसी की ड्राइंग अच्छी है और क्रिएटिव सोच रखता है तो वह इस क्षेत्र में बेहतरीन कैरियर बना सकता है।
आजकल जिस तरह से फिल्मों के बनने में वृद्धि हो रही है उससे आर्ट डायरेक्टर का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक तरफ तो फिल्मों के निर्माण में आर्ट डायरेक्टर की माँग बढ़ रही है तो दूसरी तरफ टीवी चैनलों की आती बाड़ ने इस दिशा में कैरियर के द्वार खोले हैं। आज जिस तरह से टीवी कार्यक्रमों के बनने का क्रम तेजी से बढ़ा है उससे आने वाले समय में आर्ट डायरेक्टर की माँग का बढऩा भी अवश्यंभावी है। इसलिए इस क्षेत्र में खुद को स्थापित किया जा सकता है लेकिन इस क्षेत्र में कदम रखने से पहले खुद को अच्छी तरह से जाँच परख लेना चाहिए। यदि आपके अन्दर सृजनात्मक एवं प्रकृति को समझने की क्षमता है तो भाग्य आजमाया जा सकता है।

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