कैसे प्रेरित करें व्यक्ति को उन्नति व प्रगति की तरफ

प्रशंसा के द्वारा मानव हृदय जितना अधिक आकर्षित और आंदोलित होता है, उतना और किसी प्रकार नहीं होता। प्रशंसा, झूठी चापलूसी और चाटुकारिता से सर्वथा भिन्न है। सभी चाहते हैं कि हमारे गुणों को दूसरे भी परखें,सम्मान करें। प्रशंसा-प्रोत्साहन द्वारा अनेक व्यक्तियों को ऊंचा उठाने, आगे बढ़ाने में सहायक बनने का सत्प्रयोजन पूरा किया जा सकता है। इसका जादू सभी पर प्रभाव डालता है।
हो सकता है कि कोई क्रियाशील व्यक्ति आपकी प्रशंसा-प्रोत्साहन पाकर आभावों-प्रतिकूलताओं के बीच भी आगे बढ़ने का साहस नए सिरे से जुटा ले और उन्नति के प्रकाशपूर्ण पथ पर चलता हुआ, एक दिन ऊंची चोटी पर जा पहुंचे। इस महान कर्म-साधना में आप भी अनायास ही पुण्य के भागीदार बन बैठेंगे।
अनेक ऐसे लोग जो व्यक्तिगत रूप से उन्नतिशील होते हैं और जिनमें योग्यता के अंकुर विद्यमान होते हैं, समीपस्थ लोगों की झिड़़क, तिरस्कार, उपेक्षा के कारण दब जाते हैं। उनका मन मर जाता है और वे उसी को अपनी नियति मान बैठते हैं। उनके गुणों को परखकर प्रशंसा-प्रोत्साहन के दो शब्द उनके कानों में डालने की कंजूसी न की जाए, तो इन्हीं थोड़े शब्दों का रस ही उनके अन्तःकरण को ऊंचे स्तर की तृप्ति देता है, जिससे उनकी सारी थकान मिट जाती है, स्फूर्ति और उमंग उमड़ पड़ती है।
उन्नति के अवरुद्ध स्रोत खुल जाते हैं, अविकसित सत्प्रवृत्तियां प्रस्फुटित हो जाती हैं, छिपी योग्यताएं जाग्रत हो जाती हैं और निराशा के अंधकार में उन्हें पुनः आशा का दीपक जगमगाता दृष्टिगोचर होने लगता है। प्रशंसा के उपरांत यह परामर्श भी दिया जा सकता है कि उसमें जो थोड़ा-बहुत दोष-दुर्गुण हैं उन्हें किस प्रकार छोड़ें, अधिक प्रतिभावान बनें। यदि आप दूसरों के मुरझाए हृदयों को सींचने का, कानों की राह आत्माओं को अमृत पिलाने का धर्म-कार्य करते हैं, तो परोपकारी मेघों जैसे श्रेय के भागी हैं।

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