बदलती
जीवनशैली में फैशन सिर्फ परिधानों तक ही सीमित नहीं है, अब इसमें
एक्सैसरीज भी बड़ी संख्या में शामिल हो चुकी हैं। आज एक्सैसरीज के बगैर न
सिर्फ फैशन अधूरा है बल्कि स्टाइलिश लाइफस्टाइल के लिए भी ये जरूरत बन चुकी
हैं। यही कारण है कि एक्सैसरीज के क्षेत्र में काम करने वाली कम्पनियां नई
से नई एक्सैसरीज डिजाइन करने के लिए डिजाइन प्रोफैशनल्स को नियुक्तियां दे
रही हैं। अगर आप रचनात्मक हैं और हमेशा कुछ न कुछ नया करने के लिए तैयार
रहते हैं तो आप इस क्षेत्र में एक बेहतरीन करियर बना सकते हैं और मनचाही
मंजिल पा सकते हैं।
रचनात्मकता है लाजमी
युवा आज उसी करियर को चुनते हैं जिसमें काम करने की आजादी हो, लीक से हटकर हो और आसानी से रोजगार मिल जाए। अगर इन तीनों को पैमाना मानें तो एक्सैसरीज डिजाइनिंग में ये तीनों गुण हैं।
लाइफस्टाइल से जुड़ी होने की वजह से इसमें करियर का स्कोप अन्य क्षेत्रों से कहीं ज्यादा है। अपने काम से कभी न संतुष्ट होने वाला, हर समय नया करने की ललक व किसी भी समय में सर्वोत्तम देने की क्षमता जिसमें है, वह इस क्षेत्र में करियर की ऊंचाइयों को छू सकता है।
कार्यक्षेत्र
एक्सैसरीज डिजाइनर हर तरह की एक्सैसरीज की डिजाइनिंग तथा उससे जुड़े हर तरह के काम को अंजाम देते हैं। आमतौर पर डायरैक्ट डिजाइनिंग का संबंध एपैरल व एक्सैसरीज से होता है जबकि एसोसिएटेड डिजाइनिंग विजुअल मर्कैंडाइजिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग से जुड़ी होती है।
उपभोक्ता से जुड़े हर उत्पाद जैसे ज्यूलरी, होम एंड इंटीरियर प्रोडक्ट्स फैशन तथा लाइफस्टाइल में एक्सैसरीज अहम हैं। इसमें बाथरूम एंड किचनवेयर, लाइटिंग एंड लाइटिंग फिक्सचर, सन ग्लासेज, हेयर प्रोडक्ट्स, हैंडबैग, बैल्ट, क्लिप, ज्यूलरी, घडिय़ां, गिफ्ट आइटम, टेबलवेयर, वॉलहैंगिंग, फैशन एंड लाइफस्टाइल से जुड़ी सभी चीजें आ जाती हैं।
सम्भावनाएं अनगिनत
भारतीय बाजार में विदेशी सामान की दस्तक तथा मध्य वर्ग की आय में वृद्धि ने उनमें शॉपिंग का नया टेस्ट विकसित किया है। गत कुछ सालों से इस वर्ग के लोग सिर्फ चीजें ही नहीं खरीदते बल्कि ऐसी चीजें खरीदते हैं जिनसे उनकी जीवनशैली झलकती हो। विशेषज्ञों की राय में एक्सैसरीज डिजाइनर्स की मांग कभी कम नहीं होगी क्योंकि लोगों को सिर्फ उत्पाद नहीं बल्कि स्टाइल भी चाहिए। आज किसी भी मॉल के रिटेल सैक्शन में डिस्प्ले का सबसे ज्यादा स्थान एक्सैसरीज को ही दिया जाता है क्योंकि हर वर्ग में इनके खरीददार ज्यादा हैं।
रोजगार
ट्रेंड प्रोफैशनल्स को एक्सैसरीज निर्माता कंपनियों मे काम मिल सकता है। नौकरी के साथ-साथ फ्रीलांसर के रूप में काम करने के भी मौके मिलते हैं। बड़े ब्रांड के अलावा उन कंपनियों में भी अवसर हैं जो फैशन हाऊसेज या रिटेल आऊटलेट्स के लिए एक्सैसरीज बनाती हैं। अनुभव होने के बाद अपना लघु उद्योग शुरू कर सकते हैं या शोरूम भी खोल सकते हैं।
योग्यता
देश में अनेक संस्थान अब एक्सैसरीज डिजाइनिंग संबंधी कोर्स करवाती हैं जिनमें सर्टीफिकेट कोर्स से लेकर डिग्री तक की जा सकती है। कई प्रतिष्ठित संस्थानों में एक्सैसरीज डिजाइनिंग को फैशन डिजाइनिंग डिग्री के एक विषय के रूप में भी पढ़ाया जाता है।
किसी प्रतिष्ठित संस्थान से कोई भी संबंधित कोर्स या डिग्री करने के बाद शुरूआत में किसी नामी डिजाइनर के साथ या किसी एक्सैसरी या फैशन कम्पनी में बतौर प्रशिक्षु जुड़ सकते हैं। इस क्षेत्र में भी अनुभव का बेहद महत्व है। यह आपकी रचनात्मकता तथा प्रतिभा पर निर्भर करता है कि आप कितनी जल्दी यहां तरक्की करते हैं।
जरूरी कौशल
हर क्षेत्र की तरह इस क्षेत्र में सफलता के लिए जरूरी है कि आपमें कुछ निजी कौशल जरूर हों। आप में मजबूत कम्युनिकेशन स्किल के साथ फैसले लेने की क्षमता होनी चाहिए।
इसके अलावा कम्प्यूटर एवं एक्सैसरीज के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की जानकारी भी होनी चाहिए। युवाओं में डिजाइन एप्टीच्यूड के साथ बढिय़ा स्कैच तैयार करना भी आना चाहिए। इसके लिए उन्हें रचनात्मक दृष्टिकोण एवं लीक से हटकर सोचने में भी कुशल होना पड़ता है।
प्रमुख संस्थान
नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ डिजाइन (अहमदाबाद, गांधीनगर तथा बेंगलूर में संस्थान के तीन कैम्पस हैं)
इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ क्राफ्ट एंड डिजाइन, जयपुर, राजस्थान
एफ.डी.डी.आई., नोएडा
पर्ल एकैडमी ऑफ फैशन, दिल्ली
रचनात्मकता है लाजमी
युवा आज उसी करियर को चुनते हैं जिसमें काम करने की आजादी हो, लीक से हटकर हो और आसानी से रोजगार मिल जाए। अगर इन तीनों को पैमाना मानें तो एक्सैसरीज डिजाइनिंग में ये तीनों गुण हैं।
लाइफस्टाइल से जुड़ी होने की वजह से इसमें करियर का स्कोप अन्य क्षेत्रों से कहीं ज्यादा है। अपने काम से कभी न संतुष्ट होने वाला, हर समय नया करने की ललक व किसी भी समय में सर्वोत्तम देने की क्षमता जिसमें है, वह इस क्षेत्र में करियर की ऊंचाइयों को छू सकता है।
कार्यक्षेत्र
एक्सैसरीज डिजाइनर हर तरह की एक्सैसरीज की डिजाइनिंग तथा उससे जुड़े हर तरह के काम को अंजाम देते हैं। आमतौर पर डायरैक्ट डिजाइनिंग का संबंध एपैरल व एक्सैसरीज से होता है जबकि एसोसिएटेड डिजाइनिंग विजुअल मर्कैंडाइजिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग से जुड़ी होती है।
उपभोक्ता से जुड़े हर उत्पाद जैसे ज्यूलरी, होम एंड इंटीरियर प्रोडक्ट्स फैशन तथा लाइफस्टाइल में एक्सैसरीज अहम हैं। इसमें बाथरूम एंड किचनवेयर, लाइटिंग एंड लाइटिंग फिक्सचर, सन ग्लासेज, हेयर प्रोडक्ट्स, हैंडबैग, बैल्ट, क्लिप, ज्यूलरी, घडिय़ां, गिफ्ट आइटम, टेबलवेयर, वॉलहैंगिंग, फैशन एंड लाइफस्टाइल से जुड़ी सभी चीजें आ जाती हैं।
सम्भावनाएं अनगिनत
भारतीय बाजार में विदेशी सामान की दस्तक तथा मध्य वर्ग की आय में वृद्धि ने उनमें शॉपिंग का नया टेस्ट विकसित किया है। गत कुछ सालों से इस वर्ग के लोग सिर्फ चीजें ही नहीं खरीदते बल्कि ऐसी चीजें खरीदते हैं जिनसे उनकी जीवनशैली झलकती हो। विशेषज्ञों की राय में एक्सैसरीज डिजाइनर्स की मांग कभी कम नहीं होगी क्योंकि लोगों को सिर्फ उत्पाद नहीं बल्कि स्टाइल भी चाहिए। आज किसी भी मॉल के रिटेल सैक्शन में डिस्प्ले का सबसे ज्यादा स्थान एक्सैसरीज को ही दिया जाता है क्योंकि हर वर्ग में इनके खरीददार ज्यादा हैं।
रोजगार
ट्रेंड प्रोफैशनल्स को एक्सैसरीज निर्माता कंपनियों मे काम मिल सकता है। नौकरी के साथ-साथ फ्रीलांसर के रूप में काम करने के भी मौके मिलते हैं। बड़े ब्रांड के अलावा उन कंपनियों में भी अवसर हैं जो फैशन हाऊसेज या रिटेल आऊटलेट्स के लिए एक्सैसरीज बनाती हैं। अनुभव होने के बाद अपना लघु उद्योग शुरू कर सकते हैं या शोरूम भी खोल सकते हैं।
योग्यता
देश में अनेक संस्थान अब एक्सैसरीज डिजाइनिंग संबंधी कोर्स करवाती हैं जिनमें सर्टीफिकेट कोर्स से लेकर डिग्री तक की जा सकती है। कई प्रतिष्ठित संस्थानों में एक्सैसरीज डिजाइनिंग को फैशन डिजाइनिंग डिग्री के एक विषय के रूप में भी पढ़ाया जाता है।
किसी प्रतिष्ठित संस्थान से कोई भी संबंधित कोर्स या डिग्री करने के बाद शुरूआत में किसी नामी डिजाइनर के साथ या किसी एक्सैसरी या फैशन कम्पनी में बतौर प्रशिक्षु जुड़ सकते हैं। इस क्षेत्र में भी अनुभव का बेहद महत्व है। यह आपकी रचनात्मकता तथा प्रतिभा पर निर्भर करता है कि आप कितनी जल्दी यहां तरक्की करते हैं।
जरूरी कौशल
हर क्षेत्र की तरह इस क्षेत्र में सफलता के लिए जरूरी है कि आपमें कुछ निजी कौशल जरूर हों। आप में मजबूत कम्युनिकेशन स्किल के साथ फैसले लेने की क्षमता होनी चाहिए।
इसके अलावा कम्प्यूटर एवं एक्सैसरीज के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की जानकारी भी होनी चाहिए। युवाओं में डिजाइन एप्टीच्यूड के साथ बढिय़ा स्कैच तैयार करना भी आना चाहिए। इसके लिए उन्हें रचनात्मक दृष्टिकोण एवं लीक से हटकर सोचने में भी कुशल होना पड़ता है।
प्रमुख संस्थान
नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ डिजाइन (अहमदाबाद, गांधीनगर तथा बेंगलूर में संस्थान के तीन कैम्पस हैं)
इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ क्राफ्ट एंड डिजाइन, जयपुर, राजस्थान
एफ.डी.डी.आई., नोएडा
पर्ल एकैडमी ऑफ फैशन, दिल्ली